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महत्वपूर्ण खनिज मिशन को बढ़ावा, 56 खनिज ब्लॉक और 11 अन्वेषण लाइसेंस ब्लॉक नीलाम

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

खान मंत्रालय ने महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की हाल की नीलामी के सफल समापन के साथ भारत की महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा और अन्वेषण प्रणाली को मजबूत करने में काफी उपलब्धियां हासिल की हैं। इन सफल नीलामियों के साथ, सफलतापूर्वक नीलाम किए गए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की कुल संख्या 56 हो गई है। यह घरेलू खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और भारत के महत्वपूर्ण खनिज मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

खान मंत्रालय ने केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सातवीं किश्त के तहत 10 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की, जिससे सफल नीलाम किए गए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की कुल संख्या 56 हो गई है। यह 63 प्रतिशत से अधिक की सफल नीलामी दर को दर्शाता है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा नीलामी के लिए रखे गए 88 अद्वितीय खनिज ब्लॉकों में से 56 ब्लॉक नीलाम किए गए।

सातवीं किश्त ने भारत के महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण परिदृश्य का महत्वपूर्ण विस्तार किया है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना में पहली बार महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई। इस किश्त में ग्रेफाइट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई), वैनेडियम, टाइटेनियम, ग्लौकोनाइट, रॉक फॉस्फेट और संबंधित खनिज शामिल थे, जिससे देश में महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण का भौगोलिक दायरा और भी विस्तृत हो गया।

नीलामी का सातवां चरण 23 मार्च, 2026 को जारी निविदा आमंत्रण सूचना (एनआईटी) के माध्यम से शुरू किया गया, जिसमें महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों वाले 19 खनिज ब्लॉकों की पेशकश की गई। नीलामी खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 और खनिज (नीलामी) नियम, 2015 के प्रावधानों के तहत आयोजित की गई, जिनमें समय-समय पर संशोधन किए गए हैं।

महत्वपूर्ण खनिज नीलामी के साथ-साथ, मंत्रालय ने अन्वेषण लाइसेंस (ईएल) नीलामी के दूसरे चरण को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिससे भारत के अन्वेषण प्रणाली को और मजबूती मिली। दूसरे चरण के साथ, केंद्र सरकार द्वारा पहली बार अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में अन्वेषण लाइसेंस ढांचे का विस्तार किया गया है, जिससे महत्वपूर्ण और गहरे भंडारों में स्थित खनिजों के अन्वेषण के नए अवसर खुल गए हैं।

दूसरे चरण की सफल नीलामी के साथ, केंद्रीय सरकार द्वारा सफलतापूर्वक नीलाम किए गए अन्वेषण लाइसेंस ब्लॉकों की कुल संख्या 11 हो गई है। यह संख्या नीलामी प्रणाली की शुरुआत से अब तक 11 हो चुकी है। अन्वेषण लाइसेंस ढांचा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं की भागीदारी को सुगम बनाकर महत्वपूर्ण और गहराई वाले भंडारों में मौजूद खनिजों के व्यवस्थित अन्वेषण को सक्षम बनाता है।

महत्वपूर्ण खनिज और अन्वेषण लाइसेंस की नीलामी की निरंतर सफलता भारत के खनिज क्षेत्र में उद्योग के हितधारकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है और व्यवस्थित अन्वेषण को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और घरेलू खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों के प्रभाव को उजागर करती है।

ये पहल स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, विद्युत गतिशीलता, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा अनुप्रयोगों और अर्थव्यवस्था के अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और विकास में तेजी लाएंगी।

नीलामी के इन चरणों का सफल समापन राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता को कम करने और देश के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज संपत्तियों की एक मजबूत श्रृंखला बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

खान मंत्रालय नीलामी कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग और समर्थन देने के लिए सभी भागीदार बोलीदाताओं, राज्य सरकारों, तकनीकी एजेंसियों और अन्य हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त करता है। मंत्रालय देश में अन्वेषण के अवसरों का विस्तार करने और एक पारदर्शी, कुशल और निवेशक-अनुकूल खनिज इकोसिस्टम के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

रक्षा राज्य मंत्री ने रक्षा सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति की 15वीं बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 23 जून को नई दिल्ली में रक्षा सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति (डीआईटीसीसी) की 15वीं बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (एचक्यू आईडीएस) द्वारा आयोजित इस बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता और अत्याधुनिक उपकरणों को समयबद्ध तरीके से अपनाने पर जोर दिया गया।

बैठक में युद्ध के बदलते स्वरूप में रक्षा सेवाओं में विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर विषय विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों पर विचार-विमर्श किया गया। सलाहाकर समिति के सदस्यों ने उन्नत चिप निर्माण के स्वदेशीकरण, संप्रभु ऑपरेटिंग सिस्टम और डेटाबेस के विकास तथा रक्षा आवश्यकताओं के लिए डेटा केंद्रों के रणनीतिक स्थान निर्धारण जैसे कई प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा की। समिति ने उन परियोजनाओं को मंजूरी दी जिनसे न केवल रक्षा बलों को बल्कि सरकार के “विकसित-भारत” के दृष्टिकोण के अनुरूप राष्ट्रीय तकनीकी विकास प्रक्रियाओं को भी व्यापक लाभ प्राप्त होंगे।

इस बैठक में आईडीएस मुख्यालय, सेना, नौसेना, वायु सेना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों और शिक्षा जगत एवं उद्योग जगत के प्रतिष्ठित सदस्यों ने भाग लिया।

मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह मेमोरियल हॉकी प्रतियोगिता-2026 के 7वें संस्करण का उद्घाटन समारोह 23 जून 2026 को आयोजित

दिल्ली / सत्ता संदेश

वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह डीएफसी की 107वीं जयंती के उपलक्ष्य में वायु सेना खेल नियंत्रण बोर्ड की ओर से वायु सेना स्टेशन जालहल्ली में 23 जून से 3 जुलाई 2026 तक मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह मेमोरियल हॉकी टूर्नामेंट-2026 का 7वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में कुल 16 टीमें भाग लेंगी।

प्रतियोगिता का उद्घाटन समारोह 23 जून 2026 को एयर फोर्स स्टेशन जालहल्ली के हॉकी मैदान में आयोजित किया गया। एयर मार्शल एस. शिवकुमार, वीएसएम, एयर ऑफिसर-इन-चार्ज एडमिनिस्ट्रेशन (एओए) इस समारोह में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने प्रतियोगिता के शुभारंभ की घोषणा की।

इस प्रतियोगिता का उद्घाटन मैच भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना की दक्षिणी कमान, बेंगलुरु की टीमों के बीच खेला गया। भारतीय वायु सेना ने यह मैच 2-0 से जीत लिया। अग्निवीर विनायक संतोष हांडे को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। मुख्य अतिथि ने मैन ऑफ द मैच घोषित खिलाड़ी को 25,000 रुपये का चेक प्रदान किया। प्रतियोगिता के उद्घाटन के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।

मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर कहा, “हमें एक बार फिर मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह मेमोरियल हॉकी प्रतियोगिता के आयोजन से बेहद प्रसन्नता हो रही है जो देश का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है। यह प्रतियोगिता देश की सर्वश्रेष्ठ हॉकी टीमों को एक मंच प्रदान करेगी। भारतीय वायु सेना प्रतियोगिता के सुचारू रूप से आयोजन में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”

यह हॉकी प्रतियोगिता वायुसेना के दिग्गज मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया उपयुक्त आयोजन है और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने का सराहनीय तरीका है।

मदरसों के खिलाफ BJP की बड़ी मुहिम, बंद किए 1800 मदरसे, 11 हजार पर लटकी तलवार

पश्चिम बंगाल ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने अपना पहला बजट पेश कर दिया है. बजट में इस बार बंगाल में मदरसा एजुकेशन को आवंटित राशि को घटाकर आधा कर दिया गया है. सरकार की तरफ से माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन के लिए 2165 करोड़ रुपए तय किए गए हैं.

ये रकम पिछली TMC सरकार की तुलना में आधी से भी कम है. टीएमसी की सरकार में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन के लिए 5713 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे.इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रदेश के मदरसों को लेकर जानकारी मांगी है. सरकार की तरफ से सभी जिलाधिकारियों को 5 जुलाई तक मदरसों की फंडिंग, कैरिकुलम, शिक्षकों की योग्यता और गतिविधियों को लेकर रिपोर्ट देने को आदेश दे दिया गया है. सरकार के मुताबिक, अगर मदरसों में किसी तरह की गड़बड़ी या फिर विदेशी फंडिंग का मामला पाया जाता है तो उसे बंद करने में वह कोई गुरेज नहीं करेगी.

राज्य में आधिकारिक तौर पर लगभग 614 सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे हैं. वहीं, बिना रजिस्टर्ड (खारीजी) मदरसों की अनुमानित संख्या 8,000 से 11,000 के बीच है. अब सरकार के आदेश के बाद ऐसे मदरसों पर तलवार लटकी हुई है. इनको मिलने वाली फंडिंग की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी सरकार कर सकती है.

मदरसों पर लगते रहे हैं ये गंभीर आरोप

1.NCPR ने मदरसों पर राइट-टू-एजुकेशन (RTE) नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था. 2.मदरसों पर सिर्फ धार्मिक शिक्षा पर फोकस करने का आरोप लगता रहा है. 3.कई मदरसों पर सरकारी फंडिंग का दुरुपयोग करने की चलते हुई कार्रवाई 4. कई मदरसों पर संदिग्ध फंडिंग के शक में भी लिया गया एक्शन

NCPR के इस कदम के बाद मदरसों में कार्रवाई में आई तेजी

मदरसों को मिलने वाली फंडिंग, कैरिकुलम, शिक्षकों की योग्यता और गतिविधियों को लेकर पहले भी सवाल उठते आए हैं. अलग-अलग राज्य सरकारें अपने तरीके से अवैध मदरसों पर कार्रवाई करती आ रही थीं. लेकिन इनमें तेजी तब आई, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR )सवाल उठाया.

NCPCR ने सभी राज्यों को लेटर लिखकर कहा था कि मदरसों को दिया जाने वाला फंड बंद कर देना चाहिए. ये राइट-टू-एजुकेशन (RTE) नियमों का पालन नहीं करते हैं.NCPCR का कहना था कि ‘मदरसों में पूरा फोकस धार्मिक शिक्षा पर रहता है, जिससे बच्चों को जरूरी शिक्षा नहीं मिल पाती और वे बाकी बच्चों से पिछड़ जाते हैं’. इसके बाद से ही खासकर बीजेपी शासित राज्यों में मदरसों की स्क्रीनिंग और उन पर कार्रवाई में तेजी देखने को मिली.

भारत में मदरसों की दो श्रेणियां

मदरसा एक अरबी शब्द है. इसका हिंदी अर्थ शैक्षणिक संस्थान है. इस्लाम की शुरुआत में मस्जिदें ही शिक्षा के केंद्र के रूप में भी काम करती थीं, लेकिन 10वीं सदी के बाद से, इस्लामी दुनिया में मदरसों ने इस्लाम में शिक्षा के संस्थानों के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. मदरसों का सबसे पुराना जिक्र रासान और ट्रांसऑक्सानिया से मिलते हैं, जो आज के पूर्वी और उत्तरी ईरान, मध्य एशिया और अफगानिस्तान के इलाके हैं.

भारत में भी मदरसों की संख्या ठीक-ठाक रही है. यहां मदरसों की दो श्रेणियां हैं. एक है मदरसा दरसे निज़ामी, जो सार्वजनिक धर्मांध संस्थाओं के तौर पर चलते और राज्य के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं.

वे दारुल उलूम नदवतुल उलमा (लखनऊ) और दारुल उलूम देवबंद जैसे बड़े मदरसों के तय किए गए पाठ्यक्रम (सिलेबस) का पालन करते हैं. वहीं, दूसरा है मदरसा दरसे आलिया, जो राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होते हैं. वे राज्य सरकार या एनसीआरटी द्वारा निर्देशित पाठ्यक्रम का पालन करते हैं.

साल 2018-19 में भारत मदरसों की संख्या 24,010 थी

3 फरवरी, 2020 को तब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने राज्यसभा को बताया था कि 2018-19 तक भारत में 24,010 मदरसे थे. इनमें से 19,132 मान्यता प्राप्त मदरसे थे और बाकी 4,878 गैर-मान्यता प्राप्त थे.देश के कुल मदरसों में से 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में थे. इनमें 11,621 मान्यता प्राप्त और 2,907 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे थी. नकवी द्वारा पेश किए गए राज्य-वार आंकड़ों के मुताबिक मदरसों की संख्या के मामले में राजस्थान दूसरे स्थान पर था. यहां 2,464 मान्यता प्राप्त और 29 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे थे.

उत्तर प्रदेश में हाल के सालों में अवैध मदरसों पर तेजी से कार्रवाई हुई है. यूपी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक बिना मान्यता, अवैध अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से संचालित होने वाले 300 से अधिक मदरसों पर अब तक कार्रवाई (ध्वस्तीकरण और सीलिंग) की जा चुकी है. इसके अलावा सरकार ने कई मदरसों की फंडिंग की भी पड़ताल की है. इस बीच मदरसों में बच्चों की संख्या साल दर साल घट रही है.

यूपी में मदरसों बोर्ड परीक्षा में छात्रों की संख्या घटकर 63 हजार हुई

10 वर्ष पहले यूपी के मदरसा बोर्ड परीक्षा में 4 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे. वहींं, इस इस परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या सिर्फ 63 हजार रह गई है. वहीं, प्रदेश में सरकारी अनुदान पर चलने वाले मदरसों की संख्या 558 थी. लेकिन छात्र नामांकन, अनुदान राशि में हेरफेर की शिकायतों पर सरकार ने 15 मदरसों की मान्यता निलंबित कर उनके अनुदान को रोक दिया है. वर्तमान में 543 मदरसों को अनुदान मिल रहा है. इन मदरसों कुल 10 हजार शिक्षक हैं.

असम सरकार ने तो 1,281 मदरसों की पहचान ही बदल दी थी

उधर असम में हिमंता विश्वा सर्मा की सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए 1,281 मदरसों की पहचान ही बदल दी थी.सरकारी सहायता से 21 जिलों में चल रहे मदरसों को मिडिल इंग्लिश (एमई) स्कूलों में बदल दिया गया था. इसके अलावा असम सरकार मदरसों के अवैध संचालन पर काफी सख्त है. अवैध तरीके से चलने और नियमों का पालन न करने वाले मदरसों पर सरकार की तरफ से लगातार कार्रवाई की जा रही है.

उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भी मदरसों पर कार्रवाई

उत्तराखंड सरकार द्वारा भी अब तक 200 से अधिक अवैध और बिना पंजीकरण वाले मदरसों को सील किया जा चुका है. इनमें से अधिकांश कार्रवाई राज्य के सीमावर्ती इलाकों में की गई. इसके अलावा हजारों बच्चों के रिकॉर्ड गायब मिलने और सरकारी फंड का दुरुपयोग पाए जाने के चलते मान्यता प्राप्त 11 मदरसों की पोषण योजना और 23 मदरसों की सरकारी फंडिंग रोक दी गई.

इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने भी श्योपुर जिले में ही एकसाथ 56 मदरसों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी मान्यता रद्द की थी.

आईपीएल 2027 का सबसे बड़ा ट्रेड: दिल्ली लौटे ऋषभ पंत, कुलदीप यादव बने लखनऊ का हिस्सा

आईपीएल 2027 शुरू होने में अभी काफी समय है, लेकिन उससे पहले ही एक बड़े ट्रेड ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच हुए हाई-प्रोफाइल खिलाड़ी आदान-प्रदान में ऋषभ पंत अपनी पुरानी टीम दिल्ली कैपिटल्स में लौटने जा रहे हैं, जबकि स्टार स्पिनर कुलदीप यादव लखनऊ सुपर जाएंट्स की जर्सी पहनेंगे।

इस ट्रेड की सबसे बड़ी चर्चा ऋषभ पंत की सैलरी को लेकर है। आईपीएल के मुताबिक, पंत 15 करोड़ रुपये में दिल्ली से जुड़ेंगे। लखनऊ में उनकी सैलरी रिकॉर्ड 27 करोड़ रुपए थे। उन्हें आईपीएल 2025 के ऑक्शन में लखनऊ ने रिकॉर्ड 25 करोड़ देकर खरीदा था। वह आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी भी थे। उन्हें लखनऊ ने कप्तान बनाया था, लेकिन पिछले दो सीजन में खराब प्रदर्शन के बाद ही लखनऊ ने उन्हें निकाल दिया है। लखनऊ ने यही हाल पूर्व कप्तान केएल राहुल के साथ भी किया था।

पंत ने दिल्ली वापसी के लिए 12 करोड़ रुपये की बड़ी रकम की कटौती की है। वहीं, लखनऊ ने बदले में कुलदीप को 13.5 करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ा है। पंत को दिल्ली की कप्तानी भी सौंपी जा सकती है। पिछले दो सीजन से अक्षर पटेल टीम की कमान संभाल रहे थे, लेकिन दिल्ली का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था।

दिल्ली में फिर दिखेगा पंत का पुराना रंग
ऋषभ पंत का दिल्ली कैपिटल्स के साथ रिश्ता बेहद खास रहा है। युवा खिलाड़ी के रूप में उन्होंने दिल्ली के लिए अपना आईपीएल सफर शुरू किया और बाद में टीम की कप्तानी भी संभाली। वह 2016 से 2024 तक लगातार नौ सीजन इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा रहे और इस दौरान 111 मैच खेले, जो किसी भी खिलाड़ी द्वारा दिल्ली के लिए सबसे ज्यादा मैच हैं। पंत ने 2021 से 2024 के बीच चार सीजन में 43 मैचों में टीम की कप्तानी भी की। आक्रामक बल्लेबाजी और नेतृत्व क्षमता के कारण वह लंबे समय तक दिल्ली की पहचान बने रहे।

कार एक्सीडेंट और चोट से वापसी के बाद वह लखनऊ सुपर जाएंट्स से जुड़े थे, लेकिन अब एक बार फिर दिल्ली के साथ उनका रिश्ता जुड़ रहा है। दिल्ली के फैंस के लिए यह किसी भावनात्मक वापसी से कम नहीं होगी। पंत ने अपने आईपीएल करियर के कई यादगार पल इसी फ्रेंचाइजी के साथ बिताए हैं।

दिल्ली कैपिटल्स को क्या फायदा?

  • अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज की वापसी
  • कप्तानी का मजबूत विकल्प
  • मध्यक्रम को मिलेगी मजबूती
  • फैंस से भावनात्मक जुड़ाव

लखनऊ को मिला कुलदीप जैसा मैच विनर
दूसरी तरफ कुलदीप यादव का दिल्ली कैपिटल्स के साथ सफर भी शानदार रहा। 2022 में फ्रेंचाइजी से जुड़ने के बाद उन्होंने पांच सीजन में 65 मैच खेले और 72 विकेट हासिल किए। इस दौरान कुलदीप आईपीएल के सबसे प्रभावी विकेट लेने वाले स्पिनरों में शामिल रहे। उनकी कलाई की स्पिन और बीच के ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता ने दिल्ली को कई मैच जिताए। अब यह विश्वस्तरीय स्पिनर 13.50 करोड़ रुपये की मौजूदा फीस पर लखनऊ सुपर जाएंट्स के साथ जुड़ेगा।

पिछले कुछ वर्षों में कुलदीप ने आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दोनों में शानदार प्रदर्शन किया है। मध्य ओवरों में विकेट निकालने की उनकी क्षमता लखनऊ के गेंदबाजी आक्रमण को नई धार दे सकती है। खासकर इकाना जैसे स्पिन-अनुकूल मैदान पर कुलदीप विरोधी बल्लेबाजों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।

लखनऊ सुपर जाएंट्स को क्या फायदा?

  • अनुभवी भारतीय स्पिनर की एंट्री
  • मध्य ओवरों में विकेट लेने वाला गेंदबाज
  • घरेलू परिस्थितियों का फायदा
  • गेंदबाजी यूनिट को मजबूती

क्यों खास है यह ट्रेड?
यह ट्रेड सिर्फ खिलाड़ियों की अदला-बदली नहीं है, बल्कि दो फ्रेंचाइजियों की रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत भी है। दिल्ली ने अपने पुराने स्टार और पूर्व कप्तान को वापस लाकर भावनात्मक और क्रिकेट दोनों मोर्चों पर बड़ा दांव खेला है, जबकि लखनऊ ने भारतीय स्पिन विभाग को मजबूत करने के लिए कुलदीप यादव जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज को अपने साथ जोड़ा है। आईपीएल 2027 से पहले इस ट्रेड ने लीग के समीकरण बदल दिए हैं और अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि पंत की घर वापसी और कुलदीप की नई शुरुआत अपनी-अपनी टीमों को कितना फायदा पहुंचाती है। खास बात यह भी है कि लखनऊ के निकाले गए दो पूर्व कप्तान राहुल और पंत अब एक ही टीम दिल्ली से खेलते दिखेंगे।

दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान, 1 जनवरी 2025 तक की सभी झुग्गी बस्तियों का होगा पुनर्वास

दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली सरकार ने मंगलवार को झुग्गीवासियों के लिए अहम फैसला लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में DUSIB की बैठक में यह तय किया गया कि 1 जनवरी 2025 तक राजधानी में बसी सभी झुग्गी बस्तियों के निवासियों को पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा. इस पुनर्वास योजना की वजह से दिल्ली में रह रहे हजारों परिवारों को लाभ मिल सकेगा.

सीएम रेखा गुप्ता की अगुवाई में DUSIB बोर्ड की बैठक में पुनर्वास संबंधी अहम प्रस्ताव मंजूर किया गया. बैठक में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए दिल्ली सरकार ने तय किया है कि राष्ट्रीय राजधानी में 1 जनवरी 2025 तक बसी सभी झुग्गी बस्तियों के निवासियों पुनर्वास किया जाएगा. सरकार ने अपने फैसले में पुनर्वास का दायरा भी बढ़ाया है.

DUSIB की 36वीं बोर्ड बैठक में अहम फैसला

मुख्यमंत्री ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया, “दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) की 36वीं बोर्ड बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया, इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की. बैठक में यह तय किया गया कि दिल्ली में 1 जनवरी 2025 तक बसी किसी भी झुग्गी बस्ती के निवासियों को पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा.”

इससे पहले पिछले हफ्ते 16 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया था कि दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026 को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिससे ऐसे स्थानों पर रहने वाले 4 लाख परिवारों को लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को हर महीने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित कम से कम 5 पुनर्वास परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी करनी चाहिए.

अमित शाह ने पिछले हफ्ते की थी अहम बैठक

दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी वासियों के पुनर्वास को लेकर एक समीक्षा बैठक की अगुवाई करते हुए गृह मंत्री ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को 45 दिनों के अंदर 5 झुग्गी बस्तियों के लिए टेंडर जारी करने का निर्देश दिया. उन्होंने अधिकारियों को अतिरिक्त 50 झुग्गी बस्तियों के लिए परियोजना दस्तावेज और टेंडर प्रपोजल तैयार करने के भी निर्देश दिए.

तब अमित शाह ने कहा था कि झुग्गी बस्तियों के लिए पात्रता की तारीख एक जनवरी, 2025 के अनुसार तय की जाए. इस बैठक में अमित शाह के अलावा केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के उप-राज्यपाल तरणजीत सिंह संधु, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य वरिष्ठ मंत्री तथा अधिकारी शामिल हुए.

लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड: 15 छात्रों की मौत, कई घायल;सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

लखनऊ / सत्ता संदेश

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सोमवार दोपहर हुए इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। मृतकों में अधिकांश छात्र बताए जा रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं और लपटों से घिर गई। अंदर मौजूद छात्र और कर्मचारी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई छात्रों को बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता नहीं मिला, जिसके चलते उन्होंने बालकनियों और ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी। आसपास के लोगों और राहतकर्मियों ने कई छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला।

जानकारी के अनुसार, जिस भवन में आग लगी उसमें कोचिंग सेंटर के साथ अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी संचालित हो रही थीं। आग लगने के कारणों का अभी तक आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं हुआ है, हालांकि शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट समेत विभिन्न संभावनाओं पर जांच की जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और प्रशासन की कई टीमें मौके पर पहुंच गईं। घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आग पर काबू पाया गया और इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं प्रशासन ने भवन को सील कर दिया है और मामले में एफआईआर दर्ज कर कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई है।

इस हादसे ने एक बार फिर कोचिंग संस्थानों, प्रशिक्षण केंद्रों और व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित सुरक्षा ऑडिट, आपातकालीन निकास व्यवस्था और फायर सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।

लखनऊ का यह दर्दनाक अग्निकांड उन परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया है जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया। अब पूरे देश की निगाहें जांच पर टिकी हैं कि इस भयावह हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के सचिव बने सूरज सिंह बागड़ी, कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग में संगठन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सूरज सिंह बागड़ी को सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।

सूरज सिंह बागड़ी लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं तथा समाज के विभिन्न वर्गों के हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने को संगठन में उनके योगदान और जनसंपर्क क्षमता का सम्मान माना जा रहा है।

नियुक्ति के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सूरज सिंह बागड़ी को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व और कार्यशैली से अनुसूचित जाति विभाग को नई मजबूती मिलेगी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और समाज के विभिन्न वर्गों को कांग्रेस की नीतियों से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर सूरज सिंह बागड़ी ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वे अनुसूचित जाति समाज के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए संगठन को मजबूत बनाने और अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ने का प्रयास करेंगे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की नियुक्तियां संगठन को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

अमृतसर पुलिस को बड़ी सफलता, एक्सटॉर्शन गैंग के तीन शूटर गिरफ्तार

विदेश में बैठे हैंडलरों के इशारे पर पंजाब में देते थे फायरिंग और फिरौती की वारदातों को अंजाम

अमृतसर/ सत्ता संदेश

कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक्सटॉर्शन और फायरिंग की घटनाओं में शामिल एक गैंग के तीन शूटरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी विदेश में बैठे हैंडलरों के निर्देश पर पंजाब के विभिन्न जिलों में फायरिंग, फिरौती और लूट की वारदातों को अंजाम दे रहे थे।

इस संबंध में जानकारी देते हुए पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गुरदेव सिंह, जशनप्रीत सिंह और हरप्रसदीप सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों आरोपी गैंगस्टर घनशामपुरिया के नेटवर्क से जुड़े हुए थे और विदेश में बैठे दो हैंडलरों के निर्देशों पर काम कर रहे थे।

पुलिस के अनुसार, आरोपी व्यापारियों और अन्य लोगों को फोन कर फिरौती की मांग करते थे। यदि कोई व्यक्ति पैसे देने से इनकार करता था, तो आरोपी उसके घर या कारोबारी प्रतिष्ठान के बाहर फायरिंग कर डर का माहौल बनाते थे। इसके बाद दोबारा संपर्क कर फिरौती वसूलने का प्रयास किया जाता था।

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अब तक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने अमृतसर, अमृतसर देहात, तरनतारन और फिरोजपुर सहित पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों में करीब छह आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया है। इनमें लोहारका रोड स्थित पेट्रोल पंप पर हुई लूट की घटना भी शामिल है।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने एक पिस्टल बरामद की है। बरामद हथियार को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस को आशंका है कि इसी हथियार का इस्तेमाल कई अन्य वारदातों में भी किया गया हो सकता है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और जांच के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। साथ ही गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों और सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए पंजाब के विभिन्न इलाकों में लगातार छापेमारी की जा रही है।

पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

दिहाड़ी मजदूरी से भारतीय सेना तक का सफर: लहरागागा के साका ने रचा इतिहास

गरीब परिवार के बेटे ने मेहनत के दम पर हासिल की बड़ी सफलता, आर्मी मेडिकल कोर में हुआ चयन

लहरागागा / सत्ता संदेश

संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए लहरागागा के रहने वाले युवा साका ने भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने परिवार, समुदाय और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से संबंध रखने वाले साका का चयन आर्मी मेडिकल कोर, लखनऊ में हुआ है।

जानकारी के अनुसार, जोगी समुदाय से जुड़े साका ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने दुकानों पर दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार की आर्थिक मदद की और अपनी शिक्षा जारी रखी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर भारतीय सेना में जगह बनाई।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

स्थानीय लोगों के अनुसार, साका ने बचपन से ही कई आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सेना में भर्ती होने का सपना देखा। लगातार मेहनत और तैयारी के बाद उनका चयन आर्मी मेडिकल कोर में हो गया, जिससे पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।

लहरागागा पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत

सेना में चयन के बाद जब साका अपने गृह नगर लहरागागा पहुंचे तो मोहल्ले और क्षेत्र के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर और मिठाइयां बांटकर उनकी उपलब्धि का जश्न मनाया।

परिवार के सदस्यों ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार जोगी समुदाय से भारतीय सेना में भर्ती होने वाले युवाओं में साका का नाम एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में सामने आया है।

माता-पिता को किया सैल्यूट

कार्यक्रम के दौरान भावुक पल उस समय देखने को मिला जब साका ने अपने माता-पिता को सैल्यूट कर उनके संघर्ष, त्याग और सहयोग के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और सभी ने युवा सैनिक के जज्बे की सराहना की।

गौरव गोयल ने किया सम्मानित

इस अवसर पर पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल के पुत्र गौरव गोयल ने भी साका को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साका की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साका के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

साका की यह सफलता साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो आर्थिक कठिनाइयां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। आज साका की कहानी हजारों युवाओं को अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा दे रही है।