पंजाब विधानसभा के 22 से 27 अक्टूबर तक चलने वाले विशेष सत्र में SIR के खिलाफ प्रस्ताव, सिल्क रूट खोलने की मांग, नशा तस्करी और बेअदबी कानून पर चर्चा की संभावना।
चंडीगढ़ / सत्ता संदेश
पंजाब विधानसभा का 22 से 27 अक्टूबर तक चलने वाला विशेष सत्र कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा में रहेगा। सत्र के दौरान विपक्ष विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत तैयार मतदाता सूचियों के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा यह प्रस्ताव सदन में रखेंगे। इसके अलावा पंजाब के व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक सिल्क रूट को दोबारा खोलने, भाई कन्हैया जी की मानव सेवा को सम्मान देने और बेअदबी रोधी कानून में संशोधन जैसे मुद्दे भी उठ सकते हैं।
SIR के खिलाफ प्रस्ताव लाएंगे प्रताप सिंह बाजवा
विशेष सत्र में विपक्ष की ओर से SIR के तहत तैयार मतदाता सूचियों को रद्द करने और घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन के आधार पर तैयार पुरानी मतदाता सूचियों का इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाएगी। प्रस्ताव में पंजाब सरकार से यह मामला केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के समक्ष उठाने की मांग भी शामिल होगी। इस प्रस्ताव को सत्ता पक्ष का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पंजाब में व्यापार बढ़ाने के लिए सिल्क रूट खोलने की मांग
सत्र में विधायक जसवंत सिंह गज्जनमाजरा ऐतिहासिक सिल्क रूट को दोबारा खोलने का मुद्दा उठाएंगे। इस प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से संबंधित देशों के साथ व्यापारिक संपर्क बहाल करने की पहल करने की मांग की जाएगी।
ऐतिहासिक सिल्क रूट चीन से मध्य एशिया, ईरान और यूरोप तक फैले व्यापारिक मार्गों का नेटवर्क था। पंजाब का संपर्क भी उत्तर-पश्चिम के उन रास्तों से रहा है, जो अफगानिस्तान के माध्यम से मध्य एशिया तक पहुंचते थे। इन मार्गों के जरिए व्यापारियों और सामान की आवाजाही होती थी। प्रस्ताव का उद्देश्य पंजाब के किसानों और कारोबारियों को नए व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। हालांकि, इन मार्गों को दोबारा विकसित करने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित देशों के स्तर पर पहल जरूरी होगी।
भाई कन्हैया जी के नाम पर अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड रखने की मांग
विशेष सत्र में भाई कन्हैया जी की मानव सेवा को सम्मान देने से जुड़ा प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इसमें सरकारी अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों का नाम भाई कन्हैया जी के नाम पर रखने की मांग की जाएगी। इसके साथ ही 20 सितंबर को मनाए जाने वाले भाई कन्हैया जी मानव सेवा संकल्प दिवस को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की सिफारिश भी की जाएगी।
नशा तस्करी, कानून-व्यवस्था और कर्मचारियों के मुद्दों पर चर्चा
सत्र के दौरान तीन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी विभिन्न मुद्दों पर सदन में अपनी बात रखेंगे। विपक्ष सीबीआई जांच, नशा तस्करी, कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की मांगों सहित पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। सदन में प्रश्नकाल भी होगा, जिसके दौरान विधायकों को विभिन्न मामलों पर सवाल उठाने का अवसर मिलेगा।
बेअदबी रोधी कानून में संशोधन विधेयक पेश होने की संभावना
विशेष सत्र में बेअदबी रोधी कानून में संशोधन विधेयक और रंजीतगढ़ विकास प्राधिकरण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। बेअदबी रोधी कानून के कुछ प्रावधानों पर श्री अकाल तख्त साहिब की आपत्तियों के बाद सरकार ने इस विषय पर विचार-विमर्श किया है। वहीं, रंजीतगढ़ विकास प्राधिकरण विधेयक का उद्देश्य कंडी क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना है।
इन मुद्दों के चलते पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अब सदन की कार्यवाही के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIR के खिलाफ प्रस्ताव, सिल्क रूट को दोबारा खोलने की मांग और प्रस्तावित विधेयकों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच क्या सहमति बनती है।
हीरो मेंस एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी-2026 को लेकर पंजाब में खेल प्रेमियों और हॉकी खिलाड़ियों के बीच उत्साह बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में वीरवार को अमृतसर के छेहरटा स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस में दोपहर 3 बजे हॉकी शो मैच करवाया जाएगा। इस मुकाबले में ओलंपियन, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों सहित करीब 200 खिलाड़ियों के शामिल होने की उम्मीद है।
इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को हॉकी के प्रति आकर्षित करना और पंजाब में होने वाले अंतरराष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। शो मैच के माध्यम से खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को हॉकी से जुड़ने तथा खेल गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
तरनतारन के गांव चब्बा से अमृतसर पहुंचेगी ट्रॉफी
एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी-2026 के प्रचार के लिए पंजाब के सभी जिलों में ट्रॉफी टूर निकाला जा रहा है। इसी अभियान के तहत वीरवार दोपहर 1:30 बजे तरनतारन जिले के गांव चब्बा में बाबा नौध सिंह जी की समाधि से ट्रॉफी प्राप्त की जाएगी। इसके बाद ट्रॉफी को अमृतसर लाया जाएगा, जहां खेल विभाग की ओर से हॉकी शो मैच का आयोजन किया जाएगा।
ट्रॉफी टूर के जरिए अलग-अलग जिलों में हॉकी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इस खेल को लोकप्रिय बनाने की कोशिश की जा रही है। आयोजन में अनुभवी खिलाड़ियों की भागीदारी से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।
23 अक्टूबर को गुरदासपुर जाएगी ट्रॉफी
अमृतसर में कार्यक्रम संपन्न होने के बाद 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे ट्रॉफी गुरदासपुर जिले के लिए रवाना होगी। अगले पड़ाव पर ट्रॉफी के स्वागत और संबंधित कार्यक्रमों के लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन के अनुसार, ट्रॉफी टूर का मुख्य उद्देश्य हीरो मेंस एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी-2026 के प्रति लोगों में उत्साह पैदा करना, हॉकी को बढ़ावा देना और युवाओं को खेलों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। पंजाब के विभिन्न जिलों में होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से इस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट को लेकर खेल वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
अमृतसर ईस्ट की विधायक जीवनजोत कौर के PA मनिंदर सिंह पर दुकानदार से मारपीट का आरोप है। ₹4.50 लाख के लेनदेन के विवाद में पुलिस ने FIR दर्ज की।
अमृतसर / सत्ता संदेश
पंजाब के अमृतसर में अमृतसर ईस्ट की विधायक जीवनजोत कौर के निजी सहायक (PA) मनिंदर सिंह के खिलाफ एक दुकानदार से मारपीट करने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता अश्वनी कुमार का आरोप है कि 17 अक्टूबर को रामबाग चर्च के सामने स्थित बाजार में उन्हें घेरकर पीटा गया और किरच से उनके पेट पर दो वार किए गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गांव पाखरपुरा निवासी 43 वर्षीय अश्वनी कुमार इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते हैं। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर को बाजार में उनकी मुलाकात सुच्चा सिंह, उसके बेटे राणा, हरप्रीत सिंह, दामाद मनिंदर सिंह और एक अन्य व्यक्ति से हुई। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और फिर हमला कर दिया गया।
पेट पर किरच से वार करने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, राणा और सुच्चा सिंह ने उन्हें पकड़ लिया, जबकि मनिंदर सिंह और एक अन्य व्यक्ति ने उनके साथ मारपीट की। अश्वनी कुमार ने आरोप लगाया कि हरप्रीत सिंह ने किरच से उनके पेट के दाईं ओर दो वार किए, जिससे वह घायल हो गए और खून बहने लगा।
घटना के बाद उन्हें पहले सिविल अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें गुरु नानक अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद उन्हें 108 एंबुलेंस के जरिए अमनदीप अस्पताल में भर्ती कराया गया।
₹4.50 लाख के लेनदेन को लेकर विवाद
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी बहन के जेठ सुच्चा सिंह को 4.50 लाख रुपये उधार दिए थे। उनके मुताबिक, रकम वापस मांगने को लेकर विवाद चल रहा था। अश्वनी कुमार ने आरोप लगाया कि इसी रंजिश के चलते उन पर हमला किया गया।
पुलिस ने इन धाराओं के तहत दर्ज की FIR
थाना ए डिवीजन के एएसआई भरतराज सिंह के अनुसार, घायल के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 190, 191(3) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच की जा रही है।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC कर्मचारियों की सरकार से वार्ता बेनतीजा रही। करीब 2,000 बसें प्रभावित, शुक्रवार को CM आवास और विधानसभा की ओर कूच का ऐलान।
चंडीगढ़ / सत्ता संदेश
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के साथ पंजाब सरकार की बैठक बेनतीजा रहने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। बुधवार को यूनियन के चक्का जाम के कारण करीब 2,000 बसों का संचालन प्रभावित रहा, जिससे पंजाब के भीतर और दूसरे राज्यों में जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यूनियन ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास और पंजाब विधानसभा की ओर कूच करने का ऐलान किया है।
यूनियन लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने, अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने, पिछले आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस केस वापस लेने और परिवहन विभाग में नई बसें खरीदने की मांग कर रही है। यूनियन का कहना है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। सरकार और यूनियन के बीच अगली बैठक 29 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
2,000 बसें बंद, यात्रियों को हुई परेशानी
परिवहन विभाग में करीब 2,900 बसें हैं, लेकिन बुधवार को हड़ताल के कारण लगभग 2,000 बसें विभिन्न रूटों पर नहीं चलीं। इसका असर दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जाने वाले यात्रियों पर भी पड़ा। कई यात्री बस अड्डों पर घंटों बसों का इंतजार करते रहे।
विभाग की कुछ बसें लोकल रूटों पर चलती रहीं, लेकिन वहां भी कई सेवाएं प्रभावित हुईं। बसों का संचालन बाधित होने के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।
29 अक्टूबर को होगी अगली बैठक
यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल के अनुसार, कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा और परिवहन सचिव वरुण रूजम के साथ यूनियन की बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने बताया कि सरकार ने मांगों पर विचार करने के लिए 29 अक्टूबर तक का समय मांगा है और इसी दिन अगली बैठक बुलाई गई है।
गिल ने आरोप लगाया कि सरकार ने 15 अक्टूबर तक मांगों के संबंध में अधिसूचना जारी करने का वादा किया था, लेकिन इसे पूरा नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शुक्रवार को CM आवास और विधानसभा की ओर कूच
यूनियन ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास और पंजाब विधानसभा की ओर कूच करने का फैसला लिया है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुबंध के दायरे में लाना, अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करना, पिछले आंदोलन के दौरान दर्ज केस वापस लेना और विभाग में नई बसें शामिल करना है।
अब 29 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर नजर रहेगी। यदि सरकार और यूनियन के बीच सहमति नहीं बनती, तो बस सेवाओं को लेकर यात्रियों की परेशानियां आगे भी बनी रह सकती हैं।
उत्तराखंड के कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस पर विवाद के बीच CM पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अब मामले को विराम देना चाहिए। मीका सिंह ने भी किया समर्थन।
देहरादून / सत्ता संदेश
उत्तराखंड के कुंजापुरी मेले में पंजाबी गायक दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार चर्चा में है। इस मामले में गायक मीका सिंह समेत बॉलीवुड की कई हस्तियों ने दलेर मेहंदी का समर्थन किया है। वहीं, फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर इस मामले पर अपना पक्ष रखा है। इस बीच मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि अब इस विवाद को समाप्त कर देना चाहिए।
CM धामी बोले- अब मामले को विराम देना चाहिए
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह प्रतिक्रिया दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस विपक्ष के ‘वोट चोरी’ अभियान को लेकर आयोजित की गई थी। इसी दौरान दलेर मेहंदी से जुड़े विवाद पर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय जनता का दबाव रहा होगा।
धामी ने कहा कि संबंधित मंत्री ने भी इस मामले पर बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि उन्हें दलेर मेहंदी की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी नहीं थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इस विषय को यहीं समाप्त कर देना चाहिए।
दलेर मेहंदी के समर्थन में आए मीका सिंह और बॉलीवुड सितारे
कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति को लेकर विवाद सामने आने के बाद मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है। पंजाबी गायक मीका सिंह भी दलेर मेहंदी के समर्थन में सामने आए हैं। इसके अलावा फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की है।
इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने के बीच मुख्यमंत्री धामी के बयान को विवाद समाप्त करने की अपील के रूप में देखा जा रहा है। अब इस मुद्दे पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
पंजाब विधानसभा सत्र के पहले दिन कांग्रेस का प्रदर्शन, नशा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरा
चंडीगढ़ / सत्ता संदेश
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन सदन के बाहर कांग्रेस विधायकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विधायकों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला जलाकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस ने मानसा में नशा-विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या, राज्य में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और सरकारी आवासों पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली के नेताओं के कथित कब्जे जैसे मुद्दे उठाते हुए सरकार को घेरा।
कांग्रेस विधायकों ने इन मामलों में सरकार की जवाबदेही तय करने और मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगने की बात कही। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इन मुद्दों को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
झोटा हत्याकांड पर मुख्यमंत्री से जवाब मांगेंगे प्रताप सिंह बाजवा
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कांग्रेस परविंदर सिंह झोटा की हत्या समेत राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मुख्यमंत्री से सीधा जवाब मांगेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए और मुख्यमंत्री को सदन में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि नशे और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर विधानसभा में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। पार्टी इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी कर रही है।
नशा और कानून-व्यवस्था पर चर्चा की मांग
कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह कोटली ने कहा कि विपक्ष राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की मांग करेगा। उन्होंने मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता झोटा की हत्या का जिक्र करते हुए राज्य में गैंगस्टर गतिविधियों और रंगदारी के लिए मिल रही कथित धमकियों पर चिंता जताई।
कोटली ने नशीले पदार्थों से जुड़ी आत्महत्याओं का मुद्दा भी उठाने की बात कही। उन्होंने संगरूर के गुलजार सिंह के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर भी सदन में चर्चा होनी चाहिए।
परगट सिंह ने भी सरकार से जवाब मांगने की बात कही
जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि वे इन सभी मुद्दों को विधानसभा में उठाएंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद विधानसभा पहुंचे परगट सिंह ने नशे, कानून-व्यवस्था और राज्य के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरने की बात कही।
विधानसभा सत्र के पहले दिन कांग्रेस के प्रदर्शन से पंजाब की राजनीति में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। अब सदन की कार्यवाही के दौरान यह देखना होगा कि सरकार इन सवालों पर क्या जवाब देती है और किन मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ती है।
लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव, 50% बढ़ोतरी फॉर्मूले और परिसीमन की बहस को समझें। जानें यूपी, बिहार, तमिलनाडु और अन्य राज्यों पर संभावित असर।
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। इस दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को दोबारा आगे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, 22 अक्टूबर तक विशेष सत्र की तारीख और विधायी एजेंडे की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 850 करने का प्रस्ताव और सीटों में संभावित 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का फॉर्मूला है। मौजूदा लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। यदि 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का मॉडल लागू होता है, तो सदस्यों की संख्या करीब 815 से 816 तक पहुंच सकती है। वहीं, प्रस्तावित संवैधानिक बदलाव के तहत लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 850 करने की बात कही गई थी।
लेकिन सवाल सिर्फ सीटें बढ़ने का नहीं है। असली बहस इस बात पर है कि नए परिसीमन में उत्तर भारत और दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व किस अनुपात में बदलेगा और क्या सभी राज्यों में प्रति सांसद आबादी का अंतर कम हो पाएगा।
अप्रैल में क्यों अटक गया था परिसीमन का प्रस्ताव?
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने, परिसीमन की व्यवस्था बदलने और महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया से जुड़े तीन विधेयक पेश किए थे। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल थे।
17 अप्रैल को संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में मतदान हुआ। इसे 298 सदस्यों का समर्थन मिला, जबकि 230 सदस्यों ने विरोध में मतदान किया। संविधान संशोधन के लिए जरूरी विशेष बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसके बाद संबंधित दो विधेयकों पर भी आगे की कार्यवाही नहीं हुई।
अब दोबारा विधायी पहल की चर्चाओं के बीच यह देखना अहम होगा कि सरकार नए प्रस्ताव में राज्यों के प्रतिनिधित्व और सीटों की बढ़ोतरी को लेकर क्या व्यवस्था रखती है। फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार ने जरूरी बहुमत जुटा लिया है या विधेयक निश्चित रूप से पारित हो जाएगा।
50% फॉर्मूला लागू हुआ तो कितनी बढ़ सकती हैं सीटें?
50 प्रतिशत बढ़ोतरी के मॉडल के तहत राज्यों की मौजूदा लोकसभा सीटों में संभावित बदलाव का अनुमान इस प्रकार है। ये आंकड़े केवल गणना पर आधारित हैं, अंतिम प्रस्तावित या स्वीकृत सीटों की सूची नहीं हैं।
राज्य
मौजूदा सीटें
50% बढ़ोतरी के हिसाब से संभावित सीटें
उत्तर प्रदेश
80
120
बिहार
40
60
महाराष्ट्र
48
72
पश्चिम बंगाल
42
63
मध्य प्रदेश
29
लगभग 44
राजस्थान
25
लगभग 38
तमिलनाडु
39
लगभग 59
कर्नाटक
28
42
इन अनुमानों में अलग-अलग राज्यों की सीटों को 1.5 से गुणा किया गया है और जहां जरूरी है, वहां संख्या को निकटतम पूर्णांक में दर्शाया गया है। अंतिम वितरण परिसीमन की स्वीकृत व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में बहस के दौरान कहा था कि सभी राज्यों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के मॉडल से दक्षिण भारत के पांच राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर 195 हो सकती हैं और कुल सीटों में उनका हिस्सा लगभग 24 प्रतिशत बना रह सकता है। हालांकि, यह उस समय सरकार की ओर से रखा गया राजनीतिक आश्वासन था, लागू हो चुका कानूनी प्रावधान नहीं। <Cite refs={[“turn265468search0”]}/>
बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रति सांसद आबादी ज्यादा क्यों?
लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने का एक बड़ा तर्क यह है कि मौजूदा व्यवस्था में एक सांसद को बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करना पड़ता है। लेकिन सभी राज्यों की जनसंख्या एक जैसी गति से नहीं बढ़ी है। इसी कारण समान प्रतिशत से सीटें बढ़ाने के बाद भी प्रति सांसद आबादी का अंतर बना रह सकता है।
दिए गए 2026 के जनसंख्या अनुमानों और 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के मॉडल के आधार पर:
बिहार: करीब 13.23 करोड़ की अनुमानित आबादी और 60 सीटों के हिसाब से प्रति सांसद लगभग 22 लाख लोग होंगे।
उत्तर प्रदेश: करीब 24.29 करोड़ की अनुमानित आबादी और 120 सीटों के हिसाब से प्रति सांसद लगभग 20.2 लाख लोग होंगे।
महाराष्ट्र: लगभग 72 सीटों के मॉडल में प्रति सांसद आबादी करीब 18 लाख के आसपास हो सकती है।
पश्चिम बंगाल: 63 सीटों के मॉडल में प्रति सांसद लगभग 16 लाख से कुछ अधिक लोग हो सकते हैं।
तमिलनाडु: 59 सीटों के मॉडल में प्रति सांसद आबादी लगभग 13 लाख के आसपास रह सकती है।
कर्नाटक: 42 सीटों के मॉडल में प्रति सांसद आबादी करीब 16 लाख के आसपास हो सकती है।
ये आंकड़े जनसंख्या अनुमानों पर आधारित हैं, जनगणना के अंतिम आंकड़े नहीं। इनसे यह स्पष्ट होता है कि सीटों में एक समान प्रतिशत की बढ़ोतरी अपने आप सभी राज्यों में प्रति सांसद आबादी को बराबर नहीं करेगी।
परिसीमन पर उत्तर-दक्षिण बहस क्यों तेज है?
परिसीमन का अर्थ लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा प्रतिनिधित्व से जुड़ी सीटों के पुनर्निर्धारण से है। मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के बंटवारे पर 1971 की जनगणना के आधार पर रोक लागू रही है, जबकि निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का अंतिम व्यापक पुनर्निर्धारण 2001 की जनगणना के आधार पर हुआ था। सीटों के अंतरराज्यीय बंटवारे पर लगी रोक को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना से जुड़ी व्यवस्था तक रखा गया था।
इस व्यवस्था के पीछे जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का सवाल भी महत्वपूर्ण रहा है। दक्षिण भारत के कई राज्यों ने परिवार नियोजन और जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के प्रयास किए। दूसरी ओर, उत्तर भारत के कुछ राज्यों में जनसंख्या वृद्धि अपेक्षाकृत अधिक रही।
ऐसे में यदि सीटों का बंटवारा केवल नई जनसंख्या के अनुपात पर किया जाता है, तो अधिक आबादी वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है। कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को आशंका है कि कुल सीटों में उनका हिस्सा घट सकता है, भले ही उनकी अपनी सीटों की संख्या बढ़ जाए।
इसी वजह से परिसीमन की बहस में यह सवाल अहम है कि प्रतिनिधित्व का आधार केवल जनसंख्या हो या राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अन्य संवैधानिक व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जाए।
2011 की जनगणना से सीटें बांटी गईं तो क्या होगा?
परिसीमन से जुड़े अप्रैल 2026 के विधेयकों में प्रकाशित जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्निर्धारण की व्यवस्था प्रस्तावित थी। PRS Legislative Research के विश्लेषण के अनुसार, यदि लोकसभा की कुल सदस्य संख्या मौजूदा स्तर पर रखी जाए और 2011 की जनगणना के आधार पर राज्यों का प्रतिनिधित्व दोबारा तय हो, तो उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 89 और बिहार की 40 से बढ़कर 46 हो सकती हैं। इसके विपरीत, तमिलनाडु की सीटें 39 से घटकर 32 और केरल की 20 से घटकर 15 हो सकती हैं।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि कुल सीटों की संख्या स्थिर रखने और सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी करने वाले मॉडल के परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी राज्य को होने वाले वास्तविक लाभ या नुकसान का आकलन प्रस्तावित नियमों, जनगणना के आधार और अंतिम सीट वितरण को देखे बिना नहीं किया जा सकता।
850 सीटें होने पर एक सांसद पर कितनी आबादी होगी?
भारत की आबादी करीब 140 करोड़ मानकर एक सामान्य गणना करें, तो 850 सांसदों के हिसाब से प्रति सांसद लगभग 16.47 लाख लोग आते हैं। मौजूदा 543 सीटों के हिसाब से यह संख्या लगभग 25.78 लाख होगी।
यह केवल राष्ट्रीय औसत है। वास्तविकता में किसी निर्वाचन क्षेत्र की आबादी, राज्यों के बीच सीटों के बंटवारे और परिसीमन की प्रक्रिया के कारण प्रति सांसद आबादी अलग-अलग हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय तुलना करते समय भी संबंधित देशों की संसद की संरचना, निर्वाचन क्षेत्रों और जनसंख्या के नवीनतम आंकड़ों को एक ही आधार पर देखना जरूरी है। केवल सांसदों की संख्या से अलग-अलग देशों में प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
आगे क्या होगा?
लोकसभा की सीटें बढ़ाने और परिसीमन के प्रस्ताव पर अगला कदम सरकार की आधिकारिक घोषणा और विधेयकों के वास्तविक मसौदे पर निर्भर करेगा। अप्रैल में पेश विधेयक आवश्यक विशेष बहुमत नहीं जुटा पाए थे। अब यदि सरकार इन्हें दोबारा पेश करती है, तो राज्यों के प्रतिनिधित्व, जनसंख्या के आधार और दक्षिण भारत की आशंकाओं पर फिर बहस होने की संभावना है।
फिलहाल 850 सीटों की सीमा और 50 प्रतिशत बढ़ोतरी को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। वास्तविक सीटों की संख्या और राज्यों के हिस्से का निर्धारण तभी स्पष्ट होगा, जब संबंधित कानून पारित हों और परिसीमन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो।
पंजाबी साहित्यिक संस्कृति और पाकिस्तानी पंजाबी साहित्य ने रघबीर सिंह भरत जी की आकस्मिक मृत्यु पर खेद व्यक्त करते हुए अध्यक्ष प्रोफेसर गुरभजन सिंह गिल ने कहा है कि वह एक बहादुर कलमकार थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन माछीवाड़ा साहिब में अध्यापन और समाज सेवा में बिताकर प्रसिद्धि अर्जित की। उन्होंने सुरजीत खुर्शीदी, बलदेव पवार, हरजीत सिंह मंगत और तेलू राम कोहरा के साथ मिलकर साहित सभा माछीवाड़ा की स्थापना की।
उनके द्वारा किए गए प्रमुख कार्यों में पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना द्वारा प्रकाशित मौला बख्श कुश्ता की वृहत पुस्तक “पंजाबी शायरां दा तज़क्रा” का अनुवाद और पोथोहारी लोकगीतों पर शोध पुस्तक “बान फुलवाड़ी” (लेखक श्री अफ़ज़ल परवेज़) शामिल हैं। मुझे गर्व है कि उन्होंने मेरा अनुरोध स्वीकार किया और ये दोनों कार्य किये। इससे भी अधिक निराशाजनक बात यह है कि सुरगवास की रात से कुछ घंटे पहले, उन्होंने माछीवाड़ा साहिब में हमारे साथ पूरा दिन बिताया। हमने सहजप्रीत सिंह मंगत, त्रिलोचन लोची और प्रोफेसर रविंदर भट्टल के साथ पंजाबी सरित अकादमी लुधियाना से बन फुलवाड़ी पुस्तक की दस प्रतियां सौंपीं।
निधन के बाद अगली सुबह उन्हें यह पुस्तक लोगों को भेंट करने के लिए पंजाबी भवन लुधियाना आना था। भोग नमित पाठ और अंतिम प्रार्थना 25 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच गुरुद्वारा महंत गुलाब सिंह गली नंबर एक, नबी खान गनी खान गेट माछीवाड़ा साहिब (लुधियाना) के पास होगी। पंजाबी साहित्य अकादमी द्वारा अनुवादित उनकी पुस्तक बन फुलवाड़ी को लेखकों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
महासचिव डॉ. डॉ. गुलज़ार पंधेर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष. पाल कौर, डॉ. जसविंदर सिंह, डॉ. धनवंत कौर, हरमीत विद्यार्थी, रमन संधू, सहजप्रीत सिंह मांगट, डॉ. तरसपाल कौर, रंजीत कौर स्वि, कुलविंदर विरक, सिमरन अक्स, कुलविंदर कुल्ला, नवतेज गढ़दीवाला, मनजिंदर, सुरिंदरदीप, इंदरजीत पाल कौर भिंडर, बलविंदर गैलेक्सी, डॉ. जगविंदर जोधा, मनदीप औलख और अन्य उपस्थित लेखकों ने लोगों को प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर रघबीर सिंह भरत, इंग्लैंड से प्रसिद्ध लेखक गुरनाम ढिल्लों, डॉ. शिंदरपाल सिंह के प्रतिभाशाली युवा बेटे शरणजीत सिंह जिम्मी की असामयिक मृत्यु पर दुख व्यक्त किया.
इस आयोजन में अन्य लोगों के अलावा अकादमी के संरक्षक मो. चरणजीत सिंह यूएसए, अश्वनी जेटली, डॉ. गुरइकबाल सिंह, जनमेजा जोहल, डॉ. जगविंदर जोधा, अमरजीत शेरपुरी, सहजप्रीत सिंह मंगत, थलोचन लोची, अजीत पियासा, मेजर सिंह छीना, हरबंस सिंह अखाड़ा, प्रभजोत सोही, डॉ. कंवल ढिल्लों, डॉ. सोमपाल हीरा, भगवान ढिल्लों सुरिंदरदीप, डॉ. बलविंदर सिंह औलख गैलेक्सी, तरलोचन झंडे, नेतर सिंह मुत्तो, राजिंदर वर्मा, हरबख्श सिंह ग्रेवाल, परविंदर सिंह कलसी, मेजर सिंह, डॉ. सोमपाल हीरा, संधे सुखबीर, प्रीत बाठ, मेजर सिंह सियाद भी मौजूद थे।