लुधियाना में धान की पराली जलाने के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया गया। डीसी हिमांशु जैन ने 3 अवेयरनेस वैन रवाना कीं, जो गांव-गांव जाकर किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करेंगी।
लुधियाना / सत्ता संदेश
धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए लुधियाना प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स से तीन अवेयरनेस वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
ये वैन कृषि विभाग, लुधियाना की ओर से चलाए जा रहे ‘स्टबल मैनेजमेंट कैंपेन’ के तहत चलाई जा रही हैं। धान की कटाई के सीजन के दौरान ये वैन जिले के सभी ब्लॉकों में जाकर गांव-गांव किसानों को पराली न जलाने और इसे बिना आग लगाए मैनेज करने के लिए जागरूक करेंगी।
डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में जिले में पराली प्रबंधन से जुड़ी 5,000 से अधिक कृषि मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराई गई हैं। इस साल भी किसान अब तक करीब 1,300 और मशीनें खरीद चुके हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले साल जिले में पराली जलाने की कुल 219 घटनाएं दर्ज की गई थीं। प्रशासन के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने में सहयोग करने वाले किसानों को कृषि विभाग की ओर से कैंप लगाकर सम्मानित भी किया जा रहा है।
हिमांशु जैन ने कहा कि इस वर्ष भी किसानों के सहयोग और कृषि, सहकारिता, ग्रामीण विकास तथा शिक्षा विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों के जरिए पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने जिले के किसानों से अपील की कि वे पराली को बिना जलाए मैनेज करने के लिए किसान समूहों, सहकारी समितियों और पंचायतों का सहयोग लें। उन्होंने कहा कि पराली का उचित प्रबंधन करके पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में मदद मिल सकती है।
इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि अवेयरनेस वैन किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और इसके उचित प्रबंधन के फायदों के बारे में जानकारी देंगी। वैन में ऑडियो सिस्टम भी लगाया गया है, जिसके माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे।
डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि अवेयरनेस वैन के अलावा गांवों में किसान प्रशिक्षण कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों में कार्यक्रमों, अखबारों, WhatsApp संदेशों और दीवारों पर लिखे स्लोगन के जरिए भी किसानों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
इस अवसर पर खेतीबाड़ी विभाग के इंजीनियर अमनप्रीत सिंह घई, खेतीबाड़ी अधिकारी ब्लॉक लुधियाना डॉ. हरिंदर सिंह और एडीओ डॉ. करमजीत सिंह ने भी किसानों से विभाग की मुहिम में सहयोग करने की अपील की।
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना में 25 और 26 सितंबर को ‘हमारे राम’ नाटक के चार शो होंगे। आशुतोष राणा रावण और राहुल आर. भूचर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे।
लुधियाना / सत्ता संदेश
पंजाब की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंजाब सरकार की ओर से लुधियाना में ‘हमारे राम’ नाटक के चार शो आयोजित किए जाएंगे। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) में 25 और 26 सितंबर को हर दिन दो शो होंगे।
कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां और पंजाब हेरिटेज एंड टूरिज्म प्रमोशन बोर्ड के सलाहकार दीपक बाली ने लुधियाना के लोगों से बड़ी संख्या में नाटक देखने पहुंचने की अपील की। उन्होंने बताया कि दोनों दिनों में पहला शो दोपहर 2 बजे और दूसरा शो शाम 6 बजे शुरू होगा। कार्यक्रम के दौरान साउंड और लाइट की विशेष व्यवस्था की गई है।
मुंडियां और बाली ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार रामायण के माध्यम से भगवान राम के जीवन, आदर्शों और शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक विरासत से युवाओं को जोड़ना भी है।
हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि पंजाब सरकार लोगों की निजी और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों पर बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ और श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रमों के साथ ‘हमारे राम’ नाटक का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पूरे पंजाब में ‘हमारे राम’ की कुल 41 प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से चार प्रस्तुतियां 25 और 26 सितंबर को PAU लुधियाना में होंगी।
आशुतोष राणा और राहुल आर. भूचर मुख्य भूमिकाओं में
फेलिसिटी थिएटर की ओर से तैयार किया गया ‘हमारे राम’ एक हिंदी स्टेज प्रोडक्शन है, जिसमें रामायण की कथा को आधुनिक थिएटर तकनीक, संगीत, विजुअल इफेक्ट्स, हवाई कलाबाजी और आधुनिक स्टेज अरेंजमेंट के साथ प्रस्तुत किया गया है।
नाटक में अभिनेता आशुतोष राणा रावण की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि राहुल आर. भूचर भगवान राम का किरदार निभा रहे हैं।
दीपक बाली ने बताया कि नाटक की कहानी सीता माता के वनवास के बाद लव और कुश की भगवान राम से मुलाकात से आगे बढ़ती है। प्रस्तुति में कथा को सूर्य देव के दृष्टिकोण से दिखाने का प्रयास किया गया है, जिससे रामायण की कहानी को एक अलग नाटकीय नजरिए से प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि नाटक में संगीत, विजुअल इफेक्ट्स और आधुनिक तकनीक के माध्यम से दर्शकों के लिए एक व्यापक थिएटर अनुभव तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने के साथ थिएटर कला को बढ़ावा देना है।
नाटक के पास BookMyShow, संबंधित विधायकों और जिला प्रशासन के कार्यालयों से निशुल्क उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
इस अवसर पर विधायक अशोक पराशर पप्पी, विधायक मदन लाल बग्गा, डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, सनातन सेवा समिति के अध्यक्ष विजय शर्मा, ब्राह्मण वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन पंकज शारदा, चेयरमैन जतिंदर सिंह खंगूरा और वरुण मेहता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
लुधियाना के गांव ओटाला में डेयरी डेवलपमेंट विभाग ने मिल्क प्रोड्यूसर अवेयरनेस कैंप लगाया। किसानों को सरकारी योजनाओं, पशु रोग, संतुलित आहार, देखभाल और डेयरी लोन की जानकारी दी गई।
लुधियाना / सत्ता संदेश
डेयरी किसानों को डेयरी व्यवसाय से जुड़ी योजनाओं, पशुओं की देखभाल और आधुनिक डेयरी प्रबंधन के बारे में जानकारी देने के लिए डेयरी डेवलपमेंट विभाग की ओर से गांव ओटाला, ब्लॉक समराला में एक दिवसीय मिल्क प्रोड्यूसर अवेयरनेस कैंप लगाया गया।
यह कैंप कैबिनेट मंत्री पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग पंजाब गुरमीत सिंह खुडियां की अगुवाई और डायरेक्टर डेयरी डेवलपमेंट विभाग पंजाब एस. वरयाम सिंह गिल के निर्देशों के तहत आयोजित किया गया। कैंप का संचालन जिला लुधियाना के डिप्टी डायरेक्टर डेयरी डेवलपमेंट सुरिंदर सिंह की अगुवाई में किया गया।
कैंप के दौरान डेयरी किसानों को विभाग की विभिन्न गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी दी गई। इसके साथ ही पशुओं में होने वाली बीमारियों, उनकी रोकथाम, संतुलित आहार, पशुओं की उचित देखभाल और रखरखाव के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
किसानों को डेयरी लोन केस से जुड़ी प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि वे डेयरी व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित और विस्तार कर सकें।
इस अवसर पर रिटायर्ड सीनियर वेटरनरी ऑफिसर डॉ. गुलजार, रिटायर्ड चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर डॉ. बलदेव सिंह, एडवांटा कंपनी से राशिद, वेरका मिल्क प्लांट खन्ना से बचित्तर सिंह, डेयरी डेवलपमेंट इंस्पेक्टर अगमप्रीत कौर, अंकित कपूर और सुखविंदर सिंह ने किसानों से बातचीत की।
विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें डेयरी व्यवसाय से संबंधित जरूरी जानकारी दी और उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
गुरु नानक स्टेडियम लुधियाना में 4 से 10 अक्टूबर 2026 तक अग्निवीर भर्ती रैली होगी। लुधियाना, मोगा, रूपनगर और मोहाली के CEE पास योग्य युवा हिस्सा ले सकेंगे।
लुधियाना / सत्ता संदेश
भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए लुधियाना के गुरु नानक स्टेडियम में 4 से 10 अक्टूबर 2026 तक अग्निवीर भर्ती रैली आयोजित की जाएगी। रैली की तैयारियों को लेकर अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) शिखा भगत ने आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (ARO), लुधियाना के भर्ती निदेशक और सेना के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
जोनल भर्ती कार्यालय, जालंधर के अधीन आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस लुधियाना की ओर से वज्र कोर के जवानों के सहयोग से भारतीय सेना में विभिन्न श्रेणियों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। इस भर्ती रैली में लुधियाना, मोगा, रूपनगर और एसएएस नगर (मोहाली) जिलों के वे पात्र युवा हिस्सा ले सकेंगे, जिन्होंने कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन (CEE) पास किया है।
आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस लुधियाना के भर्ती निदेशक ने बताया कि यह पंजाब की बड़ी भर्ती रैलियों में शामिल है। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, सुचारू और सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि रैली में 6,100 से अधिक उम्मीदवारों के शामिल होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि ARO लुधियाना की भर्ती रैली सिविल-फौजी तालमेल का उदाहरण है। वर्ष 2024 और 2025 में आयोजित अग्निवीर भर्ती रैलियों के दौरान भी प्रशासन और सेना के बीच समन्वय के जरिए व्यवस्थाएं की गई थीं।
एडीसी शिखा भगत ने कहा कि जिला प्रशासन पंजाब के युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भर्ती रैली के सफल आयोजन के लिए भारतीय सेना को प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ा हर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने संबंधित विभागों को रैली के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इनमें रिफ्रेशमेंट, स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, इंटरनेट सुविधा, मेटल डिटेक्टर, फायर टेंडर, मोबाइल शौचालय और मेडिकल टीम जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
प्रशासन और सेना की ओर से भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।
26-27 सितंबर को साप्ताहिक अवकाश के चलते लगातार पांच दिन प्रभावित हो सकता है बैंकिंग कामकाज; SLBC पंजाब ने ग्राहकों को दी सलाह
चंडीगढ़ / सत्ता संदेश
बैंक ग्राहकों के लिए सितंबर के आखिरी सप्ताह में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की ओर से 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय बैंक हड़ताल प्रस्तावित की गई है। इससे पहले 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश रहेगा।
ऐसे में बैंक शाखाओं का नियमित कामकाज लगातार कई दिनों तक प्रभावित होने की संभावना है। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC), पंजाब ने ग्राहकों से अपील की है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपने जरूरी बैंकिंग कार्य 25 सितंबर 2026 तक पूरे कर लें।
SLBC के अनुसार, प्रस्तावित हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं की सेवाओं पर असर पड़ सकता है। ऐसे में ग्राहकों को नकदी निकासी और अन्य जरूरी बैंकिंग कार्यों के लिए डिजिटल और वैकल्पिक बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
ग्राहक जरूरत के अनुसार एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, UPI, BC एजेंट/कस्टमर सर्विस सेंटर (CSP) समेत अन्य डिजिटल बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
बैंकों की ओर से ग्राहकों को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही गई है, लेकिन हड़ताल की स्थिति में शाखा स्तर पर होने वाले काम प्रभावित हो सकते हैं।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ओर से भी ग्राहकों को महत्वपूर्ण शाखा-संबंधी कार्य पहले ही निपटाने और जरूरत के अनुसार डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे बैंक शाखा से जुड़े ऐसे काम, जिनमें व्यक्तिगत रूप से शाखा जाना जरूरी है, उन्हें निर्धारित तारीख से पहले पूरा कर लें, ताकि प्रस्तावित हड़ताल के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
मध्य प्रदेश और पंजाब में पेट्रोल पंप डीलरों ने 16 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। जानिए MDR शुल्क को लेकर क्या है पूरा मामला।
डेस्क न्यूज/ सत्ता संदेश
मध्य प्रदेश और पंजाब में पेट्रोल पंप डीलरों ने UPI भुगतान को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, 16 अक्टूबर 2026 से पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे। डीलरों ने यह फैसला UPI लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR (Merchant Discount Rate) शुल्क के विरोध में लिया है।
डीलरों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर पहले से ही मुनाफे का मार्जिन काफी कम है। ऐसे में UPI लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनके लिए यह लागत वहन करना मुश्किल होगा। डीलरों ने सरकार से मांग की है कि पेट्रोल पंपों को UPI भुगतान पर भी MDR शुल्क से छूट दी जाए, जिस तरह डेबिट और क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर छूट उपलब्ध है।
मध्य प्रदेश में रोजाना करीब ₹590 अतिरिक्त लागत का दावा
मध्य प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अजय सिंह के अनुसार, एक पेट्रोल पंप पर औसतन करीब 100 ग्राहक ऐसे होते हैं, जो ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करते हैं। उनके मुताबिक प्रस्तावित MDR शुल्क लागू होने पर इससे प्रति दिन लगभग ₹590 की अतिरिक्त लागत आ सकती है। यह रकम महीने में करीब ₹17,700 तक पहुंच सकती है।
अजय सिंह ने कहा कि पेट्रोल पंप डीलरों का मुनाफा पहले से ही सीमित है। उन्होंने बताया कि डीलर करीब 0.5 प्रतिशत के आसपास मुनाफा मार्जिन पर काम करते हैं, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क को वहन करना उनके लिए संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि ग्राहक पेट्रोल और डीजल के भुगतान के लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। कार्ड भुगतान पर फिलहाल कोई ऐसी सीमा नहीं रखी गई है।
सरकार से UPI पर भी MDR छूट की मांग
अजय सिंह ने कहा कि पेट्रोल पंपों को क्रेडिट और डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR शुल्क से छूट मिल चुकी है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए UPI भुगतान को भी इसी तरह की छूट दिए जाने की जरूरत है।
डीलरों का कहना है कि यदि सरकार UPI लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर राहत देती है तो ग्राहकों को भी डिजिटल भुगतान की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी।
पंजाब में भी 16 अक्टूबर से ₹2,000 की सीमा
मध्य प्रदेश के साथ पंजाब के पेट्रोल पंप डीलरों ने भी 16 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है।
पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट परमजीत सिंह दोआबा ने कहा कि पेट्रोल पंप डीलर प्रस्तावित UPI ट्रांजैक्शन चार्ज को वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कम मार्जिन के कारण पहले से ही पेट्रोल पंपों के संचालन से जुड़े खर्च निकालना चुनौती बना हुआ है।
दोआबा के मुताबिक, ग्राहकों की सुविधा के लिए पेट्रोल पंपों पर डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान की सुविधा जारी रहेगी। उन्होंने इस मामले को लेकर संबंधित मंत्रालय के अलावा IOCL, BPCL और HPCL को भी पत्र लिखा है।
अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं। यदि प्रस्तावित MDR व्यवस्था में पेट्रोल पंप डीलरों को UPI भुगतान पर कोई राहत नहीं मिलती है, तो 16 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर रोक का फैसला लागू होने की बात कही गई है।
पोषण: यह सिर्फ़ हमारी थाली में मौजूद चीज़ों से कहीं ज़्यादा है भारत की बदलती पोषण कहानी पर ‘पोषण माह’ का नज़रिया
लेखिका : प्रियंका गांधी बंसल और अपर्णा मुखर्जी
आज आपने क्या खाया?
यह सबसे आम सवालों में से एक है जो हम पूछते हैं। हम इसे खाने की मेज़ पर, फ़ोन पर या बस बातचीत जारी रखने के लिए पूछते हैं। फिर भी, इन चार शब्दों में एक ऐसा सवाल छिपा है जो हम सभी के लिए मायने रखता है: क्या हम अपने शरीर को वह सब दे रहे हैं जिसकी उसे बढ़ने, काम करने और स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरत है?
पोषण ही तय करता है कि बच्चा कैसे बढ़ेगा, किशोर का विकास कैसे होगा, महिला का गर्भावस्था का अनुभव कैसा होगा, वयस्क कैसे स्वस्थ रहेगा और बुज़ुर्ग व्यक्ति कैसे सक्रिय रहेगा। इस लिहाज़ से, पोषण का मतलब सिर्फ़ खाना नहीं है। यह जीवन के हर पड़ाव पर हमारी सेहत की कहानी का अहम हिस्सा है।
इसीलिए हर सितंबर में मनाया जाने वाला ‘पोषण माह’ सिर्फ़ “स्वस्थ खाने” की सालाना याद दिलाने से कहीं ज़्यादा है। यह रुककर एक बड़ा सवाल पूछने का मौका है: जैसे-जैसे भारत में खाने की आदतें और सेहत की ज़रूरतें बदल रही हैं, क्या हमारे पोषण से जुड़े फ़ैसले भी उसी
हिसाब से बदल रहे हैं?
भारत में पोषण की कहानी बदल रही है और और भी पेचीदा होती जा रही है। कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) की कमी अब भी गंभीर चिंता का विषय हैं, जबकि ज़्यादा वज़न, मोटापा और गैर-संचारी रोग (NCDs) भी बढ़ रहे हैं। असल में, हम एक ही समय में बहुत कम, बहुत ज़्यादा और कभी-कभी गलत तरह के खान-पान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
ऐसी स्थिति से निपटने के लिए एक व्यापक प्रतिक्रिया की ज़रूरत है। सरकारी कार्यक्रम और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल सेहत से जुड़े कई पहलुओं पर तेज़ी से काम कर रहे हैं। उनके काम में मोटापा और हाइपरटेंशन जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) की शुरुआती जांच और पहचान से लेकर स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देना, ज़्यादा तेल का इस्तेमाल कम करना और शारीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित करना शामिल है। ‘ईट राइट इंडिया मूवमेंट’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसी पहल एक सरल लेकिन असरदार संदेश देती हैं: बचाव का मतलब सिर्फ़ बीमारी से बचना नहीं है; इसका मकसद स्वस्थ जीवन जीना है।
सबूत से कार्रवाई तक
इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) में पोषण लंबे समय से काम का एक मुख्य क्षेत्र रहा है। अपने संस्थानों और रिसर्च ग्रांट्स के नेटवर्क के ज़रिए, ICMR पूरी प्रक्रिया पर काम करता है: पोषण से जुड़ी समस्याओं और उनके कारणों को समझना, सबूत इकट्ठा करना और उन्हें एक साथ लाना, असल हालात में उपायों को आज़माना और नतीजों को नीतियों और कार्यक्रमों में बदलना। यह काम लंबे समय से चली आ रही…
एनीमिया और बचपन में कुपोषण जैसी चुनौतियाँ, साथ ही गट माइक्रोबायोम, न्यूट्रिजिनोमिक्स, मेटाबोलोमिक्स जैसे नए क्षेत्र और पोषण का आकलन करने व स्वास्थ्य के लिए व्यक्तिगत तरीके अपनाने वाली नई तकनीकें।
अब सबूतों को समाधान में बदलने पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है। इसका मतलब है ऐसे खाने और व्यवहार से जुड़े तरीके विकसित करना और उनका मूल्यांकन करना जो वैज्ञानिक रूप से सही हों, सस्ते हों, स्वीकार्य हों और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यावहारिक हों। रिसर्च में स्वास्थ्य क्षेत्र से आगे बढ़कर यह भी देखा जा रहा है कि कैसे खेती, खाद्य प्रणालियाँ और खान-पान की पसंद मिलकर पोषण को बेहतर बना सकती हैं और गैर-संचारी रोगों (NCDs) को रोकने में मदद कर सकती हैं।
थाली में इंद्रधनुष
इन सबके केंद्र में एक सरल विचार है: आहार में विविधता मायने रखती है। एक स्वस्थ थाली का जटिल होना ज़रूरी नहीं है। इसे एक इंद्रधनुष की तरह सोचें—अलग-अलग रंग, अलग-अलग खाद्य पदार्थ और महत्वपूर्ण रूप से, अलग-अलग पोषक तत्व। सब्ज़ियाँ और फल, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और मोटे अनाज (मिलेट्स), दालें, मेवे और बीज, दूध या प्रोटीन के अन्य स्रोत—इन सभी की अपनी जगह है। लक्ष्य हर भोजन में एक आदर्श थाली बनाना नहीं है, बल्कि पूरे दिन में एक विविध आहार लेना है।
इंद्रधनुष वाली थाली सिर्फ़ एक रंगीन तस्वीर से कहीं ज़्यादा है। यह एक व्यावहारिक सीख देती है: कोई भी एक खाद्य पदार्थ हमारे शरीर की सभी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकता। भारत में पहले से ही अलग-अलग क्षेत्रों में अनाज, दालों, सब्ज़ियों, फलों, मेवों, बीजों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की असाधारण विविधता मौजूद है। हमें हमेशा अगले “सुपरफ़ूड” की तलाश करने की ज़रूरत नहीं है; कभी-कभी, हमें बस अपनी खाद्य परंपराओं में पहले से मौजूद विविधता को फिर से खोजने की ज़रूरत होती है।
साथ ही, पोषण का मतलब शायद ही कभी खाद्य पदार्थों को “अच्छे” और “बुरे” के साफ़-सुथरे खानों में बाँटना होता है। मात्रा, आवृत्ति, तैयारी का तरीका, पोषक तत्वों की संरचना और खान-पान का समग्र पैटर्न—ये सभी मायने रखते हैं। कोई पारंपरिक भोजन सिर्फ़ इसलिए स्वस्थ नहीं हो जाता कि वह पारंपरिक है, ठीक वैसे ही जैसे कोई पैक्ड भोजन सिर्फ़ इसलिए अस्वस्थ नहीं हो जाता कि वह पैक्ड है। बड़ी तस्वीर मायने रखती है: कुल मिलाकर आहार कैसा है।
पोषण में बदलाव साफ़ दिख रहा है
एक और बदलाव है जिसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होता जा रहा है। अधिक वज़न और मोटापे में वृद्धि यह बताती है कि भारत के पोषण एजेंडा को कमी और अधिकता, दोनों पर ध्यान देने की ज़रूरत क्यों है। नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे के लगातार दौरों के आँकड़े बताते हैं कि महिलाओं और पुरुषों, दोनों में अधिक वज़न और मोटापे की संयुक्त दर में लगातार वृद्धि हो रही है।
नोट: ज़्यादा वज़न/मोटापे को BMI ≥25 kg/m² के तौर पर परिभाषित किया गया है। ये आंकड़े 15-49 साल की उम्र के वयस्कों के लिए हैं।
पोषण से जुड़े रिसर्च के अगले चरण में ज़्यादा तालमेल और असल ज़िंदगी से गहरा जुड़ाव ज़रूरी होगा। हमें खान-पान के बदलते तरीकों, कमज़ोर वर्गों और अस्वस्थ खान-पान की वजहों को बेहतर ढंग से समझने की ज़रूरत है। हमें यह जानना होगा कि क्या काम करता है, किसके लिए, कहाँ और किस स्तर पर। खेती, खाद्य प्रणालियों, पोषण और स्वास्थ्य के बीच मज़बूत संबंध, टेक्नोलॉजी और डेटा का बेहतर इस्तेमाल, और खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) को रोकने पर ज़्यादा ध्यान देना इस अगले चरण के मुख्य हिस्से होंगे।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि हमें पोषण से जुड़ी समस्याओं के बारे में सिर्फ़ बताने से आगे बढ़ना होगा। असली मौका यह है कि हम उनका पहले से अंदाज़ा लगाएँ, उन्हें रोकें और ऐसे समाधान तैयार करें जिन्हें लोग असल ज़िंदगी में इस्तेमाल कर सकें।
क्योंकि आखिरकार, पोषण का मतलब सिर्फ़ एक एकदम सही डाइट का पालन करना नहीं है। यह उन हज़ारों आम फैसलों के बारे में है जो हम हर बार खाना खाते समय लेते हैं।
आज हमारी थाली में जो है, वही कल के लिए हमारी सेहत भी बना रहा है। शायद ‘पोषण’ को समझने का सबसे आसान तरीका यही है—सिर्फ़ ज़िंदगी में साल जोड़ना नहीं, बल्कि उन सालों में सेहत भी जोड़ना।
(लेखक क्रमशः ICMR मुख्यालय, नई दिल्ली में वैज्ञानिक E और ICMR मुख्यालय, नई दिल्ली में वैज्ञानिक F (प्रमुख, RCN डिवीजन और क्लिनिकल ट्रायल्स यूनिट) हैं।)