आर्थिक सशक्तिकरण की शुरुआत तब होती है, जब कोई युवा अपनी शिक्षा पूरी करके करियर बनाने की तैयारी शुरू करता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने इसी यात्रा को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाओं की रूपरेखा तैयार की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक चरण में मिलने वाली सहायता अगले चरण में नए अवसरों का रास्ता खोले।
विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा जारी रखने में मदद करने वाली छात्रवृत्तियों से लेकर फेलोशिप, कोचिंग, कौशल विकास और उद्यमिता के लिए वित्तीय सहायता तक, इन पहलों का उद्देश्य सहायता की एक ऐसी निरंतर व्यवस्था विकसित करना है, जो लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने में सक्षम बनाए।
छात्रवृत्तियों के माध्यम से मजबूत नींव का निर्माण
वंचित वर्ग के ऐसे विद्यार्थी के लिए, जिसके परिवार के पास सीमित आर्थिक संसाधन हैं, स्कूली शिक्षा पूरी करना भी एक चुनौती हो सकती है। आठवीं कक्षा पूरी करने के बाद परिवार के सामने अक्सर यह सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या बच्चे की पढ़ाई आगे जारी रख पाना संभव होगा।
पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना इस चिंता को दूर करने में मदद करती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को नौवीं और दसवीं कक्षा तक अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सहायता दी जाती है।
स्कूली शिक्षा के बाद, उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना विद्यार्थियों को शिक्षा से जुड़े खर्चों में सहायता प्रदान करती है। इसमें शिक्षण शुल्क और रखरखाव संबंधी खर्च शामिल हैं। इस सहायता से विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
विद्यार्थियों को शिक्षा व्यवस्था से जोड़े रखना विभाग की छात्रवृत्ति योजनाओं की बुनियादी सोच है। पिछले 12 वर्षों में अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अन्य पात्र विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही पूर्व-मैट्रिक और उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 19.8 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 65,756 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि विद्यार्थियों को आर्थिक बाधाओं से उबरने और अपनी शिक्षा जारी रखने में मदद देने के लिए बड़े स्तर पर सहायता प्रदान की गई है।
छात्रवृत्ति योजनाओं का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ, सहायता पहुंचाने की व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। वर्ष 2021-22 से छात्रवृत्ति योजनाओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही, दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाने के लिए रिकॉर्ड का मिलान, विद्यार्थियों और अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक ई-केवाईसी तथा अलग-अलग शैक्षणिक वर्षों में विद्यार्थियों का रिकॉर्ड रखने के लिए एक बार पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
डिजिलॉकर, उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) और शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडाइस) के डेटाबेस के साथ एकीकरण ने भी इस व्यवस्था को मजबूत किया है। इन उपायों से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि आर्थिक सहायता सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंचे। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है।
उच्च शिक्षा और शोध के लिए नए रास्ते खोलना
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने की आकांक्षा रखने वाले विद्यार्थियों के सामने भी आर्थिक बाधाएं बनी रह सकती हैं। विभाग की उच्च शिक्षा संबंधी योजनाओं का उद्देश्य शैक्षणिक यात्रा के विभिन्न चरणों में इन बाधाओं को दूर करना है।
शीर्ष श्रेणी शिक्षा योजना के तहत निर्धारित प्रमुख शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क और अन्य पात्र शैक्षणिक खर्चों के लिए सहायता दी जाती है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि योग्यता के आधार पर प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।
जो विद्यार्थी शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए राष्ट्रीय फैलोशिप योजना के तहत वजीफे और आकस्मिक खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इससे शोधार्थियों को अपने शैक्षणिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना चयनित विद्यार्थियों को विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की पढ़ाई करने का अवसर प्रदान करती है। इससे उन्हें उच्च स्तरीय शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभव प्राप्त करने के अवसर मिलते हैं।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) और विमुक्त जनजातियों (डीएनटी) से संबंधित विद्यार्थियों को भी प्रधानमंत्री यंग अचीवर्स छात्रवृत्ति पुरस्कार योजना (पीएम-यशस्वी) के माध्यम से सहायता दी जाती है। इस योजना में स्कूली और कॉलेज स्तर पर शीर्ष श्रेणी की शिक्षा के लिए सहायता का प्रावधान है।
ये सभी पहल मिलकर विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा से लेकर विशिष्ट अध्ययन, शोध और उच्च शैक्षणिक योग्यताएं हासिल करने तक आगे बढ़ने में मदद करती हैं।
आवास की समस्या का समाधान
शिक्षा जारी रखने के लिए केवल शिक्षण शुल्क और शैक्षणिक खर्चों में वित्तीय सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के लिए, किसी छोटे शहर का विद्यार्थी जब दूसरे शहर के किसी अच्छे शिक्षण संस्थान में प्रवेश प्राप्त करता है, तो उसके सामने सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था करना एक अतिरिक्त चुनौती बन सकता है।
उपयुक्त आवासीय सुविधाओं की कमी से परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है और कुछ मामलों में विद्यार्थियों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के अंतर्गत छात्रावास घटक और अन्य पिछड़ा वर्ग के लड़कों एवं लड़कियों के लिए छात्रावास निर्माण योजना का उद्देश्य आवासीय सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराकर इस चुनौती का समाधान करना है। ये योजनाएं छात्रवृत्ति के माध्यम से मिलने वाली सहायता को और प्रभावी बनाती हैं तथा ऐसा वातावरण तैयार करने में मदद करती हैं, जिसमें विद्यार्थी अधिक सुरक्षा और निरंतरता के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
इन योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक संसाधनों या आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की कमी विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति में बाधा न बने।
शिक्षा से नवाचार और उद्यमिता तक
शिक्षा आर्थिक सशक्तिकरण के कई रास्ते खोलती है। जहां अनेक विद्यार्थी रोजगार प्राप्त करने का सपना देखते हैं, वहीं कुछ अन्य अपना उद्यम स्थापित करना और अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी आजीविका के अवसर पैदा करना चाहते हैं। विभाग की आर्थिक सहायता संबंधी पहल इन दोनों आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य सीखने से लेकर कमाई करने तक की यात्रा के विभिन्न चरणों में सहायता उपलब्ध कराना है।
युवा नवोन्मेषकों और शोधार्थियों के लिए अंबेडकर सामाजिक नवाचार एवं इन्क्यूबेशन मिशन (एएसआईआईएम) नवीन विचारों को व्यावहारिक उद्यमों में बदलने के लिए सहायता प्रदान करता है। इस मिशन के तहत 30 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच उद्यमिता को प्रोत्साहित करके इस पहल का उद्देश्य ज्ञान और नवाचार को व्यावहारिक आर्थिक अवसरों से जोड़ना है।
वेंचर कैपिटल फंड के तहत पात्र उद्यमों को रियायती दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस फंड के अंतर्गत 4 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे कारोबार के विकास के लिए अपेक्षाकृत कम लागत पर पूंजी मिलती है।
इस तरह की सहायता से अपना कारोबार शुरू करने या उसका विस्तार करने की इच्छा रखने वाले उद्यमियों को एक बड़ी चुनौती से निपटने में मदद मिल सकती है। यह चुनौती है उचित शर्तों पर वित्तीय संसाधनों तक पहुंच हासिल करना।
आजीविका के लिए वित्तीय सहायता को अधिक सुलभ बनाना
हर स्नातक बड़े उद्यम की स्थापना करना नहीं चाहता। अनेक लोगों के लिए छोटी दुकान, कार्यशाला या सेवा आधारित कारोबार आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने का व्यावहारिक रास्ता हो सकता है। किफायती दरों पर ऋण की उपलब्धता किसी आकांक्षा को केवल विचार बनकर रह जाने और उसे स्थायी आजीविका में बदलने के बीच का अंतर तय कर सकती है।
वंचित इकाई समूह और वर्गों को आर्थिक सहायता (विश्वास) योजना के तहत पात्र अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सफाई कर्मचारी ऋण लेने वालों को आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इसमें व्यक्तिगत लाभार्थियों के साथ-साथ स्वयं सहायता समूह भी शामिल हैं।
यह योजना आय अर्जित करने वाले कार्यों के लिए लिए गए ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान करती है। इससे सामान्य ऋण देने वाली संस्थाओं से कर्ज लेने की प्रभावी लागत कम करने में मदद मिलती है। इस योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों को दिया जाता है, जिससे छोटे कारोबार की स्थापना करने या उसका विस्तार करने की कोशिश कर रहे लोगों पर वित्तीय बोझ कम होता है।
स्वच्छता क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के लिए स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) के माध्यम से रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना वाहनों और उपकरणों से जुड़े स्वच्छता संबंधी उद्यमों को सहायता प्रदान करती है, जिससे पात्र लाभार्थियों को अपना उद्यम स्थापित करने और उसका स्वामित्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
ऐसी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर यह पहल श्रमिकों को अपनी आजीविका मजबूत करने और आर्थिक विकास में अधिक सक्रिय भागीदारी निभाने के अवसर प्रदान करती है।
अवसरों की निरंतर शृंखला का निर्माण
एक बार फिर उस विद्यार्थी के बारे में सोचिए, जिसने आठवीं कक्षा पूरी कर ली है, लेकिन अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित है। छात्रवृत्ति की मदद से वह स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है और आगे कॉलेज तक पहुंच सकता है। कोचिंग की सहायता उसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर दे सकती है, जबकि उच्च शिक्षा योजनाओं या फैलोशिप के तहत मिलने वाली सहायता आगे की पढ़ाई और शोध को संभव बना सकती है।
जो विद्यार्थी कोई दूसरा रास्ता चुनते हैं, उनके लिए कौशल विकास के अवसर, स्टार्टअप के लिए वित्तीय सहायता और रियायती ऋण रोजगार पाने या उद्यमिता शुरू करने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
सहायता का प्रत्येक चरण अगले चरण की नींव तैयार करता है। इन पहलों का प्रभाव केवल व्यक्तिगत लाभार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका लाभ पूरे परिवार और समुदाय तक पहुंच सकता है।
रोजगार प्राप्त करने वाला कोई स्नातक अपने छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई जारी रखने में मदद कर सकता है। वहीं, अपना कारोबार स्थापित करने और आसपास के लोगों को रोजगार देने वाला उद्यमी समुदाय में अवसरों का दायरा बढ़ा सकता है।
समय के साथ, ये उपलब्धियां परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, अगली पीढ़ी को अपनी जीवन यात्रा पहले से अधिक मजबूत स्थिति से शुरू करने का अवसर मिल सकता है।
विभाग का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि इन सभी चरणों के बीच संबंध मजबूत बने रहें, ताकि शिक्षा की दिशा में पहला कदम उठाने वाला विद्यार्थी आगे मिलने वाले अवसरों को भी देख सके।
जब छात्रवृत्ति, कोचिंग, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और ऋण सहायता एक-दूसरे की पूरक योजनाओं के रूप में काम करती हैं, तो सशक्तिकरण अलग-अलग लाभों तक सीमित नहीं रहता। यह एक सतत प्रक्रिया बन जाता है, जो कक्षा से कार्यस्थल तक, शिक्षा से उद्यम तक और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आगे बढ़ती है।
(लेखक भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में सचिव हैं।)