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लुधियाना में जीवनजोत प्रोजेक्ट की बड़ी कार्रवाई, स्पेशल रेड में 4 बच्चे रेस्क्यू

लुधियाना में जीवनजोत प्रोजेक्ट के तहत स्पेशल रेड कैंपेन चलाया गया। रेलवे स्टेशन समेत कई इलाकों में कार्रवाई के दौरान 4 बच्चों को बचाया गया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

बच्चों की सुरक्षा, भलाई और अधिकारों की रक्षा को लेकर लुधियाना में जीवनजोत प्रोजेक्ट के तहत विशेष रेड कैंपेन चलाया गया। डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर श्री गुरमीत सिंह के निर्देशों पर 12 सितंबर को शहर के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में की गई इस कार्रवाई के दौरान 4 बच्चों को बचाया गया।

स्पेशल रेड कैंपेन के तहत लुधियाना रेलवे स्टेशन, माता रानी चौक, दुर्गा माता चौक, दंडी स्वामी रोड, पैवेलियन चौक सहित शहर के कई संवेदनशील क्षेत्रों को कवर किया गया। अभियान के दौरान टीम ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए चार बच्चों को रेस्क्यू किया।

रेस्क्यू किए गए बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), लुधियाना के समक्ष पेश किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इस विशेष अभियान का नेतृत्व लुधियाना की डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर श्रीमती रश्मि ने किया। अभियान में संदीप सिंह, मनजोत सिंह, किरणदीप कौर, ज्योति, कमलजीत कौर और शरद सूद ने हिस्सा लिया। चाइल्ड हेल्पलाइन टीम की ओर से संदीप सिंह और CDPO स्टाफ से भूपिंदर सिंह भी अभियान में शामिल रहे। पुलिस प्रशासन ने भी कार्रवाई के दौरान टीम को आवश्यक सहयोग प्रदान किया।

अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू किए गए बच्चों की सुरक्षा, कल्याण और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए निर्धारित कानूनी नियमों, प्रोटोकॉल और चाइल्ड प्रोटेक्शन व्यवस्था के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

जीवनजोत प्रोजेक्ट का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना, उनके अधिकारों की रक्षा करना तथा जरूरतमंद बच्चों को समय पर सहायता, संरक्षण और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करवाना है।

जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से बच्चों की सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता देते हुए भविष्य में भी ऐसे विशेष रेड कैंपेन और जागरूकता अभियानों को जारी रखने की बात कही गई है।

लुधियाना नेशनल लोक अदालत में 1.23 लाख से ज्यादा केस निपटे, ₹260 करोड़ से अधिक के अवॉर्ड

लुधियाना में नेशनल लोक अदालत के दौरान 1.25 लाख से अधिक मामलों की सुनवाई हुई और 1.23 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया गया। ₹260 करोड़ से अधिक के अवॉर्ड पास किए गए।

लुधियाना / सत्ता संदेश

जिला लुधियाना और इसके अंतर्गत आने वाले जगराओं, समराला, खन्ना और पायल सब-डिवीजनों की अदालतों में 12 सितंबर 2026 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का आयोजन भारत के चीफ जस्टिस एवं नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, नई दिल्ली के पैट्रन-इन-चीफ जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट के जज एवं नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस विक्रम नाथ तथा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट, चंडीगढ़ के चीफ जस्टिस एवं पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के पैट्रन-इन-चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में किया गया।

यह लोक अदालत जिला एवं सेशंस जज-कम-चेयरपर्सन, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, लुधियाना हरप्रीत कौर रंधावा की देखरेख में तथा पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की एग्जीक्यूटिव मेंबर सेक्रेटरी श्रीमती जगदीप कौर विर्क के आदेश के अनुसार आयोजित की गई।

जिला एवं सेशंस जज हरप्रीत कौर रंधावा ने बताया कि प्री-लिटिगेटिव और लंबित सिविल मामलों के साथ-साथ कंपाउंडेबल क्रिमिनल मामलों को पक्षकारों की आपसी सहमति से निपटाने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय लुधियाना में कुल 44 बेंच बनाए गए थे। वहीं जगराओं, समराला, खन्ना और पायल सब-डिवीजनों में कुल 10 बेंच स्थापित किए गए।

उन्होंने बताया कि नेशनल लोक अदालत के दौरान 1,25,000 से अधिक मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें से 1,23,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल ₹260,34,22,067 के अवॉर्ड पास किए गए।

लोक अदालत के दौरान करीब पांच वर्षों से लंबित एक मामला अमनदीप कौर बनाम सुखवीर सिंह भी जिला एवं सेशंस जज की पहल और प्रयासों से आपसी सहमति के आधार पर निपटाया गया। इसके अलावा एक्सिस बैंक बनाम परगट सिंह मामले का भी आपसी सहमति से निपटारा किया गया।

हरप्रीत कौर रंधावा ने लोक अदालत के लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का शीघ्र निपटारा होता है। लोक अदालत का अवॉर्ड सिविल कोर्ट की डिक्री के समान माना जाता है और कानून के तहत ऐसे अवॉर्ड के खिलाफ सामान्य तौर पर अपील का प्रावधान नहीं होता। इसके अलावा आपसी समझौते के आधार पर विवाद का समाधान होने के साथ कोर्ट फीस की वापसी का लाभ भी मिलता है।

उन्होंने बताया कि अगली नेशनल लोक अदालत 12 दिसंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। वहीं धारा 138 एनआई एक्ट से संबंधित मामलों के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन 21 नवंबर 2026 को किया जाएगा।

लोग लोक अदालत, कानूनी सहायता और अन्य लीगल सर्विसेज से संबंधित जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर सकते हैं।

इस अवसर पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. रजनीश, सिविल जज जूनियर डिवीजन गौरव गुप्ता एवं अमित बख्शी तथा एडवोकेट रजनीश लखनपाल सहित अन्य अधिकारी और न्यायिक कर्मचारी मौजूद रहे।

मिशन क्लीन पंजाब के दूसरे फेज में लुधियाना में सफाई अभियान, MLA सिद्धू और मानूके ने संभाली कमान

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार की ओर से राज्य के शहरों और कस्बों को साफ, सुंदर और स्वस्थ बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘मिशन क्लीन पंजाब’ अभियान के दूसरे फेज के तहत लुधियाना जिले में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस दौरान विभिन्न इलाकों में जनप्रतिनिधियों और नगर निगम की टीमों ने मिलकर सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया।

आत्म नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू की अगुवाई में वार्ड नंबर 45 में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। अभियान में वार्ड काउंसलर के साथ CSO, CSI, SI, B&R टीम, O&M टीम, CF और हेल्थ टीम के सदस्य मौजूद रहे।

इस दौरान इलाके की सफाई के साथ-साथ लोगों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्रति जागरूक किया गया। लोगों से अपील की गई कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में कचरा जमा न होने दें तथा कचरे को अलग-अलग करके सफाई कर्मचारियों को सौंपें।

इसी तरह जगराओं विधानसभा क्षेत्र में विधायक सरबजीत कौर मानूके की अगुवाई में जगराओं बस अड्डा चौक से सुआ पुली, लुधियाना जीटी रोड तक मुख्य हाईवे पुल के दोनों तरफ विशेष सफाई अभियान चलाया गया।

अभियान के दौरान विधायकों ने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास का वातावरण साफ रखें और ‘मिशन क्लीन पंजाब’ को केवल सरकारी अभियान न मानकर जनभागीदारी वाला अभियान बनाएं। उन्होंने कहा कि शहरों और कस्बों को साफ एवं सुंदर बनाए रखना सरकार के साथ-साथ हर नागरिक की भी जिम्मेदारी है।

विधायकों ने कहा कि ‘मिशन क्लीन पंजाब’ राज्य सरकार का एक महत्वपूर्ण अभियान है, जिसका उद्देश्य शहरों और कस्बों में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना है। स्वच्छ वातावरण प्रत्येक नागरिक का अधिकार होने के साथ-साथ उसकी जिम्मेदारी भी है।

उन्होंने कहा कि सफाई को केवल किसी विशेष दिन या अभियान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। खासकर बारिश के मौसम में गलियों, नालियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बेहतर सफाई व्यवस्था, जागरूकता और सही तरीके से कचरा प्रबंधन के जरिए कई मौसमी और जलजनित बीमारियों को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है।

लोगों से अपील की गई कि वे ‘मिशन क्लीन पंजाब’ को जन आंदोलन बनाने में सहयोग करें और अपने घरों, दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने का संकल्प लें।

Sports Homeland Punjab 2026: लुधियाना के 4 ब्लॉकों में खेल मुकाबले शुरू, खिलाड़ियों ने दिखाया दम

लुधियाना / सत्ता संदेश

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026 के तहत लुधियाना जिले के विभिन्न ब्लॉकों में आयोजित किए जा रहे ब्लॉक स्तरीय खेल मुकाबलों के तीसरे फेज की शुरुआत हो गई है। इस चरण में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, खन्ना, लुधियाना-2 और रायकोट ब्लॉकों में खेल प्रतियोगिताएं शुरू हुईं।

खेल मुकाबलों के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कैबिनेट मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध करवाना तथा युवाओं को खेलों से जोड़ना है।

म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ब्लॉक के मुकाबले गुरु नानक स्टेडियम, लुधियाना में आयोजित किए गए। इस दौरान आत्म नगर से विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू, लुधियाना नॉर्थ से विधायक मदन लाल बग्गा और लुधियाना सेंट्रल से विधायक अशोक पराशर पप्पी ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। इस मौके पर पंजाब खेल कल्याण बोर्ड की सदस्य सोनिया अलग, पंजाब बास्केटबॉल एसोसिएशन के सचिव तेजा सिंह धालीवाल, अंतरराष्ट्रीय साइक्लिस्ट राजिंदर सिंह, भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशासक हरबंस सिंह, जिला खेल अधिकारी मंदीप कौशल सहित खेल विभाग के अधिकारी और आयोजन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।

म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ब्लॉक में पहले दिन अंडर-17 लड़कों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता के 400 मीटर मुकाबले में ध्रुव ने पहला, आदि ने दूसरा और आदित्य ने तीसरा स्थान हासिल किया। 1500 मीटर में पुष्प ने पहला, सक्षम आनंद ने दूसरा और संजय सोढ़ी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। लड़कियों के अंडर-17 वर्ग की 100 मीटर दौड़ में हाना ने पहला, याचिका जैन ने दूसरा और अनन्या वर्मा ने तीसरा स्थान हासिल किया।

खन्ना ब्लॉक के मुकाबले नरेश चंद्र स्टेडियम में आयोजित किए गए। यहां कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने खेल विभाग और जिला प्रशासन द्वारा प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर एसडीएम स्वाति टिवाना, तहसीलदार गुरचरण सिंह, ईओ चरणजीत सिंह सहित खेल प्रशिक्षक और आयोजन से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे।

खन्ना में लड़कियों के अंडर-14 वर्ग में बाबा जोरावर सिंह फतेह सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल मंजी साहिब कोटन ने पहला, कुलार पब्लिक स्कूल बीजा ने दूसरा और सेंटर गोह खन्ना ने तीसरा स्थान हासिल किया। अंडर-17 लड़कों की 800 मीटर दौड़ में सुखमन सिंह पहले, गुरविंदर सिंह दूसरे और जशनदीप सिंह तीसरे स्थान पर रहे। अंडर-17 लड़कियों की 100 मीटर दौड़ में गुरलीन कौर ने पहला, जसमीत कौर ने दूसरा और जसलीन कौर ने तीसरा स्थान हासिल किया। 400 मीटर में रवनीत कौर पहले, भावना दूसरे और वृद्धि तीसरे स्थान पर रहीं।

लुधियाना-2 ब्लॉक की प्रतियोगिताएं मुख्यमंत्री खेल स्टेडियम, गौंसगढ़ में शुरू हुईं। कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने यहां पहुंचकर खिलाड़ियों से मुलाकात की और उन्हें खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर ब्लॉक संयोजक सतविंदर सिंह, ब्लॉक सह-संयोजक सुखपाल कौर और साइक्लिंग कोच साहिल मौजूद रहे।

लुधियाना-2 ब्लॉक में अंडर-17 लड़कों की 400 मीटर दौड़ में अनुराज सिंह ने पहला, रमनप्रीत सिंह ने दूसरा और जशनप्रीत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं 800 मीटर में अनुराज सिंह पहले, दलजीत सिंह दूसरे और जशनप्रीत सिंह तीसरे स्थान पर रहे।

रायकोट ब्लॉक के मुकाबले स्पोर्ट्स स्टेडियम, रायकोट में आयोजित किए गए। इस दौरान रायकोट के विधायक हाकम सिंह ठेकेदार ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें खेलों के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर एसडीएम रायकोट खुशप्रीत सिंह, यूथ प्रेसिडेंट हरप्रीत सिंह, ब्लॉक कन्वीनर बलजीत कौर, ब्लॉक को-कन्वीनर सरबजीत कौर और विभिन्न खेलों के कोच मौजूद रहे।

रायकोट ब्लॉक में पहले दिन अंडर-14 लड़कियों के मुकाबलों में शहबाजपुरा ने पहला, बस्सियां ने दूसरा और ऐतियाना ने तीसरा स्थान हासिल किया।

स्पोर्ट्स होमलैंड पंजाब 2026 के तहत आयोजित इन प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की भागीदारी और उत्साह से खेल मैदानों में खासा जोश देखने को मिला। प्रतियोगिताओं के जरिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों से उभर रही खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिल रहा है।

MLA बग्गा ने वार्ड नंबर 88 में RMC रोड का किया उद्घाटन, करीब 60 लाख रुपये होंगे खर्च

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के विधायक चौधरी मदन लाल बग्गा ने वार्ड नंबर 88 में RMC रोड के निर्माण कार्य का उद्घाटन किया। इस प्रोजेक्ट पर करीब 60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

उद्घाटन के मौके पर पार्षद नीरज आहूजा, पार्षद अमन बग्गा खुराना सहित आम आदमी पार्टी की टीम और स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे।

MLA मदन लाल बग्गा ने कहा कि वार्ड नंबर 88 की यह सड़क काफी समय से खराब हालत में थी, जिसके कारण स्थानीय निवासियों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि सड़क के निर्माण के बाद लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और ट्रैफिक व्यवस्था भी बेहतर होगी।

विधायक बग्गा ने कहा कि लुधियाना नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र को विकास के मामले में अग्रणी क्षेत्र बनाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विधानसभा क्षेत्र की कोई भी सड़क मरम्मत या निर्माण से वंचित न रहे। शहर और गांवों के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए भी लगातार काम किया जा रहा है।

MLA बग्गा ने कहा कि लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है और विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

आत्म नगर में रामगढ़िया वेलफेयर बोर्ड की बैठक, AAP नेताओं की उपलब्धि पर बांटे लड्डू

लुधियाना के आत्म नगर में रामगढ़िया वेलफेयर बोर्ड की बैठक आयोजित हुई। बैठक में AAP नेताओं के नेशनल एग्जीक्यूटिव सदस्य चुने जाने पर लड्डू बांटकर खुशी मनाई गई।

लुधियाना / सत्ता संदेश

विधानसभा हलका आत्म नगर में रामगढ़िया वेलफेयर बोर्ड की बैठक जिला चेयरमैन स. रेशम सिंह सग्गू की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में पंजाब चेयरमैन सतपाल सिंह सोखी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान रेशम सिंह सग्गू ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा करवाए जा रहे विकास कार्यों और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार की जनहितैषी नीतियों से आम लोगों को राहत मिल रही है और योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कैंप लगाए जा रहे हैं।

सग्गू ने दावा किया कि सरकार के कार्यों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग आम आदमी पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में 2027 में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी।

इस अवसर पर रेशम सिंह सग्गू और सतपाल सिंह सोखी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, हरपाल सिंह चीमा, ओएसडी राजवीर सिंह घुम्मण और आदिल अहमद खान को आम आदमी पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव का सदस्य चुने जाने पर बधाई दी। इस खुशी में बैठक के दौरान लड्डू बांटे गए और पार्टी नेतृत्व का धन्यवाद किया गया। नेताओं ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित पार्टी की पूरी लीडरशिप का आभार व्यक्त किया।

बैठक में विधानसभा चेयरमैन तरुणदीप सिंह कलसी, लखविंदर सिंह सबरवाल, दर्शन सिंह, यादविंदर सिंह मठाड़ू, मनमोहनप्रीत सिंह गहीर, जगदीप सिंह रिंकू, हरप्रीत सिंह सेबी, उप-चेयरमैन सुखदेव सिंह जगदेव, सुखविंदर सिंह दहले, बलविंदर सिंह सियाण, जगदीप सिंह लोटे, सतवंत सिंह मठाड़ू, हरदीप सिंह गुरु, सलिंदर सिंह भंमरा, सुरिंदर सिंह तथा जनरल सचिव सुखविंदर सिंह जगदेव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

चंडीगढ़ में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम, युवाओं ने लिया नशा मुक्त भारत का संकल्प

देव समाज कॉलेज फॉर वीमेन, सेक्टर 45-बी चंडीगढ़ में माय् भारत द्वारा विकसित भारत यूथ कनेक्ट कार्यक्रम आयोजित किया गया। युवाओं ने नशा मुक्त भारत की शपथ ली।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में माय् भारत द्वारा “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” विषय पर विकसित भारत यूथ कनेक्ट कार्यक्रम का आयोजन देव समाज कॉलेज फॉर वीमेन, सेक्टर 45-बी, चंडीगढ़ में किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज की छात्राओं और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें विकसित भारत @2047 और नशा मुक्त भारत के लक्ष्य में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम में देव समाज कॉलेज फॉर वीमेन की प्राचार्या प्रो. डॉ. नीरू मलिक, सलाहकार डॉ. जसपाल कौर, डीन छात्र कल्याण श्रीमती राखी जे. सिंह, वाडा क्लब प्रभारी डॉ. सतिंदर कौर एवं डॉ. अनुपम तथा माय् भारत नोडल अधिकारी डॉ. सवकीरत कौर मौजूद रहीं।

माय भारत की ओर से यूटी निदेशक, माय भारत चंडीगढ़ शिवधन शर्मा, राज्य निदेशक, माय भारत पंजाब रश्मीत कौर, लेखा एवं कार्यक्रम पर्यवेक्षक हरि प्रकाश तथा निर्मल सिंह ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान माय् भारत एवं विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD) 2027 पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें छात्रों को माय् भारत मंच, युवा सहभागिता और विभिन्न अवसरों के बारे में जानकारी दी गई। युवाओं को VBYLD यात्रा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से VBYLD क्विज़ भी आयोजित की गई।

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं में माय् भारत स्वयंसेविका एवं यूथ आइकन मानशवी शर्मा की भागीदारी रही। उन्होंने नशीले पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों पर प्रभावी प्रस्तुति देते हुए स्वस्थ, जिम्मेदार और नशा मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इसके अलावा “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” विषय पर नारा लेखन प्रतियोगिता कराई गई और उपस्थित युवाओं को नशा मुक्त भारत की सामूहिक शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ एवं जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का समापन युवाओं द्वारा नशा मुक्त भारत और विकसित भारत @2047 के विजन में सक्रिय योगदान देने के संकल्प के साथ हुआ।

आईटीबीपी सुरक्षाकर्मियों के सम्मान में RBI ने आयोजित की वार्षिक सांस्कृतिक संध्या

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), चंडीगढ़ द्वारा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सुरक्षाकर्मियों की सेवाओं के सम्मान और उनके प्रति आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से शुक्रवार को वार्षिक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय रिज़र्व बैंक के हरियाणा, पंजाब एवं चंडीगढ़ संघ शासित क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक श्री विवेक श्रीवास्तव ने की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईटीबीपी वेस्टर्न कमांड के पुलिस महानिरीक्षक श्री अश्वनी कुमार डोगरा उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारतीय रिज़र्व बैंक और आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ Bureau of Civil Aviation Security के क्षेत्रीय निदेशक श्री संजय कुमार तथा यूटी चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा प्रोटोकॉल से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में श्री विवेक श्रीवास्तव ने कठिन एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आईटीबीपी के जवानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित सुरक्षाकर्मियों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

सांस्कृतिक संध्या के दौरान विभिन्न संगीतमय एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश की गईं, जिन्होंने पूरे वातावरण को उत्साह और उल्लास से भर दिया। आईटीबीपी के जवानों के लिए आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से आपसी सौहार्द, सम्मान और सहयोग की भावना को और मजबूत करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के समापन पर भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से आईटीबीपी के अधिकारियों एवं सुरक्षाकर्मियों के समर्पण, साहस और राष्ट्रसेवा के लिए आभार व्यक्त किया गया।

‘क्लीन सी, सेफ़ सी’ कैंपेन की बढ़ती पहुंच, 75 जगहों से 836 तटीय क्षेत्रों तक पहुंचा अभियान

-डॉ. जितेंद्र सिंह

समुद्र में एक ऐसी याद है जिसे कोई मॉनसून मिटा नहीं सकता। भारत के 11,098 km लंबे समुद्र तट पर सुबह की सैर करें। आपको उन लहरों में वही पुरानी कहानी दिखेगी जो कभी मसालों से लदे जहाज़ों को मालाबार तट पर लाती थी और मन्नार की खाड़ी में मोती खोजने वालों की मदद करती थी। समुद्र की इसी पुरानी और लगातार लय ने तय किया है कि भारतीय कैसे रहते हैं, व्यापार करते हैं, पूजा करते हैं और सपने देखते हैं।

लेकिन आज उसी बीच पर जाएं और लहरें कुछ और भी वापस ला रही हैं—एक फटा हुआ मछली पकड़ने का जाल जिसमें एक खाली शैम्पू का पाउच उलझा हुआ है; एक छोटा समुद्री कछुआ बोतल के ढक्कन की ओर बढ़ रहा है, उसे खाना समझकर; एक मछुआरे की सुबह की पकड़ उसके पिता से छोटी होती है और उसमें मछलियों से ज़्यादा प्लास्टिक होता है। एक समय भारत अपनी खुशहाली का अंदाज़ा मसल्स, क्लैम और मछलियों की ज़्यादा पकड़ से लगाता था। लेकिन आज का भारत उसी समुद्र से कचरे के रूप में एक संदेश पा रहा है। यह कहानी इस बारे में है कि पिछले दस सालों में हमने आखिरकार उस मैसेज को समझना और समुद्र को अपने तरीके से जवाब देना कैसे शुरू किया है।

बहुत लंबे समय से, समुद्र तट हमारे दिमाग में उतना ही बसा हुआ था जितना हमारे मैप में। हम बीच पर जाते थे, उनकी खूबसूरती देखते थे और कभी-कभी साइक्लोन से हुए नुकसान पर दुख जताते थे। लेकिन इसे हमारी साझी विरासत के तौर पर बचाने पर बहुत कम ध्यान दिया गया। पहले, समुद्र की रक्षा और उसके बचाव का काम ज़्यादातर सरकारी डिपार्टमेंट तक ही सीमित था। अलग-अलग डिपार्टमेंट अपने-अपने लेवल पर काम करते थे। रोज़ाना समुद्र की देखभाल करने के बजाय, ज़्यादातर ध्यान आपदाओं के बाद राहत और बचाव पर होता था। आम लोगों को – जैसे कोच्चि में कॉलेज स्टूडेंट, पुरी में स्कूल टीचर या पोरबंदर में दुकानदार – यह महसूस कराने के लिए कोई नेशनल प्लेटफॉर्म नहीं था कि समुद्र उनका है और इसे बचाना उनकी ज़िम्मेदारी है। इस बीच, समुद्र के लिए खतरा लगातार बढ़ता जा रहा था।

बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा, खासकर सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, नदियों और झरनों के ज़रिए समुद्र में पहुँच रहा था। यह प्लास्टिक गायब नहीं होता, बल्कि टूटकर माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाता है। ये पांच मिलीमीटर से भी छोटे टुकड़े होते हैं। मछलियां प्लास्टिक के इन छोटे टुकड़ों को खाना समझकर खा जाती हैं। यह प्लास्टिक फिर उन मछलियों तक पहुंचता है जिन्हें हम खाते हैं। अब यह भी पता चला है कि ये छोटे प्लास्टिक के कण धीरे-धीरे फूड चेन के ज़रिए हमारे शरीर में पहुंच सकते हैं। समुद्री जानवर छोड़े गए मछली पकड़ने के जालों में फंसकर मर रहे थे। रीफ, मैंग्रोव जंगल और मछलियों की आबादी पर भी धीरे-धीरे असर पड़ रहा था। लाखों तटीय परिवारों की रोजी-रोटी इन पर निर्भर है। सच कहूं तो, यह हमारे समय की सबसे कम ध्यान दी जाने वाली पर्यावरण समस्याओं में से एक थी। समस्या हमारे ठीक सामने थी, लेकिन हम इसे नज़रअंदाज़ करते रहे। यह भारत के नौ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों को छूने वाली तटीय रेखा के साथ बढ़ रही थी।

यह बदलाव सिर्फ़ एक नई पॉलिसी से नहीं आया। असली बदलाव यह था कि मोदी सरकार ने सोच-समझकर यह तय किया कि सफाई अब किसी और पर नहीं छोड़ी जा सकती। इसे सबकी ज़िम्मेदारी बनाना होगा। 2014 में स्वच्छ भारत मिशन शुरू करते समय, प्रधानमंत्री ने इसे ‘जन आंदोलन’ बनाने की बात की थी। यह सोच समुद्र और तटों तक फैली हुई थी। इसी सोच का एक हिस्सा है ‘मिशन लाइफ’, यानी इको-फ्रेंडली लाइफस्टाइल। इसका मकसद है कि पर्यावरण की सुरक्षा हर नागरिक के लिए रोज़ की आदत बने, न कि कभी-कभार का काम। हमारी मिनिस्ट्री की ज़िम्मेदारी है कि वह समुद्र, पर्यावरण और धरती से जुड़े साइंटिफिक सिस्टम को समझे और उनकी स्टडी करे। तो हमारे सामने एक सीधा सवाल था – अगर भारत अपने शहरों को साफ़ करने के लिए करोड़ों लोगों को एक साथ ला सकता है, तो क्या यही काम अपने समुद्रों के लिए नहीं किया जा सकता?

इस सवाल का जवाब 2022 में ‘क्लीन ओशन, सेफ़ ओशन’ कैंपेन के रूप में मिला। इस कैंपेन का मकसद सिर्फ़ एक दिन के लिए बीच साफ़ करना और तस्वीरें खिंचवाना नहीं था। इसे लगातार चलने वाला, साइंस-बेस्ड और नागरिकों की भागीदारी वाला कैंपेन बनाया गया। हर साल इसे इंटरनेशनल कोस्टल क्लीनअप डे से जोड़ा जाता है। यह दिन सितंबर के तीसरे शनिवार को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1986 में हुई थी और आज दुनिया के 100 से ज़्यादा देशों में लोग अपने सबसे पास के बीच पर जाकर उसे साफ़ करते हैं—सिर्फ़ हाथों में ग्लव्स और कचरे के थैले लेकर, और मन में समुद्र को साफ़ रखने का संकल्प लेकर।

इस कैंपेन का छोटा सा इतिहास इसकी बढ़ती पहुँच की पूरी कहानी बताता है। पहले साल, ‘क्लीन सी, सेफ़ सी’ कैंपेन 75 दिनों तक चला और 75 जगहों पर पहुँचा। इसे ज़्यादातर हमारे समुद्र से जुड़े रिसर्च इंस्टीट्यूट ने चलाया। यह एक शुरुआत थी, कोई बहुत बड़ी कामयाबी नहीं। लेकिन धीरे-धीरे दूसरे मंत्रालय भी इससे जुड़ने लगे। सीमा जागरण मंच और पर्यावरण संरक्षण प्रतिभा जैसे वॉलंटरी संगठनों ने अपने नेटवर्क के ज़रिए लोगों को जोड़ा। यह मैसेज बीच पर रहने वाले लोगों में भी फैलने लगा। इस साल, यह कैंपेन 836 तटीय जगहों और एक लाख से ज़्यादा लोगों तक फैल गया।

भारत की भूली-बिसरी लौकी-वर्गीय सब्ज़ियों पर एक जेनेटिक नज़र

‘अक्ल की लौकी’ अब नहीं

हिंदी में एक कहावत है: ‘अक्ल की लौकी’। इसका मतलब है ‘दिमाग की जगह लौकी होना’, यानी किसी को बेवकूफ या नासमझ कहना। आम लोगों की सोच में लौकी बेकार और खोखली चीज़ है, जिसे गंभीरता से नहीं लिया जाता।

लेकिन असल में लौकी ही बाज़ी मार ले जाती है।

उत्तर भारत के ज़्यादातर गाँवों में फसल के मौसम में घूमिए, तो आपको ये हर जगह दिखेंगी: लौकी, तोरई, करेला, नेनुआ, चिचिंडा – ये सब घरों के बाहर बाँस के मचानों पर चढ़ी हुई मिलेंगी। ये सस्ती और देखने में साधारण होती हैं, और इतनी आम हैं कि खरीदते समय कोई इनके बारे में ज़्यादा सोचता भी नहीं। फिर भी, पोषण के मामले में ये बहुत काम की चीज़ें हैं। ये ऐसे देश में विटामिन और मिनरल देती हैं जहाँ चावल और गेहूँ पेट तो भर देते हैं, लेकिन खाने में ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी रह जाती है। कृषि वैज्ञानिक ऐसी फसलों को ‘ऑर्फ़न क्रॉप्स’ (अनाथ फसलें) कहते हैं। जो लोग इन्हें उगाते और खाते हैं, उनके लिए ये बहुत ज़रूरी हैं, लेकिन दशकों तक इन्हें नज़रअंदाज़ किया गया क्योंकि ब्रीडर्स ने चावल, गेहूँ, कपास और टमाटर को ज़्यादा पैदावार देने वाली किस्मों में बदल दिया, जिन्हें हम आज जानते हैं।

समस्या यह है। लौकी-वर्गीय लगभग सभी पौधों में फल लगने के लिए कीड़ों द्वारा परागण (पॉलिनेशन) की ज़रूरत होती है। एक बेल में हर एक मादा फूल के मुकाबले दर्जनों या सैकड़ों नर फूल लगते हैं, और सिर्फ़ मादा फूल ही फल में बदलते हैं। और तो और, वह अकेला मादा फूल खिलने के बाद कुछ ही घंटों तक पराग (पॉलेन) लेने के लिए तैयार रहता है, और पराग पहुँचाने के लिए मधुमक्खियों पर निर्भर रहता है। लौकी परिवार की सभी सब्ज़ियों में यही पैटर्न दिखता है: महीनों तक ज़ोरदार बढ़त के बाद भी फसल उतनी नहीं मिलती जितनी पौधे की मेहनत के हिसाब से मिलनी चाहिए।

इसे ऐसे समझिए। हम घरों में गाय इसलिए पालते हैं क्योंकि वे दूध देती हैं, न कि बैल के लिए। लेकिन अगर हमारे ज़्यादातर बछड़े बैल बन जाएँ, तो समस्या हो जाएगी। लौकी के साथ भी ठीक यही स्थिति है: बहुत ज़्यादा नर फूल और बहुत कम मादा फूल। पौधा उन नर फूलों पर बहुत ज़्यादा ऊर्जा खर्च करता है जिनसे कोई फल नहीं मिलता। किसान के लिए, यह निवेश पर बहुत कम रिटर्न है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) मोहाली में डॉ. रवि देवानी की टीम, फ्रांस के पेरिस-सैक्ले में इंस्टीट्यूट ऑफ़ प्लांट साइंसेज में डॉ. बेंडाहमाने के रिसर्च ग्रुप के साथ मिलकर, अब इस गणित को बदलने की कोशिश कर रही है। ज़्यादा खाद या कीटनाशक इस्तेमाल करने के बजाय, वे उन जेनेटिक निर्देशों को समझना और बदलना चाहते हैं जो यह तय करते हैं कि कोई फूल नर होगा या मादा। उनका पहला फ़ोकस लौकी है। इसका जीनोम पूरी तरह से मैप किया जा चुका है और इसमें नए जेनेटिक निर्देश डालने की एक साबित तकनीक भी मौजूद है। इसलिए, यह उन दूसरी लौकी-वर्गीय सब्ज़ियों (जिन पर कम रिसर्च हुई है) की समस्या को हल करने के लिए सबसे सही शुरुआती पॉइंट है।

सोचिए कि आज हाइब्रिड बीज कैसे बनाए जाते हैं। बेहतर किस्में बनाने के लिए, बीज कंपनियाँ हाथ से दो पैरेंट पौधों का क्रॉस कराती हैं; वे एक पौधे के नर फूल से पराग (pollen) लेती हैं और उसे एक-एक करके दूसरे पौधे के मादा फूल तक पहुँचाती हैं। यह प्रक्रिया धीमी है और इसमें बहुत मेहनत लगती है। इसका खर्च बीज के पैकेट की कीमत में जुड़ जाता है। कई साल पहले, खरबूजे और खीरे के ब्रीडर्स ने ऐसी प्लांट लाइनें बनाकर इस समस्या को हल किया था जो लगभग पूरी तरह से मादा होती हैं – जैसे डेयरी के झुंड में ज़्यादातर गायें हों, न कि बैल। कम नर फूल, ज़्यादा फल। भारतीय लौकी-वर्गीय सब्ज़ियों में अभी तक ऐसा कोई नहीं कर पाया है।
पॉलिनेशन (परागण) भी अपने आप में एक समस्या है, और क्लाइमेट चेंज इसे और भी खराब कर देगा। जो पौधे पॉलिनेशन के छोटे से समय और किसी कीड़े की मदद पर निर्भर होते हैं, उनके लिए गर्मी की लहरें (heat waves) और मधुमक्खियों की घटती संख्या बुरी खबर है। रिसर्चर दो अलग-अलग समाधानों पर काम कर रहे हैं।

एक ऐसे फूल के बारे में सोचिए जो एक ही समय में नर और मादा दोनों हो, आत्मनिर्भर हो, जिसे किसी साथी, किसी कीड़े या पराग के ट्रांसफर की ज़रूरत न हो। यानी हर्माफ्रोडाइट (उभयलिंगी) पौधे, जिनमें एक ही फूल में नर और मादा दोनों हिस्से होते हैं, जिससे पौधा बिना किसी कीड़े के खुद को फर्टिलाइज़ कर सकता है। एक और, ज़्यादा क्रांतिकारी समाधान है ‘पार्थेनोकार्पी’, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘वर्जिन फ्रूट’ (बिना निषेचन के फल)। पार्थेनोकार्पी बिना फर्टिलाइज़ेशन के फल पैदा करने की क्षमता है। पार्थेनोकार्पिक बेल को समय पर मधुमक्खी की मौजूदगी की ज़रूरत नहीं होती: न पॉलिनेशन, न मधुमक्खियाँ, न कोई समस्या। चाहे एक तरीका इस्तेमाल किया जाए या दोनों को मिलाकर, ये फसलें गर्मी की दोपहर या मधुमक्खियों के खराब सीज़न से कम प्रभावित होंगी। दोनों रणनीतियाँ दूसरी फसलों में तो दिखाई गई हैं, लेकिन भारतीय लौकी-वर्गीय सब्ज़ियों में अभी तक नहीं। कई दशकों की सावधानीपूर्वक रिसर्च के बाद, डॉ. बेंदहमाने और डॉ. देवानी ने खरबूजे और खीरे में फूलों के लिंग को कंट्रोल करने वाले जेनेटिक स्विच की पहचान की—एक बार में एक जीन करके। उन्होंने अपनी खोजों को ‘साइंस’, ‘नेचर’ और ‘नेचर प्लांट्स’ जैसे जर्नल्स में पब्लिश किया। लेकिन यह अभी भी पता नहीं है कि क्या लौकी और उससे जुड़ी दूसरी प्रजातियां भी उन्हीं स्विच का इस्तेमाल करती हैं या उन्होंने अपने अलग स्विच विकसित कर लिए हैं।

लौकी और खीरे के पूर्वज करोड़ों साल पहले एक ही थे—इंसानों के अस्तित्व में आने से भी बहुत पहले। इतने लंबे समय में, उनके जेनेटिक निर्देशों में काफी अंतर आ गया है। इसलिए, जो स्विच खीरे में काम करता है, हो सकता है कि वह लौकी में काम न करे। इस प्रोजेक्ट में…