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चंडीगढ़ : अटल पेंशन योजना कार्यक्रम, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बैंक सम्मानित

चंडीगढ़ में अटल पेंशन योजना के प्रचार-प्रसार के लिए आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। पात्र नागरिकों का पंजीकरण बढ़ाने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बैंकों को सम्मानित करने पर जोर दिया गया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

तारीख : 27 अक्टूबर 2026

अटल पेंशन योजना (APY) के प्रचार-प्रसार और पात्र नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के उद्देश्य से मंगलवार को चंडीगढ़ में आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (SLBCs), विभिन्न बैंकों के अधिकारियों तथा बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) एजेंटों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में अटल पेंशन योजना के तहत अधिक से अधिक पात्र नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने, पेंशन के लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बैंकिंग नेटवर्क के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने पर जोर दिया गया।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, पंजाब के उप महाप्रबंधक रामकिशोर मीना ने बताया कि कार्यक्रम में PFRDA के मुख्य महाप्रबंधक प्रवेश कुमार, पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य महाप्रबंधक आशीष चतुर्वेदी, PNB चंडीगढ़ के मंडल प्रमुख संजीव कुमार झा, PNB मोहाली के मंडल प्रमुख बिस्वजीत बिस्वाल और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, हरियाणा के उप महाप्रबंधक ओमकारनाथ झा सहित विभिन्न राज्य सरकारों और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

PFRDA के मुख्य महाप्रबंधक प्रवेश कुमार ने अपने संबोधन में अटल पेंशन योजना के अंतर्गत पात्र नागरिकों का पंजीकरण बढ़ाने और योजना के लाभों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बैंकिंग नेटवर्क की मदद से अधिक से अधिक लोगों को पेंशन सुरक्षा से जोड़ने पर जोर दिया।

वहीं, पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य महाप्रबंधक आशीष चतुर्वेदी ने कहा कि बैंक अधिकारियों, शाखा प्रमुखों और बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट एजेंटों की योजना के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका है। इनके माध्यम से नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में जागरूक किया जा सकता है और उन्हें इन योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

अटल पेंशन योजना के तहत 5,000 रुपये तक मासिक पेंशन

अटल पेंशन योजना के तहत निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने वाले 18 से 40 वर्ष की आयु के नागरिक पंजीकरण करवा सकते हैं। योजना में निर्धारित अंशदान के आधार पर 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन का प्रावधान है। इस योजना का उद्देश्य लोगों को बुढ़ापे में नियमित आय की सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध करवाना है।

कार्यक्रम के दौरान पिछले वर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए पंजाब और हरियाणा की राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों सहित विभिन्न बैंकों को PFRDA की ओर से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग नेटवर्क के माध्यम से अटल पेंशन योजना का दायरा बढ़ाना, पात्र नागरिकों को पेंशन सुरक्षा से जोड़ना और समाज में वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता को मजबूत करना रहा।

Ludhiana Youth Anti-Drug Campaign : युवाओं को नशे से बचाने की पहल, स्किल डेवलपमेंट और पुनर्वास पर जोर

लुधियाना में लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के युवा रिकवरी अभियान के तहत नशा मुक्ति, काउंसलिंग, पुनर्वास और स्किल डेवलपमेंट के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

लुधियाना / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बसंत सिंह रोड़िया

तारीख : 27 अक्टूबर 2026

पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, एसएएस नगर की ओर से चलाए जा रहे “यूथ रिकवरी एंड रिहैबिलिटेशन” अभियान के तहत युवाओं को नशे से दूर रखने, नशा मुक्ति और पुनर्वास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत जगराओं स्थित ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, लुधियाना के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-कम-सेक्रेटरी ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के दौरान युवाओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न जागरूकता सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताना और उन्हें अपनी जिंदगी को सही दिशा देने के लिए प्रेरित करना है।

उन्होंने बताया कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जा रही है। इनमें प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य और अन्य तकनीकी कौशल सीखने के अवसर शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

अभियान के तहत युवाओं को पढ़ाई पर ध्यान देने, नई स्किल सीखने और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नशे से दूरी बनाकर और सही मार्गदर्शन प्राप्त करके युवा अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

इसी कड़ी में युवाओं की रिकवरी और पुनर्वास को लेकर “नशा छोड़ो, जिंदगी जोड़ो” विषय पर विशेष जागरूकता सेमिनार भी आयोजित किया जा रहा है। इसमें नशे के दुष्प्रभावों, नशा मुक्ति उपचार, मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग और पुनर्वास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं।

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, लुधियाना का उद्देश्य जरूरतमंद युवाओं को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार मार्गदर्शन उपलब्ध करवाना और उन्हें कानूनी सहायता सहित विभिन्न कल्याणकारी सेवाओं से जोड़ना है, ताकि वे नशे से उबरकर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें और सम्मानजनक, स्वस्थ व आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।

अधिकारियों ने बताया कि पुनर्वास या कानूनी सहायता से संबंधित मार्गदर्शन की जरूरत होने पर संबंधित अथॉरिटी से संपर्क किया जा सकता है। इसके लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

Ludhiana : जालंधर से आए स्वास्थ्य विभाग टीम ने सरकारी अस्पताल OPD और मैटरनिटी विभाग का किया निरिक्षण

लुधियाना के सरकारी अस्पताल में जालंधर से आई हेल्थ विभाग की टीम ने OPD और मैटरनिटी एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई की जांच की।

लुधियाना/सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बसंत सिंह रोड़ियां

तारीख : 27 अक्टूबर 2026

पंजाब सरकार की गाइडलाइंस के तहत जालंधर से आई हेल्थ विभाग की दो सदस्यीय टीम ने आज लुधियाना के डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट हॉस्पिटल के OPD विभाग और मैटरनिटी एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई के इंतजामों की जांच की गई।

डॉ. जगियासा और डॉ. वरिंदर रियार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने अस्पताल के विभिन्न विभागों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पंजाब सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार सरकारी अस्पतालों में समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था की जांच करना है।

इस मौके पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट हॉस्पिटल के मैटरनिटी एंड चाइल्ड विभाग के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहित रामपाल भी टीम के साथ मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि सरकारी गाइडलाइंस के तहत टीमें नियमित रूप से अस्पतालों में जांच के लिए पहुंचती हैं। इस तरह के निरीक्षण के दौरान मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं और संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाता है।

ESTIC 2026: विज्ञान को विकसित भारत की आकांक्षाओं से जोड़ना

डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री

“समाज में परिवर्तन लाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार मुख्य रूप से विज्ञान से ही आएगा।” 28 फरवरी 2006 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ये शब्द कहे थे।

लगभग दो दशक बाद डॉ. कलाम के ये शब्द पूरी तरह सही साबित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तकनीक आधारित विकास को गति देते हुए ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की इस प्रगति पर पूरी दुनिया का ध्यान गया है और उसने इसे स्वीकार भी किया है।

विज्ञान का महत्व केवल इस बात में नहीं है कि हम क्या खोजते हैं, बल्कि इस बात में भी है कि हमारी खोजें देश के लोगों के लिए क्या-क्या संभव बनाती हैं। वैज्ञानिक प्रगति का वास्तविक मूल्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाने, समस्याओं का समाधान करने और नए अवसर पैदा करने की उसकी क्षमता में निहित है।

भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षाएं केवल आर्थिक विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं हैं। इनमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, अधिक उत्पादक कृषि, मजबूत उद्योग, युवाओं के लिए अधिक अवसर और प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर में सुधार भी शामिल हैं।

इन सभी आकांक्षाओं को पूरा करने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारा दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि हम जो ज्ञान विकसित करें, वह सार्थक बदलाव लाने का माध्यम बने।

यही उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) 2026 का व्यापक उद्देश्य है। अपने दूसरे संस्करण में ईएसटीआईसी वर्ष 2025 में शुरू हुए राष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उनके व्यावहारिक उपयोग के बीच संबंधों को और मजबूत करना है। यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी लोगों, स्टार्टअप से जुड़े उद्यमियों और युवा शोधकर्ताओं को एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए एक मंच पर लाता है।

हमारे सामने कुछ सबसे महत्वपूर्ण सवाल ऐसे हैं, जिनका समाधान तत्काल आवश्यक है। वैज्ञानिक प्रगति किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में किस तरह मदद कर सकती है? अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है? भारतीय उद्योग उन्नत प्रौद्योगिकियां कैसे विकसित कर सकते हैं, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कैसे कर सकते हैं और महत्वपूर्ण वस्तुओं के आयात पर निर्भरता कैसे कम कर सकते हैं? अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर कैसे पैदा किए जा सकते हैं?

इन सवालों का जवाब कोई एक संस्थान या विषय अपने दम पर नहीं दे सकता। इसके लिए वैज्ञानिकों को उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करना होगा, शोधकर्ताओं को व्यावहारिक जरूरतों को समझना होगा और नीति निर्माताओं को ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिसमें संभावनाओं से भरे विचारों को परखा और विकसित किया जा सके।

ईएसटीआईसी 2026 इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 12 विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, महासागर विज्ञान एवं समुद्री प्रौद्योगिकी, क्वांटम संचार, सेमीकंडक्टर, कृषि प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, उन्नत स्वास्थ्य सेवा, इमर्सिव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान शामिल हैं।

इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में ऐसी संभावनाएं हैं, जिनका दायरा प्रयोगशालाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में प्रगति भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकती है। जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण के क्षेत्र में नए रास्ते खोल सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स में होने वाले विकास औद्योगिक प्रक्रियाओं को बदल सकते हैं, जबकि कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्य अधिक कुशल एवं टिकाऊ कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दे सकते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती इन संभावनाओं को व्यावहारिक उपयोग में बदलने की है। किसी वैज्ञानिक खोज में वर्षों का अनुसंधान लग सकता है, लेकिन उसे रोजमर्रा के उपयोग में लाने के लिए अक्सर आगे के परीक्षण, निवेश, इंजीनियरिंग और आपसी सहयोग की जरूरत होती है। हमें इस पूरी प्रक्रिया को मजबूत करना होगा, ताकि अनुसंधान से जुड़े शुरुआती सवाल से लेकर ऐसी तकनीक विकसित करने तक का सफर पूरा हो सके, जो वास्तविक लाभ पहुंचाए।

भारत की वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाएं अंततः उसके युवाओं की प्रतिभा और कल्पनाशीलता पर निर्भर करेंगी। किसी युवा शोधकर्ता के पास कोई संभावनाशील विचार है, तो उसे उसे प्रस्तुत करने, अनुभवी वैज्ञानिकों से सीखने और ऐसे लोगों से जुड़ने का अवसर मिलना चाहिए, जो उस विचार को उपयोगी रूप देने में मदद कर सकें।

ईएसटीआईसी 2026 ‘फ्रंटियर्स इन फोकस’ सत्रों और ‘यंग रिसर्चर्स एंड इनोवेटर्स पिच कॉर्नर’ के माध्यम से इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने का प्रयास करता है। ‘नेक्स्ट-जेन डिस्कवरी एक्सपो’ में भारत की अनुसंधान क्षमताओं और उभरते डीप-टेक तंत्र को प्रदर्शित किया जाएगा, जबकि ‘इनोवेशन एक्सचेंज हब’ तकनीकों और संभावित सहयोग के अवसरों पर संवाद को बढ़ावा देगा।

वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता को तेजी से एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। विशेष रूप से डीप-टेक उद्यमों को किसी तकनीक को बाजार तक पहुंचाने से पहले अक्सर विशेष बुनियादी ढांचे, धैर्य के साथ किए जाने वाले निवेश और निरंतर सहयोग की आवश्यकता होती है।

अनुसंधान संस्थानों के पास वैज्ञानिक विशेषज्ञता है, स्टार्टअप उद्यमशीलता की ऊर्जा लेकर आते हैं, उद्योग जगत उत्पादन संबंधी आवश्यकताओं और बाजार की जरूरतों को समझता है, जबकि निवेशक इस पूरी प्रक्रिया के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। जब ये सभी क्षमताएं एक साथ आती हैं, तो अनुसंधान को उपयोगी उत्पादों और सेवाओं में बदलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

ईएसटीआईसी 2026 ऐसी साझेदारियों को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करता है। इसके तकनीकी सत्रों और प्रदर्शनियों का उद्देश्य केवल उपलब्धियों को प्रदर्शित करना नहीं है, बल्कि ऐसे संवाद और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना भी है, जिनसे आपसी सहयोग के नए रास्ते खुल सकें।

विकसित भारत@2047 की यात्रा का निर्माण केवल सरकार के प्रयासों से नहीं हो सकता। न ही इसे वैज्ञानिक अनुसंधान के अलग-थलग प्रयासों के माध्यम से हासिल किया जा सकता है। इसके लिए अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, उद्योग जगत, उद्यमियों और युवा नवाचारकर्ताओं के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

डॉ. कलाम के शब्द आज भी हमें याद दिलाते हैं कि विज्ञान का अंतिम उद्देश्य समाज की सेवा करना होना चाहिए। विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए हमारी सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि हम कौन-सी खोजें करते हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उन खोजों से लोगों के जीवन में कितना बदलाव आता है।

यही ईएसटीआईसी 2026 के पीछे की व्यापक आकांक्षा है- भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को उसके लोगों की जरूरतों के और करीब लाना तथा नवाचार की संभावनाओं को राष्ट्र की प्रगति में बदलना।

(लेखक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।)

Delhi Yamuna Cruise Service: रेखा गुप्ता ने किया क्रूज सेवा का निरीक्षण, जानें किराया और सफर की पूरी जानकारी

दिल्ली में यमुना रिवर सफारी का ट्रायल शुरू। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोनिया विहार से जगतपुर तक क्रूज सेवा का निरीक्षण किया। जानें संभावित किराया, सफर की अवधि और शुरुआत की तारीख।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली में यमुना नदी पर पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को सोनिया विहार से जगतपुर तक विकसित की जा रही यमुना क्रूज सेवा का ट्रायल रन और निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, संचालन व्यवस्था और यात्रियों के लिए तैयार की जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। सरकार की योजना छठ महापर्व से पहले इस सेवा को शुरू करने की है, जबकि औपचारिक शुभारंभ नवंबर के पहले सप्ताह में किए जाने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्लीवासियों का मां यमुना के साथ गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। यमुना रिवर सफारी इस जुड़ाव को नया आयाम देने के साथ राजधानी में पर्यटन और मनोरंजन की नई संभावनाएं खोलेगी। इससे लोगों को नदी के किनारे प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताने और परिवार के साथ क्रूज यात्रा का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।

6 किलोमीटर के जलमार्ग पर चलेगा क्रूज

सोनिया विहार से जगतपुर तक लगभग 6 किलोमीटर के जलमार्ग पर क्रूज सेवा विकसित की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को दिल्लीवासियों और पर्यटकों के लिए आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। इसके लिए फूड कियोस्क, रेस्टोरेंट, बच्चों के लिए किड्स जोन और अन्य जनसुविधाएं तैयार की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ यमुना की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि लोग नदी के प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकें और इसके संरक्षण के प्रति भी जागरूक हों।

30 यात्रियों की क्षमता, 35 से 45 मिनट का सफर

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल 30 यात्रियों की क्षमता वाली क्रूज सेवा शुरू करने की तैयारी है। सोनिया विहार से जगतपुर स्थित शनि मंदिर तक आने-जाने में लगभग 35 से 45 मिनट लगने का अनुमान है। यात्रा पूरी होने के बाद यात्री अपने शुरुआती स्थान पर लौट सकेंगे।

क्रूज सेवा का ट्रायल लगभग एक सप्ताह तक चलाने की योजना है। इसके बाद नवंबर के पहले सप्ताह में औपचारिक शुरुआत की तैयारी की जा रही है। हालांकि, सेवा शुरू होने की अंतिम तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी की जानी बाकी है।

क्या होगा यमुना क्रूज का किराया?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना परिसर में प्रवेश शुल्क 50 रुपये और क्रूज की एक पूरी यात्रा के लिए प्रस्तावित किराया 500 रुपये रखा गया है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यात्रा पर जाने से पहले अंतिम टिकट दरों, बुकिंग व्यवस्था और संचालन समय की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि कर लें।

केंद्र और दिल्ली सरकार के समन्वय से तैयार हो रही परियोजना

यमुना रिवर सफारी परियोजना में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड सहित कई एजेंसियां शामिल हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने परियोजना को आगे बढ़ाने में केंद्र और दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से राजधानी में पर्यटन के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने भी यमुना रिवर सफारी को महत्वपूर्ण परियोजना बताया। उनके अनुसार, बोट राइड, म्यूजिक फाउंटेन, वाटर स्पोर्ट्स और फूड पार्क जैसी सुविधाओं के माध्यम से दिल्लीवासियों और पर्यटकों को नया अनुभव देने की योजना है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और NGT के मानकों के पालन पर भी जोर दिया।

छठ महापर्व से पहले शुरुआत की तैयारी

दिल्ली सरकार की योजना यमुना रिवर सफारी को छठ महापर्व से पहले जनता के लिए खोलने की है। इसके साथ ही यमुना तट पर छठ पूजा के आयोजन की तैयारियां भी की जा रही हैं। यदि परियोजना निर्धारित समय पर शुरू होती है, तो दिल्लीवासियों को त्योहारों के मौसम में पर्यटन का एक नया विकल्प मिल सकता है।

यमुना क्रूज सेवा की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि यात्रियों की सुरक्षा, नदी की स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों का कितनी प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है। इसके अलावा, किराये और संचालन संबंधी अंतिम जानकारी सामने आने के बाद ही लोग इस नई सुविधा का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

Australia Squad for 3rd Test: निक मैडिसन और सैम हार्पर रिलीज, स्टीव स्मिथ के खेलने पर सस्पेंस

ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टेस्ट के लिए टीम घोषित की। निक मैडिसन और सैम हार्पर रिलीज, जबकि स्टीव स्मिथ की फिटनेस पर फैसला बाकी है।

खेल डेस्क / सत्ता संदेश

ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केप टाउन में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच के लिए अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। तीन मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर होने के कारण तीसरा मुकाबला निर्णायक माना जा रहा है। दोनों टीमों के बीच यह टेस्ट 27 अक्टूबर से शुरू होने वाला है।

सीरीज के अहम मुकाबले से पहले ऑस्ट्रेलिया ने टीम में बदलाव किए हैं। निक मैडिसन और बैकअप विकेटकीपर सैम हार्पर को टीम से रिलीज कर दिया गया है। दोनों खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया लौटकर घरेलू टूर्नामेंट शेफील्ड शील्ड में हिस्सा लेंगे।

तीसरे टेस्ट में नई ओपनिंग जोड़ी की संभावना

निक मैडिसन अब टीम का हिस्सा नहीं हैं, ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की ओपनिंग जोड़ी में बदलाव देखने को मिल सकता है। अब तक मैडिसन और ट्रेविस हेड पारी की शुरुआत कर रहे थे। मैडिसन की जगह मैट रेनशॉ को ओपनिंग की जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।

सीरीज के निर्णायक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी की शुरुआत अहम होगी। ऐसे में नई ओपनिंग जोड़ी का प्रदर्शन मैच के परिणाम पर प्रभाव डाल सकता है।

स्टीव स्मिथ की फिटनेस पर नजर

तीसरे टेस्ट से पहले ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ की फिटनेस भी चर्चा का विषय है। गर्दन की समस्या के कारण उनके खेलने पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। उनकी उपलब्धता का फैसला मैच से पहले फिटनेस का आकलन करने के बाद किया जाएगा।

स्मिथ का अनुभव ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम के लिए अहम है। यदि वह मुकाबले के लिए फिट नहीं होते हैं, तो टीम को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।

तीसरे टेस्ट के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम

पैट कमिंस (कप्तान), स्कॉट बोलैंड, एलेक्स कैरी, कूपर कोनोली, कैमरन ग्रीन, जॉश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, जॉश इंग्लिस, मैथ्यू कुन्हेमन, मार्नस लाबुशेन, नाथन लायन, माइकल नेसर, मैट रेनशॉ, स्टीव स्मिथ, मिचेल स्टार्क और ब्यू वेब्स्टर।

सीरीज 1-1 से बराबर होने के कारण केप टाउन टेस्ट दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया की नई ओपनिंग जोड़ी और स्टीव स्मिथ की उपलब्धता इस मुकाबले से पहले देखने वाले प्रमुख पहलू होंगे।

Gujarat Drought Relief: गुजरात के चार जिलों में सूखा, किसानों को मुआवजा और पशुपालकों को ₹80 प्रतिदिन की मदद

गुजरात में कम बारिश के कारण देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ सूखाग्रस्त घोषित। किसानों को ₹8,500 प्रति हेक्टेयर, पशुपालकों को ₹80 प्रतिदिन सहायता और ग्रामीणों को 150 दिनों के रोजगार की घोषणा।

गुजरात / सत्ता संदेश

गुजरात में कम बारिश के कारण पैदा हुई सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का ऐलान किया है। इनमें देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ शामिल हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि गुजरात में इस मानसून सीजन में औसत बारिश का लगभग 89 प्रतिशत दर्ज किया गया, लेकिन इन चार जिलों में बारिश काफी कम हुई। इसी के चलते सूखे की स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में भी इस घोषणा की पुष्टि की गई है।

किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹8,500 की सहायता

कम बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार की घोषणा के अनुसार, पात्र किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि की सीमा तक प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता मिलेगी। इससे सूखे से प्रभावित किसानों को खेती से जुड़े आर्थिक नुकसान के बीच कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। सहायता के लिए पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होगी।

पशुपालकों को सस्ती दर पर मिलेगा चारा

सूखे के कारण पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा चुका है। सरकार के पास फिलहाल तीन करोड़ किलोग्राम चारे का भंडार मौजूद है। जरूरत बढ़ने पर अतिरिक्त चारे की व्यवस्था करने की भी बात कही गई है।

पशु शिविरों में प्रति पशु ₹80 प्रतिदिन की सहायता

पशुओं के पालन-पोषण पर बढ़ते खर्च को देखते हुए पशु शिविरों में प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। इस कदम का उद्देश्य सूखा प्रभावित इलाकों में पशुपालकों को आर्थिक सहारा देना और पशुधन की देखभाल में मदद करना है। सरकार जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता देने पर भी विचार करेगी।

सूखा प्रभावित गांवों में 150 दिनों का रोजगार

राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण परिवारों के लिए 150 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की घोषणा की है। इससे कृषि कार्य प्रभावित होने की स्थिति में ग्रामीण परिवारों को आय का वैकल्पिक साधन मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति में किसानों और पशुपालकों को राहत देने के साथ-साथ पानी, चारे और रोजगार की जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

सरकारी राहत के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर

गुजरात के इन चार जिलों में कम बारिश के कारण कृषि और पशुपालन से जुड़े परिवारों पर दबाव बढ़ा है। घोषित राहत उपायों से प्रभावित लोगों को सहायता मिलने की उम्मीद है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुआवजे का भुगतान, चारे की आपूर्ति और रोजगार की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी लागू होती है।

Rahul Gandhi Acquitted: अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी बरी, सुल्तानपुर कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस का जश्न

सुल्तानपुर की MP-MLA अदालत ने अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े 2018 के मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया। फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया।

सुल्तानपुर / सत्ता संदेश

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने 26 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को बरी कर दिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने माना कि उनकी टिप्पणी मानहानिकारक नहीं थी। शिकायतकर्ता के मामले में शिकायत करने के अधिकार से जुड़े पहलू को भी फैसले में महत्वपूर्ण माना गया।

फैसले के समय राहुल गांधी अदालत में मौजूद थे। निर्णय के बाद अदालत परिसर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई। इसके बाद राहुल गांधी के लखनऊ रवाना होने की जानकारी सामने आई।

2018 के बयान से जुड़ा था मानहानि का मामला

यह मामला मई 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने बेंगलुरु में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी। राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा था कि लोग यह भूल जाते हैं कि भाजपा अध्यक्ष हत्या के मामले में आरोपी रहे हैं।

यह टिप्पणी सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले के संदर्भ में थी। अमित शाह को 2014 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया था।

राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस बयान से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

करीब आठ साल तक चली कानूनी लड़ाई

सुल्तानपुर की अदालत ने नवंबर 2023 में राहुल गांधी को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया था। फरवरी 2024 में अदालत में पेश होने के बाद उन्हें जमानत मिल गई। जुलाई 2024 में राहुल गांधी ने अपना बयान दर्ज कराया और आरोपों से इनकार करते हुए मामले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से गवाह और साक्ष्य पेश किए गए। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी की आवाज के नमूने का भाषण की रिकॉर्डिंग से मिलान कराने की मांग भी की थी। ट्रायल कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी थी। इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी आगे सफल नहीं हुईं।

अक्टूबर 2026 में दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने 26 अक्टूबर को फैसला सुनाया।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर काफिले की गाड़ियों की टक्कर

सुल्तानपुर जाते समय राहुल गांधी के काफिले की कुछ गाड़ियां पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आपस में टकरा गईं। शुरुआती रिपोर्टों में इस घटना की पुष्टि हुई, हालांकि टक्कर में शामिल वाहनों की संख्या और नुकसान से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग-अलग रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं थी।

इस मामले में अदालत के फैसले से राहुल गांधी के खिलाफ इस आपराधिक मानहानि मुकदमे की ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही समाप्त हो गई है। फैसले को चुनौती देने के लिए शिकायतकर्ता के पास उच्च अदालत का रुख करने का विकल्प हो सकता है।

CM Yogi News: बिठूर-बिल्हौर को ₹411 करोड़ की सौगात, GCC Innovation Summit से युवाओं के रोजगार पर जोर

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिठूर-बिल्हौर क्षेत्र की 411 करोड़ रुपये से अधिक की 48 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। GCC Innovation Summit 2026 में तकनीक, निवेश और रोजगार पर जोर दिया गया।

कानपुर / लखनऊ / सत्ता संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर कानपुर नगर के बिठूर में बिठूर और बिल्हौर विधानसभा क्षेत्रों के लिए 411 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 48 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित करने का कार्यक्रम भी रखा गया। मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं के साथ निवेश, तकनीक और नवाचार के जरिए युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि बिठूर से लोकमंगल और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं का विस्तार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना प्रदेश की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

GCC Innovation Summit 2026 से तकनीक और रोजगार को बढ़ावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित GCC Innovation Summit 2026 को उत्तर प्रदेश में तकनीकी अनुसंधान, नवाचार और उच्च कौशल आधारित रोजगार की संभावनाओं से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि वैश्विक कंपनियों और विश्वविद्यालयों के साथ होने वाले समझौता ज्ञापन (MoUs) युवाओं के लिए नए अवसर खोल सकते हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को अपनी ही धरती पर बेहतर अवसर मिलें और वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। इसके लिए निवेश, तकनीकी शिक्षा और उद्योगों के साथ सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।

महर्षि वाल्मीकि की विरासत और आधुनिक विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की रामायण को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के साथ ज्ञान, मर्यादा और लोककल्याण की परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की गौरवशाली विरासत से प्रेरणा लेते हुए विज्ञान और तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी के लिए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

उन्होंने विकास की इस सोच को संस्कृति और आधुनिक तकनीक के समन्वय से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षा युवाओं को सामर्थ्य प्रदान करती है, जबकि तकनीक और नवाचार उनके लिए समृद्धि के नए रास्ते खोल सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और कनेक्टिविटी पर फोकस

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशोन्मुख नीतियों के जरिए उत्तर प्रदेश में नए आर्थिक अवसर विकसित हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेश को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बनाने की दिशा में प्रयासों का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उनके मुताबिक, विरासत से संस्कार, शिक्षा से सामर्थ्य और तकनीक से समृद्धि के रास्ते तैयार कर उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा दी जा सकती है।

Cyclone Arnab Alert: ओडिशा में चक्रवात का खतरा, मछली पकड़ने पर रोक; कई जिलों में पर्यटन गतिविधियां बंद

चक्रवात ‘अर्नब’ के खतरे को देखते हुए ओडिशा में समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक लगाई गई है। संवेदनशील जिलों में पर्यटन गतिविधियों पर प्रतिबंध और राहत-बचाव की तैयारियां तेज की गई हैं।

ओडिशा / सत्ता संदेश

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के तेज होने की आशंका के बीच ओडिशा सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं। समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। वहीं, संवेदनशील जिलों में पहाड़ियों, झरनों, बांधों और अन्य पर्यटन स्थलों पर लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई है। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट पर रखते हुए राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, मलकानगिरी, कोरापुट और नवरंगपुर जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात से पहले की तैयारियों की निगरानी के लिए आठ मंत्रियों को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी है।

संवेदनशील इलाकों में बचाव दल तैनात

चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा तथा पुलिस के जवानों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। राहत और बचाव कार्यों के समन्वय के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं।

राज्य सरकार ने संबंधित विभागों के कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं, ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराने की संभावना

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा दबाव 26 अक्टूबर की सुबह चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ में बदल गया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, यह तूफान आगे बढ़ते हुए 26 अक्टूबर की आधी रात तक गंभीर चक्रवाती तूफान और 27 अक्टूबर को अति गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।

IMD के अनुसार, तूफान के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यानम के तट से बापटला तथा विशाखापत्तनम के बीच टकराने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहने का अनुमान है। तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है।

स्कूल-कॉलेज बंद रखने की तैयारी

खराब मौसम की आशंका के मद्देनजर प्रभावित जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र 28 और 29 अक्टूबर को बंद रहेंगे। इस संबंध में संबंधित जिलों के नवीनतम सरकारी आदेशों की पुष्टि आवश्यक है।

किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जो फसल 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी है, उसकी कटाई कर उसे सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। किसानों की सहायता के लिए विशेष कृषि हेल्पलाइन शुरू किए जाने की भी जानकारी दी गई है।

ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि राज्य सरकार किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग और जिला प्रशासन की सलाह का पालन करने तथा समुद्र, झरनों, बांधों और पहाड़ी क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है।