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भारत 2035 तक 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन बनाने की दिशा में बढ़े: नीति आयोग

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

NITI Aayog ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत को 2035 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में केवल भागीदार की भूमिका तक सीमित रहने के बजाय नेतृत्वकारी स्थिति हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके लिए देश में 120 से 150 अरब डॉलर तक की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता बताई गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दशक में सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे रणनीतिक और तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र रहेगा, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा, टेलीकॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी प्रमुख तकनीकों की रीढ़ है।

नीति आयोग के अनुसार, भारत पहले ही इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और निर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है, लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करना जरूरी है, जिसमें डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और सप्लाई चेन सभी शामिल हों।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हाल के वर्षों में आए व्यवधानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देशों के लिए सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोविड-19 महामारी और उसके बाद की भू-राजनीतिक तनावों ने इस उद्योग की संवेदनशीलता को और उजागर किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास इस क्षेत्र में बड़ी क्षमता है, खासकर उसके विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और बढ़ते घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के कारण। हालांकि, उच्च तकनीकी निवेश, अनुसंधान एवं विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को निजी क्षेत्र के साथ मिलकर दीर्घकालिक नीति स्थिरता, कर प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

नीति आयोग ने कहा कि यदि भारत इस दिशा में सफल होता है, तो वह न केवल आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

फिलहाल यह लक्ष्य भारत की औद्योगिक और तकनीकी नीति में एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जो आने वाले दशक में देश की आर्थिक संरचना को भी प्रभावित कर सकता है।

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