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PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों पढ़े में बड़ी दिन भर की खबरें…

पंजाब डेस्क : पंजाब-चंडीगढ़ की बड़ी खबरें: 13 IAS अफसरों के तबादले, स्कूलों को बम की धमकी और राघव चड्ढा का केजरीवाल पर तंज। चुटकियों में पढ़े दिनभर की अहम 10 खबरें।

1. 13 IAS अधिकारियों का तबादला: पंजाब सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 13 IAS अधिकारियों के तबादले किए हैं। इसमें जालंधर, पटियाला, कपूरथला और श्री मुक्तसर साहिब के डिप्टी कमिश्नर (DC) बदले गए हैं। हिमांशु अग्रवाल पटियाला के और वरजीत वालिया जालंधर के नए DC नियुक्त किए गए हैं।

2.स्कूलों और नेताओं को बम की धमकी: चंडीगढ़ और जालंधर के कई स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली है। ईमेल में पंजाब के CM भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और DGP गौरव यादव को भी निशाना बनाने की बात कही गई है। खुद को ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ बताने वाले भेजने वाले ने 14 अप्रैल को अमृतसर में अंबेडकर प्रतिमा को भी नुकसान पहुँचाने की धमकी दी है।

3. जालंधर PNB में दिनदहाड़े लूट: जालंधर में स्कूटी सवार दो नकाबपोश लुटेरों ने PNB बैंक में गनपॉइंट पर लूट की वारदात को अंजाम दिया। लुटेरे कैशियर पर पिस्तौल तानकर नकदी से भरा बैग लेकर फरार हो गए, जिसकी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है।

4. नशे ने उजाड़ा परिवार: कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी में एक दंपती के 4 बेटों की नशे के कारण मौत हो गई, जबकि 5वां बेटा भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक नशा करने के कारण युवक की नसें भी नहीं मिल रही हैं।

5. राघव चड्ढा का ‘पावर’ मैसेज: सांसद राघव चड्ढा और ‘आप’ नेतृत्व के बीच विवाद गहराता दिख रहा है। चड्ढा ने ‘द 48 लॉज ऑफ पावर’ किताब पढ़ते हुए एक फोटो शेयर की, जिसमें पहला नियम है— “अपने बॉस से ज्यादा चमकने की कोशिश न करें”,। इसे अरविंद केजरीवाल पर सीधा तंज माना जा रहा है।

6.PGI डॉक्टर से 1.10 करोड़ की ठगी: चंडीगढ़ PGI के एक डॉक्टर को शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर शातिर ठगों ने अपना शिकार बनाया। ठगों ने वाट्सएप ग्रुप के जरिए डॉक्टर को झांसे में लेकर अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 1.10 करोड़ रुपये ठग लिए।

7. गांव में प्रेम विवाह पर पाबंदी: अमृतसर के अदलीवाल गांव की पंचायत ने एक अजीबोगरीब प्रस्ताव पास किया है। अब गांव में एक ही गांव में शादी करने और बिना परिवार की सहमति के लव मैरिज करने पर पाबंदी लगा दी गई है। ऐसा करने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

8. मरीज को स्ट्रेचर से गिराया: मोहाली में एक एम्बुलेंस ड्राइवर की लापरवाही का मामला सामने आया है। 83 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को अस्पताल ले जाते समय ड्राइवर ने उन्हें स्ट्रेचर से गिरा दिया, जिससे उनकी हालत और गंभीर हो गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।

9. कनाडा में खालिस्तानी प्रदर्शन: कनाडा के ब्रैम्पटन में त्रिवेणी मंदिर के बाहर खालिस्तानी समर्थकों ने भारत और हिंदू विरोधी नारे लगाए। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि प्रदर्शनकारियों को भीड़ जुटाने के लिए 100-100 डॉलर का लालच दिया गया था।

10. दिल्ली-हलवारा फ्लाइट का समय बदला: दिल्ली और हलवारा के बीच उड़ानों के समय में बदलाव किया गया है। अब सुबह की फ्लाइट 8:35 बजे उड़ान भरेगी। हलवारा एयरपोर्ट पर पहली फ्लाइट 15 मई को लैंड होगी।

जालंधर में दिन-दहाड़े सनसनीखेज लूट: PNB बैंक में घुसे नकाबपोश लुटेरों ने गनपॉइंट पर कैशियर से लूटा पैसों का बैग; सीसीटीवी में कैद हुई वारदात

पंजाब डेस्क: जालंधर के कुक्की टाब के पास बैंक एन्क्लेव स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में 6 अप्रैल 2026 को दिन-दहाड़े लूट की एक बड़ी वारदात सामने आई है। स्कूटी पर सवार होकर आए दो नकाबपोश लुटेरों ने हथियार के बल पर बैंक से नकदी लूट ली और फरार हो गए।

दोपहर का वक्त: यह घटना दोपहर करीब 2:30 बजे की है जब बैंक में कामकाज चल रहा था।

गनपॉइंट पर धमकी: स्कूटी पर आए दो लुटेरों में से एक बैंक के बाहर पहरा दे रहा था, जबकि दूसरा अंदर घुसा। उसने कैशियर के पास जाकर सारा कैश देने को कहा। जब कैशियर ने मना किया, तो लुटेरे ने उस पर पिस्तौल तान दी और जान से मारने की धमकी दी।

कैश लेकर फरार: डर के मारे कैशियर ने काउंटर पर रखा पैसों से भरा बैग उसे सौंप दिया। उस समय बैंक में 3-4 ग्राहक भी मौजूद थे। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों लुटेरे मुंह ढककर अपनी स्कूटी से फरार हो गए।

सीसीटीवी फुटेज: पुलिस को इस घटना की सीसीटीवी फुटेज मिली है, जिसमें आरोपी बैंक से पैसों का बैग लेकर बाहर निकलता दिखाई दे रहा है।

पुलिस की कार्रवाई: सूचना मिलते ही डीसीपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बैंक स्टाफ लूटी गई राशि का हिसाब लगा रहा है और आरोपियों को पकड़ने के लिए अलग-अलग पुलिस टीमें तैनात कर दी गई हैं।

नवी मुंबई, वस्त्र अपशिष्ट, टेक्सटाइल वेस्ट मैनेजमेंट, पर्यावरण संरक्षण, रीसाइक्लिंग, सस्टेनेबिलिटी, कचरा प्रबंधन, सर्कुलर इकॉनमी, हरित पहल, शहरी विकास, पुनर्चक्रण, पर्यावरण अनुकूल पहल

नवी मुंबई की टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी, चक्रीय प्रणालियों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वस्त्र अपशिष्ट को अवसरों में बदलने का काम कर रही है। स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के अंतर्गत यह पहल न केवल लैंडफिल कचरे को कम कर रही है, बल्कि रोजगार के नए रास्ते भी खोल रही है और शहरी भारत के लिए एक प्रभावी व विस्तार योग्य मॉडल पेश कर रही है।

भारत में हर साल लगभग 78 लाख मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो घरों, संस्थानों और उद्योगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले वस्त्रों की व्यापकता और विविधता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। साड़ियों और वर्दी से लेकर डेनिम और घरेलू लिनेन तक, कपड़े शहरी कचरे के प्रवाह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। शहरों में वस्त्रों की रिकवरी, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण के लिए सुनियोजित प्रणालियां विकसित करने की आवश्यकता को तेजी से महसूस की जा रही है। चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण और संसाधन दक्षता पर बढ़ते ध्यान के साथ, नगरपालिकाएं ऐसे नवीन समाधानों की खोज कर रही हैं जो वस्त्रों को लैंडफिल में जाने से रोकते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के तहत, नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है। व्यवस्थित उपायों के माध्यम से वस्त्र अपशिष्ट की समस्या से निपटने के अवसर को पहचानते हुए, एनएमएमसी ने नवी मुंबई के बेलापुर में भारत की पहली नगर निगम टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (टीआरएफ) स्थापित की। विकेंद्रीकृत संग्रहण, वैज्ञानिक छंटाई, पता लगाने की क्षमता और महिलाओं के नेतृत्व में आजीविका सृजन को एकीकृत करके, टीआरएफ वस्त्र अपशिष्ट को एक उपेक्षित धारा से शहरी चक्रीय अर्थव्यवस्था के एक मूल्यवान घटक के रूप में पुनर्स्थापित करता है।

नवी मुंबई की टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (टीआरएफ) की परिकल्पना, एक स्वतंत्र संग्रह केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक चक्रीय इकोसिस्टम के रूप में की गई है जो संग्रह, छंटाई, प्रौद्योगिकी और आजीविका सृजन को जोड़ता है।

इस मॉडल की शुरुआत विकेंद्रीकृत संग्रहण प्रणाली से होती है, जिसके तहत सभी 8 नगर निगम वार्डों में स्थित हाउसिंग सोसाइटियों में ब्रांडेड कपड़े के कूड़ेदान लगाए गए हैं। अब तक 140 कूड़ेदान स्थापित किए जा चुके हैं और 250 कूड़ेदान लगाने का लक्ष्य है जिससे जमीनी स्तर पर सुलभता और नागरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

बेलापुर के एक पुराने शहरी स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित अंतरिम टीआरएफ में, वैज्ञानिक छंटाई और अनुरेखण क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एकत्रित वस्त्रों का वजन किया जाता है, उन पर टैग लगाए जाते हैं और उन्हें व्यवस्थित रूप से पुन: प्रयोज्य, पुनर्चक्रण योग्य, अपसाइक्लिंग योग्य, डाउनसाइक्लिंग योग्य और अस्वीकृत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। कोशा हैंडहेल्ड स्कैनर के एकीकरण से कपास, पॉलीकॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन और रेशम सहित रेशों की तत्काल पहचान संभव हो पाती है, जिससे वैज्ञानिक वर्गीकरण को मजबूती मिलती है और सामग्री की पुनर्प्राप्ति को अनुकूलित किया जाता है।

दाता से अंतिम उत्पाद तक वस्तु की यात्रा को ट्रैक करने के लिए एक विशेष एमआईएस प्लेटफॉर्म विकसित करता है, जो डिजिटल निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। पहचान के बाद, आगे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए वस्त्रों को कपड़े के प्रकार, रंग और स्थिति के आधार पर अलग किया जाता है। छांटे गए पदार्थों को पुनः उपयोग में लाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अच्छी तरह से कीटाणुरहित किया जाता है।

उपयुक्त कपड़ों को स्वयं-सहायता समूहों की कुशल महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित बैग, चटाई, सहायक उपकरण, परिधान और घरेलू सजावट की वस्तुओं में परिवर्तित किया जाता है। इन पुनर्निर्मित उत्पादों को बाद में प्रदर्शनियों में प्रदर्शित और बेचा जाता है। इससे उन सामग्रियों को नया जीवन और अर्थ मिलता है, जिन्हें कभी बेकार समझा जाता था।

300 से अधिक महिलाओं ने फाइबर की पहचान, पृथक्करण प्रोटोकॉल, मरम्मत तकनीक और अपसाइक्लिंग कौशल को कवर करने वाले 8 दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) मॉड्यूल में भाग लिया है। 150 से अधिक महिलाएं अब कपड़ा छंटाई, सिलाई और उत्पाद रूपांतरण के माध्यम से प्रति माह 9,000 रुपए से 15,000 रुपए के बीच से कमा रही हैं।

इस पहल ने एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इसने गृहिणियों को कुशल चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रणेता के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है। यह संयंत्र एक समर्पित अपसाइक्लिंग केंद्र के रूप में कार्य करता है जहां स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य पुराने वस्त्रों से बैग, कपड़े, पाउच और घरेलू सजावट के उत्पाद बनाते हैं। वस्त्र पुनर्चक्रण एक सुनियोजित आजीविका का साधन बनकर उभरा है जो हरित रोजगार सृजित करता है, स्थानीय उद्यम को मजबूत करता है और शहरी स्थिरता के ढांचे के भीतर श्रम की गरिमा को सुदृढ़ करता है।

टीआरएफ मॉडल ने उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल किए गए 30 मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट को इकट्ठा करने में मदद की है जिसमें से 25.5 मीट्रिक टन को वैज्ञानिक तरीके से छांटा गया है। प्रतिदिन औसतन लगभग 500 वस्तुओं की दर से 41,000 से अधिक वस्तुओं का प्रसंस्करण किया गया है। इस पहल ने 1,14,575 से ज्यादा परिवारों तक पहुंच बनाई है, 75 से अधिक आईईसी कार्यशालाएं आयोजित की हैं और 350 से अधिक समाज प्रतिनिधियों को जोड़ा है, जिससे नागरिक भागीदारी और संस्थागत सहयोग को बल मिला है। 400 से अधिक अपसाइकल्ड उत्पादों के नमूने विकसित किए गए हैं, जिसमें अस्वीकृत वस्त्र अपशिष्ट से तैयार किया गया कागज का एक सफल प्रायोगिक बैच भी शामिल है। यह पहल संसाधन पुनर्प्राप्ति में नए और रचनात्मक समाधानों को दर्शाती है।

जागरूकता बढ़ाने और बाजार अवसरों का विस्तार करने के लिए, टीआरएफ ने 30 से अधिक प्रदर्शनियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इन मंचों ने उपभोक्ता द्वारा उपयोग किए गए वस्त्रों के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही महिला कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के अवसर भी प्रदान किए हैं।

नवी मुंबई में टीआरएफ के कार्यान्वयन में शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं, जिनमें कूड़ेदान लगाने में प्रतिरोध, वस्त्र पृथक्करण के बारे में सीमित जागरूकता और मिश्रित रेशों की छटाई में जटिलताए शामिल थीं। इन चुनौतियों को चरणबद्ध कार्यान्वयन, निरंतर नागरिक सहभागिता, अंतर-एजेंसी समन्वय और फाइबर-स्कैनिंग तकनीक को अपनाकर दूर किया गया।

बेलापुर में अंतरिम टीआरएफ की सफलता के आधार पर, अगले चरण में निसर्ग उद्यान के पास कोपरखैरान में एक स्थायी, उच्च क्षमता वाली टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी की परिकल्पना की गई है।

नवी मुंबई स्थित टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी साबित करती है कि आमतौर पर बेकार माने जाने वाले अपशिष्ट पदार्थों को आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ के स्रोत के रूप में पुनर्जीवित किया जा सकता है। यह स्वच्छ भारत 2.0, स्मार्ट सिटी मिशन और सतत विकास लक्ष्य 12- जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन के सिद्धांतों के अनुरूप है।

आम चुनाव और उपचुनाव 2026: मतदान-पूर्व और मतदान दिवस पर एमसीएमसी द्वारा मुद्रित विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणीकरण
  1. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।
  2. निष्पक्ष चुनावी माहौल सुनिश्चित करने के लिए, कोई भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार, संगठन या व्यक्ति मतदान के दिन और मतदान के दिन से एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं करेगा, जब तक कि उसकी सामग्री राज्य/जिला स्तर पर मीडिया प्रमाणीकरण और निगरानी समिति (एमसीएमसी) द्वारा पूर्व-प्रमाणित न हो।
  3. व्यक्ति या चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार जिला एमसीएमसी में विज्ञापनों के प्रमाणीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यालय वाली सभी पंजीकृत राजनीतिक पार्टियां राज्य स्तरीय एमसीएमसी में ऐसे विज्ञापनों के प्रमाणीकरण के लिए आवेदन कर सकती हैं।
  4. तदनुसार, मतदान वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणीकरण नीचे दिए गए कार्यक्रम के अनुसार आवश्यक है:
आम चुनाव में भाग लेने वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नाममतदान की तिथिप्रकाशन तिथियां जिनके लिए मुद्रित विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणीकरण अनिवार्य है
असम, केरल और पुडुचेरी09.04.202608.04.2026 और 09.04.2026
तमिलनाडु23.04.202622.04.2026 और 23.04.2026
पश्चिम बंगाल23.04.2026 (Ph-I)22.04.2026 और 23.04.2026
29.04.2026(चरण-II)28.04.2026 और 29.04.2026
  1. प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों के लिए पूर्व-प्रमाणीकरण के इच्‍छुक आवेदकों को विज्ञापन के प्रकाशन की प्रस्तावित तिथि से कम से कम दो दिन पहले एमसीएमसी को आवेदन करना होगा।
  2. समय पर पूर्व-प्रमाणीकरण की सुविधा के लिए, राज्य/जिला स्तर पर एमसीएमसी को ऐसे विज्ञापनों की जांच और पूर्व-प्रमाणीकरण करने और यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय किया गया है कि निर्णय शीघ्रता से लिए जाएं।
  3. एमसीएमसी मीडिया में भुगतान की गई खबरों के संदिग्ध मामलों पर भी कड़ी निगरानी रखेगी और उचित कार्रवाई करेगी।
राज्यसभा सभापति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने नव निर्वाचित/पुनर्निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई

राज्यसभा सभापति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज उन्नीस नवनिर्वाचित/पुनर्निर्वाचित सदस्यों श्री रामदास बंडु आठवले, श्रीमती माया चिंतामन इवनाते, श्री शरदचंद्र पवार, श्री रामराव सखाराम वाडकुटे, डॉ. ज्योति नागनाथ वाघमारे, श्री क्रिस्टोफर मनिकम, डॉ. अंबुमणि रामदॉस, श्री कॉन्स्टैंडाइन रवींद्रन, श्री एल.के. सुधीश, डॉ.एम. थंबीदुरई, श्री तिरुचि शिवा, श्री बाबुल सुप्रियो बराल, डॉ. मेनका गुरुस्वामी, श्री राजीव कुमार, सुश्री रुक्मिणी मलिक, श्री विश्वजीत सिन्हा, श्री संतृप्त मिश्रा, श्री दिलीप कुमार रे और श्री मनमोहन सामल को राज्‍यसभा  सदस्‍यता की शपथ दिलाई।

राज्यसभा कक्ष में तीन सदस्यों ने मराठी में, दो ने हिंदी में, छह ने तमिल में, एक ने अंग्रेजी में, चार ने बंगाली में और तीन ने ओडिया में शपथ ली। नए सदस्‍यों में पांच महाराष्ट्र से, छह तमिलनाडु से, पांच पश्चिम बंगाल से और तीन सदस्‍य ओडिशा से हैं।

इस अवसर पर संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजीजू; जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम; राज्य सभा महासचिव श्री पी.सी. मोदी और राज्‍यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

टीडीबी-डीएसटी ने भारत-ब्रिटेन सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत एडवांस्‍ड ईवी चार्जिंग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के लिए एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड को सहयोग प्रदान किया

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने “इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नवोन्‍मेषण सशक्तिकरण” नामक परियोजना के लिए मेसर्स एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। यह परियोजना औद्योगिक स्थिरता के लिए भारत-ब्रिटेन सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत समर्थित है और ब्रिटेन स्थित अल्ब्राइट प्रोडक्ट डिजाइन लिमिटेड के साथ साझेदारी में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग अवसंरचना के लिए उन्नत और कुशल समाधान विकसित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

इस समर्थित परियोजना का मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक बेड़े और डिपो संचालन के लिए तैयार किए गए अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग समाधान का विकास करना है। यह प्रौद्योगिकी एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित एक नवोन्‍मेषी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर चार्ज कंट्रोलर को ब्रिटेन के भागीदार के पेटेंट प्राप्त स्वचालित केबल प्रबंधन प्रणाली के साथ एकीकृत करती है। इस एकीकृत दृष्टिकोण को उच्च मांग वाले इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग वातावरण में परिचालन दक्षता, सुरक्षा और उपयोगिता में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह समाधान विशेष रूप से फ्लीट-आधारित अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन की गई एक मोटरयुक्त ओवरहेड केबल प्रबंधन प्रणाली प्रस्तुत करता है, जो मैन्युअल हैंडलिंग को कम करके, केबलों की क्षति को न्यूनतम करके और उपयोगकर्ता की सुविधा को बढ़ाकर चार्जिंग संचालन को सुव्यवस्थित करता है। यह प्रणाली विद्यमान एसी टाइप-2 ईवी चार्जर के अनुकूल है और डिपो में सुरक्षित तथा व्यवस्थित अवसंरचना सुनिश्चित करते हुए चार्जिंग टर्नअराउंड समय को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखती है।

केबल प्रबंधन, उपकरण सुरक्षा और कार्यप्रवाह अनुकूलन जैसी प्रमुख परिचालन चुनौतियों का समाधान करने के जरिए इस प्रौद्योगिकी द्वारा इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग डिपो की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की उम्मीद है। साथ ही, केबल क्षति, तोड़फोड़ और परिचालन संबंधी खतरों को कम करके यह सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में भी योगदान देती है।

एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड एक उभरती हुई भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो उन्नत पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है। इस परियोजना के माध्यम से, कंपनी का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना और बढ़ते इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्‍टर के लिए परिमाणयोग्‍य और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करना है।

टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा कि भारत-ब्रिटेन कार्यक्रम जैसी सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास पहलें उन्नत, उद्योग-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से अपनाने और भारत में एक मजबूत, कुशल और भविष्य के लिए तैयार इकोसिस्‍टम के निर्माण के लिए ईवी चार्जिंग बुनियादी ढांचे में नवोन्‍मेषण आवश्यक हैं।

एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर ने समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और रेखांकित किया कि यह परियोजना कंपनी को बाजार में अभिनव, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी ईवी चार्जिंग समाधान लाने में सक्षम बनाएगी, जिससे फ्लीट ऑपरेटरों और बुनियादी ढांचा प्रदाताओं की बढ़ती आवश्‍यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।

विधायी नेतृत्व: नीति निर्धारण में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की परिवर्तनकारी शक्ति

विधायी नेतृत्व: नीति निर्धारण में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की परिवर्तनकारी शक्ति

  • श्रीमती अन्नपूर्णा देवी

भारत के समक्ष एक असाधारण अवसर है—अपनी विधायिकाओं को नया आकार देने, महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ाने और एक ऐसे लोकतंत्र की रचना करने का- जो सही मायनों में अपने लोगों की शक्ति को प्रतिबिंबित करता हो। जब महिलाएँ शासन में अपना उचित स्थान ग्रहण करती हैं, तब सभी की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर नीतियाँ बनती हैं, और राष्ट्र अधिक उद्देश्य और शक्ति के साथ आगे बढ़ता है।

सितंबर 2023 में पारित संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम — नारी शक्ति वंदन अधिनियम — हाल के वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सुधारों में से एक है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में बनाया गया यह कानून हमारे देश के लोकतांत्रिक ढाँचे में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के विजन में निहित यह ऐतिहासिक कानून, लोकसभा और राज्यों की  विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करते हुए विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक साहसिक कदम है।

यह मात्र संवैधानिक प्रावधान से कहीं बढ़कर है—यह एक परिवर्तनकारी विजन का संस्थागत रूप है, जहाँ महिलाएँ केवल लोकतंत्र में भागीदारी ही नहीं करतीं, बल्कि उसके ताने-बाने को भी आकार देती हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास को दिए गए निरंतर समर्थन ने लंबे समय से चली आ रही उम्‍मीदों को हकीकत में बदलने की मजबूत प्रेरणा प्रदान की है। 

भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को केवल अधिक महिलाओं की ही नहीं, बल्कि ऐसी महिलाओं की आवश्यकता है जिनके पास नीतिगत परिणामों को आकार देने के लिए अधिकार, क्षमता और पर्याप्त अवसर हों। वर्तमान सरकार ने पिछले एक दशक में महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण निवेश किया है, जिससे इस विधायी परिवर्तन के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है। जन धन खाताधारकों में 56% से अधिक महिलाएँ  हैं, जिससे वित्तीय समावेशन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलता है। मुद्रा योजना के लगभग 67% लाभार्थी महिलाएँ  हैं, जो उद्यमिता में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत 73% से अधिक मकान महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 10 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शनों ने घरेलू जीवन स्तर में सुधार किया है। ये सभी कदम एक स्पष्ट नीतिगत दिशा — भागीदारी के जरिए सशक्तिकरण- की ओर इंगित करते हैं हालांकि, अब ध्यान भागीदारी से आगे बढ़कर निर्णय-लेने तक पहुँचने पर केंद्रित है।

हमारे देश का अपना अनुभव एक मजबूत मानक प्रस्तुत करता है। स्थानीय स्तर पर, अब पंचायती राज संस्थाओं में चुने गए प्रतिनिधियों में से लगभग 50% महिलाएँ हैं, यानी 12 लाख से अधिक नेताओं के रूप में वे स्थानीय शासन को दिशा दे रही हैं। उनका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। महिला-नेतृत्व वाली स्थानीय संस्थाओं ने विकास से जुड़े  जल, स्वच्छता, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य देखरेख जैसे प्रमुख मुद्दों पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है, जो दर्शाता है कि नेतृत्व में विविधता नीति निर्माण में सकारात्मक बदलाव लाती है।

अब यह प्रश्न नहीं रह गया है कि महिलाएँ प्रभावी नेतृत्व कर सकती हैं या नहीं; इसके प्रमाण पहले से मौजूद हैं। अब समय आ गया है कि भारत की उच्च विधायी संस्थाएँ महिलाओं के नेतृत्व को पूर्ण रूप से अपनाएँ और उसे बढ़ाएँ। नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने पहले ही आधार तैयार कर दिया है, जो सार्थक प्रतिनिधित्व के लिए एक मजबूत संरचनात्मक नींव प्रदान करता है। राजनीतिक दलों के पास अब इस गति को आगे बढ़ाने—उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को नए सिरे से परिभाषित करने, चुनावी अभियान के लिए वित्तीय संसाधनों तक पहुँच का विस्तार करने तथा महिला नेताओं के लिए स्पष्ट और सशक्त मार्ग तैयार करने का जबरदस्‍त अवसर है। उचित सुधारों के साथ, राजनीतिक दल विधायी समावेशन को विजन से जीवंत और जीती-जागती हकीकत में परिवर्तित कर सकते हैं।

सरकार संसद और राज्य विधानसभाओं में संस्थागत तत्परता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पहली बार निर्वाचित होने वाले विधायकों को सशक्त नीतिगत अनुसंधान, समग्र विधायी प्रशिक्षण और मजबूत सहकर्मी नेटवर्क तक पहुँच प्रदान करके, सरकार उन आधारों में निवेश कर रही है जो बढ़ी हुई भागीदारी को अधिक प्रभावी और सटीक निर्णय-लेने में परिवर्तित करते हैं।  

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार महिलाओं के नेतृत्व में विकास के विजन पर लगातार कार्य करती रही है, और उसने नारी शक्ति को भारत की विकास गाथा के केंद्र में स्थापित किया है। इस अधिनियम  का पारित होना विधायी स्तर पर इस विजन को दर्शाता है।

यदि इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाया जाए, तो इसकी संभावनाएँ असाधारण हैं। वास्तविक प्रभाव के साथ प्रतिनिधित्व असर को कई गुणा बढ़ा देता है। वास्‍तविक ताकत के साथ उपस्थिति सुधार को तेज करती है। भारत दोनों को अपनाने के लिए तैयार है—और इससे होने वाले लाभ परिवर्तनकारी होंगे। जैसे-जैसे देश 2047 तक विकसित भारत बनने के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है, इसकी विधायी संस्थाओं की शक्ति एक महत्वपूर्ण कारक होगी। महिलाओं के विधायी नेतृत्व को बढ़ाना केवल निष्‍पक्षता का मामला नहीं है; यह स्वयं शासन को सुदृढ़ करने के बारे में है।

 नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने वास्तविक संभावनाओं का क्षण उत्पन्न किया है। अब इस क्षण को स्थायी परिवर्तन में बदलने का अवसर और शक्ति दोनों ही राजनीतिक संस्थाओं, दलों और नीति निर्माताओं के पास मौजूद हैं।

 प्रगति का असली पैमाना उन महिलाओं में दिखाई देगा, जो केवल सीटों पर बैठतीं ही नहीं, बल्कि उन्हें अधिकारपूर्वक संचालित भी करती हैं—जो साहसिक कानून तैयार करती हैं, परिवर्तनकारी एजेंडे तय करती हैं, और आने वाली पीढ़ियों के लिए शासन के स्वरूप को नया आकार देती हैं। इस बिल के लागू होने के साथ, भारत की विधायिकाओं की केवल संरचना ही नहीं बदलेंगी—बल्कि उनके उद्देश्य, शक्ति और वादे भी बदलेंगे।

(श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, भारत सरकार की केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं)

जालंधर में गजब चोरी: बंद कोठी में घुसे चोर, दो दिन रुककर चिकन-चाय का लुत्फ उठाया; हजारों का सामान लेकर फरार

पंजाब डेस्क: पंजाब के जालंधर से चोरी का एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के बस्ती बावा खेल इलाके में चोरों ने न केवल एक बंद घर के ताले तोड़े, बल्कि वहाँ दो दिनों तक रुककर आराम से खाना-पीना भी किया।

चिकन पार्टी और सफाई: तारा सिंह एवेन्यू स्थित एक बंद कोठी में घुसे चोरों ने वहाँ चिकन बनाकर खाया और चाय पी। दिलचस्प बात यह है कि वारदात के बाद चोरों ने बर्तन भी धोकर रख दिए, हालांकि वे चिकन के लिफाफे और सिंक में चायपत्ती छोड़ गए।

क्या-क्या हुई चोरी: चोरों ने घर से 10 हजार रुपये नकद, दो गैस सिलेंडर, बाथरूम के नल और बिजली का कीमती सामान चुरा लिया। चोर अलमारियों के ताले और नल तोड़ने के लिए अपने साथ हथौड़े और पेचकस भी लाए थे, जिन्हें वे वारदात के बाद वहीं छोड़ गए।

डेढ़ महीने से बंद था घर: पीड़ित परिवार पिछले करीब डेढ़ महीने से चंडीगढ़ के पास खरड़ में रह रहा था। पड़ोसियों से सूचना मिलने पर जब परिवार 4 अप्रैल को वापस लौटा, तब इस पूरी घटना का पता चला।

CCTV में कैद आरोपी: घर की छत के रास्ते अंदर दाखिल होते हुए एक युवक सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिया है। पड़ोसियों का दावा है कि चोर उनके घर में भी घुसे थे और उन्होंने एक संदिग्ध को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है।

पुलिस जांच: थाना बस्ती बावा खेल की पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।

भारतीय शासन व्यवस्था की पटकथा फिर से लिख रहा है मिशन कर्मयोगी

कल्पना करें कि राजस्थान के दूरदराज के किसी कोने में जिला कलेक्टर को एक ऐसी महत्वाकांक्षी कल्याण योजना की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जिसके बारे में उसकी जानकारी बहुत कम है। एक दशक पहले उसे जानकारी के लिए कहीं धूल खा रही किसी नियमावली का सहारा लेना होता। या फिर वह अपने किसी वरिष्ठ सहयोगी की तीन बैठकों और लंच के बाद खाली होने का इंतजार करता। उसकी उम्मीद उस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भी टिकी हो सकती थी जो शायद एक या दो साल में कभी आता। लेकिन आज वह अपने फोन के जरिए आईगॉट (इंटिग्रेटेड गर्वनमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म) पर लॉग ऑन करता है। उसे मिनटों में ही अपनी जरूरत के अनुरूप एक सुव्यवस्थित कार्यकुशलता आधारित पाठ्यक्रम मिल जाता है। वह शाम तक सूचनाओं और आत्मविश्वास से लैस होकर योजना के लाभार्थियों की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहा होता है। यह बदलाव देखने में छोटा लग सकता है मगर हकीकत में किसी क्रांति से कम नहीं है।

चमक-दमक से दूर धैर्य के साथ पांच साल पहले शुरू किया गया मिशन कर्मयोगी एक क्रांति ला रहा है। यह नए भारत के लिए एक नई तरह के प्रशासनिक अधिकारी तैयार करने के उद्देश्य से चुपचाप काम कर रहा है।

इसके महत्व को समझने के लिए हमें पहले संदर्भ को जानना होगा। 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के निर्धारित लक्ष्य तक यूं ही नहीं पहुंचा जा सकता। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए हमें भारत गणतंत्र को चलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए सावधानी से एक-एक कदम आगे बढ़ना होगा। इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पूंजी, प्रौद्योगिकी या नीति नहीं है। सबसे ज्यादा अहमियत उन लगभग 3.5 करोड़ प्रशिक्षित, उत्साही और नागरिक केंद्रित सरकारी कर्मियों की क्षमता की है जो हर सुबह उठ कर भारतीय शासन को संचालित करते हैं।

स्वतंत्र भारत के इतिहास में ज्यादातर समय क्षमता निर्माण का मॉडल सांयोगिक रहा है। किसी नौजवान अधिकारी को सेवा की शुरुआत के समय औपचारिक प्रशिक्षण दिया जाता था। फिर करियर के बीच में यदा-कदा उसे कुछ पाठ्यक्रमों में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता था। बाकी, उसे काम करते हुए और दूसरों को देख कर ही सीखना होता था। एक स्थिर और धीमी गति से आगे बढ़ते विश्व में यह काफी था। लेकिन कृत्रिम मेधा, जलवायु अवरोध, जनसांख्यिकीय दबाव और जबर्दस्त प्रौद्योगिकीय परिवर्तन के युग में यह सरासर नाकाफी है। प्रशासन के सामने चुनौतियां जिस रफ्तार से आती हैं उसके सामने प्रशिक्षण की पुरानी प्रणालियों की गति कहीं नहीं टिकती।

‘मिशन कर्मयोगी’ को इसी बेमेल स्थिति के समाधान के रूप में की गई थी। 2021 में शुरू किया गया यह मिशन—जिसे उसी वर्ष अप्रैल में स्थापित ‘क्षमता निर्माण आयोग’ द्वारा संस्थागत रूप से संचालित किया गया, एक सचमुच महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आगे बढ़ा। भारतीय सिविल सेवाओं की सीखने की संस्कृति को, समय-समय पर होने वाली और केवल नियमों के पालन तक सीमित प्रक्रिया से बदलकर, एक निरंतर चलने वाली, भूमिका-आधारित और स्वयं-निर्देशित विकास यात्रा में रूपांतरित करना इसका मकसद है। जैसा कि आयोग इसका वर्णन करता है, यह बदलाव ‘कर्मचारी’—यानी नियमों का पालन करने वाले एक पदाधिकारी से ‘कर्मयोगी’ बनने की ओर है: एक ऐसा लोक सेवक जो किसी उद्देश्य, सेवा-भाव और उत्कृष्टता से प्रेरित हो।

पाँच वर्षों के बाद, ये आंकड़े अत्यंत शिक्षाप्रद हैं। ‘आईगॉट’ (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म पर अब 1.5 करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारी सक्रिय शिक्षार्थी के रूप में जुड़े हैं — यह एक ऐसी संख्या है जो शुरुआत के समय काल्पनिक लगती थी। 4,600 से अधिक योग्यता-आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से, इन अधिकारियों ने 8.3 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। अकेले पिछले ‘राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह’  के दौरान, भागीदारी के परिणामस्वरूप 4.5 मिलियन घंटे के पाठ्यक्रम नामांकन और 3.8 मिलियन घंटे की वास्तविक शिक्षा दर्ज की गई। ये केवल अमूर्त आंकड़े नहीं हैं। दर्ज किया गया प्रत्येक घंटा भारत में कहीं न कहीं एक लोक सेवक का प्रतिनिधित्व करता है — छत्तीसगढ़ में एक राजस्व निरीक्षक, पुणे में एक शहरी स्थानीय निकाय अधिकारी, मणिपुर में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, ये सब अपने साथी नागरिकों की बेहतर सेवा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहें हैं।

जो बात आईगॉट प्लेटफॉर्म को वास्तव में परिवर्तनकारी बनाती है, वह केवल इसका पैमाना नहीं है, बल्कि इसकी ‘पहुँच की संरचना’  है। यह किसी भी समय और कहीं भी, स्मार्टफोन या डेस्कटॉप पर, कई भाषाओं में उपलब्ध है, और इसे शिक्षार्थी के पेशेवर प्रोफाइल के अनुसार बनाया गया है। पाठ्यक्रमों को हर तीन से छह महीने में अपडेट किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शासन में एआई टूल का उपयोग कैसे करें या नए वित्तीय नियमों को कैसे समझें, इससे संबंधित सामग्री वर्तमान और प्रासंगिक बनी रहे। दूसरे शब्दों में, यह प्लेटफॉर्म धूल फांकने वाली कोई डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है — बल्कि यह सीखने का एक जीवंत और अनुकूलन योग्य तंत्र है। इस पर विचार कीजिए कि एक आदिवासी जिले की जूनियर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए इसका क्या अर्थ है, जिसे उसकी अपनी भाषा में बाल पोषण मूल्यांकन के नवीनतम प्रोटोकॉल समझाने वाला एक मॉड्यूल प्राप्त होता है। उसे अपने ब्लॉक में किसी प्रशिक्षक के आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है। वह सीखती है, और कार्य करती है। यही इस मिशन का ‘लोकतांत्रिक लाभांश’ है।

क्षमता निर्माण आयोग, इस तंत्र  के रणनीतिक संरक्षक के रूप में, एक साथ ‘वास्तुकार’  और ‘संचालक’ दोनों की भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय नीति बनाने वाले एक सचिव से लेकर ग्राम स्तर पर इसे लागू करने वाले एक पंचायत पदाधिकारी तक, यह पहचान करता है कि सार्वजनिक भूमिकाओं के विशाल स्पेक्ट्रम में किन योग्यताओं की आवश्यकता है। यह सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय मानक 2.0 ढांचे के माध्यम से देश के प्रशिक्षण संस्थानों के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है, जिसके तहत देश भर के 200 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान पहले ही मान्यता प्राप्त  कर चुके हैं। यह राज्यों के साथ मिलकर काम करता है। सभी 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब औपचारिक समझौता ज्ञापनों  के माध्यम से जुड़ चुके हैं  ताकि ऐसी विशिष्ट ‘क्षमता निर्माण योजनाएं’  तैयार की जा सकें जो कार्यबल की दक्षताओं को संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ जोड़ती हैं। ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम’ जैसी ऐतिहासिक पहलों के माध्यम से, इसने एक मिलियन से अधिक प्रमाणित अधिकारियों को बड़े पैमाने पर व्यवहार प्रशिक्षण दिया  है, जो प्रत्येक नागरिक को अंतिम हितधारक के रूप में मानने की सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण कला है।

मिशन के इस अंतिम आयाम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह एक ऐसी चीज़ के बारे में है जिसे ‘पूर्णता प्रमाण पत्र’ या ‘लॉग किए गए घंटों’ में आसानी से नहीं मापा जा सकता। मिशन कर्मयोगी की सबसे गहरी आकांक्षाओं में से एक है—दृष्टिकोण में बदलाव। यह राज्य और नागरिक के बीच एक ‘लेन-देन’ वाले संबंध से हटकर ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से परिभाषित संबंध की ओर एक आंदोलन है: नागरिक ईश्वर के समान है, वह सर्वोच्च अधिकारी है जिसके प्रति राज्य का सेवक जवाबदेह है। जब रेलवे काउंटरों, राजस्व कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नागरिक-केंद्रित अधिकारियों को इसके तहत प्रशिक्षित किया गया और बाद में नागरिकों का सर्वेक्षण किया गया  तो प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक थी। उन्होंने बदलाव को महसूस किया। न केवल दक्षता में, बल्कि व्यवहार की आत्मीयता, तत्परता और बातचीत की मानवीय गुणवत्ता में भी। एक ऐसे युग में जब एआई प्रशासनिक कार्यों के विशाल हिस्सों को स्वचालित करने की चुनौती दे रहा है, यह मानवीय परत,  जो सहानुभूतिपूर्ण, सांस्कृतिक रूप से जागरूक और स्थानीय जड़ों से जुड़ी है कोई फालतू चीज़ नहीं, बल्कि भारत के शासन की सर्वोच्च शक्ति है।

इस मिशन ने अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ भारत की बौद्धिक विरासत का सम्मान करने का भी एक सचेत प्रयास किया है। ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रकोष्ठ’  के माध्यम से, पारंपरिक ज्ञान जिसमें सामुदायिक शासन और कृषि से लेकर वित्त और स्वास्थ्य सेवा तक के क्षेत्र शामिल हैं — को प्रशिक्षण सामग्री के ताने-बाने में बुना जा रहा है; इसे केवल अतीत की यादों के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत ज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। ‘अमृत ज्ञान कोष’  भंडार, जिसमें 70 से अधिक पूर्ण केस स्टडीज़ शामिल हैं, शासन-प्रशासन से जुड़े ऐसे ज्ञान का एक संग्रह तैयार कर रहा है जिसकी जड़ें भारतीय संदर्भों और भारतीय समाधानों में निहित हैं। प्रशासनिक मानसिकता का यह ‘वि-औपनिवेशीकरण’,  जिसके तहत भारतीय लोक सेवकों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी ही सभ्यतागत विरासत के साथ आत्मविश्वासपूर्ण जुड़ाव स्थापित करने की ओर लौटाया जाता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख आकांक्षाओं में से एक है और ‘मिशन कर्मयोगी’ इसी आकांक्षा को साकार रूप दे रहा है।

‘साधना’ सप्ताह  2 से 8 अप्रैल तक मनाया जाने वाला राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह — इस पांच वर्षीय यात्रा का उत्सव और इसके अधूरे कार्यों के प्रति पुनर्संकल्प, दोनों है। ‘साधना’ शब्द यहाँ अत्यंत उपयुक्त है। इसका अर्थ है समर्पित अभ्यास; एक ऐसे व्यक्ति का अनुशासित दैनिक प्रयास जो किसी एक असाधारण कार्य के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने कौशल के प्रति निरंतर समर्पण के माध्यम से निपुणता प्राप्त करना चाहता है। जैसे ही हम सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के एक ‘राष्ट्रीय सम्मेलन’ के साथ इस सप्ताह का उद्घाटन कर रहे हैं, जिसमें लगभग 700 वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से और 3,000 से अधिक वर्चुअल माध्यम से शामिल हो रहे हैं, हम केवल एक वर्षगाँठ नहीं मना रहे हैं। हम अगले पांच वर्षों के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं — एक ऐसे भविष्य की ओर जिसमें हर स्तर पर प्रत्येक सिविल सेवक निरंतर सीखने वाला, एक ‘नागरिक-चैंपियन’ और भारत की आकांक्षाओं का एक आत्मविश्वासी संरक्षक होगा।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य — सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से लेकर शून्य शुद्ध उत्सर्जन के संकल्प तक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व तक, केवल नीतिगत  माध्यम से पूरे नहीं होंगे। वे लोगों के माध्यम से पूरे होंगे: उस जिला अधिकारी द्वारा जो योजना को सही ढंग से समझ कर उसे पूरी शुद्धता के साथ लागू कर सके; उस शहरी योजनाकार द्वारा जो स्थानिक डेटा टूल का उपयोग कर सके; उस अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा जो सार्वजनिक स्वास्थ्य अलर्ट को इस तरह संप्रेषित करे कि उसका समुदाय उस पर भरोसा करे। मिशन कर्मयोगी न केवल कल के लिए, बल्कि आने वाले दशकों के लिए उसी दल का निर्माण कर रहा है।

भारत की शासन-व्यवस्था की कहानी के लंबे और प्रकाशमान सफर में, यह शायद वह अध्याय है जिसमें शासन ने आखिरकार ‘सीखना’ सीख लिया।

(लेखक केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री हैं)

चंडीगढ़ और जालंधर के स्कूलों में बम की धमकी: ईमेल में लिखा- ‘पंजाब अब खालिस्तान बनेगा’

पंजाब डेस्क: पंजाब और चंडीगढ़ में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब कई नामी स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। इस धमकी भरे ईमेल में न केवल बच्चों को निशाना बनाने की बात कही गई है, बल्कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी जान से मारने की चेतावनी दी गई है।

इन स्कूलों को मिली धमकी: जालंधर में डीपीएस स्कूल, मेयर वर्ल्ड स्कूल और एमजीएन स्कूल को निशाना बनाने की बात कही गई है। वहीं चंडीगढ़ के सेक्टर-32, 41, 45 और 47 स्थित चार स्कूलों को भी ऐसे ही धमकी भरे ईमेल मिले हैं।

बड़े नेता और अधिकारी टारगेट पर: ईमेल में दावा किया गया है कि बम और ग्रेनेड हमले में सीएम भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और डीजीपी को भी निशाना बनाया जाएगा। इसके अलावा, फिरोजपुर में कोर्ट परिसर को भी खाली कराया गया है।

खालिस्तान का जिक्र: भेजने वाले ने खुद को ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ से जुड़ा बताया है। ईमेल में लिखा है कि “पंजाब अब खालिस्तान बनेगा” और 14 अप्रैल को अमृतसर में डॉ. अंबेडकर के स्टैच्यू को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई है।

धमाके का समय: ईमेल में चेतावनी दी गई थी कि स्कूलों में दोपहर 1:11 बजे और मेयर ऑफिस में 2:11 बजे धमाके होंगे।पुलिस की कार्रवाई: सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया। बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने संबंधित स्कूलों में गहन तलाशी अभियान चलाया। हालांकि, जांच के दौरान अब तक कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है।

साइबर सेल की जांच: पुलिस और साइबर सेल की टीमें ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। सेक्टर-34 के एसएचओ सतिंदर ने लोगों से पैनिक न करने की अपील की है और कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है।अभिभावकों में इन धमकियों को लेकर काफी चिंता देखी जा रही है, क्योंकि इससे पहले भी चंडीगढ़ के स्कूलों और कोर्ट को ऐसी फर्जी धमकियां मिल चुकी हैं।