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प्रधानमंत्री ने भारत-इटली संबंधों पर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ एक संयुक्त संपादकीय लेख लिखा

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बताया कि उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री सुश्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ मिलकर एक संयुक्त लेख लिखा है, जिसमें इस पक्ष का विस्तार से वर्णन किया गया है कि भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध एक निर्णायक चरण पर पहुंच गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच का संबंध एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह मजबूत संबंध नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण से प्रेरित है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

मैंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ मिलकर एक संपादकीय लेख लिखा है जिसमें जानकारी दी गई है कि भारत-इटली संबंध एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। हमारी साझेदारी नवाचार, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण से प्रेरित एक विशेष रणनीतिक साझेदारी है।

पीएम मोदी ने 594 किमी लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेस-वे का किया उद्घाटन

दिल्ली/सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के हरदोई जिलें में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। भगवान नरसिम्हा की पवित्र भूमि और कुछ किलोमीटर दूर बहने वाली मां गंगा की दिव्य उपस्थिति को नमन करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पूरा क्षेत्र नदी की आध्यात्मिक और पोषणकारी कृपा से धन्य एक तीर्थस्थल है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अवसंरचना निर्माण की गति को अभूतपूर्व रूप से तेज किया है। उन्‍होंने बताया कि देश के सबसे लंबे हरित गलियारे वाले एक्सप्रेसवे में से एक, गंगा एक्सप्रेसवे, को पांच वर्ष से भी कम समय में पूरा किया गया है। तेज गति से आधुनिकीकरण के अपने विजन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह वर्तमान सरकार के काम की गति है! यह वर्तमान सरकार के काम करने का तरीका है।


इस एक्सप्रेसवे के रणनीतिक महत्व को बताते हुए पीएम ने कहा कि लगभग 600 किमी लंबा यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान क्षेत्रों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ेगा। इससे बारह जिलों के करोड़ों नागरिकों को लाभी मिलेगा। मोदी ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक तेज रफ्तार सड़क नहीं है। यह नई संभावनाओं, नए सपनों और नए अवसरों का द्वार है।


एक्सप्रेसवे के कनेक्टिविटी लाभों पर प्रकाश डालते हुए पीएम ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ता है, साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की अपार संभावनाओं को भी करीब लाता है, जिसके किनारों पर वाहनों के दौड़ने के साथ-साथ नए औद्योगिक अवसर सृजित होंगे।


अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में राज्य की उभरती भूमिका को रेखांकित करते हुए मोदी ने नोएडा में हाल ही में हुए सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखे जाने का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह राज्‍य भविष्‍य की एआई आधारित अर्थव्‍यवस्‍था में अग्रणी बन रहा है।


उन्‍होंने राज्‍य में कनेक्टिविटी के व्‍यापक विस्‍तार का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पहले जहां बहुत कम हवाई अड्डे थे, आज 21 हवाई अड्डें सं‍चालित हो रहे हैं, जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं। उन्‍होंने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उल्‍लेख किया, जो गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से कुछ ही घंटों की दूरी पर है।


उत्तर प्रदेश के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक पिछला दौर था, जब राज्‍य अपराध और अराजकता से जुड़ा था, लेकिन आज कानून-व्‍यवस्‍था एक मिसाल बन गई है। मोदी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उदाहरण पूरे देश में दिया जाता है।


भारत की व्यापक सभ्यतागत और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के विकास को रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य का परिवर्तन राष्ट्र के मूल संकल्प को साकार करता है। श्री मोदी ने कहा कि आज पूरा देश एक ही संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है – विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
वैश्विक अस्थिरता और भारत के उदय के बाहरी विरोध को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने बाहरी खतरों के बावजूद विकास के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। श्री मोदी ने कहा कि हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि विकास की नई उपलब्धियां भी हासिल कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं।


गंगा एक्सप्रेसवे को इस व्यापक विकास प्रतिमान का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में उत्तर प्रदेश के लोगों पर भरोसा जताया कि वे उभरते अवसरों को वास्तविक समृद्धि में बदल देंगे। श्री मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि गंगा एक्सप्रेसवे जो अवसर लेकर आएगा, उत्‍तर प्रदेश के लोग उन अवसरों को अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से साकार कर देंगे।

प्रधानमंत्री ने असम में चाय बागान का दौरा किया, वहां काम करने वाली महिलाओं से बात की

गुवाहाटी, एक अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को असम के डिब्रूगढ़ जिले में एक चाय बागान का दौरा किया और वहां काम कर रहीं महिला श्रमिकों से बातचीत की।

मोदी भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में दो चुनावी रैलियों को संबोधित करने के लिए राज्य के एक दिवसीय दौरे पर हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘मनोहारी टी इस्टेट’ का दौरा करने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘हम हर चाय जनजाति परिवार के प्रयासों पर अत्यंत गर्व महसूस करते हैं। उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने असम के गौरव को बढ़ाया है।’’

मोदी को महिलाओं के एक समूह के साथ चाय की पत्तियां तोड़ते हुए भी देखा गया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘चाय की पत्तियां तोड़ने के बाद महिलाओं ने अपनी संस्कृति के बारे में बात की और अंत में एक सेल्फी भी ली!’’

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि ये डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान की कुछ झलकियां हैं।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज परम पूज्‍य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक कल्याण और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान से देश की हर पीढ़ी निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित होती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

“पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः
स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।

नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः
परोपकाराय सतां विभूतयः॥”

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“मानवता के अनन्य उपासक परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी को उनकी जन्म-जयंती पर कोटि-कोटि नमन! शिक्षा, समाज कल्याण और अध्यात्म के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान देश की हर पीढ़ी को निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर शुभकामनाएं दीं

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पवित्र अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। श्री मोदी ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन और शिक्षाएं सत्य, अहिंसा और करुणा के मार्ग को प्रकाशित करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “उनके आदर्श आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी हैं और आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। समानता और करूणा के लिए उनका भाव हमें समाज के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी का स्मरण कराता है।”

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पवित्र अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान महावीर का जीवन और शिक्षाएं सदैव सत्य, अहिंसा और करुणा के मार्ग को प्रकाशित करती  हैं। उनके आदर्श आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी हैं और आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। समानता और करूणा के लिए उनका भाव, हमें समाज के प्रति हमारे साझा उत्तरदायित्व का स्मरण कराता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सूरीनाम के राष्ट्रपति के निधन पर शोक व्यक्त किया

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी के निधन पर मंगलवार को शोक व्यक्त किया और कहा कि उनका निधन न केवल उनके अपने देश के लिए बल्कि वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए भी अपूरणीय क्षति है।

मोदी ने कहा कि संतोखी को भारतीय संस्कृति के प्रति विशेष लगाव था और उन्होंने संस्कृत में शपथ लेकर अनेक लोगों के दिल जीते थे।

उन्होंने संदेश में कहा, “मेरे मित्र और सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति श्री चंद्रिकाप्रसाद संतोखी जी के अचानक निधन से मैं गहरे सदमे और दुःख में हूं। यह केवल सूरीनाम के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए भी अपूरणीय क्षति है।”

प्रधानमंत्री ने संतोखी के साथ अपनी कई मुलाकातों को भी याद किया और कहा कि सूरीनाम के नेता की देश के लिए निष्ठावान सेवा और भारत-सूरीनाम संबंधों को मजबूत करने के प्रयास उनके साथ हुई बातचीत में स्पष्ट रूप से झलकते थे।

उन्होंने कहा, “इस दुःख की घड़ी में मैं उनके परिवार और सूरीनाम के लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ओम शांति।”

संतोखी (67) 2020 से 2025 तक सूरीनाम के राष्ट्रपति रहे। वह सूरीनाम की प्रोग्रेसिव रिफॉर्म पार्टी के अध्यक्ष भी थे और 2005 से 2010 तक देश के न्याय मंत्री भी रहे।

प्रधानमंत्री 28 मार्च को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे


प्रधानमंत्री लगभग 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन प्रणालियों के निर्बाध जुड़ाव के साथ बहु-मोडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है

हवाई अड्डे में एक बहु-मोडल कार्गो हब भी शामिल है, जिसे प्रति वर्ष 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल ढुलाई के लिए तैयार किया गया है, इस क्षमता को लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है

हवाई अड्डे की प्रारंभिक यात्री संचालन क्षमता 12 मिलियन यात्री प्रति वर्ष (एमपीपीए) होगी, जिसे 70 मिलियन एमपीपीए तक बढ़ाया जा सकता है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 28 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। सुबह लगभग 11:30 बजे वे गौतम बुद्ध नगर में जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर लगभग 12 बजे प्रधानमंत्री नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन भारत के वैश्विक विमानन केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में परिकल्पित यह हवाई अड्डा, देश के हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संपर्क को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के लिए दूसरे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है, जो इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का पूरक है। ये दोनों हवाई अड्डे मिलकर एक एकीकृत विमानन प्रणाली के रूप में कार्य करेंगे, जिससे भीड़ कम होगी, यात्री क्षमता बढ़ेगी और दिल्ली एनसीआर को वैश्विक विमानन केंद्रों में अग्रणी स्थान प्राप्त होगा।

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं में से एक है। नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत लगभग 11,200 करोड़ रुपये के कुल निवेश से विकसित किया गया है। प्रारंभिक चरण में हवाई अड्डे की यात्री संचालन क्षमता 12 मिलियन यात्री प्रति वर्ष (एमपीपीए) होगी, जो हवाई अड्डे के पूर्ण विकसित होने तक 70 एमपीपीए तक हो जाएगा। इसमें 3,900 मीटर लंबा रनवे है जो बड़े आकार के विमानों के संचालन में सक्षम है। इसके साथ ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग सहित आधुनिक नेविगेशन सिस्टम हैं, जो हर मौसम में दिन-रात संचालन में कुशल है।

इस हवाई अड्डे में एक सुदृढ़ कार्गो प्रणाली भी शामिल है, जिसमें एक मल्टी-मोडल कार्गो हब, इंटीग्रेटेड कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स जोन शामिल हैं। कार्गो सुविधा को प्रति वर्ष 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल ढुलाई के लिए तैयार किया गया है, जिसे लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है और इसमें 40 एकड़ का एक समर्पित रखरखाव, मरम्मत तथा ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा क्षेत्र भी शामिल है।

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को एक सतत और भविष्य के लिए तैयार अवसंरचना परियोजना के रूप में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा-कुशल प्रणालियों और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाओं को जोड़ते हुए शून्य उत्सर्जन वाली सुविधा के रूप में संचालित होना है। इसकी स्थापत्य शैली भारतीय विरासत से प्रेरित है, जिसमें पारंपरिक घाटों और हवेलियों की याद दिलाने वाले तत्व शामिल हैं जिससे सांस्कृतिक सौंदर्यशास्त्र आधुनिक अवसंरचना के साथ मिश्रित होता है।

यमुना एक्सप्रेसवे पर रणनीतिक रूप से स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन प्रणालियों के निर्बाध जुड़ाव के साथ एक बहु-मोडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जो यात्रियों और माल ढुलाई के लिए कुशल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है।

किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: पीएम मोदी ने जारी की PM-Kisan की 22वीं किस्त, 9.32 करोड़ खातों में पहुंचे ₹18,640 करोड़

नेशनल डेस्क : देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए आज का दिन बड़ी राहत लेकर आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के गुवाहाटी से एक सिंगल क्लिक के जरिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना की 22वीं किस्त जारी कर दी है। इस कदम से देशभर के 9.32 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में सीधे ₹18,640 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई है।

सीधे खातों में मदद: योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो ₹2,000 की तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।

अब तक का कुल वितरण: प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि इस योजना की शुरुआत से अब तक किसानों के खातों में सवा 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि भेजी जा चुकी है।

असम के किसानों को लाभ: अकेले असम राज्य के करीब 19 लाख किसानों को अब तक ₹8,000 करोड़ से ज्यादा की मदद मिल चुकी है।अगर खाते में पैसे नहीं आए तो क्या करें? सूत्रों के अनुसार, यदि किसी किसान के खाते में 22वीं किस्त नहीं पहुँची है, तो इसके पीछे कुछ तकनीकी कारण हो सकते हैं:-

e-KYC का पूरा न होना।

-बैंक खाते का आधार कार्ड से लिंक न होना।

-जमीन से जुड़े दस्तावेजों (Land Records) का सत्यापन न होना।

-लाभार्थी का इनकम टैक्स के दायरे में आना।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों का डेटा पूरी तरह अपडेट है, उनके खातों में राशि सफलतापूर्वक भेज दी गई है।

क्या ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कोई आश्वासन दिया है: केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया

 नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शुक्रवार को सवाल किया कि क्या ईरान ने यह आश्वासन दिया है कि भारतीय पोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने दिया जाएगा।

केजरीवाल ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बृहस्पतिवार रात फोन पर बात कर पश्चिम एशिया की ‘‘गंभीर स्थिति’’ पर चर्चा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति को बताया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री जी, क्या ईरान के राष्ट्रपति ने आपको आश्वासन दिया है कि वह हमारे पोतों को होर्मुज से निकलने देंगे? क्या देशवासियों को इस गंभीर संकट से जल्द छुटकारा मिलेगा?’’

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा आता है।

भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने तीन दिन पहले उस समय गोलीबारी की जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था।

अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान! रावी का पानी रोकेगा भारत, शाहपुर कंडी बांध से सीमांत जिलों में आएगी खुशहाली

नेशनल डेस्क : भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना (Shahpur Kandi Dam Project) का काम 31 मार्च, 2026 तक पूरा होने वाला है, जिसके बाद रावी नदी का जो पानी अब तक पाकिस्तान जा रहा था, उसका उपयोग भारत अपने राज्यों में सिंचाई के लिए करेगा।

जम्मू-कश्मीर और पंजाब को मिलेगा भरपूर पानी: इस बांध के पूरी तरह चालू होने से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखे प्रभावित जिलों में सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 32,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई में मदद करेगा, जिससे पंजाब की 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा खेती योग्य जमीन को सीधा लाभ होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जनता को पर्याप्त पानी मुहैया कराना है।

पाकिस्तान पर मंडराया सूखे का संकट : भारत के इस कदम से पाकिस्तान के लिए आने वाली गर्मियां बेहद मुश्किल हो सकती हैं। पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है और रावी का पानी रुकने से उसके पंजाब प्रांत की सिंचाई व्यवस्था चरमरा सकती है। इसका सीधा असर लाहौर और मुल्तान जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति पर पड़ेगा, जिससे पाकिस्तान की पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बड़ा झटका लग सकता है।

46 साल बाद पूरा हो रहा है सपना : इस प्रोजेक्ट की नींव 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी, लेकिन आपसी विवादों के कारण यह 46 सालों तक लटका रहा। 2018 में मोदी सरकार के दखल के बाद इस काम में तेजी आई।

भारत का यह कदम 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि रावी, सतलुज और ब्यास जैसी पूर्वी नदियों के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने अन्य नदियों पर भी हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स का काम तेज कर दिया है।