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भारत पहली बार करेगा अंतरराष्ट्रीय विधि मापन समिति की बैठक की मेजबानी, 100 से अधिक विशेषज्ञ होंगे शामिल

भारत 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में 61वीं CIML बैठक की मेजबानी करेगा। 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत पहली बार अंतर्राष्ट्रीय विधि मापन समिति (CIML) की 61वीं बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। यह तीन दिवसीय बैठक 26 से 28 अक्टूबर, 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित होगी। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विधिक मापन संगठन (OIML) के सहयोग से आयोजित इस बैठक में दुनिया भर से 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और कानूनी मापन विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है।

इस महत्वपूर्ण आयोजन के माध्यम से भारत को अंतरराष्ट्रीय मापन मानकों, निष्पक्ष व्यापार और उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में अपनी भूमिका को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। बैठक में ओआईएमएल के सदस्य देशों, संबंधित सदस्यों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

26 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, 27 अक्टूबर को रणनीति कार्यशाला

कार्यक्रम के पहले दिन, 26 अक्टूबर को ‘कानूनी मापन में विकास’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न देशों के विशेषज्ञ कानूनी मापन प्रणालियों के आधुनिकीकरण, नियामक सेवाओं के डिजिटलीकरण, मापन उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय मानकों, ई-लर्निंग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में नवाचार पर विचार साझा करेंगे।

27 अक्टूबर को ओआईएमएल रणनीति कार्यशाला आयोजित होगी। इसमें भाग लेने वाले देश संगठन की भविष्य की रणनीति, तकनीकी प्रगति, डिजिटल परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ी प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे।

मापन मानकों और तकनीकी सहयोग पर होगा विचार-विमर्श

तीन दिवसीय बैठक के दौरान सीआईएमएल के सदस्य अंतरराष्ट्रीय सिफारिशों के विकास एवं संशोधन, ओआईएमएल की तकनीकी गतिविधियों, ओआईएमएल प्रमाणन प्रणाली (OIML-CS), क्षमता निर्माण और डिजिटल परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।

इस बैठक का उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच तकनीकी ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ाना तथा मापन प्रणालियों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानकों को प्रोत्साहित करना है।

इस आयोजन में फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील सहित कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

भारतीय उद्योग और उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?

इस अंतरराष्ट्रीय बैठक से भारतीय निर्माताओं को वैश्विक मापन मानकों, अनुरूपता मूल्यांकन और ओआईएमएल प्रमाणन प्रणाली की बेहतर जानकारी मिलने की उम्मीद है। इससे उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

मापन संबंधी मानकों में सामंजस्य से व्यापार में तकनीकी बाधाएं कम करने और परीक्षण एवं प्रमाणन की अनावश्यक पुनरावृत्ति से बचने में भी सहायता मिल सकती है।

उपभोक्ताओं के लिए सटीक और विश्वसनीय मापन व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। इससे वस्तुओं की सही मात्रा, लेन-देन में पारदर्शिता और बाजार में उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करने में मदद मिलती है।

1955 में हुई थी OIML की स्थापना

अंतर्राष्ट्रीय विधिक मापन संगठन (OIML) की स्थापना वर्ष 1955 में की गई थी। इसका उद्देश्य कानूनी मापन प्रक्रियाओं में वैश्विक सामंजस्य स्थापित करना है। संगठन व्यापार, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में इस्तेमाल होने वाले मापन उपकरणों के लिए अंतरराष्ट्रीय सिफारिशें और मानक विकसित करता है।

सीआईएमएल संगठन की प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था है, जो इसकी तकनीकी और प्रशासनिक गतिविधियों को दिशा देती है। इसकी वार्षिक बैठक कानूनी मापन के क्षेत्र में नीतिगत विषयों, तकनीकी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा का मंच प्रदान करती है।

भारत में 61वीं बैठक का आयोजन देश को अपने नियामक सुधारों, डिजिटलीकरण और व्यापार सुगमता से जुड़े अनुभव अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ साझा करने का अवसर देगा। साथ ही, यह पहल विश्वसनीय मापन व्यवस्था, निष्पक्ष व्यापार और मजबूत उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान सफलतापूर्वक संपन्न

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी), अपने प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम-सीपीएसई और संबद्ध कार्यालयों के साथ 17 सितंबर, 2026 से 2 अक्टूबर, 2026 तक स्वच्छता ही सेवा अभियान में शामिल हुआ। इस अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में मंत्रालय के सचिव की उपस्थिति में शपथ ग्रहण समारोह के साथ हुआ।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव ने नियमित रूप से अभियान की प्रगति की समीक्षा की और सभी हितधारकों को भागीदारी को अधिकतम करने और अभियान को और मजबूत करने के प्रयासों को तेज करने का निर्देश दिया।

अभियान के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियाँ

स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों और सार्वजनिक स्थानों का रूपांतरण

मंत्रालय और संबद्ध संगठनों ने पहले स्तंभ के तहत, चिन्हित स्थानों पर स्वच्छता और परिवर्तन गतिविधियां आयोजित की। इनमें बाजारों, मोहल्लों, शौचालयों, कार्यालयों और जल निकायों में स्‍वच्‍छता पहलों को भी शामिल किया गया।

अभियान के दौरान 9,845 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों का रूपांतरण किया गया इसमें 99,548 लोगों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, 937 सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई में 45,526 प्रतिभागियों ने योगदान दिया।

इस अभियान के तहत जल निकायों में 143 स्वच्छता अभियान चलाए गए, जिनमें 1,264 व्यक्तियों ने भाग लिया। इनका उद्देश्य जल संसाधनों की स्वच्छता और संरक्षण को बढ़ावा देना था। इसके अतिरिक्त, 543 मोहल्ला स्वच्छता अभियान भी आयोजित किए गए।

स्वच्छ पाठशाला: स्वच्छता के लिए युवा

इस अभियान में छात्रों, शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक हितधारकों को शामिल किया गया ताकि युवाओं में स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सके।

रिपोर्ट की गई गतिविधियों में कुल 18,700 स्कूली बच्चों ने भाग लिया। इनमें जागरूकता और प्रदर्शन गतिविधियाँ, हितधारकों की भागीदारी, विद्यालय स्तर पर स्वच्छता पहल, जल संचय संवाद और ज्ञान यात्रा गतिविधियाँ शामिल थीं। ज्ञान यात्रा गतिविधियों में 3,109 छात्रों ने भाग लिया।

सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर

मंत्रालय के संगठनों ने स्वच्छता कर्मचारियों के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देते हुए, 234 सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों में 7,098 स्वच्छता कर्मचारियों ने भाग लिया।

4,365 प्रतिभागियों के लिए आयोजित 276 निवारक स्वास्थ्य जांच के दौरान 3,518 पीपीई किट वितरित किए गए। ये पहलें स्वच्छता कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा और कल्याणकारी लाभों तक पहुंच पर बल देती हैं।

जन भागीदारी स्वच्छता के लिए

इस अभियान के तहत जागरूकता अभियानों, खाद बनाने की पहलों, प्लास्टिक कम करने की गतिविधियों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया। इसके अतिरिक्‍त 450 खाद बनाने संबंधी जागरूकता अभियान, 3,530 प्रतिभागियों के साथ 154 खेल स्वच्छता गतिविधियां और 2,662 प्रतिभागियों के साथ ‘प्लास्टिक को ना कहें’ गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनसे टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता पहलों में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा मिला।

स्वच्छता से समृद्धि

पांचवें स्तंभ के अंतर्गत, कचरे से धन उत्पन्न करने की पहलों और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर केंद्रित गतिविधियाँ शामिल थीं, जिनमें ‘कबाड़ से जुगाड़’ और ‘कबाड़ से कला’ शामिल हैं। अभियान की उपलब्धियों में 191 कला महाविद्यालयों और संस्थानों के साथ जुड़ाव, 175 प्लास्टिक पुनर्चक्रण मेले, 135 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों (पीडब्लूएमयू) का मूल्यांकन, ‘कबाड़ से जुगाड़’ के अंतर्गत 687 प्रविष्टियाँ और ‘कबाड़ से कला’ के तहत 607 प्रविष्टियाँ शामिल हैं।

इन गतिविधियों ने कचरे के रचनात्मक पुन: उपयोग को प्रोत्साहित किया और संसाधन पुनर्प्राप्ति और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में जागरूकता को बढ़ावा दिया।

स्वच्छता की भावना को बनाए रखना

ये उपलब्धियां मंत्रालय, उसके सीपीएसई और संबद्ध संगठनों, कर्मचारियों, छात्रों, स्वच्छता कर्मियों और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों को दर्शाती हैं। स्वच्छता अभियान, जागरूकता कार्यक्रम, कल्याण शिविर और अपशिष्ट प्रबंधन पहलों के माध्यम से, इस अभियान का उद्देश्य जनभागीदारी को मजबूत करना और स्वच्छता को एक सतत अभ्यास के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय स्वच्छ और विकसित भारत की व्यापक परिकल्पना में अपने योगदान के साथ स्वच्छता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

पानीपत में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने पर बवाल, डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने BJP सरकार पर साधा निशाना

पानीपत में जंतर-मंतर जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा रोके जाने और हिरासत में लिए जाने पर डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने सवाल उठाए। भाजपा सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

पानीपत / हरियाणा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : शशि कपूर

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित सत्याग्रह में शामिल होने जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पानीपत में पुलिस द्वारा रोके जाने और हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं समाजसेवी डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार बताया। उन्होंने भाजपा सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

डॉ. ओमवीर सिंह पंवार के अनुसार, वह अपने कांग्रेस साथियों चांद चौधरी, तिलक राजोरा, विकास रोशे और सुशील सैनी के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित सत्याग्रह में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान पानीपत में पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया।

डॉ. पंवार ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने, जनहित के मुद्दों को सामने लाने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की होती है। विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने विचार रखने तथा लोकतांत्रिक कार्यक्रमों में शामिल होने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।

उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती विरोध की आवाज सुनने और असहमति का सम्मान करने में है, न कि उसे दबाने में। उन्होंने संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के अधिकारों का सम्मान करने की भी मांग की।

डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर चलते हुए संविधान की रक्षा, जनता के अधिकारों और जनहित के मुद्दों को उठाती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का संकल्प कमजोर नहीं होगा और वे शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन संविधान और लोकतंत्र के मूल्य सर्वोपरि हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता जनता की आवाज उठाते रहेंगे और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास जारी रखेंगे।

NHRC Human Rights Quiz 2026: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने घोषित किए 10 विजेता, ₹15,000 का प्रथम पुरस्कार

NHRC ने मानवाधिकार क्विज-2026 के 10 विजेताओं की घोषणा की। आरती महाजन को ₹15,000, रितिका को ₹10,000 और तूबा बेनज़ीर को ₹5,000 का पुरस्कार मिला।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश
: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अपने ऑनलाइन ‘मानवाधिकार क्विज-2026: जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा का उत्सव’ के 10 विजेताओं की घोषणा कर दी है। आयोग के 33वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस क्विज में देशभर के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। यह प्रतियोगिता 1 सितंबर से 10 अक्टूबर, 2026 तक मायगॉव (MyGov) के सहयोग से आयोजित की गई थी।

इस क्विज का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को मानवाधिकारों, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (PHRA) तथा देश में मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका, शक्तियों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना था।

आरती महाजन को पहला पुरस्कार, रितिका दूसरे स्थान पर

प्रतियोगिता में आरती महाजन ने प्रथम स्थान हासिल करते हुए 15,000 रुपये का पुरस्कार जीता। वहीं, रितिका को दूसरे स्थान के लिए 10,000 रुपये और तूबा बेनज़ीर को तीसरे स्थान के लिए 5,000 रुपये का पुरस्कार दिया गया।

इसके अलावा सात प्रतिभागियों को 2,000 रुपये प्रत्येक के सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना गया। इनमें आदित्य गुप्ता, तरुण, रानी मंडल, बसंत कुमार महतो, लिख्त कुमार ए और दीपिका मदासु के नाम शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी में सात सांत्वना पुरस्कारों के लिए छह नाम ही दिए गए हैं।

26,459 लोगों ने लिया क्विज में हिस्सा

NHRC के अनुसार, इस ऑनलाइन क्विज को 1,67,127 लोगों ने देखा, जबकि 26,459 प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लोगों ने भागीदारी की। प्रतिभागियों में सबसे बड़ी संख्या 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की रही। राज्यवार भागीदारी के मामले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सबसे आगे रहे।

5,753 प्रतिभागियों ने हासिल किए पूरे अंक

क्विज में 5,753 प्रतिभागियों ने 15 में से 15 अंक प्राप्त किए। इनमें से 10 विजेताओं का चयन मायगॉव की टीम ने प्रतियोगिता के नियमों और शर्तों के अनुसार लॉटरी के माध्यम से किया। प्रतिभागियों को 300 सेकंड यानी पांच मिनट के भीतर अधिकतम 15 प्रश्नों के उत्तर देने थे।

इस पहल के माध्यम से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं, को मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करने और जीवन, स्वतंत्रता, समानता तथा गरिमा जैसे मूलभूत मूल्यों की समझ को मजबूत करने का प्रयास किया।

लुधियाना में प्रो. मोहन सिंह का 121वां जन्मदिवस सादगी से मनाया, 48वां पंजाबी सभ्याचारक मेला आयोजित

लुधियाना में प्रोफेसर मोहन सिंह का 121वां जन्मदिवस सादगी से मनाया गया। 48वें पंजाबी सभ्याचारक मेले में साहित्यकारों और कलाकारों ने श्रद्धांजलि दी

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाबी के प्रसिद्ध कवि प्रोफेसर मोहन सिंह का 121वां जन्मदिवस प्रोफेसर मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से सादगी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 48वें पंजाबी सभ्याचारक मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम से पहले पंजाबी भवन के निकट स्थित प्रोफेसर मोहन सिंह की प्रतिमा पर पुष्पमालाएं अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

फाउंडेशन के अध्यक्ष राजीव लवली और चेयरमैन गुरनाम सिंह धालीवाल के नेतृत्व में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ी प्रमुख हस्तियों ने प्रतिमा पर पुष्पमालाएं अर्पित कर महान कवि को याद किया। वहीं, सांस्कृतिक मेले में शामिल गायकों, कवियों और साहित्यकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रोफेसर मोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी और पंजाबी साहित्य एवं संस्कृति के प्रति उनके योगदान को याद किया।

इस अवसर पर राजीव लवली और गुरनाम सिंह धालीवाल ने कहा कि पंजाबी साहित्य के बाबा बोहड़ के रूप में प्रसिद्ध जगदेव सिंह जस्सोवाल, प्रोफेसर मोहन सिंह के बेहद करीबी मित्र थे। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर मोहन सिंह की स्मृति में उनकी जयंती पर सांस्कृतिक मेले आयोजित करने की शुरुआत जगदेव सिंह जस्सोवाल ने की थी।

उन्होंने कहा कि इन सांस्कृतिक मेलों का उद्देश्य पंजाबी संस्कृति की जड़ों को मजबूत करना और मातृभाषा की समृद्ध विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में लोक गायक, कवि और साहित्यकार भाग लेते हैं तथा अपनी कला के माध्यम से पंजाबी भाषा और सभ्याचार के संरक्षण में योगदान देते हैं।

फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि संस्था हर वर्ष महान साहित्यकारों और पंजाबी संस्कृति के लिए योगदान देने वाली हस्तियों को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करती है। उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष इस मेले का आयोजन और भी बड़े स्तर पर करने की योजना है।

कार्यक्रम में प्रगट सिंह ग्रेवाल, प्रितपाल सिंह धालीवाल, जसवंत सिंह छापा, के.के. बावा, पवन दीवान, निर्मल जोड़ा, अमरिंदर सिंह जस्सोवाल, प्रिथीपाल सिंह बटाला, मलकीयत सिंह दाखा, कुलजीत सिंह शंकर, सुशील मल्होत्रा, गोल्डी और विंकल सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। आयोजन में डॉ. एवीएम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षकों ने विशेष सहयोग दिया।

प्रोफेसर मोहन सिंह की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम पंजाबी साहित्य, लोक कला और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बना।

शिक्षा में निवेश करने से होगी आर्थिक सशक्तिकरण की शुरुआत : सुधांश पंत

आर्थिक सशक्तिकरण की शुरुआत तब होती है, जब कोई युवा अपनी शिक्षा पूरी करके करियर बनाने की तैयारी शुरू करता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने इसी यात्रा को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाओं की रूपरेखा तैयार की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक चरण में मिलने वाली सहायता अगले चरण में नए अवसरों का रास्ता खोले।

विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा जारी रखने में मदद करने वाली छात्रवृत्तियों से लेकर फेलोशिप, कोचिंग, कौशल विकास और उद्यमिता के लिए वित्तीय सहायता तक, इन पहलों का उद्देश्य सहायता की एक ऐसी निरंतर व्यवस्था विकसित करना है, जो लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने में सक्षम बनाए।

छात्रवृत्तियों के माध्यम से मजबूत नींव का निर्माण

वंचित वर्ग के ऐसे विद्यार्थी के लिए, जिसके परिवार के पास सीमित आर्थिक संसाधन हैं, स्कूली शिक्षा पूरी करना भी एक चुनौती हो सकती है। आठवीं कक्षा पूरी करने के बाद परिवार के सामने अक्सर यह सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या बच्चे की पढ़ाई आगे जारी रख पाना संभव होगा।

पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना इस चिंता को दूर करने में मदद करती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को नौवीं और दसवीं कक्षा तक अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सहायता दी जाती है।

स्कूली शिक्षा के बाद, उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना विद्यार्थियों को शिक्षा से जुड़े खर्चों में सहायता प्रदान करती है। इसमें शिक्षण शुल्क और रखरखाव संबंधी खर्च शामिल हैं। इस सहायता से विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

विद्यार्थियों को शिक्षा व्यवस्था से जोड़े रखना विभाग की छात्रवृत्ति योजनाओं की बुनियादी सोच है। पिछले 12 वर्षों में अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अन्य पात्र विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही पूर्व-मैट्रिक और उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 19.8 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 65,756 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि विद्यार्थियों को आर्थिक बाधाओं से उबरने और अपनी शिक्षा जारी रखने में मदद देने के लिए बड़े स्तर पर सहायता प्रदान की गई है।

छात्रवृत्ति योजनाओं का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ, सहायता पहुंचाने की व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। वर्ष 2021-22 से छात्रवृत्ति योजनाओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही, दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाने के लिए रिकॉर्ड का मिलान, विद्यार्थियों और अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक ई-केवाईसी तथा अलग-अलग शैक्षणिक वर्षों में विद्यार्थियों का रिकॉर्ड रखने के लिए एक बार पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

डिजिलॉकर, उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) और शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडाइस) के डेटाबेस के साथ एकीकरण ने भी इस व्यवस्था को मजबूत किया है। इन उपायों से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि आर्थिक सहायता सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंचे। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है।

उच्च शिक्षा और शोध के लिए नए रास्ते खोलना

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने की आकांक्षा रखने वाले विद्यार्थियों के सामने भी आर्थिक बाधाएं बनी रह सकती हैं। विभाग की उच्च शिक्षा संबंधी योजनाओं का उद्देश्य शैक्षणिक यात्रा के विभिन्न चरणों में इन बाधाओं को दूर करना है।

शीर्ष श्रेणी शिक्षा योजना के तहत निर्धारित प्रमुख शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क और अन्य पात्र शैक्षणिक खर्चों के लिए सहायता दी जाती है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि योग्यता के आधार पर प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।

जो विद्यार्थी शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए राष्ट्रीय फैलोशिप योजना के तहत वजीफे और आकस्मिक खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इससे शोधार्थियों को अपने शैक्षणिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना चयनित विद्यार्थियों को विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की पढ़ाई करने का अवसर प्रदान करती है। इससे उन्हें उच्च स्तरीय शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभव प्राप्त करने के अवसर मिलते हैं।

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) और विमुक्त जनजातियों (डीएनटी) से संबंधित विद्यार्थियों को भी प्रधानमंत्री यंग अचीवर्स छात्रवृत्ति पुरस्कार योजना (पीएम-यशस्वी) के माध्यम से सहायता दी जाती है। इस योजना में स्कूली और कॉलेज स्तर पर शीर्ष श्रेणी की शिक्षा के लिए सहायता का प्रावधान है।

ये सभी पहल मिलकर विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा से लेकर विशिष्ट अध्ययन, शोध और उच्च शैक्षणिक योग्यताएं हासिल करने तक आगे बढ़ने में मदद करती हैं।

आवास की समस्या का समाधान

शिक्षा जारी रखने के लिए केवल शिक्षण शुल्क और शैक्षणिक खर्चों में वित्तीय सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के लिए, किसी छोटे शहर का विद्यार्थी जब दूसरे शहर के किसी अच्छे शिक्षण संस्थान में प्रवेश प्राप्त करता है, तो उसके सामने सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था करना एक अतिरिक्त चुनौती बन सकता है।

उपयुक्त आवासीय सुविधाओं की कमी से परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है और कुछ मामलों में विद्यार्थियों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के अंतर्गत छात्रावास घटक और अन्य पिछड़ा वर्ग के लड़कों एवं लड़कियों के लिए छात्रावास निर्माण योजना का उद्देश्य आवासीय सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराकर इस चुनौती का समाधान करना है। ये योजनाएं छात्रवृत्ति के माध्यम से मिलने वाली सहायता को और प्रभावी बनाती हैं तथा ऐसा वातावरण तैयार करने में मदद करती हैं, जिसमें विद्यार्थी अधिक सुरक्षा और निरंतरता के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।

इन योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक संसाधनों या आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की कमी विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति में बाधा न बने।

शिक्षा से नवाचार और उद्यमिता तक

शिक्षा आर्थिक सशक्तिकरण के कई रास्ते खोलती है। जहां अनेक विद्यार्थी रोजगार प्राप्त करने का सपना देखते हैं, वहीं कुछ अन्य अपना उद्यम स्थापित करना और अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी आजीविका के अवसर पैदा करना चाहते हैं। विभाग की आर्थिक सहायता संबंधी पहल इन दोनों आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य सीखने से लेकर कमाई करने तक की यात्रा के विभिन्न चरणों में सहायता उपलब्ध कराना है।

युवा नवोन्मेषकों और शोधार्थियों के लिए अंबेडकर सामाजिक नवाचार एवं इन्क्यूबेशन मिशन (एएसआईआईएम) नवीन विचारों को व्यावहारिक उद्यमों में बदलने के लिए सहायता प्रदान करता है। इस मिशन के तहत 30 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।

विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच उद्यमिता को प्रोत्साहित करके इस पहल का उद्देश्य ज्ञान और नवाचार को व्यावहारिक आर्थिक अवसरों से जोड़ना है।

वेंचर कैपिटल फंड के तहत पात्र उद्यमों को रियायती दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस फंड के अंतर्गत 4 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे कारोबार के विकास के लिए अपेक्षाकृत कम लागत पर पूंजी मिलती है।

इस तरह की सहायता से अपना कारोबार शुरू करने या उसका विस्तार करने की इच्छा रखने वाले उद्यमियों को एक बड़ी चुनौती से निपटने में मदद मिल सकती है। यह चुनौती है उचित शर्तों पर वित्तीय संसाधनों तक पहुंच हासिल करना।

आजीविका के लिए वित्तीय सहायता को अधिक सुलभ बनाना

हर स्नातक बड़े उद्यम की स्थापना करना नहीं चाहता। अनेक लोगों के लिए छोटी दुकान, कार्यशाला या सेवा आधारित कारोबार आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने का व्यावहारिक रास्ता हो सकता है। किफायती दरों पर ऋण की उपलब्धता किसी आकांक्षा को केवल विचार बनकर रह जाने और उसे स्थायी आजीविका में बदलने के बीच का अंतर तय कर सकती है।

वंचित इकाई समूह और वर्गों को आर्थिक सहायता (विश्वास) योजना के तहत पात्र अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सफाई कर्मचारी ऋण लेने वालों को आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इसमें व्यक्तिगत लाभार्थियों के साथ-साथ स्वयं सहायता समूह भी शामिल हैं।

यह योजना आय अर्जित करने वाले कार्यों के लिए लिए गए ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान करती है। इससे सामान्य ऋण देने वाली संस्थाओं से कर्ज लेने की प्रभावी लागत कम करने में मदद मिलती है। इस योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों को दिया जाता है, जिससे छोटे कारोबार की स्थापना करने या उसका विस्तार करने की कोशिश कर रहे लोगों पर वित्तीय बोझ कम होता है।

स्वच्छता क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के लिए स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) के माध्यम से रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना वाहनों और उपकरणों से जुड़े स्वच्छता संबंधी उद्यमों को सहायता प्रदान करती है, जिससे पात्र लाभार्थियों को अपना उद्यम स्थापित करने और उसका स्वामित्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है।

ऐसी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर यह पहल श्रमिकों को अपनी आजीविका मजबूत करने और आर्थिक विकास में अधिक सक्रिय भागीदारी निभाने के अवसर प्रदान करती है।

अवसरों की निरंतर शृंखला का निर्माण

एक बार फिर उस विद्यार्थी के बारे में सोचिए, जिसने आठवीं कक्षा पूरी कर ली है, लेकिन अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित है। छात्रवृत्ति की मदद से वह स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है और आगे कॉलेज तक पहुंच सकता है। कोचिंग की सहायता उसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर दे सकती है, जबकि उच्च शिक्षा योजनाओं या फैलोशिप के तहत मिलने वाली सहायता आगे की पढ़ाई और शोध को संभव बना सकती है।

जो विद्यार्थी कोई दूसरा रास्ता चुनते हैं, उनके लिए कौशल विकास के अवसर, स्टार्टअप के लिए वित्तीय सहायता और रियायती ऋण रोजगार पाने या उद्यमिता शुरू करने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

सहायता का प्रत्येक चरण अगले चरण की नींव तैयार करता है। इन पहलों का प्रभाव केवल व्यक्तिगत लाभार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका लाभ पूरे परिवार और समुदाय तक पहुंच सकता है।

रोजगार प्राप्त करने वाला कोई स्नातक अपने छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई जारी रखने में मदद कर सकता है। वहीं, अपना कारोबार स्थापित करने और आसपास के लोगों को रोजगार देने वाला उद्यमी समुदाय में अवसरों का दायरा बढ़ा सकता है।

समय के साथ, ये उपलब्धियां परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, अगली पीढ़ी को अपनी जीवन यात्रा पहले से अधिक मजबूत स्थिति से शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

विभाग का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि इन सभी चरणों के बीच संबंध मजबूत बने रहें, ताकि शिक्षा की दिशा में पहला कदम उठाने वाला विद्यार्थी आगे मिलने वाले अवसरों को भी देख सके।

जब छात्रवृत्ति, कोचिंग, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और ऋण सहायता एक-दूसरे की पूरक योजनाओं के रूप में काम करती हैं, तो सशक्तिकरण अलग-अलग लाभों तक सीमित नहीं रहता। यह एक सतत प्रक्रिया बन जाता है, जो कक्षा से कार्यस्थल तक, शिक्षा से उद्यम तक और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आगे बढ़ती है।

(लेखक भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में सचिव हैं।)