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CMC Ludhiana: मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना से 125 बच्चों की मेजर सर्जरी मुफ्त, डॉ. बलबीर सिंह ने की सराहना

लुधियाना के CMC अस्पताल में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत करीब 125 बच्चों की मेजर सर्जरी और गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज किया गया। पात्र मरीजों को 10 लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा मिल रही है।

लुधियाना / सत्ता संदेश

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लुधियाना स्थित सीएमसी अस्पताल में करीब 125 बच्चों की मेजर सर्जरी और गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज किए जाने की जानकारी सामने आई है। योजना के तहत पात्र मरीजों को 10 लाख रुपये तक के मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।

इस योजना के तहत इलाज करवाने वाले बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, दिल में छेद, कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों की महंगी सर्जरी और उपचार का खर्च योजना के तहत सरकार द्वारा वहन किया गया है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सीएमसी अस्पताल पहुंचकर मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत चल रहे उपचार का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीजों और उनके परिवारों से भी जानकारी ली तथा योजना के तहत जरूरतमंदों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की सराहना की।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार का उद्देश्य राज्य के लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण किसी जरूरतमंद व्यक्ति का इलाज न रुके।

उन्होंने लोगों से अपील की कि अधिक से अधिक पात्र परिवार स्वास्थ्य बीमा कार्ड बनवाएं, ताकि गंभीर बीमारी की स्थिति में उन्हें योजना का लाभ मिल सके। सरकार की ओर से पंजाब की करीब 3 करोड़ आबादी तक योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज और महंगी सर्जरी की सुविधा मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को योजना के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

लुधियाना : वर्धमान जैन युवक मंडल गोल्फ लिंक ने लगाया मेडिकल चेकअप और ब्लड डोनेशन कैंप

लुधियाना में वर्धमान जैन युवक मंडल गोल्फ लिंक की ओर से मेडिकल चेकअप और ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया। लोगों की स्वास्थ्य जांच के साथ जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान किया गया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

वर्धमान जैन युवक मंडल गोल्फ लिंक की ओर से लुधियाना में विशेष मेडिकल चेकअप एवं ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया। कैंप के दौरान लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई, वहीं जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान भी किया गया।

कैंप में स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचे लोगों को जरूरी चिकित्सकीय सलाह दी गई। वहीं रक्तदान करने वाले लोगों ने जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए अपना योगदान दिया। आयोजकों ने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वर्धमान जैन युवक मंडल गोल्फ लिंक के सदस्यों ने कहा कि जरूरतमंद लोगों की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। समाज के लोगों की ओर से कैंप में मिले सहयोग और उत्साह को देखते हुए आयोजकों ने जल्द ही दूसरा मेडिकल चेकअप एवं ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित करने की घोषणा की।

आयोजकों ने कहा कि उनका उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं और रक्त जैसी महत्वपूर्ण सहायता पहुंचाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भी ऐसे सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएं।

कैंप के आयोजन के जरिए स्वास्थ्य जागरूकता के साथ-साथ रक्तदान के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने का संदेश भी दिया गया।

CMC लुधियाना ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 100 से अधिक बच्चों की सर्जरी का आंकड़ा पार किया

CMC लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 100 से अधिक बच्चों की सफल सर्जरी की। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने टीम को बधाई दी।

लुधियाना / सत्ता संदेश

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ (MMSY) के तहत 100 से अधिक बच्चों की सफल सर्जरी करने का महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। इस उपलब्धि पर पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने CMC लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग को बधाई दी और डॉक्टरों तथा मेडिकल स्टाफ की सेवाओं की सराहना की।

इस उपलब्धि के अवसर पर CMC लुधियाना में आयोजित विशेष कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने हिस्सा लिया। योजना के तहत बच्चों की कई जटिल और गंभीर सर्जरी की गई हैं। इन उपचारों का उद्देश्य पंजाब के शिशुओं और बच्चों को उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना आधुनिक और बेहतर सर्जिकल सेवाएं उपलब्ध कराना है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और समान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को उच्च गुणवत्ता वाली तृतीयक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि गंभीर बीमारी या सर्जरी की स्थिति में परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

स्वास्थ्य मंत्री ने CMC लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जनों, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और प्रबंधन टीम को उनकी मेहनत और समर्पण के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि गंभीर सर्जरी की जरूरत वाले बच्चों का बिना आर्थिक परेशानी के संवेदनशीलता और चिकित्सकीय सटीकता के साथ इलाज करना एक सराहनीय कार्य है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है, ताकि आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी पहुंचाई जा सकें।

CMC लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग और प्रशासन ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह तथा पंजाब सरकार का सहयोग और समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया। विभाग ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के जरूरतमंद और वंचित बच्चों तक विशेष पीडियाट्रिक सर्जिकल सेवाएं पहुंचाने के अपने संकल्प को भी दोहराया।

पंजाब विश्वविद्यालय में ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ का आयोजन, 350 से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा

चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में 100 सप्ताह नशा मुक्त युवा अभियान के तहत ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

100 सप्ताह नशा मुक्त युवा अभियान के तहत पंजाब विश्वविद्यालय में रविवार को ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ का आयोजन किया गया। माई भारत चंडीगढ़, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार, स्टेट एनएसएस सेल, चंडीगढ़ प्रशासन और एनएसएस इकाई, पंजाब विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का आयोजन पंजाब विश्वविद्यालय के गांधी भवन में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ थीम के तहत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 5:30 बजे माई भारत वॉलंटियर एवं योग प्रशिक्षक सुश्री सारिका के नेतृत्व में वार्म-अप, ज़ुम्बा और रिदमिक योग सत्र से हुई। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया गया।

इसके बाद आयोजित औपचारिक कार्यक्रम में माई भारत के यूटी डायरेक्टर शिवधन शर्मा ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ एजुकेशन, सेक्टर-20 के माई भारत-एनएसएस स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों और नशा मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

माई भारत चंडीगढ़ के जिला युवा अधिकारी विनय कुमार ने शपथ चक्र के दौरान सभी प्रतिभागियों को नशा मुक्त युवा शपथ दिलाई। प्रतिभागियों ने नशे से दूर रहने और समाज के अन्य लोगों को भी नशे से बचने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी गोयल ने ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन के राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. नेमी चंद गोलिया सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। पंजाब विश्वविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनुपम बहरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

वॉक के समापन के बाद प्रतिभागियों ने नशा मुक्त समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए सिग्नेचर वॉल पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और अल्पाहार की व्यवस्था की गई।

यह आयोजन नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम ने नशा मुक्त समाज और विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा सरकारी एजेंसियों के सामूहिक संकल्प को भी सामने रखा।

नशा मुक्ति केंद्रों में अब होगी Triple H Screening, HIV और हेपेटाइटिस की जांच से जुड़ेगी डि-एडिक्शन प्रक्रिया

पंजाब में नशा मुक्ति एवं रिहैबिलिटेशन सेवाओं को Triple H Screening से जोड़ने की तैयारी है। HIV, Hepatitis-B और Hepatitis-C की जांच के साथ उपचार और परामर्श पर भी जोर दिया जाएगा।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार ने नशा मुक्ति एवं पुनर्वास सेवाओं को रक्त के जरिए फैलने वाले संक्रमणों की जांच से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत नशा मुक्ति एवं रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से जुड़े लोगों की Triple H Screening की जाएगी। इसमें HIV, Hepatitis-B और Hepatitis-C की जांच शामिल होगी।

सरकार के अनुसार, यह पहल नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार और पुनर्वास सेवाओं के साथ-साथ संक्रमणों की समय पर पहचान और चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराना है।

नशा मुक्ति प्रक्रिया से सीधे जुड़ेगी जांच

पंजाब में पिछले वर्षों से HIV और हेपेटाइटिस की जांच के लिए समय-समय पर कैंप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि, केवल कैंप आधारित व्यवस्था में यह पता लगाना मुश्किल था कि कितने लोगों ने जांच करवाई, कौन जांच से छूट गया और किन लोगों को आगे उपचार या मेडिकल निगरानी की जरूरत है।

नई व्यवस्था में जांच को सीधे नशा मुक्ति एवं रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। इससे जांच के अवसर नियमित होंगे और संक्रमण की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति को आगे की चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।

इंजेक्शन से नशा करने वालों में संक्रमण का जोखिम

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों में रक्त के जरिए फैलने वाले संक्रमणों का जोखिम अधिक होता है। ऐसे में HIV, Hepatitis-B और Hepatitis-C की समय रहते पहचान जरूरी है, ताकि मरीज को उचित उपचार, परामर्श और चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा सके।

उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति का उद्देश्य केवल नशे की आदत से छुटकारा दिलाना नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों को स्वस्थ जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जुड़ने में मदद करना भी है।

जांच से लेकर उपचार तक बेहतर होगी निगरानी

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि कोई व्यक्ति नियमित जांच शिविर में शामिल नहीं हो पाता था तो उसे अगली स्क्रीनिंग के लिए कई सप्ताह या महीनों तक इंतजार करना पड़ सकता था। नशा मुक्ति सेवाओं के साथ स्क्रीनिंग को जोड़ने से ऐसे लोगों की पहचान करना आसान होगा, जिन्हें जांच या आगे की चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है।

संक्रमण की पुष्टि होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था भी की जाएगी।

परामर्श और मनोवैज्ञानिक सहयोग पर भी जोर

सरकार की इस पहल में केवल बीमारी की जांच ही नहीं, बल्कि नशे से उबरने की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर है। इसमें चिकित्सकीय देखभाल के साथ परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहयोग और सामाजिक पुनर्वास को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

राज्य में आम आदमी क्लीनिकों के माध्यम से भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पंजाब के स्वास्थ्य विभाग का ऑनलाइन स्वास्थ्य प्रबंधन तंत्र राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और सुविधाओं की निगरानी करता है।

जानकारी के मुताबिक, निजी नशा मुक्ति केंद्रों में Triple H Screening की व्यवस्था शुरू हो चुकी है, जबकि सरकारी केंद्रों में इसे जल्द लागू किए जाने की उम्मीद है। इस पहल का उद्देश्य नशे की समस्या से प्रभावित लोगों के लिए जांच, उपचार, परामर्श और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।


डिजिटल हेल्थ सिस्टम से बदलेगी मरीजों के इलाज की तस्वीर, ABDM और NHCX से डेटा शेयरिंग पर जोर

जानकारी के एक जगह से दूसरी जगह सही तरीके से न पहुंचने के कारण अस्पतालों को लंबे समय से डॉक्टरों के समय की बर्बादी और अटके हुए बीमा दावों के रूप में नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब जरूरत ऐसी डिजिटल व्यवस्थाएं बनाने की है, जो एक-दूसरे के साथ आसानी से जानकारी साझा कर सकें।

लेखक : डॉ. गिरधर जे. ज्ञानी, महानिदेशक, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI)

भारत के कई हिस्सों में आज भी एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर तक मरीज की जानकारी पहुंचाने का मुख्य जरिया खुद मरीज ही है। वह हर बार अपनी पुरानी मेडिकल रिपोर्ट लेकर जाती है- कागजों की फाइल, मोबाइल में जांच की तस्वीरें या फिर सिर्फ अपनी याददाश्त के भरोसे। इलाज के हर चरण में नई जानकारी तैयार होती है, लेकिन अक्सर वह अगले डॉक्टर या अस्पताल तक नहीं पहुंच पाती।

अस्पतालों के लिए इस कमी को दूर करना लंबे समय तक प्राथमिकता नहीं रहा। जब स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की बात हुई, तो मुख्य सवाल यही रहा कि इसमें कितना खर्च आएगा और अस्पतालों को अपनी व्यवस्था में कितना बदलाव करना पड़ेगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई नई डिजिटल व्यवस्था एक सप्ताहांत में लागू नहीं की जा सकती। अस्पतालों में वर्षों पुराने सॉफ्टवेयर, अलग-अलग तरह की काम करने की प्रक्रियाएं और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल का अलग-अलग स्तर है। छोटे अस्पतालों के लिए तकनीक पर खर्च किया गया हर रुपया बिस्तरों, उपकरणों और कर्मचारियों पर होने वाले खर्च से जुड़ा होता है। इसलिए हमेशा यह सवाल रहा कि क्या नई व्यवस्था वास्तव में ऐसी समस्या का समाधान करेगी, जिसका समाधान जरूरी है।

अब सवाल बदल गया है। ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मरीजों की जानकारी अलग-अलग जगह बंटी रहने की वजह से अस्पतालों और मरीजों को पहले से कितना नुकसान हो रहा है।

मरीज के इलाज का पूरा सफर इस समस्या को साफ दिखाता है। वह पहले किसी स्थानीय डॉक्टर को दिखा सकती है, फिर किसी जांच केंद्र पर जांच करा सकती है, उसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह ले सकती है और अंत में अस्पताल में भर्ती हो सकती है। इलाज के हर चरण में मरीज से जुड़ी नई जानकारी तैयार होती है, लेकिन यह जानकारी अक्सर डॉक्टर, क्लिनिक और जांच केंद्र के बीच आगे नहीं पहुंचती।

इसके बाद क्या होता है, यह हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री उपलब्ध नहीं होती, वही जांच दोबारा करानी पड़ती है, इलाज में अनावश्यक देरी होती है और ऐसी जानकारी जुटाने में घंटों लग जाते हैं जो पहले से कहीं और मौजूद होती है।

लंबे समय तक डेटा को अस्पताल या संस्था की अपनी संपत्ति की तरह देखा गया, जिसे अपने पास रखा जाए। जबकि असल में यह ऐसी जानकारी है, जिसे मरीज के साथ आगे बढ़ना चाहिए। अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग प्रारूप और एक-दूसरे से मेल न खाने वाली डिजिटल व्यवस्थाओं ने इस समस्या को और बढ़ाया है। अब जानकारी को अलग-अलग जगह बंद रखने की कीमत इतनी बढ़ गई है कि इसका नुकसान मरीजों और अस्पतालों, दोनों को हो रहा है। इसी वजह से निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन यानी एबीडीएम को एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि अलग-अलग डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान के लिए एक समान मानकों की जरूरत है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि मरीज जहां भी इलाज कराए, उसकी जरूरी स्वास्थ्य जानकारी अगले डॉक्टर या अस्पताल के काम आ सके।

दुनिया के अलग-अलग देशों के अनुभव बताते हैं कि जब मरीज की स्वास्थ्य जानकारी एक जगह से दूसरी जगह आसानी से नहीं पहुंचती, तो मरीज को खराब अनुभव हो सकता है, एक ही जांच बार-बार हो सकती है और इलाज में देरी हो सकती है। इसके विपरीत, अलग-अलग स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल से जांचों की दोहराव वाली जरूरत और अस्पताल में दोबारा भर्ती होने के मामलों में कमी देखी गई है।

प्रशासन के स्तर पर भी यही समस्या दिखाई देती है। एक अस्पताल कई बीमा कंपनियों और भुगतान करने वाली संस्थाओं के साथ काम करता है। इनमें से हर संस्था की अपनी डिजिटल व्यवस्था और अपने तरीके होते हैं। जब ये व्यवस्थाएं एक-दूसरे से ठीक से बात नहीं कर पातीं, तो बीमा दावों की प्रक्रिया बेवजह धीमी और महंगी हो जाती है। इसका सीधा असर अस्पताल की वित्तीय टीम और उसके पैसे के प्रवाह पर पड़ता है।

नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (एनएचसीएक्स) इसी समस्या को दूर करने की कोशिश करता है। यह बीमा दावों की प्रक्रिया को एक समान बनाने पर काम करता है। चाहे डॉक्टर के लिए जरूरी जांच रिपोर्ट हो या अस्पताल और बीमा कंपनी के बीच भेजा जाने वाला दावा, अगर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एक जगह से दूसरी जगह आसानी से नहीं पहुंच सकती, तो यह पूरी व्यवस्था की कमी है।

एनएचसीएक्स और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन स्वास्थ्य क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों पर काम करते हैं, लेकिन दोनों के पीछे मूल सोच एक ही है-जानकारी सुरक्षित तरीके से, एक समान व्यवस्था के तहत और जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सके।

लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था सिर्फ ऊपर से लागू नहीं की जा सकती। इसे डॉक्टरों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाएं देने वालों के साथ मिलकर तैयार करना होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी दी है कि अगर डिजिटल व्यवस्था अलग-अलग और केवल ऊपर से तय करके लागू की जाती है, तो इससे स्वास्थ्य व्यवस्था में बिखराव और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर प्रशासनिक बोझ बढ़ सकता है। इसलिए अलग-अलग प्रणालियों को आपस में जोड़ना ही मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।

भारत में यह बात खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां निजी स्वास्थ्य क्षेत्र बहुत विविध है। महानगर का एक बड़ा कॉरपोरेट अस्पताल और दूसरे या तीसरे स्तर के शहर का छोटा अस्पताल एक जैसी तकनीक, संसाधन या डिजिटल व्यवस्था लागू करने की क्षमता नहीं रखते।

छोटे अस्पताल में अलग से तकनीकी टीम भी नहीं हो सकती। अगर डिजिटल व्यवस्था सही तरीके से नहीं बनाई गई, तो उसे लागू करने का अतिरिक्त बोझ भी अस्पताल पर पड़ सकता है। इसलिए डिजिटल व्यवस्था को अपनाने की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अस्पतालों को कितना व्यावहारिक सहयोग मिलता है और नई व्यवस्था मरीजों के इलाज के मौजूदा तरीके के साथ कितनी आसानी से जुड़ पाती है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के दूत और एनएचसीएक्स के समर्थक के रूप में, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एएचपीआई) राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा देने वालों को इन डिजिटल व्यवस्थाओं का व्यावहारिक लाभ समझाना, अलग-अलग तरह के अस्पतालों में इनके इस्तेमाल को बढ़ावा देना और अस्पतालों के अनुभवों को उन लोगों तक पहुंचाना है, जो इन डिजिटल व्यवस्थाओं को तैयार कर रहे हैं।

निजी स्वास्थ्य क्षेत्र सिर्फ भारत की डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का इस्तेमाल करने वाला नहीं रह सकता। अस्पताल इस व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण उपयोगकर्ताओं में हैं, इसलिए उन्हें इसे बनाने में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा देने वालों को जानकारी के अलग-अलग जगह बंटे होने और आपसी तालमेल की कमी का जो अनुभव होता है, उसे देश में डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को आगे बढ़ाने की योजना में शामिल करना होगा।

आगे का काम चार हिस्सों में बांटा जा सकता है।पहला, अस्पतालों को ऐसी डेटा व्यवस्थाओं को खत्म करना होगा, जिनका अलग-अलग बंद पड़े रहना किसी के काम नहीं आता।

दूसरा, स्वास्थ्य तकनीक से जुड़ी कंपनियों को ऐसे उत्पाद और सॉफ्टवेयर बनाने होंगे, जो एक-दूसरे के साथ आसानी से काम कर सकें।तीसरा, चिकित्सा संस्थाओं और संगठनों को छोटे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को डिजिटल व्यवस्था अपनाने के शुरुआती चरण में मदद करनी होगी। चौथा, नीति बनाने वालों को ऐसे समान और व्यावहारिक मानक तय करने होंगे, जिन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी लोग अपना सकें।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सफलता तब मानी जाएगी, जब अस्पतालों, डॉक्टरों और मरीजों को स्वास्थ्य व्यवस्था में बिखराव कम होता हुआ महसूस होगा। जब ऐसा होगा और ऐसा होना संभव है तब डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मरीजों के इलाज का अधिक बेहतर और प्रभावी तरीका माना जाएगा।

समराला ब्लॉक में HIV/AIDS जागरूकता को लेकर एक दिवसीय सेंसिटिविटी ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित

समराला / सत्ता संदेश

पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (PSACS) के विजन और उद्देश्यों के तहत समराला ब्लॉक में गांवों के लोगों को HIV/AIDS के प्रति जागरूक करने के लिए एक दिवसीय सेंसिटिविटी और अवेयरनेस ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया। जिला प्रोग्राम ऑफिसर और CDPO समराला ने एस. गुरमीत सिंह के नेतृत्व में विभिन्न NGOs के सहयोग से यह कार्यक्रम करवाया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में HIV/AIDS के फैलाव, बचाव, जांच, इलाज और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में सही एवं वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को HIV संक्रमण के फैलने के तरीकों, इससे बचाव के लिए जरूरी सावधानियों, समय पर जांच और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के संबंध में जानकारी दी गई।

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में समराला ब्लॉक की आंगनवाड़ी वर्कर्स, आशा वर्कर्स, ANM, पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के सदस्यों और विभिन्न संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को अपने-अपने गांवों में HIV/AIDS के संबंध में सही जानकारी पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि HIV की रोकथाम के लिए जागरूकता, वैज्ञानिक जानकारी, सुरक्षित व्यवहार और समय पर जांच महत्वपूर्ण हैं। साथ ही HIV के साथ जी रहे लोगों के प्रति सम्मानजनक, संवेदनशील और भेदभाव रहित व्यवहार अपनाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं तक पहुंच के मामले में HIV से प्रभावित किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान HIV से प्रभावित लोगों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, परामर्श, जांच, उपचार और अन्य सहायता सेवाओं की जानकारी भी साझा की गई। वक्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय के जरिए जरूरतमंद लोगों तक इन सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से अपने गांवों और आसपास के क्षेत्रों में HIV/AIDS को लेकर सही और वैज्ञानिक जानकारी फैलाने की अपील की गई, ताकि जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ HIV से प्रभावित लोगों के प्रति सामाजिक भेदभाव और कलंक को कम किया जा सके।

लुधियाना : डेंगू को लेकर हेल्थ विभाग का अभियान, अंबेडकर नगर में मिले 4 लार्वा

लुधियाना / सत्ता संदेश

बदलते मौसम के बीच डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए लुधियाना हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से हर शुक्रवार को “डेंगू एंड वार” कैंपेन चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अंबेडकर नगर इलाके में अभियान चलाकर डेंगू के लार्वा की जांच की।

अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम को चार स्थानों पर डेंगू का लार्वा मिला, जिसे मौके पर ही नष्ट किया गया। टीम ने लोगों को घरों और आसपास पानी जमा न होने देने तथा डेंगू से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, डेंगू के हॉटस्पॉट इलाकों में विशेष गाड़ियों के माध्यम से स्प्रे भी किया जा रहा है, ताकि मच्छरों और डेंगू के लार्वा को खत्म किया जा सके।

डॉ. नारंग ने बताया कि हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से हर शुक्रवार को डेंगू एंड वार कैंपेन के तहत अभियान जारी रखा जा रहा है। विभाग की टीमें अलग-अलग इलाकों में जाकर डेंगू के लार्वा की जांच और उसे खत्म करने का काम कर रही हैं।

जालंधर : बच्चे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, परिजनों ने इलाज में लापरवाही के लगाए आरोप

जालंधर / सत्ता संदेश

कपूरथला चौक स्थित एक निजी अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने, बच्चे की गंभीर हालत की जानकारी नहीं देने और लगातार पैसे जमा करवाने के गंभीर आरोप लगाए। हंगामे की सूचना मिलने पर थाना डिवीजन नंबर-2 की पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को संभाला।

बच्चे के पिता शमशेर ने बताया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। सोमवार को उनका बेटा छत से गिर गया था, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी। हालत बिगड़ने पर उसे कपूरथला चौक स्थित सत्यम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिजनों का आरोप है कि बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद अलग-अलग दवाइयों और जांच के नाम पर उनसे लगातार पैसे जमा करवाए जाते रहे, लेकिन बच्चे की वास्तविक स्थिति के बारे में उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार के मुताबिक, उन्हें बच्चे से मिलने की अनुमति भी नहीं दी गई।

परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने बच्चे को देखने की बात कही तो उन्हें पहले शाम 5 बजे, फिर 6 बजे और बाद में 7-8 बजे का समय दिया गया। इससे परिवार को संदेह हुआ। आरोप है कि जब उन्होंने अंदर जाकर बच्चे की स्थिति जानने का प्रयास किया तो अस्पताल के बाउंसरों और सुरक्षा कर्मचारियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की।

परिवार के अनुसार काफी प्रयास के बाद बच्चे के चाचा किसी तरह अंदर पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि बच्चे की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे की मृत्यु के बावजूद उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई और उनसे पैसे जमा करवाए जाते रहे। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय रहते बच्चे की गंभीर स्थिति या मौत की जानकारी दी जाती तो वे किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने अथवा अन्य चिकित्सकीय विकल्प तलाशने का प्रयास कर सकते थे।

मामले की शिकायत पुलिस कंट्रोल रूम में दी गई। 112 नंबर पर सूचना मिलने के बाद थाना डिवीजन नंबर-2 की पुलिस टीम अस्पताल पहुंची। पुलिस ने मौके का जायजा लेने के साथ परिजनों और अस्पताल पक्ष से बातचीत की।

पुलिस के अनुसार मामले की जांच की जा रही है। परिजनों के बयान और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या पक्ष सामने आया है, इसकी जानकारी फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

समराला में शुरू हुआ आधुनिक फिजियोथेरेपी सेंटर, करण अस्पताल ने माछीवाड़ा रोड पर दी नई सुविधा

करण अस्पताल समराला ने माछीवाड़ा रोड पर आधुनिक फिजियोथेरेपी सेंटर शुरू किया। एसडीएम गुरसिमरनजीत कौर ने सेंटर का उद्घाटन किया।

रिपोर्ट: परमिंदर वर्मा

समराला / सत्ता संदेश

समराला के करण अस्पताल समराला की ओर से माछीवाड़ा रोड पर नए फिजियोथेरेपी सेंटर की शुरुआत की गई। सेंटर का उद्घाटन समराला की एसडीएम गुरसिमरनजीत कौर ने किया। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों, स्टाफ के साथ क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, नए फिजियोथेरेपी सेंटर में मरीजों को आधुनिक फिजियोथेरेपी सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया है। सेंटर शुरू करने का उद्देश्य मरीजों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है, ताकि उन्हें फिजियोथेरेपी के लिए दूर न जाना पड़े।

उद्घाटन के अवसर पर एसडीएम गुरसिमरनजीत कौर ने करण अस्पताल की ओर से शुरू किए गए नए फिजियोथेरेपी सेंटर के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सेंटर के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की बात कही।

कार्यक्रम के दौरान समराला के पूर्व विधायक जगजीवन सिंह खीरनियां, करण अस्पताल समराला के डायरेक्टर डॉ. गुरमुख सिंह और फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. गुरदित्त सिंह ने भी सेंटर की सुविधाओं और यहां उपलब्ध करवाई जाने वाली सेवाओं से संबंधित जानकारी साझा की।

इस मौके पर अस्पताल के डॉक्टरों एवं स्टाफ के अलावा क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।