Gujarat Drought Relief: गुजरात के चार जिलों में सूखा, किसानों को मुआवजा और पशुपालकों को ₹80 प्रतिदिन की मदद
गुजरात में कम बारिश के कारण देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ सूखाग्रस्त घोषित। किसानों को ₹8,500 प्रति हेक्टेयर, पशुपालकों को ₹80 प्रतिदिन सहायता और ग्रामीणों को 150 दिनों के रोजगार की घोषणा।
गुजरात / सत्ता संदेश
गुजरात में कम बारिश के कारण पैदा हुई सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का ऐलान किया है। इनमें देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ शामिल हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि गुजरात में इस मानसून सीजन में औसत बारिश का लगभग 89 प्रतिशत दर्ज किया गया, लेकिन इन चार जिलों में बारिश काफी कम हुई। इसी के चलते सूखे की स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में भी इस घोषणा की पुष्टि की गई है।
किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹8,500 की सहायता
कम बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार की घोषणा के अनुसार, पात्र किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि की सीमा तक प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता मिलेगी। इससे सूखे से प्रभावित किसानों को खेती से जुड़े आर्थिक नुकसान के बीच कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। सहायता के लिए पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होगी।
पशुपालकों को सस्ती दर पर मिलेगा चारा
सूखे के कारण पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा चुका है। सरकार के पास फिलहाल तीन करोड़ किलोग्राम चारे का भंडार मौजूद है। जरूरत बढ़ने पर अतिरिक्त चारे की व्यवस्था करने की भी बात कही गई है।
पशु शिविरों में प्रति पशु ₹80 प्रतिदिन की सहायता
पशुओं के पालन-पोषण पर बढ़ते खर्च को देखते हुए पशु शिविरों में प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। इस कदम का उद्देश्य सूखा प्रभावित इलाकों में पशुपालकों को आर्थिक सहारा देना और पशुधन की देखभाल में मदद करना है। सरकार जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता देने पर भी विचार करेगी।
सूखा प्रभावित गांवों में 150 दिनों का रोजगार
राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण परिवारों के लिए 150 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की घोषणा की है। इससे कृषि कार्य प्रभावित होने की स्थिति में ग्रामीण परिवारों को आय का वैकल्पिक साधन मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति में किसानों और पशुपालकों को राहत देने के साथ-साथ पानी, चारे और रोजगार की जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
सरकारी राहत के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
गुजरात के इन चार जिलों में कम बारिश के कारण कृषि और पशुपालन से जुड़े परिवारों पर दबाव बढ़ा है। घोषित राहत उपायों से प्रभावित लोगों को सहायता मिलने की उम्मीद है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुआवजे का भुगतान, चारे की आपूर्ति और रोजगार की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी लागू होती है।

