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PMJJBY Fraud: मध्य प्रदेश में 9.5 करोड़ का बीमा घोटाला, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों से क्लेम लेने का आरोप

मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 9.5 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े की जांच। CID ने दो FIR दर्ज कीं, 121 क्लेम और 482 से अधिक बैंक खाते जांच के दायरे में।

भोपाल / सत्ता संदेश

मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत कथित बीमा घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों और संदिग्ध बैंक खातों के जरिए करीब 9.5 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम हासिल किए गए। इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने दो FIR दर्ज की हैं। अब तक 121 संदिग्ध क्लेम मामलों की जांच की जा रही है, जबकि 482 से अधिक बैंक खाते जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।

प्रारंभिक जांच के मुताबिक, कथित गिरोह ने जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर बीमा कंपनियों से क्लेम लेने की कोशिश की। इस पूरे मामले ने बैंकिंग व्यवस्था, नगरीय निकायों में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और बीमा क्लेम के सत्यापन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

गरीबों के लिए शुरू की गई योजना में कथित फर्जीवाड़ा

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना केंद्र सरकार की जीवन बीमा योजना है, जिसके तहत पात्र खाताधारकों को निर्धारित वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर दिया जाता है। इस योजना का उद्देश्य परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, कथित गिरोह ने लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग बीमा पॉलिसियां लीं। कुछ मामलों में शुरुआत में एक या दो प्रीमियम की किश्तें जमा कराई गईं। इसके बाद बीमित व्यक्ति की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से होने का दावा करते हुए कथित रूप से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर क्लेम हासिल किए गए।

ग्वालियर, मुरैना और राजस्थान तक जांच का दायरा

मामले की जांच केवल एक शहर तक सीमित नहीं है। ग्वालियर, मुरैना, रतलाम और मध्य प्रदेश के अन्य इलाकों के साथ राजस्थान के कुछ स्थानों से जुड़े रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि अलग-अलग बैंकों में खोले गए खातों और बीमा पॉलिसियों का इस्तेमाल कथित ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया।

जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि कुछ बीमित व्यक्तियों के पते, मृत्यु के कथित स्थान और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले निकायों के बीच मेल नहीं था। एक ही परिवार के कई सदस्यों की मृत्यु कम समय के अंतराल में दर्ज किए जाने के मामलों ने भी एजेंसियों का ध्यान खींचा।

एक मोबाइल नंबर और नॉमिनी से खुला शक

कथित फर्जीवाड़े की जांच के दौरान बैंक खातों और बीमा दस्तावेजों में कुछ असामान्य समानताएं सामने आईं। कई खातों में एक ही मोबाइल नंबर या ई-मेल आईडी दर्ज होने और अलग-अलग पॉलिसियों में समान व्यक्तियों को नॉमिनी बनाए जाने की जानकारी जांच का हिस्सा है।

इन समानताओं और मृत्यु प्रमाण पत्रों से जुड़े असामान्य पैटर्न के आधार पर संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बैंक खाते किसने खुलवाए, दस्तावेज किसने जमा किए और बीमा क्लेम की रकम किन लोगों तक पहुंची।

रतलाम के बैंक खातों से जुड़े दावों की जांच

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रतलाम स्थित फेडरल बैंक के 62 खातों से करीब 2.5 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम से संबंधित लेन-देन की जांच की जा रही है। इसके अलावा, 121 पॉलिसीधारकों में से 28 के मृत्यु प्रमाण पत्र राजस्थान के सवाई माधोपुर से जारी होने की बात सामने आई है।

अन्य प्रमाण पत्रों के संबंध में ग्वालियर नगर निगम, मालनपुर, भिंड, गोहद क्षेत्र के गांव लेचौरा, शिवपुरी जिले के पार्वती बड़ौदा और मुरैना के कैलारस से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की वास्तविकता, जारी करने की प्रक्रिया और बीमा कंपनियों के समक्ष प्रस्तुत किए गए रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही हैं।

एक ही पते पर कई बैंक खाते मिलने का दावा

जांच में कुछ ऐसे पते भी सामने आए हैं, जहां कई बैंक खाते दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इनमें मुरैना के जैन बगीची, रामनगर क्षेत्र के एक पते पर 12 खाते, ग्वालियर के थाटीपुर ग्रिड क्षेत्र के एक पते पर 12 खाते, मुरैना की गायत्री कॉलोनी में 9 खाते और ग्वालियर की नारायण विहार कॉलोनी में 3 खाते शामिल बताए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, इंदौर की पीपल्याहाना शाखा से 59 खातों के आवेदन पत्र, KYC दस्तावेज और लेन-देन के विवरण जब्त किए जाने की जानकारी है। बेंगलुरु स्थित पंजाब नेशनल बैंक की रामानगरम शाखा और अन्य राज्यों से जुड़े कुछ बीमा रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।

क्लेम की रकम निकालने के तरीके की भी जांच

आरोप है कि बीमा क्लेम की रकम खातों में आने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों के ATM से नकदी निकाली गई। जांच एजेंसियां बैंक खातों, ATM निकासी, लेन-देन के रिकॉर्ड और संदिग्ध व्यक्तियों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं, ताकि कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके।

मोहन यादव सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप

इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने की बात कही गई है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार की स्थिति गंभीर है और केंद्र सरकार की योजना भी इससे अछूती नहीं रही।

पटवारी ने सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए उसे ‘अलीबाबा और 40 चोर’ की सरकार कहा। उनके बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

फिलहाल, CID की जांच का मुख्य उद्देश्य कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों की उत्पत्ति, बैंक खातों के संचालन, बीमा क्लेम के भुगतान और इसमें शामिल संभावित लोगों की भूमिका का पता लगाना है। जांच के नतीजों से यह स्पष्ट होगा कि कथित घोटाले में कितने लोग शामिल थे और संबंधित संस्थाओं की ओर से किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई थी या नहीं।