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ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान सभी हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा

 इस्लामाबाद, 26 मार्च (भाषा) पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह ईरान युद्ध को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करने के लिए क्षेत्र और उससे बाहर के सभी हितधारकों के साथ सक्रिय और रचनात्मक रूप से बातचीत कर रहा है।

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी को शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका और आगामी सप्ताहांत में इस्लामाबाद में आमने-सामने की वार्ता की संभावनाओं के बारे में कई सवालों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने आगामी दिनों में सीधी वार्ता की पुष्टि करने से साफ इनकार कर दिया, जबकि इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान वार्ता के माध्यम से शांति लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पाकिस्तान क्षेत्रीय हितधारकों और अपने क्षेत्र से बाहर के हितधारकों के साथ सक्रिय और रचनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है, और लगातार तत्काल तनाव कम करने, शत्रुता समाप्त करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक अपरिवर्तनीय मार्ग अपनाने की वकालत कर रहा है।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ व्यक्तिगत रूप से सभी संबंधित पक्षों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा देने के लिए ‘हमारे राजनयिक प्रयासों’ का नेतृत्व कर रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री के उस ट्वीट का जिक्र किया जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साझा किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘आपने देखा होगा, उनके हालिया सार्वजनिक संदेशों को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, जिसमें अमेरिका के नेतृत्व द्वारा भी मान्यता शामिल है।’’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ईमानदारी और स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होकर सेतु बनाने में सैद्धांतिक और सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।

अंद्राबी ने कहा कि उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने भी इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र और उससे बाहर के अपने समकक्षों के साथ घनिष्ठ और निरंतर संपर्क बनाए रखा है।

विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है: दक्षिण अफ्रीकी मंत्री

जोहानिसबर्ग, 10 मार्च (भाषा) दक्षिण अफ्रीका के व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय के उप मंत्री जुको गोडलिम्पी ने सोमवार को प्रिटोरिया में उद्योग जगत के दिग्गजों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जो अब पतन के कगार पर है।

गोडलिम्पी ने भारतीय उच्चायोग और ‘सीआईआई-इंडिया बिजनेस फोरम’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दूसरे वार्षिक भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार सम्मेलन को संबोधित किया।

मंत्री ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के दो वर्ष बाद स्वतंत्र भारत का जन्म उस वैश्विक व्यापार प्रणाली के ढांचे के बीच हुआ, जिसे पश्चिमी देशों ने तैयार किया था।

उन्होंने कहा, “प्रमुख शक्तियों द्वारा आकार दी जा रही दुनिया में भारत उभरता हुआ लोकतंत्र है।”

भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की उसकी योजनाओं पर मंत्री ने कहा कि भारत अब एक अलग और खास स्थिति में है।

उन्होंने कहा, “भारत खुद को ऐसी स्थिति में पाएगा, जहां वह सिर्फ मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पर चलने के बजाय एक नयी वैश्विक व्यवस्था के सह-निर्माता की भूमिका निभाने का दायित्व भी संभालेगा।”

उन्होंने कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की उस व्यवस्था में भारत एक सहायक भागीदार के रूप में उभरा था, लेकिन अब उसे इस वास्तविकता का सामना करना होगा कि वह ऐसी स्थिति में है जहां उसे उस व्यवस्था के पुनर्निर्माण में एक मुख्य भागीदार की भूमिका निभानी पड़ेगी, क्योंकि यह व्यवस्था अब पतन के कगार पर है।”

गोडलिम्पी ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं।

मंत्री ने कहा, “हम विकास, औद्योगीकरण और वैश्विक आर्थिक सुधार में रणनीतिक साझेदार हैं।”

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इन दोनों देशों को “टेरिबल ट्विन्स” (खतरनाक जोड़ी) कहा जाता है क्योंकि इनके प्रतिनिधि ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों में बदलाव लाने के लिए हमेशा मुखर रहते हैं।

उन्होंने कहा, “वैश्विक विकास से संबंधित सभी चर्चाओं में दक्षिण अफ्रीका और भारत निष्पक्ष और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों पर आधारित ग्लोबल साउथ के रणनीतिक दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं और इस बात पर भी बल देते हैं विकासशील देशों के विचारों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितना कि अधिक आर्थिक शक्ति वाले देशों के विचारों को।”

मोदी मुंबई में मंगलवार को मैक्रों से मुलाकात करेंगे

 नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे और इस दौरान दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

बयान के अनुसार, दोनों नेताओं की बातचीत रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा उन्हें नए और उभरते क्षेत्रों तक विस्तारित करने पर केंद्रित रहेगी।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों क्षेत्रीय एवं वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।

आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 फरवरी को मुंबई जाएंगे, जहां वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे।’’

इसमें कहा गया कि इस दौरान दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वह भारत द्वारा आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में भाग लेंगे और मुंबई में प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे।

यह उनकी भारत की चौथी और मुंबई की पहली यात्रा होगी।

कार्यक्रम के अनुसार, 17 फरवरी को अपराह्न लगभग सवा तीन बजे दोनों नेता मुंबई स्थित लोक भवन में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके बाद शाम लगभग सवा पांच बजे वे ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ का उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं तथा नवाचारकर्ताओं को संबोधित करेंगे।

ट्रंप के ‘ट्रैवल बैन’ को मिला कड़ा जवाब: इन देशों ने अमेरिकी नागरिकों की एंट्री पर लगाया बैन

इंटरनेशनल डेस्क: US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के ऑफिस संभालने के बाद, अलग-अलग देशों के नागरिकों की US में एंट्री को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने दुनिया के 39 देशों के नागरिकों पर सख्त ट्रैवल बैन लगाए हैं, जिसके जवाब में अब दो देशों ने भी अमेरिकी नागरिकों के लिए अपने दरवाज़े बंद कर दिए हैं।

बुर्किना फासो और माली का एक्शन अमेरिका के इस कदम के जवाब में, बुर्किना फासो और माली ने अमेरिकी नागरिकों के अपने देशों में आने पर बैन लगा दिया है। बुर्किना फासो के विदेश मंत्री करामोको जीन-मैरी ट्रैओरे ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिकी नागरिकों पर ठीक वही नियम लागू करेंगे जो अमेरिका ने उनके नागरिकों के लिए किए हैं। माली के विदेश मंत्रालय ने भी ऐसी ही शर्तें लागू करने का ऐलान किया है और US द्वारा बिना किसी सलाह-मशविरा के लिए गए इस बड़े फैसले पर अफसोस जताया है।

कौन से देश US के बैन के दायरे में हैं?

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने जिन 39 देशों पर पूरी तरह या कुछ बैन लगाया है, उनमें से 25 अफ्रीकी देश हैं। इन बड़े देशों में शामिल हैं:

सीरिया और फ़िलिस्तीन।

नाइजर, सिएरा लियोन और साउथ सूडान।

सेनेगल और आइवरी कोस्ट (कुछ बैन)।

FIFA वर्ल्ड कप पर असर ये बैन

ऐसे समय में लगाए गए हैं जब US और कनाडा में FIFA वर्ल्ड कप होना है। बैन किए गए कई देश इस टूर्नामेंट के लिए क्वालिफ़ाई भी कर चुके हैं। हालांकि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि प्लेयर्स को एंट्री की इजाज़त होगी, लेकिन फ़ैन्स के आने को लेकर अभी स्थिति साफ़ नहीं है।