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आशा भोसले की तबीयत बिगड़ी: हार्ट अटैक की अफवाहों पर पोती ने लगाया विराम; बताया अस्पताल में भर्ती होने का असली कारण

मनोरंजन डेस्क: म्यूजिक इंडस्ट्री की दिग्गज गायिका आशा भोसले की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद उनके प्रशंसकों में चिंता की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर उनके हार्ट अटैक की अफवाहें उड़ रही थीं, जिन्हें उनकी पोती जनाई भोसले ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

अस्पताल में भर्ती: 92 वर्षीय आशा भोसले को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

क्या है असली बीमारी: उनकी पोती जनाई भोसले ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा कर स्पष्ट किया कि उन्हें हार्ट अटैक नहीं आया है। आशा भोसले को अत्यधिक कमजोरी और सीने में इन्फेक्शन (चेस्ट इन्फेक्शन) के कारण अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है।

पोती की अपील: जनाई ने सिंगर के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए प्रशंसकों से परिवार की प्राइवेसी (निजता) का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि दादी का इलाज जारी है और उम्मीद है कि वे जल्द ही ठीक हो जाएंगी।

प्रशंसकों की चिंता: फिल्मी दुनिया में हजारों गानों को अपनी आवाज देने वाली दिग्गज गायिका के अस्पताल में भर्ती होने की खबर से उनके लाखों प्रशंसक परेशान थे, लेकिन अब स्थिति स्पष्ट होने के बाद उन्हें थोड़ी राहत मिली है। परिवार ने कहा कि वे आशा जी के स्वास्थ्य से जुड़े अपडेट्स समय-समय पर साझा करते रहेंगे।

पठानकोट में सीएम मान की विजिट पर संशय: सुरक्षा के लिए ‘नो ड्रोन जोन’ घोषित; पेंशनर्स दिखाएंगे काले झंडे

पंजाब डेस्क: पठानकोट के रामलीला ग्राउंड में नव संवत्सर के अवसर पर कल आयोजित हो रहे राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान की शिरकत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि पंडाल सज चुका है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार अधिकारियों की ड्यूटियों में कटौती किए जाने से मुख्यमंत्री और अरविंद केजरीवाल के आने पर संशय है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: मुख्यमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने रामलीला ग्राउंड और उसके आसपास के 500 मीटर क्षेत्र को ‘नो ड्रोन जोन’ घोषित कर दिया है। इस दायरे में ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

पेंशनर्स का विरोध प्रदर्शन: पंजाब पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने का ऐलान किया है। पेंशनर्स पंजाब सरकार के खिलाफ अपनी लंबित मांगों को लेकर भारी रोष में हैं।

प्रमुख मांगें: पेंशनर्स की मुख्य मांगों में 16% महंगाई भत्ता (DA) देना, पिछले 4 सालों से बंद पड़े 37 भत्तों (जैसे बॉर्डर एरिया और ग्रामीण भत्ता) को बहाल करना और पुरानी पेंशन योजना को लागू करना शामिल है।

सरकार पर आरोप: एसोसिएशन के नेताओं का कहना है कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स से किए वादों से पीछे हट रही है। उन्होंने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू न करने और बकाए को किस्तों में देने की नीति को ‘खोखली’ करार दिया है।

अधिकारियों की चुप्पी: जहाँ एक तरफ पार्टी नेता मुख्यमंत्री के आने का दावा कर रहे हैं, वहीं प्रशासनिक अधिकारी इस मामले पर फिलहाल कुछ भी स्पष्ट कहने से बच रहे हैं।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…11-04-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब-चंडीगढ़ टॉप 10 खबरें: वृंदावन हादसे में 11 मौतें, मंत्री पर गंभीर आरोप और जालंधर पुलिस की ‘फर्जी’ रेड का पर्दाफाश। आए चुटकियों में पढ़े दिनभर की अहम 10 खबरें।

1. वृंदावन नाव हादसे में 11 मौतें: वृंदावन नाव हादसे में मरने वाले पंजाब के लोगों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है,। लुधियाना के जगराओं में शनिवार को एक ही परिवार के 5 सदस्यों की चिताएं एक साथ जलीं, जहाँ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी पहुंचकर शोक व्यक्त किया। अबोहर के मानिक टंडन, जिनकी 12 सितंबर को शादी होनी थी, उनकी लाश भी शनिवार को बरामद की गई।

2. AAP मंत्री पर गंभीर आरोप: मुकेरियां के कारोबारी मलकीत सिंह की बेटियों ने वीडियो जारी कर सीएम मान से गुहार लगाई है कि मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के डर से उनका स्कूल जाना छूट गया है। वहीं मंत्री मुंडियां ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा है कि उन्होंने कोई ट्रॉली नहीं खरीदी और न ही कोई पैसा बकाया है।

3. जालंधर पुलिस की ‘फर्जी’ रेड: जालंधर के शाहकोट थाने के SHO, ASI और एक लेडी कॉन्स्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया गया है। एक CCTV फुटेज सामने आया है जिसमें पुलिस खुद अपनी गाड़ी से शराब का ड्रम निकालकर आरोपी के घर में रखते हुए दिख रही है, जिसके बाद रेड का नाटक किया गया।

4. 200 फीट ऊंचे टावर पर चढ़े पिता-पुत्र: गुरदासपुर के गांव सैरोवाल में पुलिस प्रताड़ना और झूठे केस से परेशान होकर पिता-पुत्र 55 घंटे तक हाई वोल्टेज टावर पर चढ़े रहे। डीएसपी द्वारा 15 दिनों में जांच के आश्वासन के बाद ही वे नीचे उतरे।

5. सिंगर बब्बू मान के शो में हंगामा: पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अलीजा सहर ने आरोप लगाया है कि जर्मनी में बब्बू मान के शो के दौरान सिक्योरिटी गार्ड्स ने उनके साथ बदसलूकी की और गलत ढंग से छुआ। अलीजा ने वीडियो जारी कर सिंगर से इंसाफ की मांग की है।

6. पंजाब कैबिनेट के बड़े फैसले: मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई बैठक में 13 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को मंजूरी दी गई है, जिसमें बेअदबी बिल पेश किया जाएगा। इसके अलावा राज्य के 11,500 गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने का फैसला भी लिया गया है।

7. आर्मी का सामान ले जा रहे ट्रक में आग: संगरूर के एक ड्राइवर ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र के नासिक में रिश्वत न देने पर एक पुलिसकर्मी ने जलती हुई सिगरेट उसके ट्रक पर फेंक दी, जिससे ट्रक में लदा आर्मी सीएसडी (CSD) का सामान जलकर राख हो गया।

8. चंडीगढ़ में ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ स्कीम: चंडीगढ़ प्रशासन पर्यटकों के लिए आलीशान कोठियों में रुकने की सुविधा शुरू करने जा रहा है। इससे कोठी मालिकों को कमाई होगी और पर्यटकों को महंगे होटलों से राहत मिलेगी।

9. चंडीगढ़ में 6 मंजिला फ्लैट: चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड जल्द ही ग्रुप हाउसिंग स्कीम लॉन्च करेगा। कलेक्टर रेट बढ़ने के कारण अब यहाँ 6 मंजिला इमारतों के निर्माण की अनुमति दी गई है।

10. मोहाली में IPL के दौरान हंगामा: महाराजा यादवेंद्र सिंह स्टेडियम में पंजाब किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के मैच के दौरान टिकटों की चेकिंग को लेकर पुलिस और दर्शकों के बीच तीखी बहस हुई। दर्शकों ने पुलिस पर टिकट ब्लैक करने के आरोप लगाए।

पुनात्सांगचू-I परियोजना का संक्षिप्त विवरण (11 अप्रैल, 2026 की स्थिति में)भारत द्वारा वित्तपोषित भूटान की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना पर 7 वर्षों के बाद काम फिर से शुरू हुआ

दिल्ली / सत्ता संदेश
10 अप्रैल, 2026 को कंक्रीट डालने का समारोह अगले पांच वर्षों में परियोजना के पूरा होने की दिशा में  महत्वपूर्ण उपलब्धि
यह परियोजना जलविद्युत परियोजनाओं और सतत विकास में भारत-भूटान की मित्रता और सहयोग का प्रतीक

● पुनात्सांगचू-I जलविद्युत परियोजना (पीएचईपी-I) पश्चिमी भूटान के वांगडुफोड्रंग जोंगखाग में पुनात्सांगचू नदी पर  रन-ऑफ-द-रिवर योजना है। पीएचईपी-I की स्थापित क्षमता 1200 मेगावाट है और यह प्रति वर्ष औसतन 5670 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करेगी।
● पीएचईपी-I भूटान में चल रही सबसे बड़ी परियोजना है। एक बार पूरा हो जाने पर इससे भूटान की जलविद्युत क्षमता में लगभग 30% की वृद्धि होगी और यह लगभग 4700 मेगावाट हो जाएगी और प्रति वर्ष औसतन 5,670 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा।
● भारत सरकार इस परियोजना को वित्तपोषित कर रही है। वित्तपोषित राशि में 40% अनुदान और 60% ऋण शामिल है।
● पीएचईपी-I द्वारा उत्पादित अतिरिक्त बिजली भारत को दोनों देशों द्वारा निर्धारित मूल्य पर बेची जाएगी जिस पर परियोजना आरंभ होने के समय सहमति होगी।
● निर्माण कार्य 11 नवंबर 2008 को शुरू हुआ था और आरंभिक तौर पर परियोजना से उत्पादन आरंभ  होने का समय नवंबर 2015 निर्धारित किया गया था।
● हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान, सतह और भूमिगत कार्यों में महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिसके कारण डिजाइन में कई बदलाव करने पड़े। 2013 से बांध के दाहिने किनारे की ढलान के अस्थिर होने के कारण बांध के निर्माण कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप  बांध के जारी कार्यों को 2019 से निलंबित कर दिया गया।
● दोनों सरकारों और संबंधित एजेंसियों ने कई बैठकों में और अध्ययनों के द्वारा इन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। 31 जुलाई 2025 को दोनों सरकारें बांध निर्माण को फिर से शुरू करने और दाहिने किनारे की ढलान को स्थिर करने पर सहमत हुईं।
● लगभग सात वर्षों के बाद, 10 अप्रैल 2026 को वांगडू फोड्रंग में 1,200 मेगावाट की पुनात्सांगचू-I जलविद्युत परियोजना का काम बांध निर्माण आरंभ होने के साथ फिर शुरू हो गया है। विद्युत, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल और भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री जेम शेरिंग ने 10 अप्रैल 2026 को शिलान्यास समारोह में भाग लिया – जो इस विशाल परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रमुख भूवैज्ञानिक चुनौतियों के कारण 2019 से बांध निर्माण कार्य रुका हुआ था।
● बांध निर्माण और दाहिने तटबंध ढलान स्थिरीकरण कार्यों के पूरा होने पर अगले पांच वर्षों के भीतर परियोजना से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
● भौतिक और वित्तीय प्रगति (28 फरवरी 2026 तक):
➢ सीसीईए द्वारा अनुमोदित लागत (दिसंबर 2013 पीएल): रु. 9375.57 करोड़
➢ वित्तीय प्रगति: 8785.19 करोड़ रुपये (93.70%), भौतिक प्रगति: 87.75%
संशोधित लागत अनुमान (आरसीई) सीईए और सीडब्ल्यूसी के साथ जांच के अधीन है।

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने पुनात्सांगछू जलविद्युत परियोजना का दौरा किया; महत्वपूर्ण समारोह में भाग लिया

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

अप्रैल 11, 2026:  केंद्रीय विद्युत एवं आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने भूटान यात्रा के दूसरे दिन पुनात्सांगचू-I और पुनात्सांगचू-II जलविद्युत परियोजना स्थलों का दौरा किया।

केंद्रीय मंत्री ने बांध के निर्माण हेतु पुनात्सांगछू-I परियोजना स्थल पर, कंक्रीट डालने हेतु आयोजित समारोह में भाग लिया, जो परियोजना के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी संयुक्त जलविद्युत परियोजना के पूरा होने पर, भूटान की जलविद्युत क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

इस यात्रा के दौरान, श्री मनोहर लाल ने ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी पर जोर दिया, भारत द्वारा वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग सहित निरंतर समर्थन के बारे में बताया और परियोजना को सुरक्षित और कुशलतापूर्वक आगे बढ़ाने में दोनों पक्षों के इंजीनियरों और विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विद्युत संयंत्र का निरीक्षण भी किया और परियोजना के कार्यान्वयन की स्थिति और हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद श्री मनोहर लाल ने पुनात्सांगचू-II परियोजना का दौरा किया। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और श्री जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक द्वारा 11 नवंबर, 2025 को इसका संयुक्त रूप से उद्घाटन किया गया था। तब से यह भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरी है।

केंद्रीय मंत्री ने परियोजना के संचालनात्मक निष्पादन की समीक्षा की और बताया कि इससे पहले ही पर्याप्त बिजली और राजस्व उत्पन्न हो चुका है, साथ ही भारत को स्वच्छ ऊर्जा का निर्यात भी संभव हो रहा है। उन्होंने परियोजना के सफल क्रियान्वयन और संचालन दक्षता की सराहना की, भूटान के आर्थिक विकास में इसके योगदान को स्वीकार किया और सतत ऊर्जा विकास में भूटान को सहयोग देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया। इस दौरे में विद्युत संयंत्र और बांध स्थल का निरीक्षण भी शामिल था, जहां उन्हें चल रहे कार्यों की जानकारी दी गई।

श्री मनोहर लाल ने वांगडु फोडरंग द्जोंग का भी दौरा किया, जो भूटान की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भंडार है

विधायक अशोक पाराशर पप्पी ने वार्ड 78 में 95.48 लाख रुपये की लागत से बन रही नई सड़कों के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।

लुधियाना सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करते हुए, विधायक अशोक पाराशर पप्पी ने वार्ड 78 के मोहर सिंह नगर की सभी सड़कों के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।

लगभग 95 लाख 48 हजार रुपये की लागत से यह परियोजना पूरी की जाएगी, जिससे क्षेत्र के निवासियों को लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से राहत मिलेगी। इस अवसर पर, कार्य के उद्घाटन के दौरान वार्ड पार्षद मन्ना सहित उपस्थित वार्ड निवासियों में खुशी का माहौल था और उन्होंने इस पहल के लिए विधायक को धन्यवाद भी दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए, विधायक अशोक पाराशर पप्पी ने कहा कि लुधियाना सेंट्रल के प्रत्येक वार्ड में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए विकास कोष का उपयोग उचित और पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है ताकि एक-एक पैसा जनता के कल्याण के लिए इस्तेमाल हो सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि काम की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और काम समय पर पूरा किया जाएगा।
क्षेत्र के निवासियों ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इस नए निर्माण कार्य से सड़कों की सुंदरता में सुधार होगा और स्वच्छ वातावरण बनेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में भी इस प्रकार के विकास कार्य जारी रहेंगे।
इस अवसर पर वार्ड पार्षद श्रीमती सुरिंदर कौर, वार्ड प्रभारी मनप्रीत सिंह मन्ना के साथ-साथ बड़ी संख्या में समर्थक और स्वयंसेवक भी उपस्थित थे।
मंत्रिमंडल मंत्री मुंडियन ने धनांसु अनाज मंडी में गेहूं खरीद की समीक्षा की

किसानों को सुगम, त्वरित और परेशानी मुक्त खरीद का आश्वासन दिया

सरकार की हर एक अनाज की खरीद की प्रतिबद्धता दोहराई

लुधियाना, 10 अप्रैल

रसीद मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने शुक्रवार को धनांसु अनाज मंडी में चल रही गेहूं खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की और मौजूदा व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सुचारू खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय लागू किए गए हैं और किसानों को आश्वासन दिया कि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। उन्होंने आगे कहा कि सभी मंडियों में गेहूं की खरीद सुचारू रूप से चल रही है।

दौरे के दौरान, मुंडियन ने बताया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और खरीद एजेंसियों के प्रमुखों को समय पर भुगतान और उपज की शीघ्र ढुलाई सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने किसानों द्वारा लाए गए हर एक अनाज की खरीद के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया।

मंत्री ने आगे बताया कि ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में समय पर सीधे भुगतान हस्तांतरित किए जा रहे हैं। कुशल प्रबंधन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारियों को परिवहन, भुगतान या रसद संबंधी किसी भी समस्या से बचने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।

खरीद के मौसम के दौरान किसानों को आरामदायक वातावरण प्रदान करने के लिए स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

मंत्रिमंडल मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने 12.03 करोड़ रुपये की लागत से बन रही भगत पूरन सिंह हेरिटेज स्ट्रीट की आधारशिला रखी

खन्ना, लुधियाना, 10 अप्रैल
खन्ना के विकास को एक महत्वपूर्ण दिशा देते हुए, मंत्रिमंडल मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने शुक्रवार को गुरु अमरदास मार्केट में भगत पूरन सिंह हेरिटेज स्ट्रीट की आधारशिला रखी। 12.03 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य शहर की सुंदरता को बढ़ाना है।
सभा को संबोधित करते हुए सोंड ने भगत पूरन सिंह को निस्वार्थ सेवा का प्रतीक और एक महान व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि पद्म श्री से सम्मानित भगत पूरन सिंह समाज में अत्यंत आदरणीय स्थान रखते हैं। खन्ना के पास राजेवाल गांव में जन्मे भगत पूरन सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शहर के आर्य विद्यालय से प्राप्त की। उनकी विरासत को सम्मान देने के लिए पंजाब सरकार ने उनके नाम पर एक हेरिटेज स्ट्रीट का निर्माण शुरू किया है। परियोजना के छह महीने के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
सोंड ने विश्वास व्यक्त किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने से खन्ना को एक नई पहचान मिलेगी और यह पंजाब के अग्रणी शहरों में शुमार होगा। उन्होंने इस पहल को शहरी सौंदर्यीकरण और आधुनिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि आजादी के बाद पहली बार शहर में इतनी बड़ी परियोजना शुरू की गई है।
पंजाब सरकार की जन कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सभी क्षेत्रों में विकास कार्य चल रहे हैं ताकि कोई भी वार्ड पीछे न छूट जाए। उन्होंने निवासियों को आश्वासन दिया कि वे खन्ना की प्रगति के लिए अथक प्रयास करते रहेंगे।
नागरिकों से सामूहिक योगदान का आह्वान करते हुए सोंड ने कहा कि खन्ना उनकी जन्मभूमि है, इसलिए इसे सबसे खूबसूरत शहर बनाने के लिए मिलकर काम करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

केन्द्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली में समुद्री खाद्य निर्यातकों की बैठक 2026 की अध्यक्षता की; वैश्विक बाज़ार तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति तैयार की

“भारत मूल्य-वर्धित समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाएगा और ईईजेड तथा खुले समुद्र से समुद्री क्षमता का उपयोग करेगा

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में “सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026” का आयोजन किया। इस बैठक में मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई। इस बैठक का उद्देश्य सरकार और उद्योग से जुड़े हितधारकों के बीच संवाद के लिए एक व्यवस्थित मंच प्रदान करना था, साथ ही निर्यातकों से बाजार तक पहुंच, मूल्य निर्धारण के दबाव और अनुपालन आवश्यकताओं से संबंधित वर्तमान चुनौतियों पर प्रतिक्रिया प्राप्त करना तथा द्वीपों, ईईजेड(विशेष आर्थिक क्षेत्र) और खुले समुद्र से मूल्य संवर्धन, बाज़ार विविधीकरण और समुद्री निर्यात के विस्तार के लिए आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श करना था।

न केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने में निर्यातकों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, उन्होंने बताया कि भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों में बेहतर प्रदर्शन रहा है। बाजार और उत्पाद विविधीकरण की निरंतर आवश्यकता पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कड़े नियामकीय अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें एंटीबायोटिक प्रतिबंधों का पालन और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। विशेष आर्थिक क्षेत्र(ईईजेड) नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस ढांचे को एक्सेस पास के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ईईजेड और खुले समुद्र से टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं को रेखांकित किया और बेहतर ऑनबोर्ड हैंडलिंग, मजबूत कोल्ड चेन अवसंरचना, बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन तथा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज पर बल दिया। निर्यातकों से ₹1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कार्य करने और ओपन मार्केट दृष्टिकोण अपनाने का भी आग्रह किया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाओं का पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आयोजित निवेशक बैठक का भी उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए निवेश हुए हैं, विशेष रूप से समुद्री केज कल्चर, मोती की खेती और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के क्षेत्रों में निवेश में तेजी आई है।

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि बजट 2026 के बाद आयोजित वेबिनार के अनुरूप, मत्स्य क्षेत्र को उच्च मूल्य और उच्च मांग वाले क्षेत्र के रूप में स्थापित करने के समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। समुद्री खाद्य निर्यात में उत्साहजनक वृद्धि को देखते हुए उन्होंने निर्यातकों के निरंतर प्रयासों की सराहना की और जोर दिया कि निर्यात वृद्धि को बनाए रखने के लिए कड़े नियामकीय अनुपालन—जिसमें पता लगाने की क्षमता और प्रमाणन शामिल हैं—के साथ-साथ मजबूत लॉजिस्टिक्स और मूल्य श्रृंखला का विकास अत्यंत आवश्यक है।

केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बताया कि एमपीईडीए, ईआईसी और वाणिज्य विभाग के समन्वय से एक केंद्रित बाजार विविधीकरण रणनीति तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि लगभग चालीस देशों के राजदूतों के साथ कूटनीतिक संवाद से उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं और इस बात पर जोर दिया कि बाजार विविधीकरण को लक्षित उत्पादों—विशेष रूप से रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य खंड—के साथ जोड़ना आवश्यक है। विभाग द्वारा समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों और विदेशों में भारतीय मिशनों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित करने में सुविधा प्रदान की जाएगी। साथ ही, एमपीईडीए से आग्रह किया गया कि वह निर्यातकों के समर्थन के लिए क्षमता निर्माण पहलों को सुदृढ़ करे, ताकि अनुपालन, प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात तैयारी को बढ़ाया जा सके।

बैठक में हितधारकों ने भारत सरकार के सक्रिय सहयोग की सराहना की और समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और अवसरों को रेखांकित किया। इनमें कैच सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में समुद्री शैवाल की खेती के लिए परमिट सुविधा प्रदान करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले फिश फीड मील के वैज्ञानिक विकास और उत्पादन विस्तार के लिए मछली आहार निर्माताओं को लक्षित समर्थन देने की आवश्यकता शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी तट पर अंतर्देशीय मत्स्य पालन और समुद्री कृषि के निर्यात संभावनाओं का पता लगाने और उन्हें मजबूत करने की जरूरत है। हितधारकों ने समुद्री खाद्य निर्यात को प्रभावित करने वाली कई व्यापक चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जिनमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं के कारण सीमित बाजार पहुंच, उच्च अनुपालन लागत, मूल्यवर्धित प्रसंस्करण क्षमता में कमी, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी बाधाएं, तथा मजबूत पता लगाने योग्य और गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों की आवश्यकता शामिल हैं।

इस बैठक में समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड(एनएपडीबी), निर्यात निरीक्षण परिषद(ईआईसी), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक(नाबार्ड),  राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम(एनसीडीसी), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड(एनसीईएल), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, और अन्य संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। निर्यात संघों के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया, जिनमें भारत समुद्री खाद्य निर्यातक संघ, भारतीय समुद्री सामग्री संघ और भारत समुद्री शैवाल संघ शामिल थे; साथ ही सी6 एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, साशिमी फूड्स प्राइवेट लिमिटे, एक्वाग्री प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, एनेमको प्राइवेट लिमिटेड, सागरीय क्षितिज जैसी कंपनियों के उद्योग प्रतिनिधियों, सहकारी समितियों और निर्यातकों ने भी शिरकत की। इस कार्यक्रम में भारत सरकार के मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ओडिशा, गुजरात, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, गोवा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप के मत्स्य विभागों के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।

पृष्ठभूमि

भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में पिछले 11 वर्षों के दौरान औसतन 7% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो मजबूत और निरंतर विकास को दर्शाती है। इस अवधि में समुद्री उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है, जो 2013–14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹62,408 करोड़ हो गया। इस वृद्धि में प्रमुख योगदान झींगा निर्यात का रहा है, जिसका मूल्य ₹43,334 करोड़ रहा।

भारत का समुद्री खाद्य निर्यात एक व्यापक और विविधतापूर्ण श्रेणी में फैला हुआ है, जिसमें 350 से अधिक प्रकार के उत्पाद लगभग 130 वैश्विक बाजारों में भेजे जाते हैं। अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार बना हुआ है, जहां 2024-25 में कुल एक्सपोर्ट मूल्य का 36.42% हिस्सा गया; इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य-पूर्व का नंबर आता है, जबकि बाकी बाज़ारों का कुल हिस्सा लगभग 9% है। कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने और वैश्विक समुद्री खाद्य बाजारों में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार निर्यात टोकरी के विविधीकरण पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, मत्स्य पालन विभाग पूरी मूल्य श्रृंखला में कई तरह के उपायों को बढ़ावा देता है, जिनमें गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन, खारे पानी की जलीय कृषि का विस्तार और विविधीकरण, निर्यात-उन्मुख प्रजातियों को बढ़ावा, प्रौद्योगिकी अपनाना, रोग प्रबंधन, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और क्षमता निर्माण शामिल हैं। इसके अलावा, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, निर्बाध कोल्ड चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली पकड़ने के बंदरगाहों और मछली उतारने के केंद्रों के विकास में भी निवेश किया जा रहा है।

केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु जैव रसायन एवं रुधिरविज्ञान में आईएसओ 15189:2022 मान्यता प्राप्त करने वाला पहला केन्‍द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् संस्थान बना


केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ने प्रतिवर्ष 1.5 लाख से अधिक परीक्षण के साथ 50 मापदंडों के लिए राष्‍ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्‍यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त की   

वैश्विक मान्यता सटीक निदान सुनिश्चित करती है और आयुष को गुणवत्तापूर्ण देखभाल के लिए एक मानदण्‍ड के रूप में स्थापित करती है: श्री प्रतापराव जाधव

महत्‍वपूर्ण आईएसओ 15189:2022 मान्यता आयुष में प्रमाण-आधारित अभ्यास और अनुसंधान को सुदृढ़ करती है: वैद्य राजेश कोटे

आयुष मंत्रालय के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु की क्लिनिकल प्रयोगशाला को जैव रसायन और रुधिरविज्ञान दोनों के लिए आईएसओ 15189:2022 मान्यता प्राप्त हुई है। इस प्रकार यह संस्थान केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् संस्थान के अंतर्गत यह उपलब्धि प्राप्‍त करने वाला पहला संस्थान बन गया है।

यह मान्यता रोगियों को आश्वस्त करती है कि प्रयोगशाला वैश्विक स्तर पर स्वीकृत गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सटीक, विश्वसनीय और सुरक्षित नैदानिक ​​परिणाम प्रदान करती है। यह उपलब्धि प्रयोगशाला के एक प्रारंभिक स्तर की एनएबीएल-प्रमाणित सुविधा से पूर्णतः स्थापित, मान्यता प्राप्त उत्कृष्टता केंद्र में परिवर्तन का प्रतीक है।

श्री प्रतापराव जाधव, माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय ने कहा, “आईएसओ 15189:2022 जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मान्यता प्राप्त होने से यह सुनिश्चित होता है कि रोगियों को विश्वसनीय और सटीक निदान सेवाएं मिलें। ये सेवाएं प्रभावी उपचार और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए आवश्यक हैं। सीएआरआई बेंगलुरु की यह उपलब्धि दर्शाती है कि मंत्रालय किस प्रकार आयुष के बुनियादी ढांचे को गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानक में परिवर्तित कर रहा है।”

वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय ने कहा, “सीएआरआई बेंगलुरु का जैव रसायन और रुधिरविज्ञान दोनों में आईएसओ 15189:2022 मान्यता प्राप्त करने वाला पहला सीसीआरएएस संस्थान बनना, उच्च गुणवत्ता वाले निदान को पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ एक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह प्रमाण-आधारित अभ्यास, अनुसंधान और रोगी-केंद्रित देखभाल पर हमारे ध्यान को और मजबूत करता है।”

सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर रबीनारायण आचार्य ने कहा, “सीएआरआई बेंगलुरु को हाल ही में प्राप्त एनएबीएल मान्यता, इसके पूर्व एनएबीएच और एनएबीएल के प्रांरभिक प्रमाणन और चल रही बीआईएस आईएस/आईएसओ 9001:2015 प्रगति के आधार पर, साथ ही आयुष मंत्रालय के तहत एक आयुर्वेद विज्ञान इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में इसकी भूमिका, गुणवत्ता मानकों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है। इससे आयुर्वेद अनुसंधान और नवाचार को वैज्ञानिक श्रेष्‍ठता और उत्कृष्टता के उच्चतम स्तर पर स्थापित किया जा सकता है।”

बेंगलुरु स्थित सीएआरआई की प्रमुख डॉ. सुलोचना भट ने कहा, “आईएसओ 15189:2022 मान्यता प्राप्त करना हमारे संस्थान के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह उच्च गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और रोगी-केंद्रित नैदानिक ​​सेवाएं प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह उपलब्धि न केवल हमारी नैदानिक ​​क्षमताओं को मजबूत करती है, बल्कि सीसीआरएएस के अंतर्गत एक अग्रणी संस्थान के रूप में हमारी भूमिका को भी सुदृढ़ करती है। यह उपलब्धि डॉ. विद्याश्री आंचन (रोग विज्ञान अनुसंधान अधिकारी) और सीएआरआई टीम के अथक प्रयासों के कारण संभव हो पाई है।”

वर्तमान में इस प्रयोगशाला को जैव रसायन और रुधिरविज्ञान के अंतर्गत 50 परीक्षण मापदंडों के लिए एनएबीएल से मान्यता प्राप्त है। यह रक्त शर्करा, एचबीए1सी, यकृत और गुर्दे की कार्यक्षमता के परीक्षण, लिपिड और थायरॉइड प्रोफाइल, इलेक्ट्रोलाइट्स और संपूर्ण रक्त गणना सहित कई प्रकार की नैदानिक ​​सेवाएं प्रदान करती है। इससे चयापचय, हार्मोन और रक्त संबंधी स्थितियों का सटीक मूल्यांकन संभव हो पाता है।

2025-26 के दौरान, प्रयोगशाला ने 1.52 लाख से अधिक जांचें कीं और 9,300 से अधिक रोगियों को सेवाएं प्रदान की। यह गुणवत्तापूर्ण निदान के प्रति इसकी बढ़ती क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्नत प्रणालियों और डिजिटल रिपोर्टिंग उपकरणों से सुसज्जित होने के कारण, रोगियों को त्वरित परिणाम, बेहतर सटीकता के साथ एसएमएस, ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से रिपोर्ट मिलती है।

नैदानिक, अनुसंधान और निदान सेवाओं में संस्थान की निरंतर प्रगति इस उपलब्धि को और भी पुष्ट करती है। ओपीडी में आने वाले रोगियों की संख्या 2021 में 18,918 से बढ़कर 2026 में 51,300 से अधिक हो गई है। यह वृद्धि जनता के विश्वास और पहुंच को दर्शाती है। प्रयोगशाला परीक्षणों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है—2021 में मात्र 2,770 परीक्षणों से बढ़कर 2026 में 1.55 लाख से अधिक हो गई है जो इसकी बढ़ी  हुई निदान क्षमता को दर्शाती है। इसी प्रकार, इस अवधि के दौरान पंचकर्म और पैरा- सर्जिकल प्रक्रियाओं में लगभग बीस गुना वृद्धि हुई है, जबकि अनुसंधान कार्य प्रतिवर्ष लगभग 20-25 परियोजनाओं के साथ लगातार मजबूत बनी हुई हैं। जुलाई 2024 में इनपेशेंट सेवाओं की शुरुआत के बाद से, बेड की उपलब्धता लगभग पूरी हो चुकी है, जो एकीकृत देखभाल की बढ़ती मांग को दर्शाती है। संस्थान ने औषधीय पौधों के प्रमाणीकरण में भी अपनी भूमिका को मजबूत किया है और पिछले कुछ वर्षों में प्रमाणीकरण प्रयासों को काफी हद तक बढ़ाया है।

यह उपलब्धि निरंतर प्रयासों और संस्थागत प्रतिबद्धता का परिणाम है। एक अर्ध-स्वचालित जैव रसायन विश्लेषक से शुरू होकर, आयुष मंत्रालय की उत्कृष्टता केंद्र योजना के तहत प्रयोगशाला को धीरे-धीरे पूर्णतः स्वचालित प्रणालियों से सुसज्जित किया गया। नवंबर 2022 में एनएबीएल प्रारंभिक प्रमाणन के बाद, प्रयोगशाला ने उच्‍च गुणवत्ता कार्यान्वयन, प्रलेखन और मूल्यांकन प्रक्रियाओं के माध्यम से अधिक सख्त आईएसओ 15189:2022 मानकों को पूरा करने की दिशा में प्रगति की।

यह प्रयोगशाला आयुर्वेद और आयुष-आधारित उपचारों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, नैदानिक ​​निर्णय लेने के लिए विश्वसनीय नैदानिक ​​डेटा प्रदान करती है, रोगी की प्रगति की निगरानी करती है और अनुसंधान परिणामों को मजबूत करती है।

ध्‍यान देने योग्‍य है कि सीएआरआई बेंगलुरु 2021-22 के दौरान एनएबीएच और एनएबीएल दोनों प्रारंभिक प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाला पहला सीसीआरएएस संस्थान बना और यह बीआईएस आईएस/आईएसओ 9001:2015 प्रमाणन की दिशा में भी बढ़ रहा है जो गुणवत्ता, सटीकता और उत्कृष्टता के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए, संस्थान मान्यता प्राप्त परीक्षणों की संख्‍या बढ़ाने और निदान क्षमताओं को बढ़ाने की योजना बना रहा है ताकि जनता को अधिक व्यापक, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा सके।