श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट पर कोऑर्डिनेशन कमेटी को लेकर ज्ञानी रघबीर सिंह का बड़ा बयान
अमृतसर / सत्ता संदेश
‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (अमेंडमेंट) एक्ट 2026’ को लेकर पंजाब सरकार द्वारा गठित 7 सदस्यीय कोऑर्डिनेशन कमेटी में शामिल किए जाने के मुद्दे पर श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें कमेटी में शामिल किए जाने की जानकारी सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर नहीं मिली, बल्कि मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी मिली है।
मीडिया से बातचीत में ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कमेटी से संबंधित कोई आधिकारिक पत्र, फाइल या एजेंडा प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से कमेटी, उसके एजेंडे और काम करने के तरीके के संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं मिलती, तब तक कमेटी में अपनी भूमिका को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार से आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही वह इस मामले में अपना नजरिया स्पष्ट करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (अमेंडमेंट) एक्ट को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाए गए एतराजों को दूर करने के उद्देश्य से कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया जाना बातचीत की दिशा में एक कदम हो सकता है। उन्होंने सभी पक्षों के साथ आपसी समन्वय और बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया।
ज्ञानी रघबीर सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और समयबद्ध जांच की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने उम्रकैद तक की सजा के प्रावधान की बात करते हुए कहा कि कानून इतना सख्त होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति ऐसी घटना को अंजाम देने से पहले कई बार सोचे।
उन्होंने बेअदबी के मामलों की जांच कम से कम DSP रैंक के अधिकारी की निगरानी में करवाने और जांच पूरी होने के बाद तीन महीने के भीतर अदालत में चालान पेश करने की मांग की। उनके मुताबिक, समयबद्ध जांच और कार्रवाई से मामलों को लंबे समय तक लंबित रहने से रोकने में मदद मिल सकती है।
ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि कानून या उसमें संशोधन से जुड़े किसी भी कदम में श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाए गए एतराजों, सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले में आपसी बातचीत और आम सहमति के जरिए आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

