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घर खरीदारों के पैसों की कथित हेराफेरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, ईडी और आरबीआई से मांगा जवाब

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Supreme Court of India ने घर खरीदारों के पैसों की कथित हेराफेरी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और कई रियल एस्टेट कंपनियों से जवाब तलब किया है। यह मामला नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की आवासीय परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये के कथित दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है।

प्रधान न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi और न्यायमूर्ति Vipul M. Pancholi शामिल थे, ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और 15 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह याचिका वंदना सभरवाल द्वारा दायर की गई है, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें पेश कीं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से जुड़े घर खरीदारों से एकत्र किए गए हजारों करोड़ रुपये का कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग किया गया और नियामक निगरानी में गंभीर खामियां रही हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है और यदि बड़े पैमाने पर धन के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह हजारों परिवारों को प्रभावित कर सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता की कमी और नियामक संस्थाओं की सीमित निगरानी के कारण इस तरह की समस्याएं बार-बार सामने आती रही हैं। इसी कारण केंद्र सरकार, ईडी और आरबीआई से विस्तृत जवाब मांगा गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह पहल घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा और रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी, जिसमें सभी पक्षों के जवाबों पर विचार किया जाएगा।

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