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नाईपर एस.ए.एस. नगर में हिंदी पखवाड़ा का समापन, विजेताओं को किया सम्मानित

मोहाली / सत्ता संदेश

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाईपर), एस.ए.एस. नगर में 14 से 28 सितंबर 2026 तक आयोजित हिंदी पखवाड़ा का सोमवार को समापन समारोह आयोजित किया गया। हिंदी के प्रचार-प्रसार और राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पखवाड़े के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

समापन समारोह में नाईपर के निदेशक प्रो. दुलाल पांडा, डीन प्रो. के.बी. टिक्कू तथा कुलसचिव विंग कमांडर (से.नि.) पी.जे.पी. सिंह वडैच सहित संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से हुई। कार्यकारी राजभाषा अधिकारी श्री मनोज तिवारी ने वर्ष 2025-26 के दौरान राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन एवं प्रगति से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।

कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। श्री विनोद कुमार, वैज्ञानिक; श्री आशु कुमार, आशुलिपिक; श्री जी. मुरुगेसन, तकनीकी सहायक; तथा आउटसोर्स कर्मचारी श्री भूपिंदर सिंह को पुरस्कार प्रदान किए गए। वहीं, हिंदी में वैज्ञानिक व्याख्यान देने के लिए प्रो. संयोग जैन, डॉ. भुवन भूषण मिश्रा और डॉ. आशुतोष कुमार को भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए प्रो. दुलाल पांडा ने कहा कि हिंदी हमारे दैनिक जीवन में आनंद का संचार करती है। उन्होंने संस्थान के दैनिक कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने वैज्ञानिक साहित्य का हिंदी में अनुवाद करने के महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रो. के.बी. टिक्कू ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए नए प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिंदी हम सभी को जोड़ने का कार्य करती है और गूगल ट्रांसलेटर जैसी तकनीकी सुविधाओं से भाषा संबंधी बाधाएं लगातार कम हो रही हैं। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त प्रतिभागियों से भविष्य में अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को हिंदी पखवाड़े में भाग लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

विंग कमांडर (से.नि.) पी.जे.पी. सिंह वडैच ने भी सभी विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने हिंदी भाषी न होने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से भी हिंदी पखवाड़े की प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने संस्थान के कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए हिंदी पखवाड़े के सफल आयोजन में योगदान देने वाली पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह के साथ नाईपर, एस.ए.एस. नगर में हिंदी पखवाड़ा 2026 का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

स्वच्छता ही सेवा 6.0: पीआईबी-सीबीसी चंडीगढ़ ने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए चलाया स्वच्छता अभियान

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से पत्र सूचना कार्यालय (PIB) चंडीगढ़ और केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) चंडीगढ़ की ओर से ‘स्वच्छता ही सेवा 6.0’ के तहत विभिन्न स्वच्छता एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।

पीआईबी चंडीगढ़ के निदेशक प्रीतम सिंह ने कहा कि स्वच्छता को केवल विशेष अवसरों या एक-दिवसीय अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक आदत और सामूहिक जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, कार्यस्थल, आसपास के क्षेत्र और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाता है, तो इससे अनुशासन, जिम्मेदारी और अपने परिवेश के प्रति सम्मान की संस्कृति विकसित होती है।

पीआईबी चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना ने भी स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे प्रयास जब सामूहिक रूप से किए जाते हैं तो उनका प्रभाव व्यापक हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ संदेश के साथ लोगों से स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

अभियान के तहत कार्यालय परिसर में स्वच्छता, जागरूकता और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कई गतिविधियां आयोजित की गईं। 18 सितंबर को बैठक के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें स्वच्छता शपथ भी दिलाई गई। इसके अलावा बेसमेंट में रखे पुराने अखबारों को व्यवस्थित कर वहां सफाई की गई। कर्मचारियों और सफाई मित्रों को डेटॉल हैंडवॉश, मास्क, दस्ताने और डस्टर वितरित किए गए। कार्यालय की अलमारियों एवं स्टोरेज क्षेत्रों की सफाई और व्यवस्था के साथ-साथ स्वच्छता जागरूकता के लिए पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई।

अभियान के दौरान सफाई मित्रों के योगदान को भी सम्मानित किया गया। उन्हें बैग, स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर कार्यस्थलों एवं सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने में उनकी सेवाओं को सराहा गया।

जनभागीदारी और युवाओं की भूमिका को बढ़ावा देने के लिए पीआईबी और सीबीसी चंडीगढ़ ने माई भारत (MY Bharat) के सहयोग से युवाओं के साथ भी संवाद किया। चैतन्य टेक्नो स्कूल, सेक्टर-44, चंडीगढ़ के पास स्थित सार्वजनिक मैदान में विद्यार्थियों के साथ स्वच्छता अभियान, स्वच्छता शपथ और जागरूकता रैली आयोजित की गई। इस दौरान विद्यार्थियों को अपने घरों, शिक्षण संस्थानों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता का संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

अभियान के आगामी चरण में पार्किंग क्षेत्र और कार्यालय परिसर के प्रवेश द्वार के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत कार्यालय परिसर में 10 पौधे लगाए जाएंगे। ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ के संदेश को आगे बढ़ाते हुए सेक्टर-10 स्थित लीजर वैली में भी स्वच्छता अभियान आयोजित किया जाएगा।

अभियान के तहत एकत्र किए गए पुराने अखबारों को रीसाइक्लिंग के लिए बेचने की भी योजना है। इसके माध्यम से जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन और कचरे के उत्पादक उपयोग का संदेश दिया जाएगा।

‘स्वच्छता ही सेवा 6.0’ की गतिविधियां 2 अक्टूबर को संपन्न होंगी। पीआईबी और सीबीसी चंडीगढ़ का उद्देश्य स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे नागरिकों की दैनिक आदत और सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना है।

डिजिटल हेल्थ सिस्टम से बदलेगी मरीजों के इलाज की तस्वीर, ABDM और NHCX से डेटा शेयरिंग पर जोर

जानकारी के एक जगह से दूसरी जगह सही तरीके से न पहुंचने के कारण अस्पतालों को लंबे समय से डॉक्टरों के समय की बर्बादी और अटके हुए बीमा दावों के रूप में नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब जरूरत ऐसी डिजिटल व्यवस्थाएं बनाने की है, जो एक-दूसरे के साथ आसानी से जानकारी साझा कर सकें।

लेखक : डॉ. गिरधर जे. ज्ञानी, महानिदेशक, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI)

भारत के कई हिस्सों में आज भी एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर तक मरीज की जानकारी पहुंचाने का मुख्य जरिया खुद मरीज ही है। वह हर बार अपनी पुरानी मेडिकल रिपोर्ट लेकर जाती है- कागजों की फाइल, मोबाइल में जांच की तस्वीरें या फिर सिर्फ अपनी याददाश्त के भरोसे। इलाज के हर चरण में नई जानकारी तैयार होती है, लेकिन अक्सर वह अगले डॉक्टर या अस्पताल तक नहीं पहुंच पाती।

अस्पतालों के लिए इस कमी को दूर करना लंबे समय तक प्राथमिकता नहीं रहा। जब स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की बात हुई, तो मुख्य सवाल यही रहा कि इसमें कितना खर्च आएगा और अस्पतालों को अपनी व्यवस्था में कितना बदलाव करना पड़ेगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई नई डिजिटल व्यवस्था एक सप्ताहांत में लागू नहीं की जा सकती। अस्पतालों में वर्षों पुराने सॉफ्टवेयर, अलग-अलग तरह की काम करने की प्रक्रियाएं और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल का अलग-अलग स्तर है। छोटे अस्पतालों के लिए तकनीक पर खर्च किया गया हर रुपया बिस्तरों, उपकरणों और कर्मचारियों पर होने वाले खर्च से जुड़ा होता है। इसलिए हमेशा यह सवाल रहा कि क्या नई व्यवस्था वास्तव में ऐसी समस्या का समाधान करेगी, जिसका समाधान जरूरी है।

अब सवाल बदल गया है। ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मरीजों की जानकारी अलग-अलग जगह बंटी रहने की वजह से अस्पतालों और मरीजों को पहले से कितना नुकसान हो रहा है।

मरीज के इलाज का पूरा सफर इस समस्या को साफ दिखाता है। वह पहले किसी स्थानीय डॉक्टर को दिखा सकती है, फिर किसी जांच केंद्र पर जांच करा सकती है, उसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह ले सकती है और अंत में अस्पताल में भर्ती हो सकती है। इलाज के हर चरण में मरीज से जुड़ी नई जानकारी तैयार होती है, लेकिन यह जानकारी अक्सर डॉक्टर, क्लिनिक और जांच केंद्र के बीच आगे नहीं पहुंचती।

इसके बाद क्या होता है, यह हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री उपलब्ध नहीं होती, वही जांच दोबारा करानी पड़ती है, इलाज में अनावश्यक देरी होती है और ऐसी जानकारी जुटाने में घंटों लग जाते हैं जो पहले से कहीं और मौजूद होती है।

लंबे समय तक डेटा को अस्पताल या संस्था की अपनी संपत्ति की तरह देखा गया, जिसे अपने पास रखा जाए। जबकि असल में यह ऐसी जानकारी है, जिसे मरीज के साथ आगे बढ़ना चाहिए। अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग प्रारूप और एक-दूसरे से मेल न खाने वाली डिजिटल व्यवस्थाओं ने इस समस्या को और बढ़ाया है। अब जानकारी को अलग-अलग जगह बंद रखने की कीमत इतनी बढ़ गई है कि इसका नुकसान मरीजों और अस्पतालों, दोनों को हो रहा है। इसी वजह से निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन यानी एबीडीएम को एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि अलग-अलग डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान के लिए एक समान मानकों की जरूरत है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि मरीज जहां भी इलाज कराए, उसकी जरूरी स्वास्थ्य जानकारी अगले डॉक्टर या अस्पताल के काम आ सके।

दुनिया के अलग-अलग देशों के अनुभव बताते हैं कि जब मरीज की स्वास्थ्य जानकारी एक जगह से दूसरी जगह आसानी से नहीं पहुंचती, तो मरीज को खराब अनुभव हो सकता है, एक ही जांच बार-बार हो सकती है और इलाज में देरी हो सकती है। इसके विपरीत, अलग-अलग स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल से जांचों की दोहराव वाली जरूरत और अस्पताल में दोबारा भर्ती होने के मामलों में कमी देखी गई है।

प्रशासन के स्तर पर भी यही समस्या दिखाई देती है। एक अस्पताल कई बीमा कंपनियों और भुगतान करने वाली संस्थाओं के साथ काम करता है। इनमें से हर संस्था की अपनी डिजिटल व्यवस्था और अपने तरीके होते हैं। जब ये व्यवस्थाएं एक-दूसरे से ठीक से बात नहीं कर पातीं, तो बीमा दावों की प्रक्रिया बेवजह धीमी और महंगी हो जाती है। इसका सीधा असर अस्पताल की वित्तीय टीम और उसके पैसे के प्रवाह पर पड़ता है।

नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (एनएचसीएक्स) इसी समस्या को दूर करने की कोशिश करता है। यह बीमा दावों की प्रक्रिया को एक समान बनाने पर काम करता है। चाहे डॉक्टर के लिए जरूरी जांच रिपोर्ट हो या अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच भेजा जाने वाला दावा, अगर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एक जगह से दूसरी जगह आसानी से नहीं पहुंच सकती, तो यह पूरी व्यवस्था की कमी है।

एनएचसीएक्स और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन स्वास्थ्य क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों पर काम करते हैं, लेकिन दोनों के पीछे मूल सोच एक ही है-जानकारी सुरक्षित तरीके से, एक समान व्यवस्था के तहत और जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सके।

लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था सिर्फ ऊपर से लागू नहीं की जा सकती। इसे डॉक्टरों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाएं देने वालों के साथ मिलकर तैयार करना होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी दी है कि अगर डिजिटल व्यवस्था अलग-अलग और केवल ऊपर से तय करके लागू की जाती है, तो इससे स्वास्थ्य व्यवस्था में बिखराव और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर प्रशासनिक बोझ बढ़ सकता है। इसलिए अलग-अलग प्रणालियों को आपस में जोड़ना ही मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।

भारत में यह बात खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां निजी स्वास्थ्य क्षेत्र बहुत विविध है। महानगर का एक बड़ा कॉरपोरेट अस्पताल और दूसरे या तीसरे स्तर के शहर का छोटा अस्पताल एक जैसी तकनीक, संसाधन या डिजिटल व्यवस्था लागू करने की क्षमता नहीं रखते।

छोटे अस्पताल में अलग से तकनीकी टीम भी नहीं हो सकती। अगर डिजिटल व्यवस्था सही तरीके से नहीं बनाई गई, तो उसे लागू करने का अतिरिक्त बोझ भी अस्पताल पर पड़ सकता है। इसलिए डिजिटल व्यवस्था को अपनाने की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अस्पतालों को कितना व्यावहारिक सहयोग मिलता है और नई व्यवस्था मरीजों के इलाज के मौजूदा तरीके के साथ कितनी आसानी से जुड़ पाती है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के दूत और एनएचसीएक्स के समर्थक के रूप में, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एएचपीआई) राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा देने वालों को इन डिजिटल व्यवस्थाओं का व्यावहारिक लाभ समझाना, अलग-अलग तरह के अस्पतालों में इनके इस्तेमाल को बढ़ावा देना और अस्पतालों के अनुभवों को उन लोगों तक पहुंचाना है, जो इन डिजिटल व्यवस्थाओं को तैयार कर रहे हैं।

निजी स्वास्थ्य क्षेत्र सिर्फ भारत की डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का इस्तेमाल करने वाला नहीं रह सकता। अस्पताल इस व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण उपयोगकर्ताओं में हैं, इसलिए उन्हें इसे बनाने में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा देने वालों को जानकारी के अलग-अलग जगह बंटे होने और आपसी तालमेल की कमी का जो अनुभव होता है, उसे देश में डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को आगे बढ़ाने की योजना में शामिल करना होगा।

आगे का काम चार हिस्सों में बांटा जा सकता है।पहला, अस्पतालों को ऐसी डेटा व्यवस्थाओं को खत्म करना होगा, जिनका अलग-अलग बंद पड़े रहना किसी के काम नहीं आता।

दूसरा, स्वास्थ्य तकनीक से जुड़ी कंपनियों को ऐसे उत्पाद और सॉफ्टवेयर बनाने होंगे, जो एक-दूसरे के साथ आसानी से काम कर सकें।तीसरा, चिकित्सा संस्थाओं और संगठनों को छोटे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को डिजिटल व्यवस्था अपनाने के शुरुआती चरण में मदद करनी होगी। चौथा, नीति बनाने वालों को ऐसे समान और व्यावहारिक मानक तय करने होंगे, जिन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी लोग अपना सकें।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सफलता तब मानी जाएगी, जब अस्पतालों, डॉक्टरों और मरीजों को स्वास्थ्य व्यवस्था में बिखराव कम होता हुआ महसूस होगा। जब ऐसा होगा और ऐसा होना संभव है तब डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मरीजों के इलाज का अधिक बेहतर और प्रभावी तरीका माना जाएगा।

टांडा उर्मर पहुंची BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’, मेन टी-स्क्वायर पर हुई जनसभा

टांडा उर्मर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसप्रीत सिंह सैनी

ड्रग्स के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से शुरू की गई ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ टांडा उर्मर पहुंची। यात्रा के टांडा पहुंचने पर शहर के मेन टी-स्क्वायर में बड़ी जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब के युवाओं को नशे से दूर रखने और लोगों को ड्रग्स के खिलाफ जागरूक करने के लिए अभियान चला रही है। वक्ताओं के मुताबिक, यात्रा का उद्देश्य नशे के खिलाफ लोगों को एकजुट करना और नशामुक्त समाज के लिए जागरूकता पैदा करना है।

इस दौरान नेताओं ने स्थानीय प्रशासन और सरकार से नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे की सप्लाई पर रोक लगाने के लिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।

टांडा उर्मर पहुंचने पर स्थानीय भाजपा नेतृत्व और कार्यकर्ताओं ने नशा मुक्त पंजाब यात्रा का स्वागत किया। जनसभा के दौरान मौजूद लोगों ने हाथ उठाकर पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए अपना संकल्प भी दोहराया।

कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने लोगों से नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान में शामिल होने की अपील की।

LPU के बाहर बेकाबू हुआ प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज के बाद पथराव और तोड़फोड़; NH-44 पर घंटों जाम

फगवाड़ा / सत्ता संदेश

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के बाहर छात्र प्रदर्शन के दौरान रविवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। कथित यौन उत्पीड़न की घटना को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन बाद में छात्रों और पुलिस के बीच टकराव में बदल गया। प्रदर्शन के दौरान पथराव, तोड़फोड़ और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे पर भी यातायात प्रभावित हुआ।

प्रदर्शन की शुरुआत सोशल मीडिया पर सामने आए एक छात्रा के कथित रेप और बाद में आत्महत्या के दावे को लेकर हुई थी। हालांकि, इन दावों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। LPU प्रशासन ने आरोपों को अफवाह और बेबुनियाद बताया है। दूसरी ओर, पुलिस ने एक छात्रा की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया है और जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है।

रविवार को प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कैंपस में तोड़फोड़ की और राष्ट्रीय राजमार्ग को भी जाम कर दिया। बाद में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर बोतलें और पत्थर फेंके जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई और पुलिस तथा छात्रों के बीच पथराव हुआ।

टकराव के दौरान पुलिस वाहनों समेत कई वाहनों को नुकसान पहुंचने और एक पुलिस वाहन में आग लगाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। कई पुलिसकर्मियों और छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

प्रदर्शन के कारण जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। रिपोर्टों के अनुसार हाईवे पर लंबे समय तक आवाजाही बाधित रही। बाद में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए।

घटना के बाद LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं निलंबित करने और मिड-टर्म परीक्षाएं स्थगित करने की घोषणा की है। मामले की जांच के लिए गठित SIT अब सामने आए आरोपों और पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी।

LPU में रेप के दावे पर बवाल, हिंसक प्रदर्शन के बाद केस दर्ज; 7 सदस्यीय SIT करेगी जांच

फगवाड़ा / सत्ता संदेश

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रा से कथित रेप और बाद में आत्महत्या से जुड़े दावों को लेकर शुरू हुआ विवाद रविवार को हिंसक प्रदर्शन में बदल गया। छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ की, कुछ स्थानों पर आगजनी की और जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग को भी जाम कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों की शुरुआत को लेकर भी जांच जारी है।

प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने दावा किया कि उन्हें एक छात्रा से जुड़ी कथित घटना की जानकारी मिली है और वे मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया और छात्रों के बीच घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। हालांकि, शुरुआती स्तर पर पुलिस ने ऐसी किसी शिकायत की जानकारी होने से इनकार किया था।

बाद में पुलिस ने मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रेप का केस दर्ज किया और सात सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की। SIT अब वायरल दावों, कथित घटना और उससे जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।

रातभर चला हंगामा, परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी

घटना को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कुछ वाहनों तथा अन्य सामान में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी।

प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग को भी जाम कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। बाद में पुलिस प्रशासन ने यातायात बहाल कराया और स्थिति को नियंत्रण में बताया।

LPU ने कथित खबरों को बताया झूठा और मनगढ़ंत

हंगामे के बीच LPU प्रशासन ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रसारित हो रही कथित खबरों और अफवाहों का खंडन किया। विश्वविद्यालय ने कहा कि छात्रों के बीच भ्रम पैदा करने वाली सूचनाएं फैलाई जा रही हैं और वर्तमान में प्रसारित अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है।

विश्वविद्यालय ने छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों से अपील की कि वे अपुष्ट सूचनाओं को साझा या आगे प्रसारित न करें और केवल विश्वविद्यालय के आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी पर भरोसा करें।

LPU ने यह भी आरोप लगाया कि भ्रामक सूचनाओं को व्यवस्थित तरीके से फैलाने से विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, विश्वविद्यालय ने किसी विशेष व्यक्ति या संगठन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज भी जांच के घेरे में

पूरे मामले में अब वायरल हुए कथित मैसेज और उसके स्रोत की भूमिका भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस और SIT यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि छात्रा से जुड़ा दावा कहां से सामने आया, उसमें कितनी तथ्यात्मक जानकारी थी और किस तरह यह जानकारी सोशल मीडिया पर फैली।

इस बीच, LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं निलंबित कर दी हैं और मिड-टर्म परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित किया है।

फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है। रेप के आरोप से जुड़े तथ्यों, वायरल दावों और रविवार को हुए हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों की भूमिका पर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

C-Pyte कैंप लुधियाना में प्लेसमेंट सेल शुरू, 75 नौकरी के मौके उपलब्ध

लुधियाना, / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की ओर से युवाओं को हुनरमंद बनाने के साथ-साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से C-Pyte कैंप, ITI गिल रोड, लुधियाना में प्लेसमेंट सेल स्थापित किया गया है। इस सेल के जरिए प्रशिक्षित और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसरों से जोड़ने की पहल की जा रही है।

C-Pyte कैंप लुधियाना के एडजुटेंट इंदरजीत कुमार ने बताया कि प्लेसमेंट सेल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध नौकरियों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि फिलहाल सिक्योरिटी गार्ड के 10, हेल्पर के 20, सिलाई मशीन ऑपरेटर के 15, CNC मशीन ऑपरेटर के 20 और वेल्डर के 10 पदों समेत कुल 75 नौकरी के अवसर उपलब्ध हैं।

इन पदों के लिए आयु सीमा 18 से 45 वर्ष निर्धारित की गई है। सिक्योरिटी गार्ड के पद के लिए करीब 20 हजार रुपये प्रति माह वेतन बताया गया है, जबकि हेल्पर, सिलाई मशीन ऑपरेटर, CNC मशीन ऑपरेटर और वेल्डर के पदों पर 15 हजार रुपये प्रति माह तक वेतन दिया जाएगा।

इंदरजीत कुमार ने बताया कि लुधियाना और मालेरकोटला जिले के नौकरी के इच्छुक युवक-युवतियां 28 सितंबर 2026 से C-Pyte कैंप लुधियाना में संपर्क कर सकते हैं। उम्मीदवारों को शैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्र, जिसमें 10वीं, 12वीं या उच्च शिक्षा के प्रमाणपत्र शामिल हैं, आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो की फोटोकॉपी साथ लेकर कैंप में रिपोर्ट करना होगा।

उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से चयनित युवाओं को तीन महीने तक मुफ्त रहने और खाने की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। नौकरी और प्लेसमेंट से संबंधित अधिक जानकारी के लिए 78885-86296, 98766-17258 और 84928-21213 पर संपर्क किया जा सकता है।

लुधियाना : ज्यूडिशियल कोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कॉरिडोर और लिफ्ट का उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज और लुधियाना सेशंस डिवीजन के एडमिनिस्ट्रेटिव जज माननीय जस्टिस दीपक सिब्बल ने लुधियाना ज्यूडिशियल कोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में दो ब्लॉकों को जोड़ने वाले कॉरिडोर और लिफ्ट का औपचारिक उद्घाटन किया।

ज्यूडिशियल कोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पहुंचने पर जस्टिस दीपक सिब्बल का लुधियाना की डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज हरप्रीत कौर रंधावा, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट डेज़ी बांगर, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-कम-सेक्रेटरी, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण हिमांशु अरोड़ा, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पवलीन सिंह, पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा, न्यायिक अधिकारियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों और लुधियाना बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्वागत किया।

इस अवसर पर जस्टिस दीपक सिब्बल ने ज्यूडिशियल कोर्ट्स कॉम्प्लेक्स परिसर में पौधारोपण भी किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके बाद जस्टिस दीपक सिब्बल ने रिबन काटकर दोनों ब्लॉकों को जोड़ने वाले नए कॉरिडोर और लिफ्ट का उद्घाटन किया। डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज हरप्रीत कौर रंधावा ने कहा कि इस सुविधा से न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट स्टाफ, वकीलों और अदालत में आने वाले आम लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। दोनों ब्लॉकों के बीच आवागमन अब अधिक आसान और सुगम हो सकेगा।

उद्घाटन के बाद जस्टिस दीपक सिब्बल ने बार एसोसिएशन के सदस्यों, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बातचीत की और अपने विचार साझा किए। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से भी मुलाकात की। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों ने विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक मामलों पर उनके साथ चर्चा की।

लुधियाना :‘हमारे राम’ को मिला दर्शकों का भरपूर रिस्पॉन्स, ऑडियंस के बीच बैठकर नाटक देखते नजर आए मनीष सिसोदिया

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की ओर से भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों से लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित नाटक एवं म्यूजिकल प्रस्तुति ‘हमारे राम’ को लुधियाना में दर्शकों का भरपूर समर्थन मिला। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) के डॉ. मनमोहन सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित प्रस्तुति देखने के लिए लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। 25 और 26 सितंबर को यहां चार शो आयोजित किए गए थे।

आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रभारी और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी प्रस्तुति के दूसरे दिन दर्शकों के बीच बैठकर ‘हमारे राम’ नाटक देखते नजर आए। इस दौरान विधायक राजिंदरपाल कौर छीना, पंजाब पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार दीपक बाली, पंजाब राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन राज लाली गिल, दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, नगर निगम की मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

दर्शकों को संबोधित करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन भारतीय संस्कृति और परंपराओं को समझने का माध्यम बन सकता है। उन्होंने ‘हमारे राम’ को रामायण और जीवन मूल्यों को समझने का एक माध्यम बताया।

सिसोदिया ने कहा कि भगवान श्री राम का जीवन सत्य, धर्म, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य, करुणा और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से रामायण के संदेश को समझने और उसके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करने की अपील की।

उन्होंने नाटक में अभिनय करने वाले आशुतोष राणा, राहुल आर. भूचर और तरुण खन्ना सहित पूरी कलाकार टीम की सराहना की। इससे पहले उपलब्ध कार्यक्रम जानकारी के अनुसार, ‘हमारे राम’ में आशुतोष राणा ने रावण और राहुल आर. भूचर ने भगवान राम की भूमिका निभाई।

‘हमारे राम’ का मंचन पंजाब के विभिन्न शहरों में किया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार राज्य में इस श्रृंखला के कुल 41 मंचन निर्धारित किए गए हैं।

MLA मदन लाल बग्गा ने वार्ड नंबर 92 में गली निर्माण कार्य का किया उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के विधायक मदन लाल बग्गा ने वार्ड नंबर 92 के बिशन एन्क्लेव में गली निर्माण कार्य का उद्घाटन किया। इस मौके पर स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में निर्माण कार्य की शुरुआत की गई।

उद्घाटन अवसर पर पार्षद बिट्टू भारद्वाज, ब्लॉक अध्यक्ष शशि शर्मा, महिला विंग इंचार्ज पूनम अरोड़ा, वरिंदर चोपड़ा समेत बड़ी संख्या में इलाके के लोग मौजूद रहे।

मदन लाल बग्गा ने कहा कि वर्ष 2022 में नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने उन पर भरोसा जताकर सेवा करने का अवसर दिया था। उन्होंने कहा कि लोगों से किए गए वादों को पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है और क्षेत्र में विकास कार्य लगातार करवाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के मामले में आगे बढ़े। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा क्षेत्र और लुधियाना शहर में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।

विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार लुधियाना शहर में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े, इसके लिए विकास कार्य जारी रहेंगे।