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पंजाब में CM भगवंत मान से जुड़े ठिकानों पर CBI रेड के बाद सियासी घमासान, 2027 चुनाव से जोड़ा मामला

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

दिनांक : 07 अक्टूबर 2026

Punjab CBI Raid: पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और उनके OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े ठिकानों पर CBI की कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI की रेड को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा।

भगवंत मान ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए परेशान करना बीजेपी की कार्यशैली रही है। उन्होंने कहा कि CBI की कार्रवाई से अब साफ हो गया है कि पंजाब में चुनावी माहौल शुरू हो चुका है।

रेड में कुछ नहीं मिला- CM भगवंत मान

संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि CBI ने जिन-जिन ठिकानों पर छापेमारी की, वहां से कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के अधिकारी कार्रवाई के बाद चले गए और उन्हें कोई आपत्तिजनक चीज नहीं मिली।

मान ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का मकसद उन्हें, उनके परिवार और पंजाब सरकार को बदनाम करना है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने कुछ गलत नहीं किया है तो वह किसी भी जांच से डरने वाले नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने OSD राजबीर सिंह घुम्मन के गांव के लोगों द्वारा उनके समर्थन में खड़े होने की भी बात कही।

CBI ने पंजाब और चंडीगढ़ में 8 ठिकानों पर की तलाशी

वहीं, CBI के मुताबिक पंजाब और चंडीगढ़ में कुल आठ ठिकानों पर तलाशी ली गई। कार्रवाई के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

CBI ने यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज की गई FIR के आधार पर की है।

राजबीर सिंह घुम्मन समेत 6 लोग FIR में आरोपी

CBI ने मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR में राजबीर घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं।

CBI के अनुसार, जांच में आरोप है कि आरोपियों ने IAS और IPS अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, संपत्ति विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों को प्रभावित करने के बदले कथित तौर पर आर्थिक लाभ हासिल किया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI की एंट्री

इस मामले की शुरुआत ED की जांच से हुई थी। ED ने पंजाब के DGP को पत्र लिखकर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में FIR दर्ज करने को कहा था। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा।

5 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने CBI को मामले की जांच सौंपने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने पंजाब पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और CBI को दो महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

हाईकोर्ट के इस आदेश को पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी बीच CBI ने FIR दर्ज कर अगले ही दिन पंजाब और चंडीगढ़ में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

फिलहाल CBI की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है, जबकि CBI अपनी जांच के तहत जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

रूस : प्लेग की आशंका के बीच भारत की महामारी तैयारी कितनी मजबूत? ₹64,180 करोड़ का PM-ABHIM और 163 लैब का नेटवर्क

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रूस के साइबेरिया में एक लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद प्लेग को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान महामारी की तैयारी की ओर खींच दिया है। इरकुत्स्क स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली एक महिला की गंभीर निमोनिया के बाद मौत की खबर सामने आई। इसके बाद संपर्क में आए लोगों की निगरानी और सुरक्षा उपायों को लेकर भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस मौत को प्लेग संक्रमण के तौर पर कंफर्म नहीं किया गया है।

ऐसे में इस घटना से जुड़े दावों और आशंकाओं को तथ्यों से अलग रखना जरूरी है। हालांकि, इस मामले ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा किया है—अगर कोरोना जैसी कोई नई संक्रामक बीमारी अचानक फैलने लगे तो भारत उसे कितनी जल्दी पहचानकर नियंत्रित कर सकता है?

कोरोना महामारी ने भारत समेत पूरी दुनिया को यह दिखाया कि महामारी से निपटने की तैयारी केवल अस्पतालों और डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं हो सकती। बीमारी की शुरुआती पहचान, लैब टेस्टिंग, संक्रमण की निगरानी, जीनोम सीक्वेंसिंग, गंभीर मरीजों के इलाज और केंद्र-राज्य के बीच तेज समन्वय की भी जरूरत होती है।

₹64,180 करोड़ का PM-ABHIM

कोरोना के अनुभव के बाद भारत ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और महामारी से निपटने की क्षमता मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया है। इनमें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) प्रमुख है, जिसके लिए 2021-22 से 2025-26 तक ₹64,180 करोड़ का प्रावधान किया गया था।

इसके अलावा देश में संक्रामक बीमारियों की जांच के लिए ICMR के VRDL नेटवर्क में 163 लैब, जीनोम जांच के लिए 4 प्रमुख हब, 602 क्रिटिकल केयर ब्लॉक और वन हेल्थ मिशन जैसी पहलें शामिल हैं।

हालांकि, किसी योजना का बजट या घोषणा और उसका जमीन पर पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल होना दो अलग-अलग बातें हैं। महामारी की वास्तविक तैयारी का आकलन इस बात से होता है कि जरूरत पड़ने पर ये सुविधाएं कितनी तेजी से सक्रिय हो सकती हैं।

भारत की महामारी तैयारी के 5 बड़े आंकड़े

  • ₹64,180 करोड़: PM-ABHIM के लिए 2021-22 से 2025-26 तक प्रावधान।
  • 163 लैब: ICMR के वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज (VRDL) नेटवर्क में संक्रामक रोगों की जांच के लिए।
  • 4 जीनोम हब: रोगजनकों और उनके जेनेटिक बदलावों की निगरानी के लिए।
  • 602 क्रिटिकल केयर ब्लॉक: गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता बढ़ाने की योजना।
  • 22 BSL-3/4 लैब: वन हेल्थ मिशन के तहत उच्च जोखिम वाले रोगजनकों की जांच के नेटवर्क में शामिल करने की योजना।

बीमारी की पहचान के लिए 163 लैब का नेटवर्क

महामारी के शुरुआती दौर में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बीमारी आखिर है क्या। कोरोना के शुरुआती समय में टेस्टिंग क्षमता बढ़ाना दुनिया के सामने बड़ी चुनौती थी। इसी अनुभव के बाद भारत में ICMR के वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज यानी VRDL नेटवर्क का विस्तार किया गया।

इस नेटवर्क में 11 रीजनल, 27 स्टेट और 125 मेडिकल कॉलेज लैब शामिल हैं। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में संक्रामक बीमारियों की जांच की क्षमता बढ़ाना है।

किसी क्षेत्र में नया संक्रमण सामने आने पर स्थानीय या क्षेत्रीय स्तर पर सैंपल की जांच की सुविधा बीमारी की पहचान और रिपोर्टिंग को तेज करने में मदद कर सकती है। रूस के मौजूदा मामले में भी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि बीमारी वास्तव में क्या थी। केवल निमोनिया, किसी रिसर्च संस्थान में काम करना या संपर्क में आए लोगों की निगरानी को प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं माना जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक जांच और पुष्टि जरूरी है।

सिर्फ बीमारी नहीं, उसके जेनेटिक बदलाव पर भी नजर

आधुनिक महामारी तैयारी में केवल किसी वायरस या बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाना पर्याप्त नहीं है। वैज्ञानिकों को यह भी समझना होता है कि रोगजनक में कोई महत्वपूर्ण जेनेटिक बदलाव तो नहीं आया।

भारत में जीनोम जांच की क्षमता इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जीनोम सीक्वेंसिंग से किसी रोगजनक के जेनेटिक बदलावों को समझने में मदद मिलती है और संक्रमण के संभावित पैटर्न पर नजर रखी जा सकती है।

महामारी में गंभीर मरीजों के लिए 602 क्रिटिकल केयर ब्लॉक

कोरोना ने यह भी दिखाया कि किसी बड़ी महामारी के दौरान अस्पतालों पर सबसे अधिक दबाव गंभीर मरीजों के इलाज को लेकर पड़ सकता है। ऑक्सीजन, ICU और क्रिटिकल केयर बेड की मांग अचानक कई गुना बढ़ सकती है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए PM-ABHIM के तहत 602 क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक विकसित करने की योजना है।

इसके अलावा 3,382 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट और 730 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 17,788 सब-हेल्थ सेंटरों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 11,024 अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर विकसित किए जा रहे हैं।

इसका उद्देश्य बीमारी की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उपचार की सुविधाओं को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना है।

रियल टाइम सर्विलांस से बीमारी पर नजर

महामारी से निपटने के लिए केवल अस्पताल और लैब पर्याप्त नहीं हैं। यह जानना भी जरूरी है कि बीमारी कहां बढ़ रही है, कितने मामले सामने आ रहे हैं और संक्रमण किस दिशा में फैल रहा है।

इसके लिए NCDC का Integrated Disease Surveillance Programme (IDSP) काम करता है। वहीं Integrated Health Information Platform (IHIP) के जरिए बीमारी से संबंधित रिपोर्टिंग और निगरानी को मजबूत करने की कोशिश की गई है।

संभावित प्रकोप की स्थिति में विशेषज्ञों की टीमें जांच और जोखिम का आकलन कर सकती हैं। मॉक ड्रिल और सिमुलेशन एक्सरसाइज के जरिए स्वास्थ्य एजेंसियों की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को भी परखा जाता है। कुछ रोगजनकों के शुरुआती संकेतों की पहचान के लिए वेस्टवॉटर सर्विलांस भी महामारी निगरानी का हिस्सा है।

इंसानों के साथ जानवरों पर भी नजर

नई संक्रामक बीमारियों का खतरा केवल इंसानों से नहीं आता। कई रोगजनक जानवरों से इंसानों तक पहुंच सकते हैं। इसी वजह से भारत ने नेशनल वन हेल्थ मिशन पर जोर दिया है।

इस पहल में 13 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय का उद्देश्य इंसान, जानवर और पर्यावरण की सेहत को एक साथ समझना है। मिशन के तहत 22 BSL-3/4 लैब के नेटवर्क पर भी काम किया जा रहा है।

नागपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वन हेल्थ को विकसित किया जा रहा है। इसमें बीमारी की निगरानी, संभावित प्रकोप की जांच, रिसर्च और डेटा शेयरिंग जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया है।

यूपी के आंकड़े बताते हैं जमीन पर अभी चुनौती बाकी

देश की महामारी तैयारी का आकलन केवल केंद्रीय योजनाओं से नहीं किया जा सकता। राज्यों में इन योजनाओं के लिए जारी धन का इस्तेमाल और तैयार की गई सुविधाओं का संचालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश के 2025-26 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक NHM के तहत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹1,500.93 करोड़ मंजूर किए गए थे, जबकि उपलब्ध प्रोविजनल आंकड़ों में ₹83.66 करोड़ खर्च दिखाया गया है।

PM-ABHIM के तहत उत्तर प्रदेश के लिए केंद्र से ₹211.88 करोड़ जारी किए गए, जबकि रिपोर्ट में कुल खर्च ₹511.46 करोड़ बताया गया है। इसमें राज्य की हिस्सेदारी और पिछली बची राशि भी शामिल हो सकती है।

उत्तर प्रदेश में PM-ABHIM के तहत 74 क्रिटिकल केयर ब्लॉक को मंजूरी मिली है। ये आंकड़े बताते हैं कि महामारी की तैयारी में केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं है। पैसा समय पर खर्च हो, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो और जरूरत पड़ने पर वह पूरी क्षमता के साथ काम करे—यह भी उतना ही जरूरी है।

2026-27 के हेल्थ बजट में भी महामारी तैयारी पर जोर

केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ₹1,06,530.42 करोड़ का प्रावधान किया गया है। PM-ABHIM के लिए ₹4,770 करोड़ रखे गए हैं, जो पिछले संशोधित अनुमान के ₹2,845 करोड़ से 67.66 प्रतिशत अधिक है।

इसके अलावा NHM के लिए ₹39,390 करोड़, PM-JAY के लिए ₹9,500 करोड़ और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के लिए ₹4,821.21 करोड़ का प्रावधान है। ICMR के लिए ₹4,000 करोड़ रखे गए हैं।

क्या भारत कोरोना जैसी अगली महामारी के लिए तैयार है?

भारत ने कोरोना महामारी के बाद अपनी स्वास्थ्य तैयारियों को केवल अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय एक व्यापक ढांचा तैयार करने की कोशिश की है। 163 लैब, जीनोम सर्विलांस, 602 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, बीमारी की निगरानी के सिस्टम और वन हेल्थ मिशन इस तैयारी के अलग-अलग हिस्से हैं।

लेकिन किसी भी महामारी की तैयारी की असली परीक्षा संकट आने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होती है। लैब कितनी तेजी से टेस्ट कर सकती हैं, डेटा कितनी जल्दी साझा होता है, राज्यों की प्रतिक्रिया कितनी तेज है और अस्पताल अचानक बढ़ने वाले मरीजों के दबाव को कितना संभाल सकते हैं—इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि भारत अगली बड़ी संक्रामक बीमारी का सामना कितनी मजबूती से कर पाएगा।

दिल्ली : पीएम मोदी का ‘We Will Do It’ मंत्र, 25 साल की सार्वजनिक सेवा पर जताया जनता का आभार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित करते हुए देश की जनता का आभार जताया और विकास के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए नया संदेश दिया—“We Will Do It”। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए देशवासियों में आत्मविश्वास, ऊर्जा और “करके रहेंगे” का जज्बा होना जरूरी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने सभा से पहले विनायक मंदिर जाकर देश के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने भगवान से अपने लिए भी यही प्रार्थना की कि उन्हें इतनी ऊर्जा मिले कि वे लगातार देश की सेवा करते रहें।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में विधानसभा से लेकर लोकसभा तक कई चुनाव हुए और जनता ने उन्हें लगातार अपनी सेवा का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि यह सब जनता के निरंतर आशीर्वाद से संभव हुआ है। प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र और संविधान को नमन करते हुए सेवा ज्योति यात्रा में शामिल नागरिकों का भी अभिनंदन किया।

25 साल की सार्वजनिक सेवा पूरी होने पर जताई कृतज्ञता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन सरकार के प्रमुख के रूप में उनकी लगातार 25 वर्षों की सेवा पूरी होगी।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की जनता के निरंतर विश्वास और आशीर्वाद का परिणाम है। पीएम मोदी ने भारत के लोगों, भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले सभी राजनीतिक सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि देश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, इसलिए देश के प्रति उनका दायित्व भी उतना ही बड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों का जनविश्वास और अनुभव उनकी बहुत बड़ी पूंजी है, लेकिन यह पूंजी केवल उनकी नहीं बल्कि पूरे देश की है।

‘हर दिन कुछ नया सीखने का प्रयास करता हूं’

अपने बचपन को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वडनगर के स्कूल में पढ़ाई के दौरान वे हमेशा सबसे पहले स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों में शामिल रहते थे। उन्होंने कहा कि सीखने की ललक उनके जीवन का हिस्सा बन गई और आज भी वे स्वयं को एक विद्यार्थी ही मानते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें केवल कृतज्ञता का भाव दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि उन्हें जिताने वालों ने उन्हें विनम्र रहना सिखाया, जबकि असफलताओं और मुश्किलों ने दोबारा खड़े होने की ताकत दी। शुभचिंतकों ने प्रोत्साहित किया और आलोचकों ने उन्हें अपने भीतर झांकने का अवसर दिया।

‘जिसने मुझे गिराया, मुझे फिर खड़ा होना सिखाया’

प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में आने वाला हर संकट उनके धैर्य की परीक्षा रहा, जबकि हर सफलता ने उनके दायित्व को और बढ़ाया। उन्होंने कहा कि हर उपलब्धि ने उन्हें बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का साहस और जज्बा दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि विरोध करने वालों ने उन्हें लोकतंत्र की शक्ति समझाई और साथ देने वालों ने विश्वास की ताकत दिखाई। उन्होंने जीवन के विभिन्न अनुभवों को अपनी सीख और पूंजी बताया।

विकास के लक्ष्यों के लिए दिया ‘We Will Do It’ का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लाल किले से उन्होंने ‘सबका प्रयास’ की बात कही थी। अब भारत को नई बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए देशवासियों के भीतर यह विश्वास होना चाहिए कि “हम करके रहेंगे—We Will Do It.”

उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य से लेकर आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने तक कई महत्वाकांक्षी लक्ष्यों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत, दुनिया की टॉप-3 अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब, ओलंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नए लक्ष्य—We Will Do It।

उन्होंने कहा कि देश में दिखाई दे रही ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।

‘एंबिशन के लिए नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान’

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका शुरुआती राजनीतिक अनुभव संगठन के कार्यकर्ता के तौर पर रहा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई चुनाव लड़वाए, लेकिन खुद कोई चुनाव नहीं लड़ा था।

उन्होंने कहा कि यदि चुनावी राजनीति में चमकने की इच्छा होती तो वे बहुत पहले चुनावी मैदान में उतर सकते थे, लेकिन उनका स्वभाव अलग रहा। बचपन से मिली शिक्षा ने उन्हें “एंबिशन के लिए नहीं, मिशन के लिए जीने” की प्रेरणा दी।

पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे निभाते चले गए और उनके जीवन का एक ही ध्येय रहा—देश के लिए निस्वार्थ कर्म। उन्होंने कहा, “कर्म ही सबकुछ है, कर्म ही मेरा धर्म है।”

नितिन नबीन ने भी पीएम मोदी की नीतियों की सराहना की

इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की विभिन्न योजनाओं और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों की ओर से प्रधानमंत्री को सलाम है, जिन्होंने शौचालय निर्माण से लेकर उज्ज्वला योजना तक कई पहलें शुरू कीं और महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान को मजबूत किया।

नितिन नबीन ने कहा कि 16 करोड़ लखपति दीदियों का सशक्तिकरण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का नया उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने महिलाओं के विकास की केवल बात नहीं की, बल्कि महिलाओं के विकास का नेतृत्व किया है।

CEC ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित, 7-8 अक्टूबर को जाना था दंतेवाड़ा और कबीरधाम

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का 7-8 अक्टूबर का छत्तीसगढ़ दौरा अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया गया है।

रायपुर / सत्ता संदेश

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित कर दिया गया है। यह दौरा 7 और 8 अक्टूबर को प्रस्तावित था। छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से जारी पत्र में दौरा स्थगित किए जाने की वजह ‘अपरिहार्य कारण’ बताई गई है। दौरे की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के पत्र के मुताबिक, दौरे के दौरान ज्ञानेश कुमार को राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया था। उनके दौरे को लेकर जरूरी प्रोटोकॉल और अन्य व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।

दंतेवाड़ा, कबीरधाम और चित्रकूट जाने का था कार्यक्रम

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के प्रस्तावित कार्यक्रम में दंतेवाड़ा की देवी दंतेश्वरी मंदिर, कबीरधाम स्थित प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर और बस्तर जिले के चित्रकूट वाटरफॉल का दौरा शामिल था।

हालांकि, अब आयोग ने इस दो दिवसीय यात्रा को स्थगित कर दिया है। छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा है कि आयोग से संशोधित तारीख मिलने के बाद इसकी जानकारी अलग से दी जाएगी।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल

CEC ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा ऐसे समय में स्थगित हुआ है, जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

विपक्ष ने की CEC के इस्तीफे की मांग

चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष का विरोध भी लगातार जारी है। हाल ही में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। आयोग के कार्यालय की ओर मार्च की अनुमति नहीं मिलने के बाद विपक्षी सांसदों ने आकाशवाणी भवन परिसर में कई घंटे तक धरना दिया।

विपक्षी नेताओं ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों के साथ-साथ मतदाता सूची के SIR और चुनाव आयोग से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है।

इससे पहले सितंबर में ज्ञानेश कुमार का मेरठ और वाराणसी दौरा भी स्थगित किया गया था। हालांकि, छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित करने के लिए चुनाव आयोग ने फिलहाल केवल ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला दिया है।

Tarang Shakti-26: F-35, Rafale और Tejas की ताकत, जोधपुर में 8 देशों का बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास

राजस्थान के जोधपुर में Tarang Shakti-26 बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास जारी है। F-35A, Rafale, Su-30MKI और Tejas समेत कई आधुनिक विमान अभ्यास में शामिल हैं।

जोधपुर / सत्ता संदेश

भारतीय वायु सेना का बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति-26 (Tarang Shakti-26) राजस्थान के जोधपुर में पूरे जोश के साथ जारी है। 26 सितंबर से शुरू हुआ यह अभ्यास 12 अक्टूबर तक चलेगा। इस वर्ष अभ्यास की थीम ‘Power in Partnership’ रखी गई है। इसका उद्देश्य केवल हवाई ताकत का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, ऑपरेशनल तालमेल और आपसी भरोसे को मजबूत करना है।

तरंग शक्ति-26 के ऑपरेशनल फेज में भारत सहित 8 देशों की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इनमें अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, UAE, बांग्लादेश और श्रीलंका शामिल हैं। इसके अलावा 32 देश ऑब्जर्वर के तौर पर इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास को देख रहे हैं।

लड़ाकू विमानों के साथ सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी शामिल

अभ्यास में केवल लड़ाकू विमानों की ताकत ही नहीं, बल्कि एयरलिफ्ट, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग और अन्य सपोर्ट एयरक्राफ्ट की क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। अभ्यास में F-35 Lightning II, Rafale, F-16, A400M, MRTT, C-130, C-130J और KC-30A जैसे आधुनिक विमान शामिल हैं।

आसमान में F-35, Rafale, Su-30MKI और Tejas

तरंग शक्ति-26 का सबसे बड़ा आकर्षण अमेरिकी F-35A Lightning II है। अमेरिका के 6 F-35A विमान जोधपुर पहुंचे हैं और भारतीय जमीन पर एक सैन्य अभ्यास में पहली बार शामिल हो रहे हैं। अमेरिकी KC-135 टैंकर भी अभ्यास का हिस्सा हैं।

भारतीय वायु सेना के Su-30MKI, Rafale और स्वदेशी Tejas समेत कई फ्रंटलाइन प्लेटफॉर्म इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। F-35, Rafale, Su-30MKI और Tejas की संयुक्त उड़ानों ने जोधपुर के आसमान में आधुनिक एयर पावर का शानदार प्रदर्शन किया है।

कौन-कौन से विदेशी विमान अभ्यास में शामिल?

तरंग शक्ति-26 में अलग-अलग देशों की एयर कॉम्बैट, एयर मोबिलिटी और सपोर्ट क्षमताओं का व्यापक मिश्रण देखने को मिल रहा है।

  • अमेरिका: F-35A Lightning II, KC-135
  • फ्रांस: Rafale, A400M, MRTT
  • जर्मनी: A400M सहित एयर मोबिलिटी क्षमता
  • ऑस्ट्रेलिया: एयर मोबिलिटी और सपोर्ट एसेट्स
  • UAE: F-16 सहित एयर कॉम्बैट क्षमता
  • बांग्लादेश: C-130J
  • श्रीलंका: एयर सपोर्ट और ट्रांसपोर्ट क्षमता

सिर्फ उड़ान नहीं, युद्ध की तैयारी भी

तरंग शक्ति-26 का फोकस केवल फाइटर जेट की फॉर्मेशन फ्लाइट या एयर शो तक सीमित नहीं है। इसमें जॉइंट मिशन प्लानिंग, फ्लाइंग ऑपरेशंस, ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की समझ, मिशन के बाद डिब्रीफिंग और पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान भी शामिल है।

अलग-अलग देशों के पायलट और एयरक्रू इस दौरान यह समझने और अभ्यास करने का अवसर पा रहे हैं कि अलग-अलग विमान, सेंसर, कम्युनिकेशन सिस्टम और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं के बावजूद संयुक्त मिशन को प्रभावी ढंग से कैसे अंजाम दिया जा सकता है। आधुनिक युद्ध के लिहाज से यही इंटरऑपरेबिलिटी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारत के लिए क्यों अहम है Tarang Shakti-26?

आज के आधुनिक युद्ध में एयर पावर केवल फाइटर जेट की क्षमता तक सीमित नहीं है। इसमें एयर डिफेंस, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, एयरलिफ्ट, सर्विलांस और नेटवर्किंग जैसी क्षमताएं भी अहम भूमिका निभाती हैं।

तरंग शक्ति-26 भारतीय वायु सेना को अलग-अलग देशों की इन क्षमताओं को करीब से समझने और उनके साथ ऑपरेशनल तालमेल विकसित करने का अवसर दे रहा है। इससे भारतीय वायु सेना की संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

एयर डिप्लोमेसी का भी बड़ा मंच

तरंग शक्ति-26 भारत की एयर डिप्लोमेसी और रक्षा सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। एक ही अभ्यास में अमेरिका के F-35, फ्रांस के Rafale, यूरोपीय एयरलिफ्ट प्लेटफॉर्म और भारत के Su-30MKI, Rafale तथा स्वदेशी Tejas जैसे विमान साथ ऑपरेट कर रहे हैं।

यह अभ्यास भारत को अपनी एयर पावर और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता प्रदर्शित करने के साथ-साथ मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक रक्षा सहयोग और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करता है।

मनप्रीत सिंह अयाली का बड़ा बयान: पार्टी के रजिस्ट्रेशन और चुनाव चिन्ह में देरी पर उठाए सवाल

पंजाब / सत्ता संदेश

अकाली दल के वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने पार्टी के रजिस्ट्रेशन और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग तथा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अयाली ने कहा कि उनकी पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था, जबकि चुनाव आयोग की ओर से कथित तौर पर पार्टी को देश के लिए खतरा बताए जाने की बात सामने आई है।

मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि आजादी की लड़ाई में पंजाबियों का बड़ा योगदान रहा है और किसानों ने भी देश में क्रांति लाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सिखों को देश के लिए खतरा बताना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बात है।

अयाली ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर जल्द से जल्द चुनाव चिन्ह दिए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आज पंजाब में अकाली दल ही पंजाब की विरासत का प्रतिनिधित्व करता है और राजनीतिक पार्टियां उनकी पार्टी के रजिस्ट्रेशन में रुकावटें पैदा कर रही हैं।

पंजाब से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए अयाली ने कहा कि चंडीगढ़ का मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ, पानी का विवाद बना हुआ है और पंजाबी भाषी इलाकों को पंजाब में शामिल करने की मांग भी पूरी नहीं हुई। उन्होंने सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा और कत्लेआम का मुद्दा भी उठाया। अयाली ने कहा कि बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग विदेशों में रह रहे हैं और वे संबंधित देशों की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

हाई कोर्ट द्वारा एक मामले की जांच CBI को सौंपे जाने के फैसले का जिक्र करते हुए मनप्रीत सिंह अयाली ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के सरकारी आवास भी खाली करवाए जाने चाहिए।

अमृतपाल सिंह के मामले पर अयाली ने कहा कि उन पर पहले NSA लगाया गया था और NSA की अवधि समाप्त होने के बावजूद उन्हें असम की जेल में रखा गया है। उन्होंने इस मामले पर भी सवाल उठाए।

मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह से जुड़े मामले की अगली सुनवाई हाई कोर्ट में 4 नवंबर को निर्धारित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव चिन्ह से जुड़े मामले का जल्द समाधान होगा।

आनंदपुर साहिब मामले में SGPC की शुरुआती जांच रिपोर्ट सार्वजनिक, हरजिंदर सिंह धामी ने प्रोपेगैंडा के आरोपों को नकारा

अमृतसर / सत्ता संदेश

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने आनंदपुर साहिब से जुड़े मामले में गठित सब-कमेटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की। उन्होंने SGPC के खिलाफ चलाए जा रहे कथित प्रोपेगैंडा की कड़ी आलोचना करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।

एडवोकेट धामी ने बताया कि मामले की जांच के लिए सरदार बलदेव सिंह कल्याणपुर, सरदार गुरमीत सिंह बूह, बीबी गुरिंदर कौर भोलूवाला और सरदार गुरबख्श सिंह खालसा की चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इसके कोऑर्डिनेटर सेक्रेटरी बलविंदर सिंह काहलवां थे। कमेटी को 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देने का समय दिया गया था और निर्धारित अवधि में शुरुआती जांच रिपोर्ट पेश कर दी गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडवोकेट धामी ने कहा कि एक तरफ आपराधिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच और कार्रवाई होती है, जबकि दूसरी तरफ इस मामले में SGPC की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया पर ट्रायल चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस आधार के हर दिन नई बातें सामने लाई जा रही हैं, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है।

SGPC अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जांच पूरी होने से पहले अधूरी जानकारियां मीडिया और सोशल मीडिया में सार्वजनिक कर माहौल को प्रभावित करने का अधिकार किसे दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच को तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने एक बार फिर पूरे मामले की CBI जांच करवाने की मांग की। उन्होंने पंजाब के पुराने मामलों और शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि गंभीर मामलों में निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आना जरूरी है।

SGPC के खिलाफ लगाए जा रहे फंड के कथित गलत इस्तेमाल और विदेश में पैसा भेजने के आरोपों को भी एडवोकेट धामी ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि SGPC के धार्मिक प्रचार और चैरिटी फंड का पैसा रिकॉर्ड और पारदर्शिता के साथ खर्च किया जाता है।

जांच रिपोर्ट में संबंधित महिला के अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर ठहरने से जुड़े रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया। धामी के अनुसार, महिला के तख्त श्री केसगढ़ साहिब के कमरा नंबर 38, गुरुद्वारा अंब साहिब और श्री दरबार साहिब स्थित गुरु अर्जन देव निवास में अलग-अलग तारीखों पर ठहरने की सरकारी एंट्री, रसीदें और किराए के भुगतान का रिकॉर्ड उपलब्ध है।

धामी ने दावा किया कि इन रिकॉर्ड के आधार पर महिला के लगातार छह महीने एक ही सराय में रहने का दावा सही नहीं है। उन्होंने सराय के रजिस्टर में कथित छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, एंट्री नंबर 246 के बाद की एंट्री में काट-छांट कर आंकड़ों में बदलाव किया गया और 247 से 281 तक की एंट्री में भी कथित तौर पर हेरफेर की गई, ताकि एक गलत लिंक तैयार किया जा सके।

SGPC अध्यक्ष ने दावा किया कि हैंडराइटिंग की जांच में भी इन एंट्री को बाद में दर्ज किए जाने के संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि SGPC जांच में पूरा सहयोग कर रही है और संगत के सामने सच्चाई लाने के लिए सभी जरूरी कानूनी रास्ते अपनाए जाएंगे।

नाभा में दूध और डेयरी उत्पादों की दुकानों पर हेल्थ विभाग की रेड, दूध-पनीर के लिए सैंपल

नाभा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : चेतन मेहता

त्योहारों के सीजन से पहले दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट की शिकायतों को देखते हुए हेल्थ विभाग की टीम ने नाभा शहर में डेयरियों और दूध से जुड़े कारोबारियों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया। फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. गुरप्रीत कौर के नेतृत्व में टीम ने विभिन्न डेयरियों पर छापेमारी कर दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के सैंपल लिए।

फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. गुरप्रीत कौर ने आशु डेयरी और महेश गेट स्थित नए फोकल प्वाइंट की डेयरी समेत अन्य स्थानों पर जांच की। बताया गया कि कुछ दिन पहले हेल्थ विभाग की टीम ने कुछ ऐसी दुकानों पर भी रेड की थी, जो उस समय बंद मिली थीं। इसके बाद विभाग की टीम ने दोबारा इन इलाकों में निगरानी और चेकिंग शुरू की।

डॉ. गुरप्रीत कौर ने दुकानदारों को स्पष्ट चेतावनी दी कि दूध और दूध से बने उत्पादों में किसी भी तरह की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाना जरूरी है। मिलावट पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अगर कोई दुकानदार चेकिंग के दौरान दुकान बंद कर देता है तो इससे वह विभाग की कार्रवाई से बच नहीं सकता। विभाग की टीमें लगातार अलग-अलग समय पर चेकिंग करेंगी और अगली कार्रवाई किसी भी दुकान पर हो सकती है।

डॉ. गुरप्रीत कौर ने बताया कि पटियाला की टीम द्वारा पिछले दिनों बड़ी मात्रा में पनीर और दूध जब्त किया गया था। उन्होंने कहा कि लैब रिपोर्ट के बाद खराब पाए गए खाद्य पदार्थों को नष्ट किया गया। विभाग की ओर से आने वाले त्योहारों को देखते हुए मिठाई की दुकानों, डेयरियों, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

सभी फूड वेंडरों को अपना लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन करवाने, कर्मचारियों की मेडिकल जांच करवाने, साफ-सफाई बनाए रखने और नियमित पेस्ट कंट्रोल करवाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि बिना एक्सपायरी डेट, खराब गुणवत्ता या नकली खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. गुरप्रीत कौर के मुताबिक यह चेकिंग अभियान केवल नाभा तक सीमित नहीं रहेगा। नाभा, राजपुरा, समाना और पूरे पटियाला जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच लगातार जारी रहेगी।

अमृतसर : ऑटो-ई-रिक्शा चालकों का ट्रैफिक पुलिस पर आरोप, ASI के खिलाफ SP ट्रैफिक को दी शिकायत

अमृतसर / सत्ता संदेश

श्री हरमंदिर साहिब के पास लंगर हॉल के गेट नंबर 2 पर तैनात ट्रैफिक पुलिस के ASI जुगल किशोर पर ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने कथित बदसलूकी, धमकाने और वाहनों को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर भगवान वाल्मीकि समाज सेवा सोसाइटी के प्रतिनिधियों के नेतृत्व में ऑटो और ई-रिक्शा चालक ट्रैफिक ऑफिस पहुंचे और SP ट्रैफिक को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

पीड़ित ऑटो चालक मंजीत सिंह ने आरोप लगाया कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले महीने की 11 तारीख को उन्हें निर्धारित स्थान पर ऑटो खड़ा करने और यात्रियों को बैठाने से रोका गया। इस दौरान कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई।

ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने आरोप लगाया कि ट्रैफिक अधिकारियों द्वारा कुछ वाहनों की हवा निकालने, तार तोड़ने और वाहनों के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। चालकों का यह भी आरोप है कि कुछ वाहनों को नियमों का उल्लंघन करने के बावजूद अंदर जाने दिया जाता है, जबकि अन्य ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के साथ कथित तौर पर भेदभावपूर्ण और दुर्व्यवहारपूर्ण रवैया अपनाया जाता है।

ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की जाती है और परिवार की महिलाओं को लेकर भी धमकियां दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि वे मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं और इस तरह की कथित कार्रवाई से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भगवान वाल्मीकि समाज सेवा सोसाइटी के नेताओं और ड्राइवरों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए। ड्राइवरों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी शिकायत पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे संघर्ष का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

फिलहाल ट्रैफिक पुलिस के ASI जुगल किशोर और पुलिस प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

मेजर जनरल पवन कुमार सिंह ने गुरु नानक स्टेडियम में आर्मी रिक्रूटमेंट रैली का किया दौरा

लुधियाना / सत्ता संदेश

दिनांक : 6 अक्टूबर 2026

11 कॉर्प्स के चीफ ऑफ स्टाफ (COS) मेजर जनरल पवन कुमार सिंह, SM ने मंगलवार को लुधियाना के गुरु नानक स्टेडियम में चल रही आर्मी रिक्रूटमेंट रैली का दौरा किया और भर्ती प्रक्रिया व व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

जोनल रिक्रूटमेंट ऑफिस (ZRO) पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर की देखरेख में आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस (ARO) लुधियाना की ओर से 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक गुरु नानक स्टेडियम में आर्मी रिक्रूटमेंट रैली आयोजित की जा रही है।

दौरे के दौरान मेजर जनरल पवन कुमार सिंह ने भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों, रिक्रूटमेंट टीम और उम्मीदवारों से बातचीत की। उन्होंने रैली के सुचारू संचालन के लिए संबंधित सैन्य इकाइयों और विशेष रूप से जिला प्रशासन की ओर से किए गए इंतजामों की सराहना की।

उन्होंने उम्मीदवारों को भारतीय सेना में शामिल होने के अपने सपने को पूरा करने के लिए अनुशासन, दृढ़ संकल्प और शारीरिक फिटनेस पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सेना में भर्ती की प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

यह भर्ती रैली क्षेत्र के योग्य युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से आयोजित की जा रही है।