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लुधियाना : 1984 के सिख नरसंहार के विवाद के बाद कांग्रेस नेता का विपक्ष पर पलटवार, गोधरा कांड को लेकर दिया बयान

पूर्व विधायक कुलदीप सिंह वैद ने 1984 सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और भाजपा पर निशाना साधते हुए गोधरा कांड का भी जिक्र किया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

राहुल गांधी के पंजाब दौरे और 1 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा के साथ-साथ 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों की ओर से भी कांग्रेस के कार्यक्रम को लेकर विरोध जताया जा रहा है। इस बीच लुधियाना से वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह वैद ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

कुलदीप सिंह वैद ने कहा कि 1984 के सिख नरसंहार का दुख सभी को है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था। हालांकि, भाजपा पर पलटवार करते हुए वैद ने कहा कि भाजपा को गोधरा कांड को भी याद करना चाहिए।

राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल होने के सवाल पर कुलदीप सिंह वैद ने स्पष्ट किया कि वह इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहीं, कांग्रेस नेता परगट सिंह के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि पार्टी अध्यक्ष कोई निर्देश देते हैं, तो वह उनके फैसले से सहमत होंगे।

कुलदीप सिंह वैद के इस बयान के बाद 1984 के सिख नरसंहार, पीड़ित परिवारों की मांगों और कांग्रेस के 1 नवंबर के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।

लुधियाना : 1984 सिख दंगा पीड़ितों का कांग्रेस की रैली का विरोध, पुतले फूंकने की चेतावनी

लुधियाना में 1984 सिख नरसंहार पीड़ितों ने कांग्रेस की 1 नवंबर की दिल्ली रैली रद्द करने की मांग की। मांग पूरी न होने पर इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के पुतले फूंकने की चेतावनी दी।

लुधियाना / सत्ता संदेश

1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों ने कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के खिलाफ विरोध जताया है। लुधियाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 1984 सिख दंगा पीड़ित वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने मांग की कि 1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस द्वारा आयोजित की जाने वाली रैली रद्द की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रैली रद्द नहीं की गई, तो 1 नवंबर को इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के पुतले फूंककर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोसाइटी के प्रधान सुरजीत सिंह और गुरदीप कौर ने 1984 के सिख नरसंहार के दौरान पीड़ित परिवारों के साथ हुई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में सिख परिवारों ने असहनीय दर्द और अत्याचार सहे। उनके आरोपों के मुताबिक, परिवार के सदस्यों को गले में टायर डालकर जिंदा जलाया गया और महिलाओं के साथ भी अत्याचार किए गए।

पीड़ितों ने कहा कि 1984 के नरसंहार की यादें आज भी उनके परिवारों के लिए गहरे दुख का कारण हैं। ऐसे संवेदनशील दिन पर कांग्रेस की रैली आयोजित किए जाने से उनकी भावनाएं आहत हो रही हैं। उन्होंने कांग्रेस से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और रैली रद्द करने की मांग की।

सुरजीत सिंह और गुरदीप कौर ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे और कांग्रेस नेताओं के पुतले फूंकेंगे। इस दौरान उन्होंने 1984 के नरसंहार के पीड़ित परिवारों की भावनाओं और उनकी मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की।

श्री अकाल तख्त साहिब से निकला विशाल नगर कीर्तन, संगत ने फूलों की वर्षा कर जताई श्रद्धा

श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश गुरुपर्व पर श्री अकाल तख्त साहिब से पांच प्यारों के नेतृत्व में विशाल नगर कीर्तन सजाया गया। संगत ने फूलों की वर्षा कर श्रद्धा व्यक्त की।

अमृतसर / सत्ता संदेश

चौथे पातशाह श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश गुरुपर्व के पावन अवसर पर श्री अमृतसर साहिब में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर सचखंड श्री हरमंदिर साहिब स्थित श्री अकाल तख्त साहिब से पांच प्यारों के नेतृत्व में और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन हजूरी में विशाल नगर कीर्तन सजाया गया। नगर कीर्तन में बड़ी संख्या में संगत ने शामिल होकर गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

नगर कीर्तन के आरंभ के समय पूरा वातावरण गुरबाणी, सतनाम वाहेगुरु के जाप और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। फूलों से सजी सुंदर पालकी साहिब के दर्शन के लिए संगत में विशेष उत्साह देखने को मिला। इस दौरान पालकी साहिब पर फूलों की वर्षा कर संगत ने अपनी श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया।

श्री अकाल तख्त साहिब से आरंभ हुआ यह विशाल नगर कीर्तन श्री अमृतसर साहिब के विभिन्न बाजारों से होकर गुजरेगा और वापस श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचकर संपन्न होगा। रास्ते में संगत द्वारा नगर कीर्तन का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया।

श्री गुरु रामदास जी ने मानवता को सेवा, विनम्रता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। उनका जीवन संगत और पंगत की परंपरा तथा मानव कल्याण की प्रेरणा देता है। प्रकाश गुरुपर्व के अवसर पर गुरु साहिब के दिखाए मार्ग पर चलने और मानवता की सेवा करने का संकल्प लिया जा रहा है।

इस पावन अवसर पर संगत द्वारा सरबत के भले, विश्व शांति और चढ़दी कला के लिए अरदास की जा रही है। गुरु साहिब के प्रकाश गुरुपर्व पर श्री अमृतसर साहिब में श्रद्धा और आध्यात्मिकता का माहौल बना हुआ है।

चंडीगढ़ : अटल पेंशन योजना कार्यक्रम, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बैंक सम्मानित

चंडीगढ़ में अटल पेंशन योजना के प्रचार-प्रसार के लिए आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। पात्र नागरिकों का पंजीकरण बढ़ाने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बैंकों को सम्मानित करने पर जोर दिया गया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

तारीख : 27 अक्टूबर 2026

अटल पेंशन योजना (APY) के प्रचार-प्रसार और पात्र नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के उद्देश्य से मंगलवार को चंडीगढ़ में आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (SLBCs), विभिन्न बैंकों के अधिकारियों तथा बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) एजेंटों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में अटल पेंशन योजना के तहत अधिक से अधिक पात्र नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने, पेंशन के लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बैंकिंग नेटवर्क के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने पर जोर दिया गया।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, पंजाब के उप महाप्रबंधक रामकिशोर मीना ने बताया कि कार्यक्रम में PFRDA के मुख्य महाप्रबंधक प्रवेश कुमार, पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य महाप्रबंधक आशीष चतुर्वेदी, PNB चंडीगढ़ के मंडल प्रमुख संजीव कुमार झा, PNB मोहाली के मंडल प्रमुख बिस्वजीत बिस्वाल और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, हरियाणा के उप महाप्रबंधक ओमकारनाथ झा सहित विभिन्न राज्य सरकारों और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

PFRDA के मुख्य महाप्रबंधक प्रवेश कुमार ने अपने संबोधन में अटल पेंशन योजना के अंतर्गत पात्र नागरिकों का पंजीकरण बढ़ाने और योजना के लाभों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बैंकिंग नेटवर्क की मदद से अधिक से अधिक लोगों को पेंशन सुरक्षा से जोड़ने पर जोर दिया।

वहीं, पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य महाप्रबंधक आशीष चतुर्वेदी ने कहा कि बैंक अधिकारियों, शाखा प्रमुखों और बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट एजेंटों की योजना के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका है। इनके माध्यम से नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में जागरूक किया जा सकता है और उन्हें इन योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

अटल पेंशन योजना के तहत 5,000 रुपये तक मासिक पेंशन

अटल पेंशन योजना के तहत निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने वाले 18 से 40 वर्ष की आयु के नागरिक पंजीकरण करवा सकते हैं। योजना में निर्धारित अंशदान के आधार पर 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन का प्रावधान है। इस योजना का उद्देश्य लोगों को बुढ़ापे में नियमित आय की सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध करवाना है।

कार्यक्रम के दौरान पिछले वर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए पंजाब और हरियाणा की राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों सहित विभिन्न बैंकों को PFRDA की ओर से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग नेटवर्क के माध्यम से अटल पेंशन योजना का दायरा बढ़ाना, पात्र नागरिकों को पेंशन सुरक्षा से जोड़ना और समाज में वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता को मजबूत करना रहा।

Ludhiana Youth Anti-Drug Campaign : युवाओं को नशे से बचाने की पहल, स्किल डेवलपमेंट और पुनर्वास पर जोर

लुधियाना में लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के युवा रिकवरी अभियान के तहत नशा मुक्ति, काउंसलिंग, पुनर्वास और स्किल डेवलपमेंट के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

लुधियाना / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बसंत सिंह रोड़िया

तारीख : 27 अक्टूबर 2026

पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, एसएएस नगर की ओर से चलाए जा रहे “यूथ रिकवरी एंड रिहैबिलिटेशन” अभियान के तहत युवाओं को नशे से दूर रखने, नशा मुक्ति और पुनर्वास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत जगराओं स्थित ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, लुधियाना के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-कम-सेक्रेटरी ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के दौरान युवाओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न जागरूकता सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताना और उन्हें अपनी जिंदगी को सही दिशा देने के लिए प्रेरित करना है।

उन्होंने बताया कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जा रही है। इनमें प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य और अन्य तकनीकी कौशल सीखने के अवसर शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

अभियान के तहत युवाओं को पढ़ाई पर ध्यान देने, नई स्किल सीखने और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नशे से दूरी बनाकर और सही मार्गदर्शन प्राप्त करके युवा अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

इसी कड़ी में युवाओं की रिकवरी और पुनर्वास को लेकर “नशा छोड़ो, जिंदगी जोड़ो” विषय पर विशेष जागरूकता सेमिनार भी आयोजित किया जा रहा है। इसमें नशे के दुष्प्रभावों, नशा मुक्ति उपचार, मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग और पुनर्वास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, लुधियाना का उद्देश्य जरूरतमंद युवाओं को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार मार्गदर्शन उपलब्ध करवाना और उन्हें कानूनी सहायता सहित विभिन्न कल्याणकारी सेवाओं से जोड़ना है, ताकि वे नशे से उबरकर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें और सम्मानजनक, स्वस्थ व आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।

अधिकारियों ने बताया कि पुनर्वास या कानूनी सहायता से संबंधित मार्गदर्शन की जरूरत होने पर संबंधित अथॉरिटी से संपर्क किया जा सकता है। इसके लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

Ludhiana : जालंधर से आए स्वास्थ्य विभाग टीम ने सरकारी अस्पताली OPD और मैटरनिटी विभाग का किया निरिक्षण

लुधियाना के सरकारी अस्पताल में जालंधर से आई हेल्थ विभाग की टीम ने OPD और मैटरनिटी एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई की जांच की।

लुधियाना/सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बसंत सिंह रोड़ियां

तारीख : 27 अक्टूबर 2026

पंजाब सरकार की गाइडलाइंस के तहत जालंधर से आई हेल्थ विभाग की दो सदस्यीय टीम ने आज लुधियाना के डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट हॉस्पिटल के OPD विभाग और मैटरनिटी एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई के इंतजामों की जांच की गई।

डॉ. जगियासा और डॉ. वरिंदर रियार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने अस्पताल के विभिन्न विभागों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पंजाब सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार सरकारी अस्पतालों में समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था की जांच करना है।

इस मौके पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट हॉस्पिटल के मैटरनिटी एंड चाइल्ड विभाग के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहित रामपाल भी टीम के साथ मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि सरकारी गाइडलाइंस के तहत टीमें नियमित रूप से अस्पतालों में जांच के लिए पहुंचती हैं। इस तरह के निरीक्षण के दौरान मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं और संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाता है।

ESTIC 2026: विज्ञान को विकसित भारत की आकांक्षाओं से जोड़ना

डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री

“समाज में परिवर्तन लाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार मुख्य रूप से विज्ञान से ही आएगा।” 28 फरवरी 2006 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ये शब्द कहे थे।

लगभग दो दशक बाद डॉ. कलाम के ये शब्द पूरी तरह सही साबित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तकनीक आधारित विकास को गति देते हुए ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की इस प्रगति पर पूरी दुनिया का ध्यान गया है और उसने इसे स्वीकार भी किया है।

विज्ञान का महत्व केवल इस बात में नहीं है कि हम क्या खोजते हैं, बल्कि इस बात में भी है कि हमारी खोजें देश के लोगों के लिए क्या-क्या संभव बनाती हैं। वैज्ञानिक प्रगति का वास्तविक मूल्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाने, समस्याओं का समाधान करने और नए अवसर पैदा करने की उसकी क्षमता में निहित है।

भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षाएं केवल आर्थिक विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं हैं। इनमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, अधिक उत्पादक कृषि, मजबूत उद्योग, युवाओं के लिए अधिक अवसर और प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर में सुधार भी शामिल हैं।

इन सभी आकांक्षाओं को पूरा करने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारा दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि हम जो ज्ञान विकसित करें, वह सार्थक बदलाव लाने का माध्यम बने।

यही उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) 2026 का व्यापक उद्देश्य है। अपने दूसरे संस्करण में ईएसटीआईसी वर्ष 2025 में शुरू हुए राष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उनके व्यावहारिक उपयोग के बीच संबंधों को और मजबूत करना है। यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी लोगों, स्टार्टअप से जुड़े उद्यमियों और युवा शोधकर्ताओं को एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए एक मंच पर लाता है।

हमारे सामने कुछ सबसे महत्वपूर्ण सवाल ऐसे हैं, जिनका समाधान तत्काल आवश्यक है। वैज्ञानिक प्रगति किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में किस तरह मदद कर सकती है? अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है? भारतीय उद्योग उन्नत प्रौद्योगिकियां कैसे विकसित कर सकते हैं, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कैसे कर सकते हैं और महत्वपूर्ण वस्तुओं के आयात पर निर्भरता कैसे कम कर सकते हैं? अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर कैसे पैदा किए जा सकते हैं?

इन सवालों का जवाब कोई एक संस्थान या विषय अपने दम पर नहीं दे सकता। इसके लिए वैज्ञानिकों को उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करना होगा, शोधकर्ताओं को व्यावहारिक जरूरतों को समझना होगा और नीति निर्माताओं को ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिसमें संभावनाओं से भरे विचारों को परखा और विकसित किया जा सके।

ईएसटीआईसी 2026 इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 12 विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, महासागर विज्ञान एवं समुद्री प्रौद्योगिकी, क्वांटम संचार, सेमीकंडक्टर, कृषि प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, उन्नत स्वास्थ्य सेवा, इमर्सिव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान शामिल हैं।

इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में ऐसी संभावनाएं हैं, जिनका दायरा प्रयोगशालाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में प्रगति भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकती है। जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण के क्षेत्र में नए रास्ते खोल सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स में होने वाले विकास औद्योगिक प्रक्रियाओं को बदल सकते हैं, जबकि कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्य अधिक कुशल एवं टिकाऊ कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दे सकते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती इन संभावनाओं को व्यावहारिक उपयोग में बदलने की है। किसी वैज्ञानिक खोज में वर्षों का अनुसंधान लग सकता है, लेकिन उसे रोजमर्रा के उपयोग में लाने के लिए अक्सर आगे के परीक्षण, निवेश, इंजीनियरिंग और आपसी सहयोग की जरूरत होती है। हमें इस पूरी प्रक्रिया को मजबूत करना होगा, ताकि अनुसंधान से जुड़े शुरुआती सवाल से लेकर ऐसी तकनीक विकसित करने तक का सफर पूरा हो सके, जो वास्तविक लाभ पहुंचाए।

भारत की वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाएं अंततः उसके युवाओं की प्रतिभा और कल्पनाशीलता पर निर्भर करेंगी। किसी युवा शोधकर्ता के पास कोई संभावनाशील विचार है, तो उसे उसे प्रस्तुत करने, अनुभवी वैज्ञानिकों से सीखने और ऐसे लोगों से जुड़ने का अवसर मिलना चाहिए, जो उस विचार को उपयोगी रूप देने में मदद कर सकें।

ईएसटीआईसी 2026 ‘फ्रंटियर्स इन फोकस’ सत्रों और ‘यंग रिसर्चर्स एंड इनोवेटर्स पिच कॉर्नर’ के माध्यम से इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने का प्रयास करता है। ‘नेक्स्ट-जेन डिस्कवरी एक्सपो’ में भारत की अनुसंधान क्षमताओं और उभरते डीप-टेक तंत्र को प्रदर्शित किया जाएगा, जबकि ‘इनोवेशन एक्सचेंज हब’ तकनीकों और संभावित सहयोग के अवसरों पर संवाद को बढ़ावा देगा।

वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता को तेजी से एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। विशेष रूप से डीप-टेक उद्यमों को किसी तकनीक को बाजार तक पहुंचाने से पहले अक्सर विशेष बुनियादी ढांचे, धैर्य के साथ किए जाने वाले निवेश और निरंतर सहयोग की आवश्यकता होती है।

अनुसंधान संस्थानों के पास वैज्ञानिक विशेषज्ञता है, स्टार्टअप उद्यमशीलता की ऊर्जा लेकर आते हैं, उद्योग जगत उत्पादन संबंधी आवश्यकताओं और बाजार की जरूरतों को समझता है, जबकि निवेशक इस पूरी प्रक्रिया के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। जब ये सभी क्षमताएं एक साथ आती हैं, तो अनुसंधान को उपयोगी उत्पादों और सेवाओं में बदलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

ईएसटीआईसी 2026 ऐसी साझेदारियों को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करता है। इसके तकनीकी सत्रों और प्रदर्शनियों का उद्देश्य केवल उपलब्धियों को प्रदर्शित करना नहीं है, बल्कि ऐसे संवाद और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना भी है, जिनसे आपसी सहयोग के नए रास्ते खुल सकें।

विकसित भारत@2047 की यात्रा का निर्माण केवल सरकार के प्रयासों से नहीं हो सकता। न ही इसे वैज्ञानिक अनुसंधान के अलग-थलग प्रयासों के माध्यम से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, उद्योग जगत, उद्यमियों और युवा नवाचारकर्ताओं के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

डॉ. कलाम के शब्द आज भी हमें याद दिलाते हैं कि विज्ञान का अंतिम उद्देश्य समाज की सेवा करना होना चाहिए। विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए हमारी सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि हम कौन-सी खोजें करते हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उन खोजों से लोगों के जीवन में कितना बदलाव आता है।

यही ईएसटीआईसी 2026 के पीछे की व्यापक आकांक्षा है- भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को उसके लोगों की जरूरतों के और करीब लाना तथा नवाचार की संभावनाओं को राष्ट्र की प्रगति में बदलना।

(लेखक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।)