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रक्षा से कृषि और मेडिकल से ब्रह्मोस मिसाइल तक, भारत-इंडोनेशिया में इन समझौतों पर लगी मुहर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया दौरे पर राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान रक्षा, कृषि और खनिज सहित 14 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इसमें इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति भी शामिल है. पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत और इंडोनेशिया के बीच साझेदारी का सुनहरा अध्याय है. दोनों देश हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे है

पीएम मोदी, प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन है. मंगलवार को उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई 14 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भवन इस्ताना मर्देका में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया. गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें (पीएम मोदी) इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान से भी नवाजा गया.

प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए इंडोनेशिया और राष्ट्रपति सुबियांतो का आभार जताया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच साझेदारी का सुनहरा अध्याय है. दोनों देश हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे हैं. ये सम्मान कोरोड़ों भारतीयों का सम्मान है. दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, कृषि, इंडस्ट्री जैसे कई समझौतों पर मुहर लगी. इंडोनेशिया की सेना को ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति करने संबंधी समझौते पर दोनों ने हस्ताक्षर किए. कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों में डील हुई. खनिज-इस्पात आपूर्ति में समझौते हुए, चिकित्सा उत्पाद में डील हुई.

हम हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं- PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि 2018 में बनी हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी आज एक नई उड़ान ले रही है. हम विकास, सुरक्षा, तकनीक, संस्कृति और शिक्षा…हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं. हमारे देशों के बीच बढ़ता विश्वास हमारी रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है. आज हमने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई.

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हुए समझौते से भारत की किफायती दवाइयां इंडोनेशिया को और सहजता से उपलब्ध होंगी. हम इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा कर्मी की क्षमता निर्माण में भी योगदान देंगे. भारत में विकसित किए गए गेहूं के बीज की आपूर्ति से, इंडोनेशिया की खाद्य सुरक्षा और मजबूत होगी. हम एक दूसरे के साथ सतत खेती और कृषि प्रौद्योगिकी में सर्वोत्तम प्रथाएं भी साझा करेंगे.

‘इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बेंगलुरु का कैंपस’

पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी टेक्नोलॉजी पर आधारित है. हमारे युवाओं में तकनीक के प्रति स्वाभाविक रुझान है. हमें अपने युवाओं के बीच एआई, टेलिकॉम, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए आज एक अहम समझौता किया है. हम दोनों देशों के बीच स्टार्टअप सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमत हुए हैं. हम इंडोनेशिया में IIM बेंगलुरु का कैंपस खोलने जा रहे हैं.

भारत-इंडोनेशिया के बीच 14 अहम समझौते

  1. अंतरिक्ष सहयोग का विस्तार
  2. मेडिकल प्रोडक्ट्स रेगुलेशन में सहयोग
  3. खनिज एवं स्टील सप्लाई चेन
  4. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग
  5. समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार
  6. आपदा प्रबंधन सहयोग
  7. दूरसंचार तकनीक और सेवाएं
  8. अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार
  9. स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग
  10. चुनाव आयोगों के बीच सहयोग
  11. ब्रह्मोस मिसाइल सहयोग
  12. एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग
  13. SAIL और Krakatau Steel का संयुक्त उद्यम
  14. रेयर अर्थ मैग्नेट्स का विकास

PM मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन

इसके अलावा भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री संरक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया. दोनों देशों ने स्टील सप्लाई चेन के लिए मिनरल्स और टेक्नोलॉजी पर समझौते पर हस्ताक्षर किए. बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में कल यानी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे. एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत किया गया.

Pm Modi Indonesia President Prabowo Subianto..

2018 के बाद पहली PM मोदी की पहली द्विपक्षीय यात्रा

साल 2018 में भारत और इंडोनेशिया ने अपने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया था. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है. ​इस यात्रा से भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को और मजबूती मिलेगी. दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी बढ़ेगी. बता दें कि दोनों देश समंदर में सुरक्षा, साझा सैन्य अभ्यास और डिफेंस इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं.

केंद्र का बड़ा एक्शन: 23 और व्यक्तियों को घोषित किया गया ‘आतंकवादी’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 23 और व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किया है. यह कार्रवाई केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में की गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट है और किसी भी आतंकी गतिविधि या उसके समर्थकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.

मंत्रालय ने बताया कि ये व्यक्ति भारत-विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमलों की साजिश और उन्हें अंजाम देने, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ कराने, प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सहायता करने, आतंकवाद के लिए धन जुटाने तथा आतंकवादियों की भर्ती जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त रहे हैं.

गृह मंत्रालय का मानना है कि इन व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, आवाजाही, भर्ती क्षमता और अन्य आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी. साथ ही, ये कदम आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.

गृहमंत्रालय ने जिन 23 आतंकियों प्रतिबंधित किया है उनका विस्तृत डिटेल :

  • मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ मुफ्ती मसूद इलियास उर्फ मसूद इलियास उर्फ अबु मोहम्मद उर्फ एम. मसूद इलियास की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है और वह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मौलाना मसूद अज़हर का विश्वासपात्र और कश्मीर में घुसपैठ का मुख्य समन्वयक है. वह सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं को आतंकी गुटों में भर्ती करने और टेरर फंडिंग जुटाने में सक्रिय है. उसने अप्रैल 2022 में जम्मू के संजवान में PDP कार्यालय के पास नाका पार्टी पर हुए हमले को अंजाम दिया था.
  • मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर उर्फ अब्दुल मनन उर्फ सज्जाद उर्फ हमज़ा उर्फ वाहिद ख़ान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह लसिंयाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर है जो सीमा पर सुरंगों के माध्यम से घुसपैठ कराता है. वह ड्रोन के जरिए हथियारों और गोला-बारूद की खेप भारत भेजने में शामिल रहा है. इसके अलावा, वह अयोध्या के आर.जे.बी. परिसर, नागपुर के आरएसएस मुख्यालय और पानीपत की आई.ओ.सी.एल. रिफाइनरी जैसे रणनीतिक स्थानों की टोह लेने में संलिप्त था.
  • मुफ्ती मोहम्मद असग़र खान उर्फ अबू साद उर्फ साद जिमी की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह PoK में JeM का अमीर और सैन्य विंग का प्रमुख है. वह जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए आतंकवादी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है. वह मुज़फ्फराबाद में आतंकियों को जेहादी और सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए कैंप चलाता है.
  • हाफ़िज़ अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) / हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (HuM) से संबंध रखता है. उसने नगरोटा सेना शिविर पर हमले के लिए सांबा-कठुआ सेक्टर से तीन पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ कराई थी. उसने 1995/96 के दौरान अफगान युद्ध में भाग लिया था और वह आईएसआई (ISI) की मदद से आतंकी गतिविधियों का समन्वय करता है. वह JeM की शासी परिषद (शूरा) का सदस्य है.
  • अब्दुल्ला जिहादी उर्फ शाहनवाज़ उर्फ अल हिजामा की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मुफ्ती असगर खान का सह-षड्यंत्रकारी है और उत्तरी कश्मीर क्षेत्र में आतंकियों की घुसपैठ की सुविधा प्रदान करता है. उसने भारत सरकार के खिलाफ घृणा और असंतोष फैलाने के प्रयास किए हैं. वह कुपवाड़ा और बारामूला जिलों में स्थित कई लॉन्चिंग कैंपों का प्रबंधन संभालता था.
  • फ़िरदौस अहमद भट की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह लश्कर-ए-तैयबा का लॉन्चिंग कमांडर है जो वर्ष 2018 में वैध दस्तावेजों के सहारे वाघा सीमा से पाकिस्तान चला गया था. वह नियंत्रण रेखा (LoC) के पार विदेशी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित मार्ग का प्रबंधन करता है. इसके साथ ही, वह ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को हथियार मुहैया कराने और दक्षिण कश्मीर के युवाओं को भड़काकर आतंक में भर्ती करने का काम करता है.
  • गुलाम फरीद उर्फ गुलशन कुमार उर्फ फरीद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद से संबंध रखता है. उसने वर्ष 2001 से 2005 तक पाकिस्तानी सेना में सेवा की थी. इसके बाद वह सितंबर 2008 में बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ. दिसंबर 2008 में उसे जम्मू से गिरफ्तार किया गया था और बाद में जुलाई 2019 में उसे पाकिस्तान वापस निर्वासित कर दिया गया.
  • हारून रशीद गनई उर्फ शुनू की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह मार्च 2018 में वैध दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान गया और वहां लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया. वह कश्मीर घाटी के युवाओं को आतंकी रैंकों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर्स को हथियार तथा गोला-बारूद की आपूर्ति करता है.
  • बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – मुज़फ्फराबाद, PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से संबंध रखता है. वह सीमा पार (पाकिस्तान/PoK) से बैठकर स्थानीय कश्मीरी युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने और भड़काने की साजिश रचता है. इसके अलावा, वह कश्मीर घाटी में हथियारों, गोला-बारूद और रसद की अवैध आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन में सीधे तौर पर शामिल है.
  • आबिद कयूम लोन की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह फरवरी 2020 में अटारी चेक पोस्ट के माध्यम से पाकिस्तान गया और वापस नहीं लौटा. वह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों की योजना बनाने और लश्कर के लिए धन जुटाने का काम करता है. वह नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से पाकिस्तान से भारत में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों (नारकोटिक्स) की तस्करी करता है, जिससे प्राप्त धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है.
  • नज़ीर अहमद गुज्जर उर्फ अबू मनाज़िल की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – इस्लामाबाद, पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2006 में नियंत्रण रेखा पार कर PoK चला गया था. उसने डोडा और किश्तवाड़ क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय युवाओं को भर्ती किया. वह ड्रोन का उपयोग करके सांबा और आर.एस. पुरा सेक्टर से भारतीय क्षेत्र में हथियारों और गोला-बारूद की खेप भेजने का मुख्य ऑपरेटर रहा है.
  • अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रौफ उर्फ हाफिज अब्दुर रौफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) / फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) से संबंध रखता है. वह 1999 से लश्कर का एक वरिष्ठ नेता है और आतंकी हाफिज सईद की सीधी कमान के अधीन काम करता है. वह ‘फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन’ (FIF) और अल-मदीना वेलफेयर ट्रस्ट जैसे धर्मार्थ संगठनों की आड़ में लश्कर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन और जनसमर्थन जुटाने का काम करता है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने उसे ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (SDGT) घोषित किया है.
  • अशफाक अहमद उर्फ इशफाक अहमद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2000 में जैश में शामिल हुआ और बहावलपुर में ‘शुआबा हदीस’ और अल-रहमत ट्रस्ट (जैश का चैरिटी विंग) का प्रभारी है. उसे पाक-अधिकृत कश्मीर में जेहादी प्रशिक्षण मिला था. वह जनवरी 2016 के पठानकोट वायुसेना स्टेशन हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के ग्राहकों में से एक पाया गया था.
  • हाफिज खालिद वालीद उर्फ हाफिज खालिद नाइक उर्फ खालिद वालिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह लश्कर प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद का दामाद है और वर्ष 2003 से लश्कर की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य रहा है. वह जून 2016 में हुए पम्पोर हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के आठ जवान शहीद हुए थे. अगस्त 2012 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया था.
  • मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की उर्फ मौलाना इमदाद उर्फ इमदाद भाई उर्फ मौलाना इमददुल्लाह की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह जैश के कैदियों के विंग (शोबा-ए-असीरन) का अमीर और संगठन के कानूनी मामलों का प्रमुख है. वह मौलाना मसूद अज़हर और उसके डिप्टी मुफ्ती अब्दुल रऊफ असघर का बेहद करीबी सहयोगी है. वह जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकवादियों के साथ वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करने में शामिल था.
  • मौलाना सैफुल्लाह खालिद उर्फ वलियुल उर्फ मोहम्मद सलीम उर्फ वाजिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) से संबंध रखता है. वह पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग का महासचिव है और पहले मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) का अध्यक्ष रह चुका है. उसने लश्कर और जमात-उद-दावा के कई विंग्स (जैसे प्रचार विभाग, नियंत्रण और सुधार विंग) के प्रमुख के रूप में कार्य किया है. अप्रैल 2018 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी (SDGT) सूची में शामिल किया था.
  • मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा उर्फ समामा इल्यास उर्फ वारिस अली की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्तमान में इस्लामाबाद (चट्टा बख्तावर) से लश्कर के ऑपरेशन कमांडर के रूप में काम कर रहा है. वह भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कश्मीर घाटी में सक्रिय अन्य लश्कर कैडरों के साथ वित्तीय और साजो-सामान (लॉजिस्टिक्स) सहायता का समन्वय करता है. इसके खिलाफ श्रीनगर के CI कश्मीर पुलिस स्टेशन में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) के अधीन मामला दर्ज है.
  • मौलाना यूसुफ ताईबी उर्फ मोहम्मद यूसुफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. यह LeT/JuD का एक केंद्रीय नेता है जो वर्तमान में संगठन के नियंत्रण और सुधार (दावत-ओ-इस्लाह) विंग से जुड़ा हुआ है. वह पूर्व में कराची स्थित LeT/JuD से संबद्ध संस्था ‘जामिया अल-दीरासत अल-इस्लामिया ट्रस्ट’ (JADIAT) का प्रभारी रह चुका है. वर्तमान में वह लाहौर के ‘अल-क़दसिया इस्लामिक सेंटर’ से जुड़ा है और पंजाब के सरगोधा मरकज़ में शुक्रवार को धार्मिक उपदेश (खुतबा) देने का काम करता है.
  • ओवैस फारूज़ उर्फ ओवैस अहमद मीर उर्फ ओवैस फारूज़ मीर की राष्ट्रीयता भारत है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह अप्रैल 2018 में वैध भारतीय पासपोर्ट पर वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान गया और LeT के आतंकवादी रैंक में शामिल हो. जनवरी 2023 में उसके भाई फरज़ान फिरोज़ को श्रीनगर पुलिस ने 450 ग्राम हेरोइन (कीमत लगभग 9.95 लाख रुपये) और LeT के लेटर पैड के साथ गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ NIA कोर्ट, पुलवामा ने धारा 82 CrPC के अधीन उद्घोषणा आदेश जारी किया है.
  • क़ारी याक़ूब शेख उर्फ क़ारी मोहम्मद याक़ूब शेख उर्फ याक़ूब शेख उर्फ क़ारी शेख मुहम्मद याकूब उर्फ मोहम्मद याकूब की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा पाकिस्तान मरकाजी मुस्लिम लीग (PMML) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह JuD का एक केंद्रीय नेता और उसकी केंद्रीय ‘दवाती टीम’ का सदस्य है. उसने 2018 के पाकिस्तानी आम चुनाव में मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. वह सऊदी अरब में लश्कर और JuD के लिए फंड इकट्ठा करने के मिशनों में प्रमुखता से शामिल रहा है. अगस्त 2012 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया था.
  • राणा इफ्तिखार उर्फ राणा वलीद आतिफ उर्फ राणा इफ्तिखार हैदर उर्फ राणा इफ्तिखार अहमद उर्फ हैदर खान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह LeT प्रमुख हाफिज़ सईद का अत्यंत करीबी और उसके कश्मीर ऑपरेशन्स के वित्त (Finance) का मुख्य प्रबंधक है. वह मारे गए और भारतीय जेलों में बंद आतंकियों के परिवारों के कल्याण के लिए काम करने वाले विंग ‘शोबा-ए-असीरन’ का प्रभारी है. वर्ष 1993 में जम्मू-कश्मीर के मेंढर सेक्टर में एक मुठभेड़ के दौरान घायल होने पर उसे गिरफ्तार किया गया था और यह 2004 तक भारतीय जेल में बंद रहा.
  • वसीम नूर जाट उर्फ क़ारी वसीम की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. यह जैश का एक लॉन्चिंग कमांडर है जो कोटली व्यवस्था संभालता है. वह वर्ष 2021-22 के दौरान ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में हथियार और गोला-बारूद गिराने की गतिविधियों में शामिल रहा है. उसे पहले अक्टूबर 2008 में सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया था और वह 2012 से 2015 तक कोट भलवाल सेंट्रल जेल, जम्मू में बंद था, जहाँ से रिहा होने के बाद उसे पाकिस्तान निर्वासित कर दिया गया था.
  • मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ मुहांदीस उर्फ ज़ाकिर की राष्ट्रीयता पाकिस्तान (मूल रूप से भारतीय, वर्तमान में रावलपिंडी में सक्रिय) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / अल-कायदा / ISIS से संबंध रखता है. वह वर्ष 2012 के बेंगलुरु LeT साजिश मामले और 2013 के नांदेड़ LeT मामले का मुख्य मास्टरमाइंड और हैंडलर है, जिसमें दक्षिणपंथी राजनेताओं और पत्रकारों की लक्षित हत्याओं (Target Killings) की साजिश रची गई थी. वह वर्ष 2013 में आतंकी फरहतुल्लाह गोरी की मदद से पाकिस्तान भाग गया. जांच के अनुसार, वह रामेश्वरम कैफे विस्फोट मामले (2024), मंगलुरु कुकर विस्फोट और अल-हिंद ISIS मॉड्यूल मामले में एक ऑनलाइन हैंडलर के रूप में शामिल रहा है. वह सोशल मीडिया और यूट्यूब /टेलीग्राम चैनलों (जैसे ‘सवत अल हक’) पर राष्ट्र-विरोधी और जिहादी वीडियो के जरिए युवाओं को भर्ती करने का काम करता है.
नारी शक्ति: वादों से लेकर कर दिखाने तक: ब्रिक्स में भारत का योगदान

भारत ने 1 जनवरी 2026 को “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” की थीम के तहत ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। महिलाओं से जुड़े मामलों में हमारा योगदान बेहद खास रहा है। हम सिर्फ़ कोई नारा या तारीफ़ के लिए सफल कहानियों का संग्रह पेश नहीं कर रहे हैं। हम एक ऐसा कामकाजी ढांचा लेकर आए हैं, जो करोड़ों महिलाओं तक पहुँचा है। यह ढांचा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां से शुरू होकर जहाँ भी जाता है, वहाँ आगे और विकसित होने के लिए तैयार रहता है।

यही भारत की खास बात है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से ज़्यादा समय से  भारत ने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को एक राष्ट्रीय मिशन के तौर पर अपनाया है और इस काम को इतने बड़े पैमाने पर किया है, जिसकी बराबरी बेहद कम देश कर सकते हैं। 2023 में अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान, भारत ने वैश्विक सोच को “महिलाओं के विकास” से बदलकर “महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास” की ओर मोड़ने में मदद की। यह महज़ शब्दों का बदलाव नहीं था, बल्कि सोच का भी बदलाव था। महिलाओं को सिर्फ़ लाभार्थी के तौर पर देखने के बजाय, उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका में देखना। कोच्चि में हम इसी बदलाव से जुड़ा सवाल उठा रहे हैं: एक बार वादा करने के बाद, उसे बड़े पैमाने पर, आख़िरी गाँव की आख़िरी महिला तक कैसे पहुँचाया जाए? भारत ने पिछले दस सालों में सिर्फ़ सैद्धांतिक तौर पर नहीं, बल्कि असल में इस सवाल का जवाब दिया है।

भारत के लिए यह सोच नई नहीं, बल्कि बहुत पुरानी है। विकास की भाषा के आने से काफी पहले ही, हमारी संस्कृति ने नारी को शक्ति, ज्ञान और समृद्धि का स्रोत माना था। ये तीनों ही वे आधार हैं, जिन पर कोई भी समाज तरक्की करता है और उन्हें देवी दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता रहा है। दैवीय शक्ति को ही ‘शक्ति’ कहा जाता है और संस्कृत के एक प्रसिद्ध श्लोक के अनुसार, जहाँ महिलाओं का सम्मान होता है, वहाँ देवता भी प्रसन्न होते हैं। यह सम्मान सिर्फ़ दिखावे के लिए नहीं था: लोपामुद्रा और घोषा जैसी महिला ऋषियों ने ऋग्वेद के मंत्रों की रचना की और गार्गी और मैत्रेयी जैसी दार्शनिकों ने उपनिषदों के प्रसिद्ध वाद विवादों में अपनी बात मज़बूती से रखी। इसलिए, भारत के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास, किसी और से लिया हुआ विचार नहीं है, बल्कि एक प्राचीन विचार का ही आधुनिक रूप है।

शुरुआत फ़ैसला लेने की प्रक्रिया से करते हैं। भारत की पंचायती राज संस्थाओं में चुने गए प्रतिनिधियों में से लगभग आधी महिलाएँ हैं, जो दुनिया में चुनी हुई महिला नेताओं के सबसे बड़े समूहों में से एक है। इसके अलावा नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का अंत सिर्फ़ प्रतिनिधित्व तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां से इसकी शुरुआत होती है। ऐसा मॉडल, जो महिलाओं को सेवाएँ तो देता है, लेकिन उन सेवाओं को तय करने वाले फ़ैसलों में उन्हें शामिल नहीं करता, वह असल में महिलाओं के नेतृत्व वाला मॉडल नहीं है।

भारत में सेवा पहुँचाने का ढाँचा तीन हिस्सों पर टिका है, जो एक साथ मिलकर ही काम करते हैं। पहला हिस्सा है पहुँच: डिजिटल जन अवसंरचना, फ़ायदों को सीधे महिलाओं के हाथों तक पहुँचाती है। आधार से जुड़े ट्रांसफ़र उन बिचौलियों की भूमिका को खत्म कर रहे हैं, जो पहले मदद पहुँचने से पहले ही उसे दूसरी तरफ़ मोड़ देते थे। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना इस पहुँच का व्यावहारिक उदाहरण है।  4.26 करोड़ से ज़्यादा माताओं को मातृत्व लाभ के तौर पर 20,060 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि सीधे उनके आधार से जुड़े खातों के ज़रिए मिली है। दूसरा हिस्सा है संस्थाएँ: डीएवाई-एनआरएलएम के तहत, 10.05 करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण महिलाओं को 90.90 लाख से ज़्यादा स्वयं-सहायता समूहों में संगठित किया गया है, जो दुनिया में महिलाओं के नेतृत्व वाली सामुदायिक संस्थाओं का सबसे बड़ा नेटवर्क है। तीसरा हिस्सा है गतिशीलता—यानी मूल्य श्रृंखला में हमेशा सबसे नीचे बने रहने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ने का एक सोच-समझकर चुना गया रास्ता। भारत अब 65,949 एसएचजी महिलाओं को बिज़नेस कॉरेस्पोंडेंट एजेंट यानी बीसी सखी के तौर पर तैनात कर रहा है, जो दूर-दराज़ के इलाकों में जमा, क्रेडिट, धनराशि भेजने और पेंशन सेवाएँ पहुँचाती हैं। जो महिला कभी किसी लाभ के लिए कतार में लगती थी, अब वही महिला उस लाभ को दूसरों तक पहुँचाती है।

कुल मिलाकर ये सब मिलकर भागीदारी को आमदनी और मालिकाना हक में बदलते हैं। लखपति दीदी पहल के तहत, जून 2025 तक 1.48 करोड़ स्वयं सहायता समूह महिलाओं की सालाना कमाई कम से कम 1 लाख रुपए तक पहुँच गई थी और जनवरी 2026 में शुरू किए गए उद्यमिता पर केंद्रित एक राष्ट्रीय अभियान का मकसद 50,000 सामुदायिक संसाधन व्यक्ति के ज़रिए 50 लाख अतिरिक्त महिलाओं को प्रशिक्षण देना है। तरक्की का यही रास्ता औपचारिक कारोबार में भी दिखता है: पीएमएमवाई के तहत दिए गए ऋण में से 69 प्रतिशत और ‘स्टैंड-अप इंडिया’ के लाभार्थियों में से 84 प्रतिशत महिलाएँ हैं। डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त 2.12 लाख स्टार्टअप्स में से 1.02 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या हिस्सेदार है और इनमें से कई स्टार्टअप बड़े शहरों के बजाय छोटे शहरों में हैं। हम ब्रिक्स को ये ब्रांड नाम नहीं, बल्कि उनके पीछे की कहानी पेश करते हैं: पहले पहुँच, फिर संस्थाएँ और फिर लाभार्थी से उद्यमी बनने का एक व्यवस्थित मार्ग।

आँकड़े भी इस बदलाव को दिखाते हैं। भारत में महिलाओं की कामकाजी आबादी में भागीदारी 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 41.7 प्रतिशत हो गई है और इसी दौरान महिलाओं में बेरोज़गारी दर 5.6 प्रतिशत से घटकर 3.2 प्रतिशत हो गई है। अब पहले से कहीं ज़्यादा महिलाएँ कार्यबल का हिस्सा हैं, इसलिए हमारा फोकस अब अगले चरण पर है, उनके काम की गुणवत्ता और आमदनी को और बेहतर बनाना।

इस साल महिलाओं से जुड़े कामों के लिए चार प्राथमिकता वाले क्षेत्र तय किए गए हैं और इनमें से एक सीधे हमारे अनुभव से जुड़ा है: जलवायु कार्यवाही, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महिलाओं की भूमिका। इस बारे में साक्ष्य भी साफ नतीजे बयां करते हैं: जब फैसले लेने की प्रक्रिया में महिलाएं शामिल होती हैं, तो पोषण बेहतर मिलता है और समुदाय चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं। यह कोई काल्पनिक बात नहीं है। झारखंड में महिला किसानों को ऐसी बीजों की किस्मों की जानकारी है, जो सूखे के दौरान भी बची रहती हैं। राजस्थान में महिला पशुपालकों को उन रास्तों की भी जानकारी है, जिनसे सूखे के समय मवेशियों को सुरक्षित ले जाया जा सकता है। भारत का काम ऐसे संस्थान बनाना रहा है, जो इस जानकारी और अनुभव का इस्तेमाल करें, न कि इसे नज़रअंदाज़ करें। मिशन पोषण 2.0 आंगनवाड़ी नेटवर्क के ज़रिए चलाया जाता है, जिसमें महिलाएं काम करती हैं और वे ही लोगों तक सेवा पहुंचाने की भरोसेमंद कड़ी होती हैं। जलवायु के अनुसार ढलने का काम भी इसी तरह होता है, चाहे वह लद्दाख में महिलाओं द्वारा बनाए गए ऊंचे इलाकों में पानी जमा करने के ढांचे हों या ओडिशा के तट पर वनस्पति के घने इलाकों को बचाने वाली समितियां। महिलाएं अब सिर्फ़ अनुकूलन की तकनीक का इस्तेमाल करने वाली नहीं रह गई हैं, बल्कि वे खुद इसे आगे बढ़ा भी रही हैं: नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को खेती में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह ज़्यादा कौशल और ज़्यादा आमदनी वाले काम की ओर एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है।

एक खास बात जो पूरी तरह से भारत की वास्तविक विशेषता बन गई है।  एक ज़िला एक उत्पाद पहल के तहत अब 761 ज़िलों में 1,102 उत्पाद शामिल हैं। महिला समूह हथकरघा, जीआई टैग वाले शिल्प और क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों जैसे स्थानीय विशेष उत्पादों को ब्रांडेड और तेज़ी से निर्यात होने वाले उत्पादों में बदल रहे हैं। सरकार भी इन उत्पादों के लिए बाज़ार तक पहुँचने का रास्ता बना रही है: अवसर योजना के तहत हवाई अड्डों पर महिलाओं के लिए आरक्षित रिटेल जगह और ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ के तहत महिला-संचालित उद्यमों के लिए जेम पर एक खास स्थान। असल मायनों में यह टिकाऊ व्यवस्था है, जिसके तहत स्थानीय सामग्री, स्थानीय कौशल और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, जो समुदाय के भीतर ही अपना मूल्य बनाए रखती हैं और ये विकास का ऐसा रूप भी है, जिसके लिए किसी महिला को बाज़ार तक पहुँचने के लिए अपना ज़िला छोड़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास सरकार द्वारा की गई महज़ कोई घोषणा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसे एक-एक हिस्से को जोड़कर तब तक बनाया और संचालित किया जाता है, जब तक कि यह उस आखिरी महिला तक न पहुँच जाए, जिसके लिए इसे बनाया गया था। जुलाई में कोच्चि में होने वाली मंत्रियों की बैठक में, भारत इस मॉडल को एक योगदान के तौर पर पेश करेगा, न कि किसी ऐसे उपाय के तौर पर, जिसे दूसरों को भी अपनाना ही हो। इसका मकसद यह है कि दूसरे इससे सीख सकें और इसे अपनी परिस्थितियों के अनुसार ढाल सकें। यही व्यवस्था और इसके सफल होने के सबूत, भारत ब्रिक्स के सामने रख रहा है। यह आदान-प्रदान दोनों तरफ से होता है: भारत कोच्चि में अपने ब्रिक्स सहयोगियों के बेहतरीन तौर-तरीकों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।

(लेखिका भारत सरकार में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं)

नागरिकों और बिज़नेस के लिए सुविधा – डिजिटल इंडिया की 11 साल की विरासत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

सिर्फ़ दस साल पहले, उत्तर प्रदेश के एक दूर-दराज़ के गाँव में किसान को सब्सिडी पाने या पैदावार बढ़ाने की सलाह लेने के लिए कागज़ों के ढेर खंगालने पड़ते थे। उस समय लाइनों में खड़ा होना आम बात थी। लेकिन आज, वह किसान बिना किसी बिचौलिए के फसल की मदद ले सकता है और सब्सिडी भी सीधे उसके बैंक अकाउंट में जमा हो जाती है।

आजकल, किसी भी गली में चलते हुए, आप एक साइलेंट रेवोल्यूशन महसूस कर सकते हैं। एक ऐसा रेवोल्यूशन जिसने ज़िंदगी को पूरी तरह से बदल दिया है। पहले, एक फल बेचने वाले या तिपहिया वाहन चालक को कैश में लेन-देन करना पड़ता था। लेकिन अब वह अपना ठेला या ऑटो रिक्शा घुमाते हुए गर्व से QR कोड दिखाता है।

102.86 करोड़ नागरिकों की डिजिटल कनेक्टिविटी ने भारत को मज़बूत बनाया है। इसमें देश के 99.56 करोड़ ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर के बड़े समुदाय ने मदद की है। मोबाइल डेटा 8 से 10 रुपये प्रति GB पर बहुत सस्ता है। इस तरह, प्रति व्यक्ति महीने का डेटा इस्तेमाल 24.01 GB के बहुत बड़े लेवल पर पहुँच गया है। इस डिजिटल बुनियाद ने नागरिकों और सरकार के बीच के रिश्ते को पूरी तरह बदल दिया है। यह रिश्ता भरोसे, ट्रांसपेरेंसी और डिजिटल मैनेजमेंट पर आधारित है। इस अंतर को पाटना इस क्रांति का पहला कदम था एक्सेस को डेमोक्रेटाइज़ करना और एक मज़बूत और देसी डिजिटल आइडेंटिटी फ्रेमवर्क बनाना जो टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की गारंटी देता है।

‘भारतनेट’ प्रोग्राम बड़े पैमाने पर लागू किया गया और लगभग 2.2 लाख ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा गया। इस तरह, यह पक्का हुआ कि ज्योग्राफिकल हालात आर्थिक मौकों के रास्ते में रुकावट न बनें। 144 करोड़ से ज़्यादा आधार आइडेंटिटी बनाने के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग ने ‘जन धन’, ‘आधार’ और ‘मोबाइल’ (JAM) की तिकड़ी को बढ़ावा दिया।

सरकार ने सॉवरेन डिजिटल आइडेंटिटी फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करके डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए नागरिकों को 51.5 लाख करोड़ रुपये सक्सेसफुली ट्रांसफर किए हैं। इस सिस्टम ने पैसे की बर्बादी और बिचौलियों की ज़रूरत को असरदार तरीके से खत्म कर दिया है। इसने करोड़ों परिवारों के हाथों में फाइनेंशियल ऑटोनॉमी देकर उनके जीवन को आसान बनाने में काफी सुधार किया है।

डीपीआई: रोजमर्रा की जिंदगी और उद्यमिता में बदलाव जब से नींव रखी गई है, भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) ने समस्याओं को हल करने के लिए समाधान बनाकर नागरिकों के दैनिक जीवन को बदल दिया है। डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म ने नागरिकों और व्यवसायों के लिए इस प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है।

डिजिलॉकर के 700 मिलियन से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और प्लेटफॉर्म पर 900 मिलियन से अधिक दस्तावेज हैं। इसने कागजी कार्रवाई को खत्म करके केवाईसी प्रक्रियाओं और दस्तावेज़ सत्यापन को तुरंत पूरा करना संभव बना दिया है। इससे उद्यमों के लिए लागत और समय में काफी कमी आई है। दिनों के बजाय अब बैंकों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और वित्तीय प्रौद्योगिकी संस्थानों को ग्राहकों को सत्यापित करने में कुछ ही क्षण लगते हैं। सरकार ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के माध्यम से 19.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की है।

दूर से सरकारी सेवाओं का फ़ायदा उठाने के लिए, ‘उमंग’ ऐप ने केंद्र और राज्य सरकारों की सेवाओं को सीधे नागरिकों की पहुँच में ला दिया है। यह ऐप अब 11.6 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड यूज़र्स को सर्विस दे रहा है, जिसके ज़रिए 2,572 सरकारी सेवाओं का फ़ायदा उठाया जा सकता है और अब तक 797.84 करोड़ से ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन किए जा चुके हैं। इस पूरे इकोसिस्टम का सबसे ज़रूरी हिस्सा ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस’ (UPI) है। सड़क किनारे ठेला लगाने वाले फल बेचने वाले को जो QR कोड सुविधा देता है, वह एक सॉवरेन पेमेंट रेल है जिस पर रोज़ाना 75 करोड़ ट्रांज़ैक्शन होते हैं। आज, दुनिया भर में होने वाले कुल इंस्टेंट डिजिटल पेमेंट में से लगभग आधे अकेले भारत में होते हैं और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भी UPI को दुनिया का सबसे बड़ा इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम माना है।

यह उन 24 देशों के लिए ज़रूरी हो गया है जिनके साथ भारत ने औपचारिक रूप से MoU साइन किए हैं ताकि वे इसके डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म को अपना सकें और ऐसा ही पेमेंट सिस्टम बना सकें।

इसके अलावा, UPI अब यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर और फ्रांस समेत 9 देशों में चालू है। टेक्नोलॉजी को ‘पब्लिक गुड’ मानने की यह सोच सीधे तौर पर हेल्थ के क्षेत्र में बराबरी और लोगों की ज़िंदगी को आसान बनाने से जुड़ी है। ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के ज़रिए, भारत ने 48 करोड़ से ज़्यादा फ़्री टेली-कंसल्टेशन दिए हैं, जिससे दूर-दराज़ और पिछड़े इलाकों के मरीज़ स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से सलाह ले पाए हैं। इसी तरह, दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन कैंपेन एक देसी प्लेटफॉर्म से चलाया गया।

COVID-19 वैक्सीन की 220 करोड़ से ज़्यादा डोज़ दी गईं और ‘Covin’ के ज़रिए ट्रांसपेरेंट तरीके से ट्रैक की गईं। इसने एक मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जिसकी दुनिया भर के हेल्थकेयर सिस्टम ने स्टडी की है। भविष्य की ओर देखते हुए, डिजिटल इंडिया के 11वें साल पूरे होने के साथ, यह मिशन कटिंग-एज टेक्नोलॉजी की ओर मज़बूती से बढ़ रहा है, जिसका मकसद यह पक्का करना है कि भारत और डेवलपिंग देशों की चुनौतियों का सामना करने के लिए उनका इस्तेमाल पब्लिक इंटरेस्ट में किया जाए। सालों से, कंप्यूटिंग पावर की ज़्यादा कीमत ने छोटे शहरों के टैलेंटेड युवा इनोवेटर्स को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से दूर रखा।

‘IndiaAI’ मिशन के तहत, भारत स्टार्टअप्स के लिए बिज़नेस करने में आसानी बढ़ाने के लिए सिस्टमैटिक तरीके से इस रुकावट को दूर कर रहा है। सरकार ने इसे सभी के लिए आसान बनाने के लिए एक बड़ी, शेयर्ड कंप्यूटिंग फैसिलिटी बनाई है। देश के घरेलू स्टार्टअप्स और स्टूडेंट्स को सिर्फ़ Rs 65 प्रति घंटे पर वर्ल्ड-क्लास कंप्यूटिंग कैपेसिटी देकर, इसका मकसद ज़मीनी लेवल पर इनोवेटर्स को बढ़ावा देना है।

हमारा लक्ष्य भारत को AI एप्लीकेशन्स के लिए दुनिया का हब बनाना है, इसके टैलेंटेड वर्कफोर्स का फ़ायदा उठाकर, जो सभी सेक्टर्स में सर्विस डिलीवरी को बेहतर बना सकता है और देश और विदेश में एंटरप्राइज़ेज़ की प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है। साथ ही, भारत अपने हार्डवेयर का भविष्य भी सुरक्षित कर रहा है।

‘सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम’ के तहत, देश भर में Rs 1.65 लाख करोड़ के इन्वेस्टमेंट वाले 12 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई है। इसी रफ़्तार को आगे बढ़ाते हुए, यूनियन बजट 2026-27 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) की घोषणा की गई है।

2.0 की घोषणा की गई है। यह नया चरण केवल विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सेमीकंडक्टर उपकरणों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। इस योजना के तहत 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन स्टार्टअप को मंजूरी मिलने के साथ, भारत तेजी से अपनी क्षमता निर्माण को गहन प्रौद्योगिकी कौशल में बदल रहा है।

यह एक जीवंत घरेलू फैबलेस इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रहा है जो आधुनिक दुनिया को शक्ति देने वाले चिप्स को डिजाइन करता है। इस पहल की असली विरासत एक ऐसे देश की मानसिकता में निहित है, जो अब अपनी उंगलियों पर नवाचार, निर्बाध व्यावसायिक संचालन और शासन चाहता है। यह सुनिश्चित करके कि तकनीक समावेशी, आसानी से सुलभ और संप्रभु शक्ति का स्रोत हो, ‘डिजिटल इंडिया’ चुपचाप उस ‘विकसित भारत’ की नींव रख रहा है जिसका हम 2047 में सपना देखते हैं।

अल नीनो की चुनौती और जल संरक्षण का संकल्प : डॉ. राजभूषण चौधरी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आज, धरती का पर्यावरण एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ कुदरत के संकेत तेज़ी से साफ़ दिख रहे हैं और मौसमों का पारंपरिक चक्र बुरी तरह प्रभावित होता दिख रहा है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दूर की सोच से मई के आखिर में ही साफ़ इशारा कर दिया था कि इस बार गर्मी बहुत ज़्यादा पड़ेगी। उन्होंने सभी देशवासियों से भरपूर पानी पीने और पानी के सोर्स को बचाने के प्रति सचेत रहने की भावुक अपील की थी। प्रधानमंत्री की यह अपील आज के पहले कभी न हुए पर्यावरण संकट के बीच देश को एक सुरक्षित रास्ता दिखाने वाली एक राह दिखाने वाली रोशनी साबित हो रही है।

धरती का लगातार बढ़ता तापमान और मौसमी चक्रों में भारी उतार-चढ़ाव इस बात का साफ़ सबूत है कि क्लाइमेट चेंज अब सिर्फ़ दूर की बात नहीं रह गई है। बल्कि, यह हमारे समय की सबसे बड़ी एडमिनिस्ट्रेटिव और सोशल चुनौती बन गई है। बेवक्त भारी बारिश, लंबे समय तक सूखा और गर्मी के मौसम का भयंकर रूप आज पूरी दुनिया के लिए गहरी चिंता का विषय है। इस ग्लोबल एटमोस्फेरिक उथल-पुथल के केंद्र में प्रशांत महासागर से शुरू होने वाली एक बहुत ही जटिल हाइड्रो-मेटियोरोलॉजिकल घटना है, जिसे मॉडर्न साइंस की भाषा में ‘एल नीनो’ कहा जाता है। भारत जैसे विशाल, घनी आबादी वाले और मुख्य रूप से खेती पर निर्भर देश के लिए, यह एल नीनो साइकिल सिर्फ़ लैबोरेटरी रिसर्च का विषय नहीं हो सकता। यह एक बहुत ही गंभीर और प्रैक्टिकल मुद्दा है जो सीधे देश भर के लाखों किसान परिवारों की ज़िंदगी और रोज़ी-रोटी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हमारी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है।

ओशनोग्राफी के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में, प्रशांत महासागर के इक्वेटोरियल क्षेत्र में पूरब से पश्चिम की ओर चलने वाली तेज़ व्यापारिक हवाएँ गर्म सतह के पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर धकेलती हैं। इसके असर से दक्षिण अमेरिका में पेरू के तट से दूर समुद्र की गहराई से ठंडा, पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर उठता है। यह प्रक्रिया ग्लोबल एटमोस्फेरिक सर्कुलेशन का बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है और भारतीय मानसून को पॉजिटिव बूस्ट देती है। हालाँकि, एल नीनो इफ़ेक्ट के दौरान, ये व्यापारिक हवाएँ अचानक कमज़ोर हो जाती हैं और कभी-कभी, उनकी दिशा पूरी तरह से उलट भी जाती है। इस वजह से, समुद्र की सतह का गर्म पानी पश्चिम की ओर जाने के बजाय दक्षिण अमेरिका के तटीय इलाकों की ओर वापस बहने लगता है। समुद्र की सतह का यह असामान्य गर्म होना पूरे एटमोस्फेरिक प्रेशर ज़ोन को बिगाड़ देता है, जिससे बादल बनने और बारिश की ग्लोबल ज्योग्राफी बदल जाती है। इस घटना से पेरू के कुछ हिस्सों में बहुत ज़्यादा बारिश और बाढ़ आती है, वहीं भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में हवा का दबाव बढ़ जाता है, जिससे मानसूनी हवाओं की रफ़्तार कमज़ोर हो जाती है। भारत के ज़मीनी हिस्से पर इसका सीधा असर बारिश की भारी कमी, बिखरे हुए मानसून और गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के रूप में दिखता है। यह एक साइंटिफिक तबाही है जिसमें देश के पूरे हाइड्रोलॉजिकल साइकिल और पानी के सर्कुलेशन को अस्थिर करने की पूरी क्षमता है। इसके साथ ही, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के बदलते पैटर्न और एल नीनो के असर ने मिलकर देश के लिए पानी के संकट और मौसम की अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है।

प्रधानमंत्री ने हमेशा पानी की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी है, इसे राष्ट्रीय संप्रभुता और रक्षा सुरक्षा के बराबर रखा है। उनका साफ़ मानना ​​है कि पानी बचाना हर नागरिक की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक ज़रूरी हिस्सा और एक बड़ा जन आंदोलन बनना चाहिए। इसी सोच के आधार पर उन्होंने ‘कैच द रेन’ कैंपेन शुरू किए, जिसका मूल मंत्र है कि मॉडर्न तकनीकों का इस्तेमाल करके, हमें बारिश के पानी की हर बूंद को वहीं बचाना चाहिए जहाँ वह धरती पर गिरती है। देश के इतिहास में पहली बार, मौजूदा सरकार ने ‘जल शक्ति मंत्रालय’ के रूप में एक जुड़ा हुआ और मज़बूत एडमिनिस्ट्रेटिव ढांचा बनाया, जो देश की पानी की प्लानिंग को एक नई, साइंटिफिक और सही दिशा देने में सच में एक बदलाव लाने वाली पहल साबित हुई है।

बढ़ते कंक्रीटीकरण और बिना प्लान के इस्तेमाल की वजह से धरती के पानी के लेवल में लगातार हो रही गिरावट को रोकने और पानी के सोर्स की लंबे समय तक सुरक्षा पक्का करने के लिए, सरकार ने पॉलिसी और प्रोग्राम का एक बहुत बड़ा और आपस में जुड़ा हुआ फ्रेमवर्क बनाया है।

देश में ‘जल जीवन हरियाली मिशन’ ने पर्यावरण संतुलन और पानी बचाने को एक नई तेज़ी दी है। ‘जल जीवन मिशन’ के ज़रिए आज ‘हर घर जल’ के संकल्प के साथ देश के हर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाके में शुद्ध, टेस्टेड और लगातार पीने के पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा, ‘अटल भूजल योजना’ के तहत, ज़्यादा इस्तेमाल वाले इलाकों में कम्युनिटी की भागीदारी को बढ़ावा देकर साइंटिफिक मैनेजमेंट और ग्राउंड वॉटर लेवल का रिचार्ज किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र की स्थिरता के लिए, ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के तहत, ‘Per Drop More Crop’ के सिद्धांत पर ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों को पूरे देश में बढ़ाया जा रहा है ताकि पानी का हर हिस्सा पानी के हर हिस्से तक पहुँच सके।

भारत ने कैसे किया होर्मुज संकट का मुकाबला : हरदीप सिंह पुरी  

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

जब फरवरी के अंत में होर्मुज की खाड़ी बंद हुई, तो भारत सरकार ने एक प्राथमिकता का चयन किया – हमारे देश के नागरिकों, विशेष रूप से सबसे कमजोर समुदायों, को अभूतपूर्व आपूर्ति और मूल्य व्यवधानों से सुरक्षित रखना। इस प्राथमिकता के आस-पास ही अन्य प्रयास किये जाने थे। यह भावना खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की थी और यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा व्यवधान के लगभग चार महीनों तक बनी रही। 

तथ्यों के पता चलने से पहले ही भारत को लेकर निर्णय किये जा रहे थे: तर्क यह था कि एक ऐसा देश, जो अपने  कच्चे तेल का 85% से अधिक आयात करता है, होर्मुज के बंद होने से संभल नहीं पायेगा, जिससे होकर दुनिया का 20-30% से अधिक हाइड्रोकार्बन गुजरता है। पेट्रोल पंप में कुछ ही दिनों में तेल ख़त्म हो जाएगा, कीमतें आसमान छुएंगी (जैसे कि कई अन्य देशों में हुआ) और अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। आज स्टॉक भरे हुए हैं, पंप खुले हैं, और भारतीय उपभोक्ता ने इस संकट के दौरान ऊर्जा के लिए दुनिया के किसी भी अन्य उपभोक्ता की तुलना में कम भुगतान किया है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इसे कैसे किया गया और इससे गलत आख्यानों को जवाब भी मिल जाएगा।

28 फरवरी को ईरान पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर सबसे महत्वपूर्ण मार्ग-खंड बंद हो गया और एलपीजी आपूर्ति ने भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती पेश की, क्योंकि दुनिया में केवल अमेरिका और मध्य पूर्व ही प्रमुख एलपीजी निर्यातक हैं। भारत की लगभग 60% एलपीजी पहले मध्य पूर्व से आती थी और यह आपूर्ति तुरंत लगभग शून्य हो गई। फिर आपूर्ति और मांग, दोनों को लेकर एक युद्धकक्ष ऑपरेशन शुरू हुआ, हर कार्गो, हर रिफाइनरी, हर बॉटलिंग प्लांट की निगरानी की गयी, ताकि पूरे देश के सभी रसोईघरों में खाना पकाने के लिए आग जलती रहे।

आपूर्ति के संबंध में, 8 मार्च को एलपीजी नियंत्रण आदेश पारित किया गया, जिसके तहत सभी रिफाइनरियों को अपना एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के लिए सभी सी3-सी4 कार्बन स्ट्रीम को बदलने का निर्देश दिया गया। जो रिफाइनरी कभी कुकिंग गैस नहीं बनाती थीं, बदलाव किया गया और उत्पादन 35  टीएमटी प्रति दिन से बढ़कर 54 टीएमटी प्रति दिन हो गया। युद्ध की सर्वाधिक विभीषिका के दौरान, जब होर्मुज से कोई भी जहाज बाहर नहीं निकल रहा था, तब 12 से अधिक भारतीय एलपीजी जहाजें चुपचाप होर्मुज से बिना कोई टोल दिए निकाल दी गईं – किसी भी देश के लिए यह सबसे बड़ी संख्या थी। कार्गो सुरक्षित किए गए तथा यानबू और फुजैरा बंदरगाहों से लाल सागर रास्ते के जरिए कार्गो जहाज-से-जहाज स्थानांतरित किये गये। अमेरिका से कार्गो को सुरक्षित करने की स्थिति में भी खाली जहाज भेजे गए, नए माल लेने के लिए जहाज हॉर्मुज के अंदर भेजे गए तथा अल्जीरिया, जापान और कनाडा जैसे कई देशों के साथ नई आपूर्ति व्यवस्था शुरू की गयी। मैंने हर उस देश के ऊर्जा मंत्री से कई बार बात की, जो एलपीजी निर्यात कर सकता था। मैं यह बात कहना चाहता हूँ कि खाड़ी क्षेत्र के अंदर या बाहर का हर उत्पादक, जिसके साथ हमने व्यापार किया, हमारे साथ खड़ा रहा। 

हालांकि, आपूर्ति प्रयास का केवल आधा हिस्सा था, क्योंकि मांग को भी प्राथमिकता देना जरूरी था। घरों में जाने वाला रसोई गैस पूरा सुरक्षित रखा गया और इस कीमती आपूर्ति को काले बाज़ारियों से बचाने के लिए डिजिटल सत्यापन कोड अनिवार्य किया गया। हर नागरिक को उनके ज़रूरत के समय सिलेंडर मिलें, लेकिन कोई भी सिलेंडर जमा न कर सके, इसके लिए 25 दिन और 45 दिन की सीमा लगाई गई। चूँकि, वाणिज्यिक सिलेंडरों को नियंत्रित नहीं किया जाता और कोई भी खरीदार उपलब्ध पूरी आपूर्ति एक साथ खरीद सकता था, इसलिए इन्हें उद्योग संघों और राज्य नागरिक आपूर्ति विभागों के माध्यम से भेजा गया, ताकि हर किसी को पर्याप्त मिले और कोई भी जमा न कर सके। उद्योग को पाइप प्राकृतिक गैस अपनाने के लिए कहा गया, बड़े रसोईघरों और प्रतिष्ठानों को अन्य ईंधनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जहाँ संभव था और घरेलू पाइप गैस और सीएनजी को बिना कटौती वाले वर्ग में रखा गया। सरकार के सभी विभागों ने मिलकर नगर निगम की शीघ्र मंज़ूरी के ज़रिए पाइप गैस कनेक्शनों की ओर बदलाव को संभव बनाया। कई उपभोक्ता, जिनमें प्रवासी भी शामिल थे, एजेंट से सिलेंडर खरीदते थे, जो अब डीएसी की शर्तों के कारण सिलेंडर नहीं ला पा रहे थे, इसलिए पूरे देश में 5 किलो का मुफ्त व्यापार सिलेंडर उपलब्ध कराया गया, जब तक इसका इस्तेमाल लगभग दोगुना नहीं हो गया। लोगों में भय पैदा करने वाले और खराब स्थिति बताने वाले झूठी अफवाहें फैलाने लगे और झूठे वीडियो शेयर करने लगे ताकि कमी, घबराहट और अराजकता का माहौल पैदा किया जा सके, जबकि सरकार हर दिन युद्धकक्ष मोड में कई क्रांतिकारी कदम उठा रही थी, ताकि देश में किसी भी जगह आपूर्ति में बाधा न आये।

इस सब के पीछे प्रधानमंत्री मोदी का दृढ़ संकल्प था – भारतीय नागरिक को सुरक्षा दी जायेगी चाहे खजाने पर कितना भी बोझ क्यों न पड़े —रूस-यूक्रेन संघर्ष और जीवन को संकट में डालने वाली कोविड चुनौती से पैदा हुए ऊर्जा संकट के दौरान यही ‘भारत की राह’ रही है। फरवरी और जून के बीच, रसोई गैस के अंतरराष्ट्रीय मानक, सऊदी सी पी, में लगभग 50% की वृद्धि हुई, और फिर भी, उस आयात दर पर ₹1,600 से अधिक की कीमत वाला सिलेन्डर उज्ज्वला घर तक ₹642 में पहुँचा। मोदी सरकार हर उज्ज्वला सिलेंडर पर लगभग ₹900 का और हर अन्य घर के लिए जाने वाले सिलेंडर पर करीब ₹600 का नुकसान उठाती है, आज सभी भारतीय परिवार अपने रसोई गैस के लिए पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, स्पेन या फ्रांस के घरों की तुलना में बहुत कम भुगतान कर रहे हैं।

मार्च में केंद्रीय उत्पाद शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कटौती का साहसिक निर्णय लिया गया, जिससे कीमत-वृद्धि में कमी आयी, जबकि कच्चे तेल की कीमत लगभग दोगुनी हो गयी थी और सरकारी तेल कंपनियों ने इस तिमाही में हर दिन 500 से 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाया। इसी अवधि में, अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 40% से अधिक और ब्रिटेन में करीब 20% बढ़ी, जबकि यूरोप के बड़े हिस्से में भी दहाई अंक की वृद्धि हुई, लेकिन भारत में कीमत में लगभग 7% की ही वृद्धि हुई।

एक और कहानी यह थी कि पूरी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी, विदेशी भंडार ख़त्म हो जाएंगे और हमारी आर्थिक संभावनाएँ धुंधली हो जाएंगी। भंडार खुद जवाब देते हैं, जो लगभग 690 बिलियन डॉलर के करीब है। यह संघर्ष शुरू होने के सप्ताह में रिकॉर्ड किये गये उच्चतम दर से केवल थोडा कम है और भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछली तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की है।

यह कहा गया कि भारत के पास केवल 8 या 9 दिन का भंडार है और उसके पास ज्यादा भंडार रखने की वास्तविक क्षमता नहीं है, यह दावा 1.5 बिलियन लोगों वाली बड़ी ऊर्जा अर्थव्यवस्था के काम करने के तरीके को गलत रूप में समझता है। आप किसी देश को कुछ गुफाओं से नहीं चला सकते, क्योंकि जमीन के भीतर रखी गई ऊर्जा से कुछ भी कमाई नहीं होती और उसे रखने में बहुत ज़्यादा खर्च भी आता है। इसके बजाय आप इसे इम्पोर्ट टर्मिनल, डिपो, पाइपलाइन, रिफाइनरी और पूरे देश में फैले स्टोरेज के सिस्टम के जरिए चलाते हैं, और आज भारत के पास 24 रिफाइनरी हैं, 47,000 किलोमीटर से ज्यादा तेल और गैस की पाइपलाइनें हैं, और 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं जो प्रतिदिन करीब 8 करोड़ लोगों की सेवा करते हैं।

उस प्रणाली की वास्तविकता की जांच, महाप्रलय का भय दिखाने वाले किसी भविष्यवक्ता की स्लाइड पर दिखाए गए आंकड़े से नहीं होती। असली जांच है – आधुनिक समय के सबसे बड़े ऊर्जा संकट के लगभग चार महीने गुजर जाने के बाद, क्या देश को अपने लोगों पर राशनिंग लागू करनी पड़ी, क्या ईंधन सिर्फ सम-विषम नंबर प्लेट्स के हिसाब से देना पड़ा, क्या घर में ऑफिस बनाना पड़ा या क्या हर दिन 5 बजे अपने पंप बंद करने पड़े। भारत को इनमें से कोई काम नहीं करना पड़ा। यह सब इसलिए संभव हुआ, क्योंकि पिछले कई सालों में इसकी तैयारी की गई थी। हमारे कच्चे तेल के बास्केट को 27 देशों से बढ़ाकर 41 करना, हमारे आयात टर्मिनल को दुगना करना, और प्रधानमंत्री मोदी के तहत एक दशक में बनाए गए पाइपलाइन और भंडार, होर्मुज के बंद होने पर ये सभी चीजें उपयोगी साबित हुईं; यही वजह थी कि रोशनी जलती रही।

इस स्तर का संकट एक देश को उसकी असली क्षमता दिखाता है। भारत ने होर्मुज के बंद होने की बाधा पार की और देश में कहीं भी बिना किसी कमी के आपूर्ति जारी रही। इस अनुभव से सीख लेकर, हम अपनी ऊर्जा सुदृढ़ता को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त क्षमताओं का निर्माण करेंगे, लेकिन जब इस संघर्ष का इतिहास लिखा जाएगा, तो एक पंक्ति मौजूद रहनी चाहिए: मानव स्मृति का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट हमारे तटों तक पहुंचा, लेकिन 150 करोड़ भारतीय नागरिक सुरक्षित रहे।

(लेखक केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हैं।)  

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3 दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचीं जापान की प्रधानमंत्री, 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में लेंगी हिस्सा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सनाए तकाइची भारत दौरे पर पहुंची। पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्टपति भवन में उनका भव्य और उल्लास के साथ स्वागत किया है। पीएम सनाए तकाइची भारत के 16वें वार्षिक समारोह में शामिल होंगी। इस समारोह के बाद दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने अपने- अपने सम्मानित मंत्रियों और उनके प्रतिनिधिमंडल से परिचय करवाया।

दिल्ली और टोक्यो के बीच आएगी मजबूती

इससे पहले बुधवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जापान की पीएम का स्वागत किया था.साथ ही इस दौरे को दिल्ली और टोक्यो के बीच वैश्विक साझेदारी और खास रणनीतिक के लिए अहम कदम बताया. विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पूरा भारत जापान की पीएम का गर्मजोशी के साथ स्वागत करता है, जो एक आधिकारिक दौरे के लिए दिल्ली आई हैं. बीते बुधवार को इसी तरह से राज्य के मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी ताकाइची का भव्य स्वागत किया.

किन-किन क्षेत्रों पर होगी चर्चा?

इस दौरे को आने वाले समय में भारत और जापान के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो खास रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और ज्यादा मजबूत करेगा. इन तीन दिनों के दौरे पर दोनों देश आर्थिक सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने साथ ही सप्लाई, नई तकनीक, रक्षा तंत्र, समु्द्री सुरक्षा और निवेश पर भी चर्चा होगी.

16वें भारत-जापान सालाना शिखर सम्मेलन के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, तकाइची ने कहा कि दोनों देशों को अपनी-अपनी खूबियों का इस्तेमाल करके साथ मिलकर और मजबूत व समृद्ध बनना चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि कई रणनीतिक मुद्दों पर दोनों नेताओं की सोच एक जैसी थी और वे सहयोग के तीन मुख्य क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर सहमत हुए, जिनमें रणनीतिक संबंधों को और गहरा करना भी शामिल है. उन्होंने कहा, जापान का अपडेटेड ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ (FOIP) विज़न प्रधानमंत्री मोदी की ‘महासागर’ (MAHASAGAR) पहल से काफी हद तक मेल खाता है, तकाइची ने कहा कि दोनों देश समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियमों पर आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे.

बाढ़ प्रभावित अरुणाचल का शिवराज सिंह चौहान, किरेन रिजिजू और पेमा खांडू ने किया हवाई व जमीनी दौरा

अरुणाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

अरुणाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

केंद्रीय मंत्री ने केयी पान्योर जिले समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही वे सड़क मार्ग से भी गांवों में पहुंचे और प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और जिनके घर बह गए हैं, उनके लिए नए मकान बनवाए जाएंगे। खेतों में हुए नुकसान, फसलों की बर्बादी, पशुधन हानि; सभी का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाएगा। तत्काल राहत के रूप में राशन और आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत और सुरक्षा दीवार बनाने के काम में खुद भी हाथ बंटाया और कहा कि समाज की यह भागीदारी प्रेरणादायक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाढ़ से भारी तबाही हुई है और नुकसान का लगातार आकलन किया जा रहा है, लेकिन इसके बीच सबसे सराहनीय बात यह है कि स्थानीय समुदाय ने सरकार का इंतजार किए बिना खुद आगे बढ़कर समाधान की पहल की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार भी हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

PM मोदी सेशेल्स दौरे के लिए हुए रवाना, आजादी के स्वर्ण जयंती समारोह में होंगे मुख्य अतिथि

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स दौरे के लिए रवाना हुए । यहां वे देश के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स की यात्रा कर रहे हैं।

कई मुद्दें पर होगी चर्चा
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति हरमिनी के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा को संबोधित करने और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करने वाले हैं। पीएम मोदी सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। 

भारत के महासागर विजन में सेशेल्स का अहम स्थान
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, ‘भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारी है। हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी होने के नाते, सेशेल्स भारत के विजन महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) और वैश्विक दक्षिण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में विशेष स्थान रखता है।

इसमें आगे कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी मित्रता की पुष्टि करेगी और सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी। इससे पहले अप्रैल में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस में आयोजित 9वें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान अपने सेशेल्स समकक्ष बैरी फॉरे से मुलाकात की और विक्टोरिया को उसकी वर्तमान आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सहायता करने के लिए नई दिल्ली की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त रोहित रातीश ने क्या कहा?
भारत-सेशेल्स संबंधों को ‘गतिशील और उत्कृष्ट’ बताते हुए, सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त रोहित रातीश ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबरस्पेस, साइबर सुरक्षा, समुद्री विज्ञान और संरक्षण और नीली अर्थव्यवस्था जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने के इच्छुक हैं। प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले आईएएनएस से बात करते हुए, रतीश ने कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियों की घोषणा होने की उम्मीद है।

उन्होंने फरवरी में सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की भारत यात्रा और पिछले साल अक्टूबर में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की सेशेल्स यात्रा का भी जिक्र किया, जिससे उच्च स्तरीय द्विपक्षीय संबंधों में आई तेजी का पता चलता है।

20 जून को प. बंगाल में पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करेंगे प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से देशभर के करोड़ों किसानों को बड़ा तोहफा देंगे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत 23वीं किस्त जारी करते हुए वे 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर करेंगे।

इस संबंध में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा ‘विकसित भारत, विकसित पश्चिम बंगाल’ के संकल्प को नई गति देने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, पशुपालन और रेलवे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण किया जाएगा।

9.44 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचेगी 18,880 करोड़ रुपये की राशि

श्री चौहान ने बताया कि पीएम-किसान की 23वीं किस्त के तहत देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिलेगा। पश्चिम बंगाल में 45.35 लाख से अधिक किसानों के खातों में लगभग 907 करोड़ रुपये की राशि पहुंचेगी। इसके साथ ही राज्य में योजना के तहत वितरित कुल राशि 15,055 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में योजना शुरू होने के बाद से अब तक देशभर में किसानों को 4.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है।

फसल बीमा और डिजिटल एग्रीकल्चर को मिलेगा बढ़ावा

प्रधानमंत्री इस अवसर पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) का भी शुभारंभ करेंगे। लगभग 12,200 करोड़ रुपये लागत वाली इन योजनाओं के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में 1.10 करोड़ किसानों को 30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर बीमा सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके साथ ही डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के अंतर्गत एग्रीटेक प्लेटफॉर्म की शुरुआत भी की जाएगी। यह प्लेटफॉर्म उर्वरक वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित खरीद जैसी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराएगा।

प्राकृतिक खेती और धन-धान्य कृषि योजना का शुभारंभ

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन का भी शुभारंभ करेंगे। इसके तहत पश्चिम बंगाल में 17,300 हेक्टेयर क्षेत्र में 346 प्राकृतिक कृषि क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे, जिनसे 43,250 किसानों को लाभ मिलेगा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत भी करेंगे। यह योजना पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झाड़ग्राम जिलों में लागू होगी। योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना तथा भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं को मजबूत बनाना है।

ग्रामीण विकास और सड़क संपर्क को मिलेगा बल

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-III) के तहत 213 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 49 सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। 315 किलोमीटर से अधिक लंबी ये सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी और किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी।

मत्स्य और पशुपालन क्षेत्र को नई मजबूती

कार्यक्रम के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले के फ्रेजरगंज में आधुनिकीकृत मत्स्य बंदरगाह और बीरभूम में आधुनिक मत्स्य बाजार का उद्घाटन किया जाएगा। वहीं नादिया जिले के हरिणघाटा में 6 करोड़ रुपये से अधिक लागत से स्थापित रीजनल सीमन प्रोडक्शन लैबोरेटरी और बकरी सीमन बैंक का भी उद्घाटन होगा।

यह पूर्वी भारत की अपनी तरह की पहली सुविधा होगी, जो वैज्ञानिक पशु प्रजनन और पशुधन उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

591 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल में लगभग 591 करोड़ रुपये लागत की विभिन्न रेल परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे। इनमें हावड़ा में 300 बिस्तरों वाले नए मंडलीय रेलवे अस्पताल की आधारशिला, पूर्व मेदिनीपुर में रोड ओवर ब्रिज का निर्माण तथा सांकराइल-सांतरागाछी थर्ड लाइन परियोजना का राष्ट्र को समर्पण शामिल है।

इन परियोजनाओं से रेल यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होगा, जबकि औद्योगिक विकास, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।

विकसित पश्चिम बंगाल की दिशा में बड़ा कदम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की जाने वाली ये परियोजनाएं कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, पशुपालन, स्वास्थ्य और परिवहन क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाने का आधार बनेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और विकसित पश्चिम बंगाल तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।