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जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा स्पीच क्राफ्ट-2026 का आयोजन

लुधियाना/सत्ता संदेश

जूनियर चैंबर इंटरनेशनल (जे सी आई) लुधियाना सेंट्रल द्वारा अपने सदस्यों के कौशल विकास के लिए स्थानीय होटल आगाज़ में तीन दिवसीय स्पीच क्राफ्ट-2026 का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन जे सी आई लुधियाना सेंट्रल के अध्यक्ष एडवोकेट सिमरप्रीत सिंह आहूजा, ट्रेनिंग वीपी जसपाल सिंह ग्रेवाल और ट्रेनिंग डायरेक्टरों द्वारा किया गया। इस मौके पर गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में होटल आगाज़ से राहुल आहूजा, जे सी रमन नायर, सीए जसमिंदर सिंह, दीदारजीत सिंह लोटे, ट्रेनर जे सी डॉ. दर्शन मरजादी और साक्षी महाजन शामिल रहे।

ट्रेनिंग सत्र संबंधी जानकारी देते हुए, एडवोकेट सिमरप्रीत सिंह आहूजा ने बताया कि जे सी आई लुधियाना सेंट्रल अपने सदस्यों के कौशल विकास के लिए वचनबद्ध है और समय-समय पर संस्था द्वारा विभिन्न ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए जाते हैं। स्पीच क्राफ्ट-2026 का उद्देश्य सदस्यों में कम्युनिकेशन स्किल्स और पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को बढ़ाना है, ताकि वे इन कौशलों का उपयोग अपने व्यवसाय और रिलेशन डेवलपमेंट में कर सकें।

उन्होंने बताया कि इस सत्र में सभी जोनों से प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिवसीय ट्रेनिंग सत्र की शुरुआत 24 अप्रैल को हुई थी। 25 अप्रैल को भी कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए और 26 अप्रैल, रविवार को इसका समापन हुआ।

इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा, सचिव विनायक कश्यप, ज्वाइंट सचिव जे सी रसलीन कौर, वीपी जसपाल सिंह, डायरेक्टर रितिक पलाहा, पी एंड आर वीपी दीपक, पूर्व अध्यक्ष प्रदीप सिंह मुंडी, जे सी कौशिक डोगरा, जे सी संजय शर्मा, जे सी प्रभजोत सिंह, हनी सेठी, जे सी सोमन गोयल, जे सी अनुज धीर, जे सी जैसमीन कौर, डायरेक्टर जतिंदर पाल सिंह और वीपी मैनेजमेंट कुलजीत सिंह भी मौजूद रहे।

‘संकटमोचन’ नहीं ‘रिंकू’ ही ठीक है: रिंकू सिंह ने ठुकराया नया नाम, LSG के खिलाफ जीत के बाद कही दिल जीतने वाली बात

स्पोर्टस डेस्क : आईपीएल 2026 के एक रोमांचक मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को हरा दिया, जिसमें रिंकू सिंह एक बार फिर जीत के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे। इस शानदार प्रदर्शन के बाद जब उन्हें ‘संकटमोचन’ जैसा नया नाम देने का प्रस्ताव रखा गया, तो उन्होंने बड़ी सादगी से इसे मना कर दिया।

रोमांचक जीत: इकाना स्टेडियम में 26 अप्रैल को खेले गए इस मैच का फैसला सुपर ओवर में हुआ, जहाँ रिंकू सिंह की बल्लेबाजी और चुस्त फील्डिंग की बदौलत केकेआर ने जीत दर्ज की।

रिंकू का धाकड़ प्रदर्शन: रिंकू सिंह ने इस मैच में 51 गेंदों पर नाबाद 83 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 5 छक्के और 7 चौके शामिल थे। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने फील्डिंग में भी कमाल दिखाते हुए 5 कैच लपके।

नया नाम ठुकराया: मैच के बाद जब प्रेजेंटर ने उनसे पूछा कि क्या अब उन्हें ‘संकटमोचन’ कहा जाना चाहिए, तो रिंकू ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ ‘रिंकू’ कहलाना ही पसंद है और वही नाम उनके लिए अच्छा है।

जीत की रणनीति: रिंकू ने अपनी सफलता का मंत्र साझा करते हुए बताया कि उनके दिमाग में बस गेम को आखिर तक ले जाने और खराब गेंदों का इंतजार करने की योजना थी।

रिंकू सिंह के इस प्रदर्शन की हर तरफ सराहना हो रही है क्योंकि उन्होंने मुश्किल वक्त में टीम की कमान संभाली और केकेआर के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में खुद को फिर से साबित किया।

भारत–न्यूजीलैंड एफटीए: किसानों, युवाओं, नौकरियों और विकास के लिए महिलाओं के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक समझौता

दिल्ली/सत्ता संदेश

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), जिस पर सोमवार को हस्ताक्षर किये जायेंगे, विकसित दुनिया के साथ भारत की सहभागिता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को किसानों, महिलाओं, युवाओं और रोजगार सृजक उद्योगों के लिए ठोस लाभ में बदलने से जुड़े प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण में हुई निर्णायक प्रगति को प्रतिबिंबित करता है।

यह एफटीए प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं, जिसमें यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ शामिल हैं, के साथ हुए कई ऐतिहासिक व्यापार समझौतों के बाद हो रहा है। ये समझौते वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं और निर्यातकों को दुनिया की कुछ सबसे लाभकारी अर्थव्यवस्थाओं में, यहां तक कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितता और उथल-पुथल के बीच भी, प्रतिस्पर्धा आधारित बढ़त प्रदान करते हैं।

निर्यात और रोजगार को मजबूत बढ़ावा 

दोनों पक्षों के लिए समान रूप से लाभकारी इस समझौते के केंद्र में न्यूजीलैंड की यह प्रतिबद्धता है कि वह तुरंत ही सभी भारतीय उत्पादों पर शुल्क समाप्त कर देगा, जिससे उस बाजार में एक महत्वपूर्ण बाधा दूर होगी, जहाँ हमारे प्रमुख निर्यात पर वर्तमान में 10% शुल्क लगाया जाता है।

यह वस्त्र, कालीन, धागे, कपड़े, फुटवियर, बैग, बेल्ट, वाहन घटक, मशीनरी, उपकरण, रत्न और आभूषण तथा हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है। रोजगार के अवसरों का सृजन करने वाले ये उद्योग भारत के एमएसएमई इकोसिस्टम की रीढ़ हैं और इन्हें मूल्य प्रतिस्पर्धा और बाजार पहुँच से लाभ मिलेगा। इससे निर्यात बढ़ेगा और निर्माण केन्द्रों, कारीगर समुदायों और लघु उद्यमों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। 

यह समझौता उस व्यापक दर्शन को प्रतिबिंबित करता है, जो 2014 में मोदी सरकार के गठन के बाद से भारत की व्यापार नीति का मार्गदर्शन कर रहा है। यह समावेश, सशक्तिकरण और साझा समृद्धि में निहित है। व्यापार को राष्ट्रीय परिवर्तन के उपकरण के रूप में देखा जाता है, जो किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं और वंचित समुदायों को लाभ पहुंचाता है।

नारी शक्ति

इस समझौते की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह भारत का पहला महिला-नेतृत्व वाला एफटीए है। वार्ता टीम की लगभग सभी सदस्य महिलायें थीं। इनमें मुख्य वार्ताकार, उप मुख्य वार्ताकार, क्षेत्र प्रमुख और न्यूजीलैंड में भारत की राजदूत शामिल हैं।

यह उपलब्धि मोदी सरकार में महिलाओं के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। यह शासन, नेतृत्व और विभिन्न क्षेत्रों में निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है और  राष्ट्रीय विकास के संचालक के रूप में नारी शक्ति के विचार को सुदृढ़ करती है।

किसान पहले

एफटीए की संरचना कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार की गयी है। न्यूज़ीलैंड कीवी, सेब और शहद के लिए कृषि उत्पादकता कार्ययोजनाओं का समर्थन करेगा। इन पहलों में बेहतर बीज सामग्री, अनुसंधान सहयोग, किसानों के लिए क्षमता निर्माण, बागवानी प्रबंधन प्रथाएं, कटाई के बाद सुधार, खाद्य सुरक्षा प्रणाली और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना शामिल है। सेब उत्पादकों और सतत मधुमक्खी पालन तौर-तरीकों के लिए परियोजनाएं उत्पादन और गुणवत्ता मानकों को बढ़ाएंगी, जिससे कृषि समृद्धि में वृद्धि होगी।

इसके साथ ही, भारत ने अपने प्रमुख कृषि हितों की मजबूती से सुरक्षा की है। डेयरी उत्पादों (जैसे दूध, क्रीम, व्हे, दही और पनीर); प्याज, चना, मटर, मकई, बादाम, चीनी और कुछ ख़ास तेल और वसा जैसी संवेदनशील वस्तुओं को शुल्क छूट से बाहर रखा गया है। समझौता सुनिश्चित करता है कि घरेलू किसान हानिकारक आयात प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित रहें। किसानों और मछुआरों के हितों की रक्षा करना सभी व्यापार वार्ताओं में भारत के दृष्टिकोण का केंद्र रहा है।

युवा और पेशेवर

समझौते का एक प्रमुख स्तंभ छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए बढ़ी हुई आवागमन की सुविधा है, जो भारत के युवाओं के लिए नए वैश्विक मार्ग का निर्माण करती है।

किसी भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते में पहली बार, न्यूजीलैंड ने भारतीय छात्रों के आवागमन और अध्ययन के बाद काम करने के अवसरों के लिए एक संरचना-युक्त रूपरेखा पेश की है। भारतीय छात्रों पर कोई संख्यात्मक सीमा नहीं है। छात्रों को अध्ययन के दौरान प्रति सप्ताह कम से कम 20 घंटे काम करने की अनुमति दी जाएगी, जबकि अध्ययन के बाद काम करने के अधिकार – एसटीईएम  स्नातकों के लिए तीन वर्षों तक और डॉक्टर डिग्री के शोधार्थियों के लिए चार वर्षों तक – बढ़ाए गये हैं।

समझौता किसी भी समय 5,000 भारतीय पेशेवरों तक के लिए अस्थायी रोजगार प्रवेश वीज़ा मार्ग पेश करता है, जिसके तहत आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, निर्माण तथा योग, आयुर्वेद, भारतीय व्यंजन और संगीत शिक्षा जैसे चयनित पारंपरिक क्षेत्रों में तीन वर्षों तक रहने की अनुमति होगी। 

इसके अलावा, एक वर्किंग हॉलीडे वीज़ा योजना प्रत्येक वर्ष 1,000 युवा भारतीयों को न्यूज़ीलैंड में 12 महीने तक रहने और काम करने की अनुमति देगी, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक अनुभव को मजबूती मिलेगी।

निवेश और नवाचार

न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इससे विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं, नवाचार इकोसिस्टम और रोजगार सृजन को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक ‘पुनर्संतुलन खंड’ शामिल किया गया है, जिससे भारत को यह अधिकार मिलता है कि यदि निवेश संबंधी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं होतीं हैं, तो वह सुधारात्मक कदम उठा सकता है। यह समझौता अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कौशल विकास और नवाचार-आधारित क्षेत्रों में सहयोग को भी बढ़ावा देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि दीर्घकालिक विकासात्मक साझेदारियों में व्यापार पूरक भूमिका निभाएगा।

व्यापार रणनीति

भारत–न्यूज़ीलैंड एफटीए विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ साझेदारी करने की स्पष्ट और भरोसेमंद व्यापार रणनीति को प्रतिबिंबित करता है, जो भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए सार्थक बाजार पहुँच की सुविधा देता है और घरेलू संवेदनशीलताओं का सम्मान करता है। 

आज भारत ताकत और विश्वसनीयता की स्थिति के साथ वार्ता करता है। पहले के दशकों में व्यापार समझौतों को अक्सर संवेदनशील क्षेत्रों को अपर्याप्त सुरक्षा दिए बिना अंतिम रूप दिया जाता था, इसके विपरीत वर्तमान वार्ताएं सुनिश्चित करती हैं कि कृषि, डेयरी और अन्य संवेदनशील क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित रहें।

जैसे-जैसे भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपनी सहभागिता को प्रगाढ़ कर रहा है, विकसित दुनिया के साथ हुए व्यापार समझौते इस तथ्य का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि व्यापार नीति को कैसे राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित किया जा सकता है, जिससे विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में समावेशी वृद्धि और दीर्घावधि आर्थिक सुदृढ़ता सुनिश्चित होती है।

(लेखक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं)         

राष्ट्रीय चिंतन शिविर का दूसरा दिन: डॉ. वीरेंद्र कुमार की मौजूदगी में राज्य-केंद्र समन्वय और जमीनी क्रियान्वयन पर जोर

चंडीगढ़ /सत्ता संदेश

चंडीगढ़ में आयोजित राज्य एवं गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय चिंतन शिविर के दूसरे दिन, राज्य-केंद्र के बीच गहन विचार-विमर्श के साथ, परिकल्पना से क्रियान्वयन की ओर कदम बढ़ाया गया। केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार गहन राज्य-केंद्र विचार-विमर्श पर केंद्रित चिंतन शिविर के दूसरे दिन के सत्रों में शामिल हुए। केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने राष्ट्रीय चिंतन शिविर में दूसरे दिन के विचार-विमर्श को “ज्ञानवर्धक और जमीनी हकीकतों पर आधारित” बताया। राज्य मंत्री के नेतृत्व में सुबह के योग सत्र ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ दिन भर चलने वाली विषयगत चर्चाओं के लिए माहौल तैयार किया। पांच अलग-अलग समूहों ने छात्रवृत्ति सुधार, नशा मुक्त भारत, श्रम में गरिमा, गरिमापूर्ण वृद्धावस्था और दिव्यांग बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप जैसे विषयों पर चर्चा की। विषयगत चर्चाओं में समावेशी सेवा वितरण के लिए सामुदायिक सहभागिता और सार्वजनिक-निजी-जन भागीदारी पर जोर दिया गया।

पीआईबी दिल्ली द्वारा तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर ‘अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब’ विकसित भारत@2047 कार्यक्रम चंडीगढ़ में दूसरे दिन प्रवेश कर गया, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से सामुदायिक भागीदारी, सार्वजनिक-निजी-जन भागीदारी और सामाजिक न्याय योजनाओं के अंतिम छोर तक कार्यान्वयन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। समावेशी और जवाबदेह शासन पर दिए गए उद्घाटन सत्र के आधार पर, देश भर के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समयबद्ध और कार्यान्वयन योग्य समाधानों पर काम करने के लिए एक साथ विचार-विमर्श किया। दिन की शुरुआत एक संयुक्त योग सत्र से हुई, जिसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों और अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा भी गणमान्य व्यक्तियों के साथ सत्र में शामिल हुए। कार्यक्रम ने दिन की कार्यवाही के लिए स्वास्थ्य-उन्मुख और सहभागी माहौल तैयार किया और सामाजिक न्याय कार्यान्वयन में समग्र, व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

सामाजिक न्याय की व्यापक पहुंच के लिए सामुदायिक सहभागिता का लाभ उठाना और सार्वजनिक-निजी-जन भागीदारी मॉडल की खोज करना विषय पर आयोजित नाश्ते के दौरान, प्रतिभागियों ने चर्चा की कि कैसे स्थानीय समुदाय, नागरिक समाज संगठन और निजी क्षेत्र के संस्थान सबसे वंचित लोगों तक पहुंचने के लिए सरकारी प्रयासों में सहयोग कर सकते हैं। चर्चाओं में पीपीपीपी के व्यावहारिक मॉडलों पर प्रकाश डाला गया, जो नशामुक्ति, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, छात्रवृत्ति वितरण, स्वच्छता कर्मचारियों को सहायता और कमजोर समूहों के पुनर्वास जैसे कार्यों को मजबूत कर सकते हैं।

दूसरे दिन के सत्रों के दौरान, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार कार्यवाही में शामिल हुए और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विषयगत चर्चाओं का बारीकी से अवलोकन किया। शिविर के समग्र उद्देश्यों को याद करते हुए, उन्होंने दोहराया कि सामाजिक क्षेत्र में विकसित भारत 2047 की परिकल्पना गरिमा, सुलभता और कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति के लिए निरंतरता के तीन स्तंभों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श का उद्देश्य कल्याण से सशक्तिकरण की ओर बढ़ना है, यह सुनिश्चित करते हुए कि कागजों पर स्वीकृत लाभ जमीनी स्तर पर छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और अन्य वंचित समूहों के लिए निर्बाध, उपयोगकर्ता-अनुकूल सेवाओं में परिवर्तित हों।

चिंतन शिविर प्रक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत ने बताया कि दस प्रमुख विषय चिन्हित किए गए हैं—सात सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग से और तीन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) से। प्रतिभागियों को पांच विषय-आधारित समूहों में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक का मार्गदर्शन एक प्रमुख समन्वयक और प्रतिवेदक द्वारा किया जाता है। इन समूहों का उद्देश्य सामान्य चर्चाओं के बजाय प्रमुख नीतिगत मुद्दों, कार्यान्वयन में कमियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और समयसीमा सहित स्पष्ट कार्य बिंदुओं को समाहित करने वाली संक्षिप्त प्रस्तुतियाँ तैयार करना है।

दूसरे दिन के ब्रेकआउट सत्र के दौरान, पांच विषयगत समूहों ने विकसित भारत 2047 ढांचे के तहत अपने पहले विषयों के समूह पर चर्चा की।

समूह I ने "शिक्षा से समृद्धि: छात्रवृत्ति वितरण और शैक्षिक पहुंच को सुदृढ़ बनाना" विषय पर चर्चा की, जिसमें समय पर और सुचारू छात्रवृत्ति पहुंच, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एकसमान कार्यान्वयन, त्वरित सत्यापन और वितरण, बेहतर शिकायत निवारण और छात्र कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

समूह II ने "नशा मुक्त भारत: नशामुक्ति और पुनर्वास पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना" विषय पर काम किया, जिसमें उपचार और पुनर्वास सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल निगरानी, ​​अंतर-क्षेत्रीय समन्वय और समुदाय-आधारित आउटरीच का विश्लेषण किया गया।

समूह III ने "श्रम की गरिमा: श्रम में गरिमा" विषय पर विचार-विमर्श किया, जिसमें मैनहोल से मशीन-होल सिस्टम में परिवर्तन, मिशन ज़ीरो स्वच्छता संबंधी मौतों और स्वच्छता कर्मचारियों की सुरक्षा, गरिमा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
समूह IV ने "गरिमापूर्ण वृद्धावस्था: भारत में समग्र दृष्टिकोण और अवसंरचना सहायता प्रणालियों के साथ घर पर वृद्धावस्था" विषय पर चर्चा की, जिसमें बुजुर्गों की देखभाल के अवसंरचना, सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा और व्यापक योजनाओं और कानूनी ढांचों के बेहतर उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
समूह V ने “नन्हे कदम स्वावलंबन की ओर: प्रारंभिक हस्तक्षेप” विषय पर चर्चा की, जिसमें विकलांग और विकासात्मक चुनौतियों से ग्रस्त बच्चों की शीघ्र पहचान और हस्तक्षेप तथा सामुदायिक स्तर पर सेवाओं के समन्वय पर विशेष बल दिया गया।
इन समूह चर्चाओं के दौरान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जमीनी स्तर पर आने वाली बाधाओं को साझा किया और छात्रवृत्ति वितरण प्रणालियों में सुधार, एकीकृत नशामुक्ति निगरानी मंच, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के मॉडल और प्रारंभिक हस्तक्षेप रणनीतियों जैसे अनुकरणीय नवाचारों को प्रदर्शित किया। मुख्य जोर विशिष्ट, हितधारक-आधारित कार्य बिंदुओं को तैयार करने पर रहा, जिन्हें मंत्रालय के दिशानिर्देशों, SAMAVESH और SETU जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करके आगे बढ़ाया जा सकता है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) में अंतिम छोर तक वितरण एवं कार्यान्वयन तंत्र को सुदृढ़ बनाने पर आयोजित दोपहर के भोजन ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को जिला स्तरीय वितरण चुनौतियों, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और डेटा-आधारित निगरानी पर विचार-विमर्श करने में सक्षम बनाया। चर्चाओं में सामंजस्यपूर्ण छात्रवृत्ति प्रणालियों, सुव्यवस्थित नशामुक्ति एवं पुनर्वास मार्गों और मजबूत निगरानी ढांचों की आवश्यकता पर बल दिया गया, जो केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हों।
समापन भाषण में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा ने विचार-विमर्श को "ज्ञानवर्धक और जमीनी हकीकतों पर आधारित" बताया और भाग लेने वाले राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को उनके स्पष्ट सुझावों और रचनात्मक विचारों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चिंतन शिविर “महज तीन दिवसीय आयोजन नहीं है, बल्कि अंतिम छोर तक सहायता पहुंचाने को मजबूत करने का एक सामूहिक संकल्प है, ताकि हर छात्रवृत्ति, वरिष्ठ नागरिकों के लिए हर सहायता, नशा मुक्त भारत के तहत या दिव्यांगजनों के लिए हर हस्तक्षेप, गरिमापूर्ण तरीके से और बिना किसी देरी के इच्छित लाभार्थी तक पहुंचे।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समूह कार्य से उभरने वाली सिफारिशें मंत्रालय और राज्यों को विचारों से कार्यान्वयन की ओर मिलकर आगे बढ़ने में मदद करेंगी।

दूसरे दिन की चर्चाओं से उभरने वाली सिफारिशों को अंतिम दिन परिष्कृत किया जाएगा, जब समूह अंत्योदय से आत्मनिर्भरता, समावेशन-पहचान-एकीकरण, आर्थिक सशक्तिकरण, दिव्यांगजनों के लिए सुलभता और प्रमाणन से संबंधित विषयों के अपने दूसरे समूह पर विचार-विमर्श करेंगे, जिससे 2047 तक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और सुलभ विकसित भारत के निर्माण में योगदान मिलेगा।
AI और ग्लोबल मंदी की दोहरी मार: भारतीय आईटी सेक्टर को 115 अरब डॉलर का भारी नुकसान

टेक डेस्क : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है। पिछले चार महीनों में इस सेक्टर की मार्केट वैल्यू में करीब 115 अरब डॉलर (लगभग ₹9.5 लाख करोड़) की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

दिग्गज कंपनियों के कमजोर नतीजे: इंफोसिस (Infosys) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) जैसी बड़ी कंपनियों के उम्मीद से कम मुनाफे और कमजोर भविष्य के अनुमानों ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।

शेयर बाजार में गिरावट: आईटी सेक्टर का प्रमुख इंडेक्स, निफ्टी आईटी (Nifty IT), जून 2023 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। साल 2026 में अब तक इसमें लगभग 25% की गिरावट आ चुकी है, जिससे यह भारत का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया है।

खर्च में कटौती: ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण क्लाइंट्स ने बड़े और लंबे प्रोजेक्ट्स को टाल दिया है। अब कंपनियां केवल जरूरी टेक खर्चों पर ही ध्यान दे रही हैं।

AI का बदलता मॉडल: AI पारंपरिक आईटी सर्विस मॉडल को तेजी से बदल रहा है। हालांकि टीसीएस (TCS) और इंफोसिस जैसी कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट्स में AI को शामिल कर लागत घटाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी भी भविष्य को लेकर तस्वीर साफ नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी सेक्टर इस समय अपने सबसे कठिन बिज़नेस साइकिल से गुजर रहा है और निवेशक अब बाजार में सुधार के लिए और अधिक मजबूत संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

जापान में भूकंप के तेज झटके: रिक्टर स्केल पर 6.1 रही तीव्रता, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

इंटरनेशनल डेस्क : जापान के उत्तरी हिस्से में सोमवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई है। झटके इतने जोरदार थे कि लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए।

समय और स्थान: भूकंप सोमवार सुबह करीब 5:24 बजे (जापान समय) आया। इसका केंद्र उत्तरी जापान में होक्काइडो के छोटे से शहर साराबेत्सु से 18 किलोमीटर पश्चिम में था।

गहराई: अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप जमीन से 81 किलोमीटर की गहराई पर आया था।

प्रभाव: प्रभावित क्षेत्रों में कंपन इतना तीव्र था कि लोगों को खड़े रहने में भी कठिनाई महसूस हुई और कुछ स्थानों पर सामान गिरने की खबरें मिलीं। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार अभी तक किसी के हताहत होने या किसी बड़े नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

सुनामी की स्थिति: राहत की बात यह है कि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इस भूकंप के बाद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की है।

पृष्ठभूमि: जापान दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। गौरतलब है कि पिछले सोमवार को भी उत्तरी जापान में 7.7 तीव्रता का बड़ा भूकंप आया था, जिसके बाद सुनामी का अलर्ट भी जारी किया गया था। विशेषज्ञ तटीय इलाकों के लिए समय-समय पर ‘मेगाक्वेक’ के जोखिम की चेतावनी देते रहते हैं।