ब्रेकिंग न्यूज़
परिवर्तन की जड़ें: ई-गवर्नेंस से बदलता ग्रामीण भारत :प्रो. एस. पी. सिंह बघेल

कुछ क्षण केवल एक उपलब्धि भर नहीं होते, वे एक पूरी यात्रा को रोशन कर देते हैं। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के लिए चार पंचायती राज पहलों का चयन ऐसा ही एक क्षण है, ऐसा क्षण जो किसी एक कार्यालय का नहीं, बल्कि हर ग्राम पंचायत और हर उस नागरिक का है, जिसने डिजिटल रूप से सशक्त ग्रामीण भारत के सपने पर भरोसा किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि से प्रेरित होकर, भारत की पंचायतें भरोसे, तकनीक और परिवर्तन का एक नया अध्याय लिख रही हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन के बारह परिवर्तनकारी वर्षों के इस पड़ाव पर यह सम्मान विशेष महत्व रखता है। यह दर्शाता है कि किस प्रकार पंचायती राज संस्थाएं मात्र योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित निकायों से आगे बढ़कर, शासन की तीसरी स्तरीय व्यवस्था की आत्मविश्वासी, सक्षम और तकनीकी रूप से दक्ष संस्थाओं के रूप में स्थापित हुई हैं।

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा स्थापित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से उत्कृष्ट लोक सेवा वितरण के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान है। इस वर्ष सात श्रेणियों में चयनित 17 परियोजनाओं में से 4 पंचायती राज क्षेत्र से संबंधित हैं, जो ज़मीनी स्तर पर नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण बनाने हेतु पिछले बारह वर्षों के निरंतर प्रयासों का स्वाभाविक परिणाम है।

ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन के मूल्यांकन हेतु पंचायती राज मंत्रालय की प्रमुख पहल, पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI), को डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन की श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इस सूचकांक के आने से पहले, देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए कोई मानकीकृत, डेटा आधारित राष्ट्रीय ढांचा उपलब्ध नहीं था। आज यह सूचकांक डेटा, प्रदर्शन, पहचान और जनभागीदारी को आपस में जोड़ने वाली एक पारदर्शी जवाबदेही व्यवस्था का निर्माण कर रहा है।

उल्लेखनीय यह है कि दो ग्राम पंचायतों ने अपने स्वयं के प्रयासों से यह सम्मान अर्जित किया है। महाराष्ट्र के सांगली जिले की कडेपुर ग्राम पंचायत ने ग्रासरूट स्तर की पहलों की श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त किया है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से 1,300 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं, पश्चिम त्रिपुरा की बिजय नगर ग्राम पंचायत को रजत पुरस्कार मिला है। पंचायत ने अपने स्वयं के स्रोतों से आय में लगभग 194 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और महिलाओं के बीच शत-प्रतिशत डिजिटल साक्षरता हासिल की है। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग को ‘ई-आरोग्य धमनी’ पहल के माध्यम से दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए जिला स्तरीय पहल श्रेणी में गोल्ड अवार्ड के लिए चयनित किया गया।

ये पुरस्कार मिलकर एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। ई-गवर्नेंस में उत्कृष्टता अब केवल राज्यों की राजधानियों या जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह समान रूप से हमारे गांवों और ग्राम सभाओं में भी स्थापित हो चुकी है। इस वर्ष 30 राज्यों की 1.65 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने इसमें भाग लिया, जो हमारे द्वारा मिलकर तैयार की गई संस्थागत क्षमता और विश्वास को दर्शाता है।

यह उपलब्धि संयोग से नहीं मिली है। पिछले बारह वर्षों में मंत्रालय ने पंचायतों को निरंतर बेहतर साधन उपलब्ध कराए हैं। ई-ग्राम स्वराज प्लेटफॉर्म के माध्यम से 2.59 लाख से अधिक पंचायतों में योजना निर्माण, बजट और भुगतान प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है, जिससे पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से ₹3.16 लाख करोड़ से अधिक के ऑनलाइन लेन-देन संभव हुए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सभासार प्लेटफॉर्म, जो 23 भारतीय भाषाओं में कार्य करता है, अब 1.35 लाख से अधिक पंचायतों में चंद मिनटों में ग्राम सभा की कार्यवाही तैयार कर देता है। मेरी पंचायत ऐप, जिसे 1 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, विकास कार्यों की जानकारी सीधे नागरिकों तक पहुंचा रहा है।

इन प्रयासों के साथ-साथ, स्वामित्व योजना के तहत 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है तथा जून 2026 के मध्य तक 1.94 लाख गांवों के लिए 3.19 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों के संपत्ति अधिकार सुदृढ़ हुए हैं और उन्हें ऋण सुविधा प्राप्त करने में आसानी हुई है। पंद्रहवें वित्त आयोग की अवधि में ग्रामीण स्थानीय निकायों को ₹2.82 लाख करोड़ की अनुदान राशि जारी की गई, जो अब तक की सर्वाधिक है। सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026 से 2031 के लिए ₹4.35 लाख करोड़ की सिफारिश की है, जो लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

इस सोच को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने ‘सेवा से समृद्धि: पंचायतों के नेतृत्व में सेवा वितरण’ विषय पर क्षेत्रीय कार्यशालाओं की एक श्रृंखला शुरू की है। इन कार्यशालाओं में पंचायत प्रतिनिधि, जिला स्तरीय अधिकारी और विषय विशेषज्ञ मिलकर स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में लोगों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं। इन कार्यशालाओं के माध्यम से सफल स्थानीय पहलों और नवाचारों को साझा किया जा रहा है, ताकि राज्य एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें और अच्छे मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके। इनकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएं बहुत व्यापक हैं। NAeG 2026 में चयनित पंचायती राज संस्थाओं की उपलब्धियां देशभर की पंचायतों को प्रेरित कर रही हैं, और अनेक पंचायतें अपने गांवों में बेहतर सेवाएं पहुंचाकर समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने के लिए ऐसे मॉडलों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सदैव यह बल देते रहे हैं कि सुशासन वही है जो नागरिकों का जीवन सरल बनाए। पारदर्शी और तकनीक सक्षम व्यवस्थाओं के माध्यम से प्राप्त ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ ही किसी सरकार की मंशा और क्षमता की सच्ची कसौटी है। यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि दूसरों का सम्मान करना स्वयं के सम्मान का मार्ग प्रशस्त करता है। पंचायतों को डिजिटल साधनों से सशक्त बनाकर और उनकी क्षमता पर विश्वास जताकर, केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण मंच पर देश को सम्मानित होने का मार्ग प्रशस्त किया है।

जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, सशक्त पंचायतों की भूमिका और भी केंद्रीय होती जा रही है। लगभग 90 करोड़ नागरिकों के ग्रामीण भारत में निवास करने के साथ, हमारी पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती ही हमारी सामूहिक प्रगति की गति तय करेगी। विकसित पंचायत, विकसित भारत से अलग नहीं, बल्कि उसकी सबसे मजबूत नींव है।

ये चार राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार बेहतर प्रदर्शन, प्रगति और निरंतर आगे बढ़ने के प्रतीक हैं। ये जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे प्रत्येक सरपंच, पंचायत सचिव और महिला जनप्रतिनिधि के लिए एक प्रेरणा हैं कि उनके समर्पण और प्रयासों को पहचान मिल रही है, उनकी सराहना की जा रही है और उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। बारह वर्षों के निरंतर प्रयासों ने ही ऐसी उत्कृष्टता के उभरने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। NAeG 2026 में मिली पहचान से लेकर देशभर में बढ़ती सेवा से समृद्धि कार्यशालाओं की गति तक, यह सफलता इस बात की पुष्टि करती है कि ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस की जड़ें वास्तव में गहरी हो चुकी हैं, और विकसित पंचायत के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण की यह यात्रा हर गुजरते वर्ष के साथ और सशक्त होती जा रही है।

(लेखक केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री हैं।)

सामान्य इंजीनियरिंग उत्पादों एवं फास्टनर्स पर विशेष ध्यान के साथ संवाद” विषय पर MSME मीट का आयोजन

रोहतक / सत्ता संदेश

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के हरियाणा शाखा कार्यालय द्वारा “सामान्य इंजीनियरिंग उत्पादों एवं फास्टनर्स पर विशेष ध्यान के साथ संवाद” विषय पर एक एमएसएमई मीट का आयोजन एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, रोहतक में किया गया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य एमएसएमई, विनिर्माताओं, उद्योग संघों एवं अन्य हितधारकों के बीच भारतीय मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (QCOs), उत्पाद प्रमाणन तथा मानकीकरण गतिविधियों में सहभागिता के अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

इस कार्यक्रम में 62 हितधारकों ने भाग लिया, जिनमें एमएसएमई प्रतिनिधि, विनिर्माण इकाइयाँ, उद्योग संघ एवं अन्य संबंधित संगठन शामिल थे। इस इंटरैक्टिव सत्र में प्रतिभागियों को BIS अधिकारियों से सीधे संवाद करने, मानकों एवं प्रमाणन प्रक्रियाओं पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने तथा गुणवत्ता अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री चंदन कुमार, वैज्ञानिक-डी/संयुक्त निदेशक, BIS हरियाणा शाखा कार्यालय के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने गुणवत्ता एवं मानकीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके पश्चात श्री मोनार्क जोशी, वैज्ञानिक-सी/उप निदेशक, उत्पादन एवं सामान्य इंजीनियरिंग विभाग (PGD), BIS द्वारा तकनीकी सत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें सामान्य इंजीनियरिंग उत्पादों, विशेषकर फास्टनर्स के लिए मानकीकरण ढांचे, संबंधित भारतीय मानकों तथा गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों की जानकारी दी गई। उन्होंने वापस लिए गए QCOs की नियामकीय स्थिति को भी स्पष्ट किया।

इसके बाद श्री सौरभ चंद्र, वैज्ञानिक-सी/उप निदेशक, BIS हरियाणा शाखा कार्यालय द्वारा BIS उत्पाद प्रमाणन योजना, प्रमाणन प्रक्रिया, मानक ऑनलाइन पोर्टल एवं हालिया सुधारों पर प्रस्तुति दी गई। इस सत्र में एमएसएमई एवं महिला उद्यमियों हेतु उपलब्ध छूट, प्रयोगशाला रियायतें, गुणवत्ता आश्वासन योजना तथा शुल्क लाभों पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को BIS मानक पोर्टल तथा तकनीकी समितियों में शामिल होने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।

एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, रोहतक की ओर से सुश्री रचना त्रिपाठी, सहायक निदेशक ने केंद्र सरकार की एमएसएमई योजनाओं पर प्रस्तुति दी।

इंटरैक्टिव सत्र के दौरान हितधारकों ने QCO कार्यान्वयन, प्रमाणन एवं अनुपालन से संबंधित मुद्दे उठाए, जिनका BIS अधिकारियों द्वारा समाधान किया गया। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक एवं उपयोगी चर्चाओं के साथ हुआ, जिससे उद्योग एवं BIS के बीच सहयोग को मजबूती मिली तथा गुणवत्ता एवं मानकीकरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिला।

BIS हरियाणा शाखा कार्यालय द्वारा जींद में जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

जींद / सत्ता संदेश

भारतीय मानक ब्यूरो हरियाणा शाखा कार्यालय चंडीगढ़ द्वारा 29 जून को मिनी सचिवालय, जींद के सम्मेलन कक्ष में जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं जागरुकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न जिला स्तरीय सरकारी विभागों के 23 अधिकारियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री आरती चौधरी, मानक संवर्धन अधिकारी, बीआईएस हरियाणा शाखा कार्यालय के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने देश में गुणवत्ता, सुरक्षा एवं मानकीकरण को बढ़ावा देने में भारतीय मानक ब्यूरो की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम के उद्देश्य, आईएसआई प्रमाणन योजना, एचयूआईडी सहित हॉलमार्किंग, अनिवार्य पंजीकरण योजना (CRS), बीआईएस केयर ऐप, उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम, स्टैंडर्ड्स क्लब, एमएसएमई मीट, ग्राम पंचायत कार्यक्रम, SHINE कार्यक्रम तथा विभिन्न क्षमता निर्माण पहलों की जानकारी दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री प्रदीप कुमार–II, एचसीएस, अतिरिक्त उपायुक्त, जींद ने की। उन्होंने अपने संबोधन में सरकारी कार्यों में गुणवत्ता, सुरक्षा, पारदर्शिता तथा मानक आधारित खरीद सुनिश्चित करने के लिए भारतीय मानकों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सभी सरकारी विभागों से अपने कार्यों में भारतीय मानकों को अपनाने एवं प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।

तकनीकी सत्र का संचालन श्री सौरभ चंद्रा, वैज्ञानिक-सी एवं उप निदेशक, बीआईएस हरियाणा शाखा कार्यालय द्वारा किया गया। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो के कार्यों, भारतीय मानकों के निर्माण की प्रक्रिया, उत्पाद प्रमाणन योजना (आईएसआई मार्क), हॉलमार्किंग, अनिवार्य पंजीकरण योजना (CRS) तथा गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (QCOs) के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने Know Your Standards Portal, Manakonline Portal तथा BIS Care App का प्रदर्शन करते हुए प्रतिभागियों को भारतीय मानकों तक पहुंच, प्रमाणित उत्पादों के सत्यापन तथा उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया से अवगत कराया।

कार्यक्रम का समापन सरकारी विभागों में भारतीय मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन पर आयोजित एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ। चर्चा के दौरान सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता (XEN) एवं अन्य अधिकारियों ने बताया कि विभाग द्वारा अपने निर्माण एवं अन्य आधिकारिक कार्यों में आईएस 456, आईएस 800 सहित अन्य प्रासंगिक भारतीय मानकों का अनुपालन किया जा रहा है, जो गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह कार्यक्रम सरकारी विभागों के बीच भारतीय मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन को प्रोत्साहित करने की दिशा में भारतीय मानक ब्यूरो की सतत प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

बाढ़ प्रभावित अरुणाचल का शिवराज सिंह चौहान, किरेन रिजिजू और पेमा खांडू ने किया हवाई व जमीनी दौरा

अरुणाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

अरुणाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

केंद्रीय मंत्री ने केयी पान्योर जिले समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही वे सड़क मार्ग से भी गांवों में पहुंचे और प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और जिनके घर बह गए हैं, उनके लिए नए मकान बनवाए जाएंगे। खेतों में हुए नुकसान, फसलों की बर्बादी, पशुधन हानि; सभी का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाएगा। तत्काल राहत के रूप में राशन और आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत और सुरक्षा दीवार बनाने के काम में खुद भी हाथ बंटाया और कहा कि समाज की यह भागीदारी प्रेरणादायक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाढ़ से भारी तबाही हुई है और नुकसान का लगातार आकलन किया जा रहा है, लेकिन इसके बीच सबसे सराहनीय बात यह है कि स्थानीय समुदाय ने सरकार का इंतजार किए बिना खुद आगे बढ़कर समाधान की पहल की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार भी हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

कैबिनेट ने यूपी में NH-34 के कानपुर-कबराई 4/6 लेन एक्सप्रेसवे को ₹7,145 करोड़ की मंजूरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज राष्ट्रीय राजमार्ग (ओ) कार्यक्रम के अंतर्गत भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे के एक महत्वपूर्ण खंड के रूप में 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबराई एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड गलियारा है जिसमें भविष्य में छह लेन तक विस्तारित करने की व्यवस्था भी है। 7145.14 करोड़ रुपये की अनुमानित कुल पूंजी लागत वाली इस परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा बीओटी (टोल) मोड पर कार्यान्वित किया जाएगा, साथ ही एनएच-34 के मौजूदा कानपुर-कबराई खंड का संचालन और रखरखाव भी किया जाएगा।

यह परियोजना कानपुर और कबराई के बीच निर्बाध, उच्च गति की कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, साथ ही सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों तक आगे की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य प्रदेश के खनिज-समृद्ध, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों से जोड़ने वाला एक आधुनिक पहुंच नियंत्रित आर्थिक गलियारा बनेगा और इस प्रकार इसमें सुधार होगा।

80-100 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया यह कॉरिडोर कानपुर और कबराई के बीच यात्रा समय को 3.5 घंटे से घटाकर 1.5 घंटे (58 प्रतिशत) कर देगा, साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार करेगा, वाहन परिचालन लागत को कम करेगा और यात्री एवं माल यातायात की कुशल आवाजाही को सुगम बनाएगा। यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और राज्य राजमार्ग एसएच-46, एसएच-91, एसएच-10बी और एसएच-42 के साथ रणनीतिक संपर्क भी प्रदान करेगी, जिससे क्षेत्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ एकीकरण मजबूत होगा। यह कॉरिडोर कबराई खनन क्षेत्र से संपर्क को और मजबूत करेगा, खनिजों, औद्योगिक वस्तुओं, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की आवाजाही में सुधार करेगा, जिससे रसद दक्षता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, यह परियोजना 16 आर्थिक नोड से कनेक्टिविटी में सुधार करेगी, जिनमें उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर और भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप, ग्रोथ सेंटर जयपुर, कानपुर नगर नोड और बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। यह 9 सोशल नोड, अर्थात् फतेहपुर, महोबा, कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्ध पार्क, जेके मंदिर और जेके मंदिर से कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी। गार्डन, राधा कृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर और महोबा पर्यटक स्थल, और 10 लॉजिस्टिक नोड, जिनमें कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर, महोबा, कबरई, भरवा सुमेरपुर और बांदा रेलवे स्टेशन, साथ में कानपुर, चकेरी और खजुराहो हवाई अड्डे शामिल हैं।

कुल मिलाकर, पीएम गतिशक्ति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए, बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में रसद प्रतिस्पर्धात्मकता, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास में सुधार करना इसका लक्ष्‍य है।

इस परियोजना से निर्माण के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2028 तक इसकी वार्षिक औसत दैनिक यातायात (एएडीटी) लगभग 18,069 यात्री कार इकाइयों (पीसीयू) तक पहुंचने का अनुमान है, जो इसके दीर्घकालिक आर्थिक, रसद और परिवहन महत्व को दर्शाता है। इस प्रकार प्रस्तावित परियोजना से लगभग 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं

आंध्र प्रदेश / सत्ता संदेश

भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु आज 1 जुलाई को आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु में आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह न केवल उत्सव मनाने का दिन है, बल्कि इस नए संस्थान की विकास-यात्रा का एक निर्णायक चरण भी है। उन्होंने कहा, मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि भविष्य के लिए पूर्णतः तैयार संस्थान बनने के लिए यह विश्वविद्यालय एक दूरगामी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों और विशेषकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति इसकी प्रतिबद्धता, समावेशी और समतामूलक विकास के प्रति उत्तरदायित्व की भावना दर्शाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनकर उभरेगा और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ की संकल्पना को साकार करने में उल्लेखनीय योगदान देगा।

उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के वर्षों के समर्पण, दृढ़ निश्चय और कड़े परिश्रम की सुखद परिणति है। अनेक सपने सँजोए हुए उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रवेश किया था। आज वे ज्ञान एवं आत्मविश्वास से युक्त होकर वह डिग्री यहाँ से लेकर जा रहे हैं जो उनके लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि विद्यार्थियों को सफलता उनके स्वयं के कड़े परिश्रम से मिलती है, किंतु इस सफलता में उनके माता-पिता का त्याग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और समाज का भी योगदान होता है। इसलिए, उनकी जिम्मेदारी है कि वे समाज का ऋण भी चुकाएं। चाहे वे रोजगार का सृजन करने वाले उद्यमी बनें, नवाचार को बढ़ावा देने वाले वैज्ञानिक बनें, जनता के लिए काम करने वाले लोकसेवक बनें या फिर समाज की सेवा करने वाले लोकोपकारी बनें, उनकी शिक्षा वंचित वर्ग के सशक्तीकरण का स्रोत बननी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही बहुआयामी प्रगति से प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। तेज़ी से बदलती ऐसी दुनिया में, सीखने का काम सिर्फ़ डिग्री प्राप्त करने के साथ समाप्त नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए। अपने आप को उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप निरंतर ढालते चलने की प्रवृत्ति ही विद्यार्थियों का मजबूत संबल बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे नए विचारों को आजमाने और नवीन ज्ञान अर्जित करने का साहस विकसित करें।  

राष्ट्रपति ने कहा कि सीखने के लिए तत्पर, मानसिक लचीलेपन से लैस, और नवाचारी सोच रखने वाले युवा हमारे देश की अनमोल संपत्ति हैं। हमारे युवा अपने ज्ञान के साथ रचनात्मकता, दृढ़ निश्चय और उत्तरदायित्व के भाव को लेकर चलेंगे, तो वे सामने आने वाली हर चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं। इस तरह वे अधिक समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि अपने आचरण में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने से उन्हें बहुत मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, करुणा, समानुभूति और प्रकृति से प्रेम केवल ऊंचे नैतिक आदर्श ही नहीं हैं, बल्कि ये समग्र विकास के आधार भी हैं। इन गुणों से उनका जीवन तो बेहतर बनेगा ही, वे समाज व देश के लिए उपयोगी योगदान भी कर पाएंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘विकसित भारत’ की संकल्पना हमारे युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और प्रतिबद्धता से ही साकार होगी। वे जीवन में चाहे जिस भी मार्ग को चुनें, उस पर उन्हें पूरी लगन और ईमानदारी के साथ चलते हुए उत्कृष्टता की मंजिल हासिल करनी है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में फटा बादल, मलबा आने से सड़कें हुई बंद

जम्मू-कश्मीर / सत्ता संदेश

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भारी बारिश और बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्राकृतिक आपदा के कारण व्यापक स्तर पर फसलों, बाग-बगीचों और निजी संपत्ति को हानि पहुंची है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

डोडा जिले के भलेसा के खलजुगासर इलाके में बादल फटने की घटना हुई। इससे अचानक आई बाढ़ ने कृषि भूमि को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसानों की खड़ी फसलें और फलदार बाग-बगीचे पूरी तरह बर्बाद हो गए। कई मकानों और अन्य निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। 

भारी बारिश के कारण कई प्रमुख सड़कें बंद हो गईं। इससे भलेसा का भट्यास इलाका घंटों तक शेष क्षेत्रों से कटा रहा। डोडा जिले के कश्तीगढ़ क्षेत्र में भी मूसलाधार बारिश हुई। बारिश के कारण यहां अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई। हालांकि, कश्तीगढ़ में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

बादल फटने से क्षेत्र में कई जल स्रोत उफान पर आ गए। इससे निचले इलाकों में पानी भर गया और मिट्टी का कटाव भी हुआ। सड़कों के बंद होने से आवश्यक सेवाओं की आवाजाही बाधित हुई। स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने सड़कों को खोलने के लिए मशीनरी लगाई है।

अमृतसर में ट्रांसफॉर्मर में भीषण आग के बाद लोगों का फूटा गुस्सा, पावरकॉम के खिलाफ सड़क जाम कर धरना
  • अमृतसर में ट्रांसफॉर्मर में भीषण आग के बाद लोगों का फूटा गुस्सा, पावरकॉम के खिलाफ सड़क जाम कर धरना
  • बार-बार जल रहा ट्रांसफॉर्मर बना मुसीबत, नए ट्रांसफॉर्मर की मांग को लेकर लोगों का प्रदर्शन

अमृतसर / सत्ता संदेश

अमृतसर के आबादी गुरु नगर, मन्ने दी वेली के बैकसाइड इलाके में लगे बिजली के ट्रांसफॉर्मर में शनिवार देर रात करीब 1:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। स्थानीय निवासी जतिंदर सिंह खालसा ने बताया कि आग लगने के बाद इलाके के लोगों ने रेत डालकर आग बुझाने की काफी कोशिश की, लेकिन आग करीब डेढ़ घंटे तक लगातार जलती रही।

लोगों का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद बिजली विभाग के जेई और एसडीओ को कई बार फोन किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, लेकिन पावरकॉम की ओर से बिजली सप्लाई बंद नहीं किए जाने के कारण फायर ब्रिगेड की टीम भी तुरंत आग पर काबू नहीं पा सकी।

अगले दिन जब बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो लोगों का आरोप था कि नया ट्रांसफॉर्मर लगाने की बजाय उसी पुराने और जले हुए ट्रांसफॉर्मर को दोबारा चालू कर दिया गया। दोपहर करीब 1:30 बजे बिजली बहाल की गई, लेकिन अधिक लोड होने के कारण एक घंटे बाद फिर बिजली बंद हो गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले छह महीनों से यह ट्रांसफॉर्मर लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है। ट्रांसफॉर्मर के आसपास दुकानें और छोटे बच्चे रहते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है। बिजली विभाग के रवैये से नाराज़ लोगों ने सड़क जाम कर पावरकॉम के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इलाके में करीब 190 किलोवाट का बिजली लोड है, जबकि लगा हुआ ट्रांसफॉर्मर केवल 100 किलोवाट क्षमता का है। इसी ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफॉर्मर बार-बार खराब हो रहा है। अधिकारियों ने बताया कि पावरकॉम के एक्सईएन से बातचीत के दौरान उन्होंने आश्वासन दिया कि नया ट्रांसफॉर्मर लगाने की तैयारी है, लेकिन कुछ स्थानीय लोग अपने घरों के सामने ट्रांसफॉर्मर लगाने का विरोध कर रहे हैं, जिससे काम में देरी हो रही है।

पुलिस प्रशासन और एसपी ने लोगों को भरोसा दिलाया कि अगले दिन सुबह 10 बजे पावरकॉम के एक्सईएन स्वयं मौके पर पहुंचेंगे और पुलिस की मौजूदगी में बिजली लोड को दो हिस्सों में बांटकर दो नए ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। इस आश्वासन और बिजली बहाली का काम शुरू होने के बाद लोगों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

हालांकि, स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे बाईपास पर बड़े स्तर पर दोबारा प्रदर्शन करेंगे।

15 लाख के कर्ज़ से करोड़पति बनने तक: बटाला के युवक की लॉटरी ने बदली किस्मत

बटाला / सत्ता संदेश

पंजाब के बटाला के गांव वडाला ग्रंथियाँ से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है। करीब डेढ़ साल पहले विदेश से लौटे एक युवक की किस्मत एक ही रात में बदल गई। लंबे समय से आर्थिक तंगी और 15 लाख रुपये के कर्ज़ से जूझ रहे इस युवक ने लॉटरी में 1 करोड़ रुपये का इनाम जीत लिया।

लॉटरी विजेता ने बताया कि विदेश से लौटने के बाद उसके पास कोई स्थायी काम-धंधा नहीं था। परिवार पर करीब 15 लाख रुपये का कर्ज़ था, जिसके कारण घर में रोज़ तनाव और झगड़े का माहौल रहता था। उसने बताया कि उसने बीती शाम लॉटरी की टिकट खरीदी थी और रात को परिणाम आने पर पता चला कि उसे 1 करोड़ रुपये का इनाम मिला है।

युवक के मुताबिक, जब उसने घरवालों को अपनी जीत के बारे में बताया तो किसी ने भी शुरुआत में उस पर विश्वास नहीं किया। परिवार वालों को लगा कि वह मज़ाक कर रहा है। लेकिन जब लॉटरी जीत की पुष्टि हुई तो पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।

विजेता ने कहा कि उसकी पहली प्राथमिकता 15 लाख रुपये का पूरा कर्ज़ चुकाना होगी। इसके बाद वह बचे हुए पैसों से कोई नया कारोबार शुरू करेगा, ताकि भविष्य में परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

वहीं, लॉटरी टिकट बेचने वाले विक्रेता ने बताया कि यह युवक पिछले करीब डेढ़ साल से नियमित रूप से उनके पास लॉटरी की टिकट खरीदने आता था। आखिरकार उसकी किस्मत ने साथ दिया और वह 1 करोड़ रुपये का इनाम जीतने में सफल रहा।

एक रात में बदली इस किस्मत ने न केवल एक परिवार को आर्थिक संकट से राहत दिलाई, बल्कि पूरे इलाके में यह चर्चा का विषय बन गई कि कभी-कभी धैर्य और उम्मीद भी बड़ी खुशियां लेकर आती हैं।

मनरेगा बना इतिहास, आज से VB-G-RAM-G कानून हुआ लागू

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में आज से ग्रामीण रोजगार योजना, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (वीबी जी राम जी कानून) लागू हो गया है। वहीं पुराना मनरेगा कानून इतिहास की बात हो गया है। वीबी जी राम जी कानून के जरिए केंद्र सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव करना चाहती है। 

क्या है वीबी-जी राम जी कानून
इस कानून के तहत केंद्र सरकार साल 2047 तक एक ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना चाहती है। इसमें ऐसे ग्रामीण परिवारों के सदस्य, जो अकुशल श्रम कर सकते हैं, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। इस कानून के तहत ग्रामीण रोजगार के माध्यम से आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जाएगा। इस कानून में सरकार ग्रामीणों को सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं रखने की कोशिश कर रही है, बल्कि ऐसा मॉडल बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे गांव के स्तर पर विकास कार्यों की दिशा तय हो। 

नए कानून में किन कामों पर होगा फोकस
वीबी जी राम जी कानून के तहत गांवों में विकास कार्यों के लिए चार प्राथमिकताएं तय की गई हैं।-

जल सुरक्षा– इसके तहत गांवों में अब जल संरक्षण संरचनाएं, सिंचाई सहायता, भूजल पुनर्भरण, जल निकायों को पुनर्जीवित करने का काम और वनीकरण जैसे कामों को आगे बढ़ाया जाएगा।

ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास-वीबी जी राम जी कानून के तहत ग्रामीण सड़कों, सार्वजनिक भवनों, स्कूलों के विकास, स्वच्छता प्रणालियों और सौलर नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े काम और आवास योजनाओं पर जोर रहेगा।

आजीविका से जुड़े काम– सरकार ने वीबी जी राम जी कानून को कृषि, मत्स्य पालन, भंडारण, बाजार, कौशल विकास से भी जोड़ रही है। 

मौसमी घटनाओं से जुड़े काम– नए कानून में ग्रामीण क्षेत्रों को आपदा के समय तैयार रखने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए कानून में आश्रय स्थल, तटबंध निर्माण, बाढ़ प्रबंधन संरचनाएं, पुनर्वास के काम और जंगलों की आग बुझाने जैसे काम भी शामिल किए गए हैं। 

मनरेगा से कितना अलग है वीबी-जी राम जी?
केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों से मनरेगा की ढाचांगत कमियों को दूर किया गया है। सबसे पहले तो योजना के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जाने वाले सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक में शामिल किया जाएगा। इस कानून में ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक कार्यों के लिए एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार होगा। इसी के आधार पर गांवों में आगे के कामों को लेकर तैयारियां होंगी।

इस तरह गांवों के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने से देशभर में उत्पादक, टिकाऊ, सुदृढ़ और बदलाव में सक्षम ग्रामीण परिसंपत्तियों (एसेट्स) का निर्माण सुनिश्चित होगा। केंद्र और राज्य 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के तहत इन परिसंपत्तियों को आगे बढ़ाने की योजनाएं भी साझा तौर पर तैयार करेंगी। यानी एक राष्ट्रीय नीति के तहत काम के बिखराव को समेटा जाएगा और तय दिशा में इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

दोनों कानूनों में मुख्य अंतर-

विशेषतामनरेगा (MGNREGA)VB-G RAM G
गारंटीकृत रोजगार दिनप्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष कम-से-कम 100 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की गारंटी थी।
 
 रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
वित्तपोषण मांग-आधारित योजना; अकुशल श्रमिकों की मजदूरी का 100% केंद्र सरकार वहन करती थी।
 
 केंद्र-राज्य व्यय अनुपात 60:40 है। वहीं हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ये अनुपात 90:10 है। केंद्र शासित राज्यों में पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। अगर जरूरत पड़ती है तो अतिरिक्त खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी
 
कृषि विरामयोजना पूरे वर्ष संचालित रहती थी।
 
राज्य बुवाई एवं कटाई के मौसम में 60 दिनों तक काम पर अस्थायी रोक घोषित कर सकते हैं।
 
परिसंपत्ति निर्माणसामान्य ग्रामीण श्रम एवं बुनियादी विकास कार्यों पर केंद्रित था।
 
चार प्रमुख विकास क्षेत्रों—जल, कृषि, आपदा प्रबंधन और संपर्क (कनेक्टिविटी)—पर आधारित है।
 
बजट व्यवस्थामांग के अनुसार अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाती थी।
 
आपूर्ति-आधारित व्यवस्था है, जिसमें राज्यों के लिए निश्चित एवं सीमित बजट निर्धारित होता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय विकास योजना से कैसे जुड़ेगी?

  • मनरेगा कानून के तहत ग्राम पंचायतें ही अपने क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार होतीं थी और वही इससे जुड़ा हर फैसला लेती थीं। वीबी जी राम जी कानून में विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत काम होगा, जिसे ग्राम पंचायतें तैयार करेंगी। इसके बाद इन विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक जानकारी जुटाएगी, इसके बाद ही कार्यों का आवंटन होगा। 
  • खास बात यह है कि इन ग्राम पंचायत योजनाओं को जीपीएस जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके तैयार किया जाएगा और पीएम गति-शक्ति के साथ इस योजना को जोड़ा जाएगा। इससे काम में पारदर्शिता लाने की कोशिश की जाएगी।
  • वीबी जी राम जी कानून में गवर्नेंस इकोसिस्टम अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत मजदूरों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जीपीएस आधारित प्लानिंग और निगरानी, मोबाइल-आधारित रिपोर्टिंग के साथ रियल-टाइम डैशबोर्ड, एआई-सक्षम विश्लेषण और सोशल ऑडिट तंत्र शामिल हैं। इसके अलावा काम की साप्ताहिक जानकारी स्वचालित रूप से तैयार की जाएगी और भौतिक-डिजिटल दोनों पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे।

राज्य निर्धारित करेंगे क्षेत्रीय विकास के लिए किसे-क्या मिलेगा
वीबी जी राम जी कानून के मुताबिक, वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को नॉर्मेटिव आवंटन (Normative Allocation) का प्रावधान किया गया है। सीधे शब्दों में समझें तो पहले मनरेगा के तहत केंद्र जो फंड्स देता था, उसकी मांग औसतन और संभावित खर्चों के आधार पर होती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार ने यह जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंप दी है। यानी अब राज्य ही वर्ग और स्थानीय विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिलों और ग्राम पंचायतों के बीच फंड का पारदर्शी और आवश्यकतानुसार बंटवारा सुनिश्चित करेंगे। 

सरकार, मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी कानून क्यों लाई?
दरअसल देश के अधिकतर राज्यों में मनरेगा कानून के दुरुपयोग का पता चला। जिनमें कई जगहों पर काम सिर्फ कागजों पर हुए थे और नियमों का उल्लंघन कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया। कई जगहों पर मजदूरों की बजाय मशीनों से काम कराए गए और पैसे की धांधली की गई। ऐसे में सरकार ने ग्रामीण रोजगार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी बेहतर निगरानी के लिए वीबी जी राम जी कानून लाने का फैसला किया। यही वजह है कि नए कानून में जीपीएस से निगरानी और रियल टाइम जानकारी और सोशल ऑडिट जैसे प्रावधान किए गए हैं।