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पंजाब दौरे पर अमित शाह ने AAP सरकार को घेरा, नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की मौत पर उठाए सवाल

लुधियाना / मानसा / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पंजाब दौरे के दौरान राज्य में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोला। मंगलवार को गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में नशे से जुड़े मामलों से प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद शाह ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशीले पदार्थों का कारोबार गंभीर चुनौती बना हुआ है और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमित शाह ने गुरदासपुर के विक्रमजीत सिंह, संगरूर के गुलजार सिंह और मानसा के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है। उन्होंने पंजाब सरकार से सवाल किया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

शाह ने आरोप लगाया कि राज्य में जमीनी हालात चिंताजनक हैं और नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों से मिलने का उनका उद्देश्य उनके दुख में शामिल होना और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाना था।

‘गांव-गांव में बिक रहा नशा’, AAP सरकार से पूछे सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार राज्य में नशीले पदार्थों का कारोबार अब भी चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बरामदगी का उल्लेख करते हुए नशे के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई।

शाह ने पंजाब सरकार से PIT-NDPS कानून के तहत की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनके दावे के अनुसार, पिछले एक साल में इस कानून के तहत 929 मामले दर्ज किए गए, लेकिन नशे के कारोबार से प्रभावित क्षेत्रों में गिरफ्तारियों को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर मामलों की समीक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल बयान देने के बजाय ठोस कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

‘गालियां देने से फायदा नहीं, नशे का कारोबार बंद करें’

अमित शाह ने कहा कि पंजाब दौरे पर आने का उनका उद्देश्य नशे से प्रभावित परिवारों को सांत्वना देना था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी या उनके प्रति नाराजगी जताने से नशे की समस्या का समाधान नहीं होगा।

शाह ने राज्य सरकार से अपील की कि नशीले पदार्थों के कारोबार को रोकने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार नशे के खिलाफ अभियान में पंजाब के लोगों के साथ खड़ी है।

BJP सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त पंजाब का वादा

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों और उन्हें संरक्षण देने वालों की पहचान कर कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पंजाब की जनता से वादा दोहराया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा जाएगा।

शाह ने यह भी कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को न्याय मिलना चाहिए और इस तरह की घटनाओं में शामिल आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

‘पाताल से भी ढूंढ निकाले जाएंगे आरोपी’, CBI जांच पर शाह का बयान

परविंदर सिंह झोटा के मामले का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि आरोपी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपे जाने के फैसले का स्वागत किया और दोषियों को सजा दिलाने का भरोसा दिया।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपने की घोषणा की थी। इसके बाद CBI की टीम मानसा पहुंची और मामले की जांच अपने हाथ में लेने की प्रक्रिया शुरू की। शाह ने गुरदासपुर और संगरूर से जुड़े अन्य मामलों की जांच भी CBI को सौंपने की मांग उठाई।

झोटा परिवार से मुलाकात, इंसाफ की मांग पर कायम परिजन

मानसा में अमित शाह ने एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात की। परिवार ने उनसे मामले में इंसाफ दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। परिजनों के अनुसार, शाह ने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया और जांच में कार्रवाई को लेकर इंतजार करने के लिए कहा।

झोटा परिवार और समर्थक मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। CBI जांच शुरू होने के बाद अब इस मामले में जांच की प्रगति और सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।

अमित शाह का यह दौरा पंजाब में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को भी सामने लाता है। जहां भाजपा ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, वहीं झोटा मामले को CBI को सौंपने का फैसला पंजाब सरकार की ओर से परिवार की मांग स्वीकार किए जाने के रूप में सामने आया है।

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: अमृतसर से मुंबई तक हथियार पहुंचाने का नेटवर्क, दो महिलाओं की भूमिका भी जांच के घेरे में

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले में अमृतसर से हथियार मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच में कथित डेड लेटर बॉक्स तरीके और हथियार सप्लाई नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल हो रही है।

मुंबई / अमृतसर / सत्ता संदेश

अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच के दौरान हथियारों की सप्लाई से जुड़ी नई जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल अमृतसर में पहले से तय एक जगह से हासिल की थी। हथियारों को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कथित तौर पर ‘डेड लेटर बॉक्स’ तरीके का इस्तेमाल किया गया, जिसमें सामान को किसी निश्चित स्थान पर रख दिया जाता है और दूसरा व्यक्ति वहां से उसे उठा लेता है।

सूत्रों के अनुसार, कुणाल और सुमित नाम के दो आरोपी करीब दो सप्ताह पहले हथियार लेने अमृतसर गए थे। बताया जा रहा है कि अनिल पंडित ने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए कुणाल को हथियार रखे होने की जगह की जानकारी दी थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, हथियार रखने वाले व्यक्ति और उन्हें उठाने वाले आरोपियों के बीच सीधे संपर्क की जरूरत नहीं पड़ी।

हथियारों की सप्लाई के लिए दिए गए 70 से 80 हजार रुपये

सूत्रों के मुताबिक, अनिल पंडित ने कथित तौर पर इस काम के लिए आरोपियों को 70 से 80 हजार रुपये दिए थे। इसमें से लगभग 10 से 12 हजार रुपये बबीता और राधा नाम की दो महिलाओं को दिए जाने की बात सामने आई है। इन महिलाओं पर हथियारों को मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपे जाने का आरोप है। इस मामले में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, कुणाल इसी साल जुलाई में सोनीपत जेल से रिहा हुआ था। जेल से बाहर आने के बाद एक दोस्त के माध्यम से उसकी मुलाकात अनिल पंडित से हुई थी। इसके बाद दोनों कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए संपर्क में रहने लगे।

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि करीब दो सप्ताह पहले कुणाल को अमृतसर से हथियार लेकर मुंबई पहुंचाने का काम सौंपा गया था। जांचकर्ताओं को शक है कि इस काम में कुणाल ने अपनी गर्लफ्रेंड राधा की मदद ली। बताया जा रहा है कि राधा और बबीता सोनीपत की एक फैक्ट्री में काम करती हैं और कुणाल की मुलाकात राधा से करीब दो महीने पहले हुई थी। हालांकि, इन सभी दावों की पुष्टि जांच एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी से होना बाकी है।

18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग

जानकारी के मुताबिक, 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में शाम करीब सात बजे टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना हुई थी। उस समय अभिनेता फुटबॉल क्लब से निकलकर अपने घर की ओर जा रहे थे। इस घटना में अभिनेता बाल-बाल बच गए, जबकि उनके ड्राइवर को चोटें आई थीं।

मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। खबरों के मुताबिक, बुधवार को गिरफ्तार किए गए तीन मुख्य आरोपियों को राजस्थान के कोटा से मुंबई लाया गया। मेडिकल जांच के बाद उन्हें पूछताछ के लिए एंटी एक्सटॉर्शन सेल के कार्यालय ले जाया गया। आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उन्हें अदालत में पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।

इस मामले में अमृतसर से हथियारों की कथित सप्लाई, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ने पर जांच एजेंसियों का ध्यान है। जांच पूरी होने और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

Punjab Roadways Strike: पंजाब में रोडवेज का चक्का जाम, कच्चे कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

पंजाब में पनबस और पीआरटीसी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया। जानें रेशम सिंह गिल ने सरकार पर क्या आरोप लगाए।

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब में पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। पंजाब रोडवेज पनबस/पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब (25/11) ने कर्मचारियों को पक्का करने और अन्य मांगें पूरी करने की मांग को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। हड़ताल के चलते बस सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

यूनियन और पंजाब सरकार के बीच मांगों को लेकर गतिरोध बरकरार है। यूनियन ने सरकार पर बार-बार बैठकों को आगे बढ़ाकर कर्मचारियों की मांगों को टालने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर चर्चा हो रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल ने बताया कि पिछले छह महीनों के दौरान वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ सात से आठ बैठकें हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, हर बैठक में यूनियन से दस दिन का समय मांगा जाता रहा, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों की एक भी मांग पूरी नहीं हुई।

रेशम सिंह गिल के अनुसार, 5 अक्टूबर को हुई अंतिम बैठक में सरकार की ओर से 15 अक्टूबर तक लिए गए फैसलों को लागू करने और संबंधित नोटिफिकेशन जारी करने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, यूनियन का आरोप है कि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी मांगों को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक कर्मचारियों की मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता और सरकार अपने आश्वासनों को लागू नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया जाएगा। हड़ताल की अवधि में बस सेवाओं पर पड़ने वाले वास्तविक असर और यात्रियों को होने वाली परेशानी की स्थिति संबंधित अपडेट के आधार पर स्पष्ट होगी।

Punjab Employees Strike: पंजाब में 21-22 अक्टूबर को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की हड़ताल

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों ने 21-22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल का ऐलान किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान से बैठक और मांगों के समाधान की मांग।

जालंधर / सत्ता संदेश

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों को लेकर विरोध तेज हो गया है। पंजाब मुलाजिम एवं पेंशनर सांझा फ्रंट और अन्य सरकारी कर्मचारी संगठनों ने 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल करने का ऐलान किया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से बैठक बुलाकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जालंधर में कर्मचारी संगठनों के प्रधानों ने बातचीत के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अक्टूबर की शुरुआत में सरकारी कर्मचारियों के साथ बैठक करने और उनकी मांगों का समाधान करने का भरोसा दिया था। हालांकि, अक्टूबर के कई दिन बीत जाने के बावजूद बैठक नहीं हुई। इसी के विरोध में संगठनों ने 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल करने का फैसला किया है।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। संगठनों ने सरकार से जल्द बैठक बुलाने और कर्मचारियों तथा पेंशनरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 21 और 22 अक्टूबर की हड़ताल के बाद बड़े स्तर पर दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि आंदोलन आगे बढ़ता है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

इस हड़ताल का सरकारी कार्यालयों में कामकाज और आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह संबंधित विभागों में कर्मचारियों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।

Punjab Anti-Drug Campaign: फिल्लौर में CM भगवंत मान की समीक्षा बैठक, 117 DSP नियुक्त

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फिल्लौर में नशा विरोधी अभियान की समीक्षा की। पंजाब में पुलिस विभाग को मजबूत करने के लिए 117 डीएसपी नियुक्त किए गए और नए वाहनों को मंजूरी दी गई।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

दिनांक : 16 अक्टूबर 2026

पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज फिल्लौर में समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी जिलों के एसएसपी, डीसी, डीएसपी और एसडीएम ने हिस्सा लिया। इस दौरान नशा विरोधी अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई और पुलिस विभाग को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा हुई।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसे जन-आंदोलन बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को इस अभियान में भागीदारी निभानी चाहिए, ताकि पंजाब को नशे की समस्या से मुक्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान से जुड़ी सिफारिशों को लागू करने की पूरी अनुमति दे दी गई है। पुलिस विभाग को और मजबूत बनाने के लिए 117 डीएसपी नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही पुलिस के लिए नए वाहनों को भी मंजूरी दी गई है, जिससे अभियान को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।

भगवंत मान ने कहा कि पंजाब गुरुओं और संतों की पवित्र धरती है और इस भूमि पर नशे का कलंक नहीं लगने दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ लड़ाई में सरकार का सहयोग करें और मिलकर पंजाब को फिर से खुशहाल बनाने में योगदान दें।

मुख्यमंत्री ने महाराजा रणजीत सिंह के न्यायपूर्ण शासन का उल्लेख करते हुए ‘रंगला पंजाब’ के निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई को सफल बनाने के लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा।

विश्व डाक दिवस 2026: ‘एक डाक नेटवर्क, अनंत संभावनाएं’ थीम के साथ पंजाब डाक सर्कल मनाएगा दिवस

विश्व डाक दिवस 2026 पर पंजाब डाक सर्कल ‘एक डाक नेटवर्क, अनंत संभावनाएं’ थीम के साथ डाक सेवाओं के डिजिटलीकरण, डाक मित्र ऐप और 9 से 15 अक्टूबर तक होने वाली गतिविधियों पर जोर दे रहा है।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

दिनांक : 9 अक्टूबर, 2026

डाक विभाग, पंजाब सर्कल, 9 अक्टूबर, 2026 को विश्व डाक दिवस मनाएगा। इस अवसर पर, नागरिकों को सुलभ, समावेशी और प्रौद्योगिकी-आधारित डाक सेवाएं प्रदान करने में भारतीय डाक की विकसित होती भूमिका को उजागर करने वाली गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी।

इस वर्ष के विश्व डाक दिवस का विषय है “विश्व डाक दिवस: एक डाक नेटवर्क, अनंत संभावनाएं”, जो डाक नेटवर्क की व्यापक पहुंच और सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से लोगों, व्यवसायों और समुदायों को जोड़ने की इसकी क्षमता को दर्शाता है।

इस अवसर पर, पंजाब पोस्टल सर्कल डिजिटल जनसंपर्क, प्रौद्योगिकी और ग्राहक-केंद्रित पहलों के माध्यम से डाक सेवाओं में हुए बदलावों को प्रदर्शित करेगा। डाक सेवा ऐप और डाक मित्र ऐप प्रमुख डिजिटल पहलों में से हैं जिनका उद्देश्य डाक सेवाओं को ग्राहकों के लिए अधिक सुविधाजनक और सुलभ बनाना है।

डाक विभाग एन-जेन डाकघरों और जन सेवा कनेक्ट डाकघरों के माध्यम से अपनी सेवा वितरण अवसंरचना का आधुनिकीकरण भी कर रहा है, जिससे नागरिकों को बेहतर और अधिक ग्राहक-अनुकूल सेवा स्थान उपलब्ध हो सकें।

उत्सव के उपलक्ष्य में, सप्ताह भर में कई विषयगत गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा:

• 9 अक्टूबर, 2026 – विश्व डाक दिवस: सार्वभौमिक डाक संघ की स्थापना और निरंतर महत्व तथा विश्व भर के समुदायों को जोड़ने में डाक नेटवर्क की भूमिका का जश्न मनाना।                                                                                            

• 12 अक्टूबर, 2026 – डाक टिकट संग्रह दिवस: डाक टिकटों, डाक टिकट संग्रह और भारत की समृद्ध डाक विरासत में रुचि को बढ़ावा देना।

• 13 अक्टूबर, 2026 – वित्तीय समावेशन और सीसीएस दिवस: वित्तीय सेवाओं के विस्तार और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में इंडिया पोस्ट की भूमिका पर प्रकाश डालना।

• 14 अक्टूबर, 2026 – डाक एवं पार्सल दिवस: डाक मेल और पार्सल नेटवर्क तथा व्यक्तियों, संस्थानों और व्यवसायों को जोड़ने में इसकी भूमिका के बारे में जागरूकता पैदा करना।

• 15 अक्टूबर, 2026 – प्रौद्योगिकी एवं नवाचार दिवस: डाक सेवा वितरण में सुधार के लिए शुरू की जा रही तकनीकी प्रगति और नवोन्मेषी पहलों पर प्रकाश डाला जाएगा।

विश्व डाक दिवस समारोह पंजाब डाक सर्कल की डाक नेटवर्क को मजबूत करने और इसे अधिक आधुनिक, सुलभ, प्रौद्योगिकी-संचालित और ग्राहक-केंद्रित सेवा मंच बनाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जो वास्तव में “एक डाक नेटवर्क, अनंत संभावनाएं” की भावना को दर्शाता है।

LPU हिंसा मामले में 3 और छात्र गिरफ्तार, कोर्ट ने पुलिस रिमांड पर भेजा

जालंधर / सत्ता संदेश

फगवाड़ा-जालंधर नेशनल हाईवे स्थित Lovely Professional University (LPU) में हुई हिंसा के मामले में फगवाड़ा पुलिस ने तीन और छात्रों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिश्या पुत्र अशोक कुमार निवासी महाराष्ट्र, कृष्णा पुत्र राजेश निवासी बिहार और योगेश पुत्र संपत निवासी राजस्थान के रूप में हुई है। तीनों आरोपी लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के छात्र बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक पुलिस ने आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से काबू किया। इनमें से योगेश को लवली यूनिवर्सिटी के लोअर गेट से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि हिंसा के दौरान वाहनों में तोड़फोड़ करने, सड़क अवरुद्ध करने और छात्रों को हिंसा के लिए उकसाने की कोशिश की गई थी।

गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को फगवाड़ा की अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए रिमांड हासिल किया है। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर हिंसा के दौरान उनकी कथित भूमिका और मामले में शामिल अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

मैड संधू मर्डर केस: ‘मेरे बेटे का क्या कसूर था?’ पिता ने बयां किया दर्द, परिवार ने मांगा इंसाफ

मैड संधू मर्डर केस में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मधुसूदन सिंह के पिता भूपिंदर सिंह ने सुरक्षा में चूक के आरोप लगाए हैं। परिवार ने हत्यारों की गिरफ्तारी और छोटे बेटे के लिए सरकारी नौकरी की मांग की।

पंजाब / सत्ता संदेश

सोशल मीडिया पर ‘मैड संधू’ के नाम से मशहूर मधुसूदन सिंह की हत्या के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। पंजाब पुलिस से रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर और मधुसूदन के पिता भूपिंदर सिंह ने मीडिया के सामने भावुक होते हुए अपने बेटे की हत्या पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा हमेशा लोगों की मदद और समाज सेवा के लिए आगे रहता था, फिर उसका क्या कसूर था?

भूपिंदर सिंह के मुताबिक, मधुसूदन पूरे परिवार का सहारा था। उसकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। पिता ने बताया कि मधुसूदन सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान और स्टाइल के कारण युवाओं के बीच लोकप्रिय था और ‘मैड संधू’ के नाम से जाना जाता था। बढ़ती लोकप्रियता के बाद उसे विभिन्न कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि भी बुलाया जाने लगा था।

बढ़ती लोकप्रियता को बताया हत्या की वजह

मधुसूदन के पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की बढ़ती शोहरत, लोकप्रियता और सोशल मीडिया फॉलोइंग से कुछ लोग नाराज थे। उनका दावा है कि इसी रंजिश के चलते साजिश रचकर मधुसूदन की हत्या कर दी गई। हालांकि, हत्या के पीछे वास्तविक कारण और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

गरीबों और जरूरतमंदों की करता था मदद

भूपिंदर सिंह ने बताया कि मधुसूदन केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं निभाता था, बल्कि जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी आगे रहता था। उनके अनुसार, वह गरीब बच्चों की पढ़ाई और जरूरतमंद परिवारों के राशन का खर्च उठाता था। इसके अलावा उसने मेडिकल कैंप और रक्तदान शिविर आयोजित किए तथा बाढ़ प्रभावित लोगों की भी मदद की।

पिता ने बताया कि मधुसूदन गुरुद्वारों में सेवा करने के साथ पाठ में भी शामिल होता था। उसने एक सैलून भी शुरू किया था, जहां कई लोग काम करके अपने परिवार का गुजारा करते थे। उसकी मौत के बाद सैलून बंद हो गया है और वहां काम करने वाले लोगों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

धमकियों के बावजूद सुरक्षा नहीं मिलने का आरोप

मधुसूदन के पिता ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उनके बेटे को पहले से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। परिवार की ओर से इन धमकियों की जानकारी संबंधित विभागों और सुरक्षा एजेंसियों को दिए जाने का दावा किया गया था।

भूपिंदर सिंह के अनुसार, CID, इंटेलिजेंस और पंजाब पुलिस को भी इस संबंध में जानकारी दी गई थी और सुरक्षा के लिए गनमैन की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद मधुसूदन को स्थायी सुरक्षा नहीं मिली।

पिता ने कहा कि अगर समय रहते सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती और धमकियों को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता। उन्होंने पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की है।

उन्होंने यह भी कहा कि हत्या के बाद अब तक सरकार की ओर से परिवार से मिलने या उनका दुख साझा करने के लिए किसी बड़े प्रतिनिधि के नहीं पहुंचने से परिवार में नाराजगी है।

छोटे बेटे के लिए सरकारी नौकरी की मांग

मधुसूदन की मौत के बाद परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और छोटा बेटा अर्शदीप सिंह रह गए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए भूपिंदर सिंह ने पंजाब सरकार से छोटे बेटे को सहानुभूति के आधार पर पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर या उसकी योग्यता के अनुरूप सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

इसके साथ ही परिवार ने पुलिस प्रशासन से मधुसूदन के हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने और मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की हत्या का इंसाफ चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

टांडा-पुल पुख्ता बरसाती नाले पर अवैध कब्जों का आरोप, कांग्रेस ने SDM को सौंपा ज्ञापन

टांडा-पुल पुख्ता बरसाती नाले पर कथित अवैध कब्जों को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने SDM टांडा को ज्ञापन सौंपा। SDM ने ड्रेनेज विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए।

टांडा उड़मुड़ / सत्ता संदेश

टांडा से पुल पुख्ता जाने वाले बरसाती नाले पर कथित गैर-कानूनी कब्जों को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब संगत सिंह गिलजियां के नेतृत्व में एसडीएम टांडा लवप्रीत सिंह औलख को ज्ञापन सौंपा।

पूर्व मंत्री संगत सिंह गिलजियां ने कहा कि आजादी के बाद बनाए गए इस ड्रेनेज नाले के माध्यम से टांडा, उड़मुड़, अहियापुर और दारापुर क्षेत्रों से बरसाती पानी की निकासी होती है। उन्होंने कहा कि पहले यह नाला काफी चौड़ा था और इसके साथ लगती जमीनों के मालिक ड्रेनेज विभाग की अनुमति लेकर ऐसी पुलियां बना सकते थे, जिनसे पानी की निकासी प्रभावित न हो।

गिलजियां ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से राजनीतिक दबाव के चलते कुछ लोगों ने निजी फायदे के लिए चौहान पैलेस के पास और अन्य स्थानों पर जेसीबी मशीनों और टिप्परों के माध्यम से मिट्टी डालकर नाले को संकरा करने और उस पर कब्जा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि यदि इस पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भारी बारिश के दौरान शहर में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की कि नाले पर किए गए कथित अवैध कब्जों को तुरंत हटाया जाए, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और पूरे नाले की सफाई करवाई जाए। साथ ही उन्होंने शहर की समाजसेवी संस्थाओं और बुद्धिजीवियों से भी इस गंभीर समस्या के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

इस मामले में एसडीएम टांडा लवप्रीत सिंह औलख ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी जांच की है और कुछ स्थानों पर नाले पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जे किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि ड्रेनेज विभाग को कानून के अनुसार कार्रवाई करने और संबंधित लोगों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कब्जे नहीं हटाए जाते हैं तो विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए कब्जे हटाए जाएंगे और नाले की सफाई करवाई जाएगी।

ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट दलजीत सिंह गिलजियां, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष गुरसेवक मार्शल, एमसी बलदेव राज, जसविंदर काका, राजेश लाडी, मनजीत सिंह, विनोद खोसला, राकेश बिट्टू, अनिल पिंका सचदेवा सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

नाभा में दूध और डेयरी उत्पादों की दुकानों पर हेल्थ विभाग की रेड, दूध-पनीर के लिए सैंपल

नाभा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : चेतन मेहता

त्योहारों के सीजन से पहले दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट की शिकायतों को देखते हुए हेल्थ विभाग की टीम ने नाभा शहर में डेयरियों और दूध से जुड़े कारोबारियों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया। फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. गुरप्रीत कौर के नेतृत्व में टीम ने विभिन्न डेयरियों पर छापेमारी कर दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के सैंपल लिए।

फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. गुरप्रीत कौर ने आशु डेयरी और महेश गेट स्थित नए फोकल प्वाइंट की डेयरी समेत अन्य स्थानों पर जांच की। बताया गया कि कुछ दिन पहले हेल्थ विभाग की टीम ने कुछ ऐसी दुकानों पर भी रेड की थी, जो उस समय बंद मिली थीं। इसके बाद विभाग की टीम ने दोबारा इन इलाकों में निगरानी और चेकिंग शुरू की।

डॉ. गुरप्रीत कौर ने दुकानदारों को स्पष्ट चेतावनी दी कि दूध और दूध से बने उत्पादों में किसी भी तरह की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाना जरूरी है। मिलावट पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अगर कोई दुकानदार चेकिंग के दौरान दुकान बंद कर देता है तो इससे वह विभाग की कार्रवाई से बच नहीं सकता। विभाग की टीमें लगातार अलग-अलग समय पर चेकिंग करेंगी और अगली कार्रवाई किसी भी दुकान पर हो सकती है।

डॉ. गुरप्रीत कौर ने बताया कि पटियाला की टीम द्वारा पिछले दिनों बड़ी मात्रा में पनीर और दूध जब्त किया गया था। उन्होंने कहा कि लैब रिपोर्ट के बाद खराब पाए गए खाद्य पदार्थों को नष्ट किया गया। विभाग की ओर से आने वाले त्योहारों को देखते हुए मिठाई की दुकानों, डेयरियों, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

सभी फूड वेंडरों को अपना लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन करवाने, कर्मचारियों की मेडिकल जांच करवाने, साफ-सफाई बनाए रखने और नियमित पेस्ट कंट्रोल करवाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि बिना एक्सपायरी डेट, खराब गुणवत्ता या नकली खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. गुरप्रीत कौर के मुताबिक यह चेकिंग अभियान केवल नाभा तक सीमित नहीं रहेगा। नाभा, राजपुरा, समाना और पूरे पटियाला जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच लगातार जारी रहेगी।