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Bathinda Groundwater Pollution: बठिंडा में भूजल में यूरेनियम की जांच करेंगे पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय और केंद्रीय भूजल बोर्ड

बठिंडा और गोनियाना मंडी में भूजल में यूरेनियम प्रदूषण की जांच होगी। पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय और केंद्रीय भूजल बोर्ड ने भूजल की गुणवत्ता और सुरक्षित पेयजल पर अध्ययन के लिए समझौता किया।

पंजाब / बठिंडा / सत्ता संदेश

पंजाब के बठिंडा और गोनियाना मंडी क्षेत्रों में भूजल की गुणवत्ता और उसमें यूरेनियम की मौजूदगी का पता लगाने के लिए पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा और केंद्रीय भूजल बोर्ड, उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र, चंडीगढ़ के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी के तहत भूजल में यूरेनियम, अन्य भारी धातुओं और रासायनिक तत्वों की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य संभावित प्रदूषण वाले क्षेत्रों की पहचान करना और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वैज्ञानिक आधार पर योजनाएं तैयार करने में मदद करना है।

यह अध्ययन नेशनल एक्विफर मैपिंग एंड मैनेजमेंट (NAQUIM) कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। इसके माध्यम से भूजल की गुणवत्ता, प्रदूषण के संभावित कारणों और समय के साथ उसमें होने वाले बदलावों का आकलन किया जाएगा।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के अवसर पर पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. रामकृष्ण वुसिरिका और केंद्रीय भूजल बोर्ड, चंडीगढ़ के क्षेत्रीय निदेशक निधीश वर्मा उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा और नोडल अधिकारी प्रो. जे. के. पटनायक ने हस्ताक्षर किए, जबकि केंद्रीय भूजल बोर्ड की ओर से वैज्ञानिक-सी कुलदीप गोपाल भारतीरिया ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

समझौते के अनुसार, केंद्रीय भूजल बोर्ड मानसून से पहले और मानसून के बाद भूजल के नमूने एकत्र करेगा। इन नमूनों की जांच के जरिए यूरेनियम, अन्य भारी धातुओं और विभिन्न रासायनिक तत्वों की मात्रा का पता लगाया जाएगा। इसके अलावा, भूजल की गुणवत्ता से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा, संभावित प्रदूषण वाले क्षेत्रों के मानचित्र तैयार किए जाएंगे और भूजल स्तर की निगरानी की जाएगी। विश्वविद्यालय के तकनीकी सहयोग से अध्ययन की अंतिम रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।

वहीं, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ भूजल में मौजूद खनिजों और रासायनिक तत्वों का अध्ययन करेंगे। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि भूजल में यूरेनियम की मौजूदगी के संभावित स्रोत क्या हैं और किन परिस्थितियों में इसकी मात्रा बढ़ सकती है। इसके साथ ही यूरेनियम प्रदूषण से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन तथा उन्हें कम करने के उपायों का भी अध्ययन किया जाएगा।

इस अध्ययन के निष्कर्षों से बठिंडा और गोनियाना मंडी के उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां भूजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। मानसून से पहले और बाद में लिए गए नमूनों की तुलना से प्रदूषण के स्तर में होने वाले मौसमी बदलावों को समझने में भी सहायता मिलेगी।

दोनों संस्थानों की यह साझेदारी भूजल संसाधनों के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सुरक्षित पेयजल की योजना बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अध्ययन से मिलने वाली वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों में भूजल की गुणवत्ता सुधारने और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए उचित रणनीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी।