स्वालकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर बढ़ा तनाव: पाकिस्तान ने भारत को लिखी एक और चिट्ठी, सिंधु जल संधि का दिया हवाला
इंटरनेशनल डेस्क : जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहे स्वालकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट के बारे में भारत से जानकारी और सलाह मांगी है।
पाकिस्तान की नई चिट्ठी: पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने पुष्टि की है कि 11 फरवरी, 2026 को भारतीय सिंधु जल कमिश्नर को एक नई चिट्ठी भेजी गई है। इस चिट्ठी के जरिए पाकिस्तान ने 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) के तहत स्वालकोट प्रोजेक्ट पर विस्तृत जानकारी और परामर्श की मांग की है। इससे पहले पिछले साल जुलाई में भी पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर पत्र लिखा था।
प्रोजेक्ट की खासियत:क्षमता: यह 1,856 मेगावाट (MW) का एक विशाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है।प्रकार: यह ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट है, जिसका अर्थ है कि इसमें नदी के प्राकृतिक बहाव का उपयोग किया जाता है और पानी का स्टोरेज बहुत कम या बिल्कुल नहीं किया जाता।
स्थान: यह केंद्र शासित प्रदेश के रामबन में चिनाब नदी पर बनाया जा रहा है।
महत्व: इसे जम्मू-कश्मीर के लिए सामरिक (स्ट्रैटेजिक) और ऊर्जा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तनावपूर्ण संबंधों के बीच विवाद: पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को “रोक” (Suspend) देने सहित कई सख्त फैसले लिए थे। पाकिस्तान का कहना है कि भारत की कोई भी एकतरफा कार्रवाई कानूनी हकीकत को नहीं बदल सकती और उसने भारत से संधि का पूरी तरह पालन करने की अपील की है।
लंबे समय से लंबित योजना: स्वालकोट प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 1984 में हुई थी, लेकिन निर्माण में देरी के कारण यह लंबे समय से चर्चा में रहा है। वर्तमान में रामबन में इसका काम चल रहा है, जिसे लेकर पाकिस्तान अपनी आपत्तियां दर्ज कराता रहा है।

