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उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की


केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, पूर्व सांसदों एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की

बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन एक महान संघर्ष की साहसिक गाथा है: लोक सभा अध्यक्ष

बाबासाहेब की दूरदर्ष्टि ने स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात की पीढ़ियों को प्रभावित किया तथा प्रेरणा के अविरल पुंज बन गए: लोक सभा अध्यक्ष

नई दिल्ली, 14 अप्रैल, 2026: भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन; प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री मल्लिकार्जुन खरगे; राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश; सांसदों, पूर्व सांसदों तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके उपरांत लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला; केंद्रीय मंत्रियों, राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री मल्लिकार्जुन खरगे, सांसदों एवं पूर्व सांसदों ने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। लोकसभा के महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने भी संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की।

इसके पश्चात, लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) द्वारा संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने अपनी प्रतिभा, समर्पण और दृढ़ निष्ठा के बल पर अपने जीवन की प्रत्येक चुनौती को अवसर में परिवर्तित किया।उन्होंने आगे  कहा कि उनका जीवन, उनके आदर्श, उनके विचार तथा राष्ट्र निर्माण में उनका अमूल्य योगदान हम सभी के लिए चिरस्थायी प्रेरणा है।

 डॉ. अम्बेडकर के प्रमुख योगदानों का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि संविधान में समानता का अधिकार तथा बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार जैसे प्रगतिशील प्रावधानों ने एक सशक्त भारत की नींव रखी, जो न केवल भारत के लोकतंत्र को बल्कि विश्व के अन्य लोकतंत्रों को भी निरंतर प्रेरित कर रहे हैं।

भारत के युवाओं को बाबासाहेब  के विचारों का सच्चा प्रतिनिधि बताते हुए श्री बिरला ने उन्हें सदैव ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के 

साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिभा, कौशल, नवाचार और समर्पण भारत को और अधिक सशक्त तथा विकसित बनाएंगे।

इस अवसर पर श्री बिरला ने X पर अपने  संदेश में कहा कि, “बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन एक महान संघर्ष की साहसिक गाथा है।विषम परिस्थितियों के बावजूद भी उन्होंने तमाम ऊँचाइयों को छुआ तथा अपने अदम्य साहस, कठोर परिश्रम और शिक्षा के बल पर न केवल स्वयं को स्थापित किया, बल्कि करोड़ों वंचितों और शोषितों के लिए आशा की नई किरण बन गए।

उन्होंने समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता के मूल्यों को जीवन का ध्येय बनाया और इन्हीं आदर्शों को भारत के संविधान में समाहित कर राष्ट्र को एक सशक्त दिशा प्रदान की।

बाबासाहेब हमारे राष्ट्र के वह विशिष्ट रत्न हैं, जिनके जीवन व कार्यों ने स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात की पीढ़ियों को प्रभावित किया तथा प्रेरणा के अविरल पुंज बन गए।

संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक ऐसा दूरदर्शी दस्तावेज देश को दिया, जो आज भी लोकतंत्र की मजबूत नींव है और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता हैउनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा, जागरूकता और संगठित प्रयासों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

आज जब हम विकसित और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर हैं, बाबासाहेब के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका संघर्ष और दर्शन हमें अन्याय, असमानता और भेदभाव के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।

डॉ. अम्बेडकर का प्रेरणादायी जीवन और उनके आदर्श सदैव हमें एक न्यायपूर्ण, समरस और सशक्त भारत के निर्माण के लिए मार्गदर्शन करते रहेंगे।”

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