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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को मिलेगी रफ्तार, एक जून से चार दिवसीय दौरे पर आएगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक जून से चार दिवसीय भारत दौरे पर आएगा। इस महत्वपूर्ण वार्ता को दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के अधिकारी व्यापार और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। बातचीत में अंतरिम व्यापार समझौते के ब्योरे को अंतिम रूप देने के साथ-साथ बाजार पहुंच, गैर-शुल्क बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने, व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।

भारत और अमेरिका पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तेजी से बढ़े हैं और अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में प्रस्तावित समझौते को द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इस वार्ता का उद्देश्य केवल व्यापारिक अड़चनों को दूर करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना भी है। खासतौर पर डिजिटल व्यापार, विनिर्माण, कृषि उत्पादों की पहुंच, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को अधिक मजबूत और स्थिर बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि दोनों देश चरणबद्ध तरीके से व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अंतरिम समझौते के तहत कुछ क्षेत्रों में तत्काल राहत और सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार हो सके। इससे दोनों देशों के निर्यातकों और उद्योगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत लंबे समय से अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की बेहतर पहुंच और कुछ गैर-शुल्क प्रतिबंधों में राहत की मांग करता रहा है। वहीं अमेरिका भी भारत में निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर अधिक स्पष्टता और सहूलियत चाहता है। ऐसे में आगामी वार्ता को दोनों देशों के व्यापारिक हितों के संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

भारत में नैनो-उर्वरक क्षेत्र में बड़ा निवेश करेगी जर्मन कंपनी बीप्लसएच सॉल्यूशंस

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

BplusH Solutions GmbH ने भारत में नैनो-उर्वरक कारोबार के विस्तार के लिए बड़ा निवेश करने की घोषणा की है। जर्मनी की इस कृषि प्रौद्योगिकी कंपनी ने वर्ष 2026 के दौरान भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए 10 लाख यूरो निवेश करने का लक्ष्य तय किया है।

कंपनी का कहना है कि भारत तेजी से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने वाला बड़ा बाजार बनकर उभरा है। ऐसे में नैनो-उर्वरकों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए बीप्लसएच सॉल्यूशंस अपनी उत्पादन क्षमता, अनुसंधान और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।

नैनो-उर्वरक पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी माने जाते हैं क्योंकि इनमें पोषक तत्वों की आपूर्ति नियंत्रित और लक्षित तरीके से होती है। इससे फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने में मदद मिलती है।

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित निवेश का उपयोग भारत में साझेदारियों को मजबूत करने, कृषि अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने और किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर उत्पादन और सप्लाई चेन को विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

भारत सरकार भी सतत कृषि और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए नैनो-उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसी कारण वैश्विक कृषि कंपनियां भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाने में रुचि दिखा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह निवेश योजना सफल रहती है तो इससे भारतीय कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों का विस्तार होगा और किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने में सहायता मिल सकती है।

सोना-चांदी की कीमतों में उछाल: MCX पर सोना ₹1.52 लाख और चांदी ₹2.60 लाख के पार

बिजनेस डेस्क: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार 8 मई 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है। सुबह के शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुएं हरे निशान पर ट्रेड कर रही हैं। 5 जून की डिलीवरी वाला सोना ₹449 (0.29%) की बढ़त के साथ ₹1,52,710 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, 3 जुलाई की डिलीवरी वाली चांदी की कीमतों में ₹1,461 (0.57%) की तेजी देखी गई, जिससे यह ₹2,60,001 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है।

इससे पहले गुरुवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी ने ₹7,000 की लंबी छलांग लगाई थी और यह ₹2,61,500 प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुई थी। इसके साथ ही 99.9% शुद्धता वाले सोने के भाव में भी ₹600 की मामूली तेजी आई, जिसके बाद यह ₹1,56,000 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि शनिवार और रविवार को MCX और सर्राफा बाजार दोनों बंद रहेंगे।

रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन, आज मुंबई में होगा अंतिम संस्कार

बिज़नेस डेस्क: रेमंड ग्रुप (Raymond Group) के पूर्व चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम मुंबई में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनके बेटे और समूह के वर्तमान अध्यक्ष गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (X) पर इस दुखद खबर की जानकारी साझा की।

आज होगा अंतिम विदाई का कार्यक्रम: रेमंड समूह के प्रवक्ता के अनुसार, विजयपत सिंघानिया का अंतिम संस्कार आज, 29 मार्च (रविवार) को किया जाएगा। अंतिम संस्कार से पहले दोपहर 1:30 बजे मुंबई के रूपारेल मार्ग स्थित हवेली (LD) में एक सभा आयोजित की जाएगी, जिसके बाद दोपहर 3 बजे चंदनवाड़ी में उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा।

व्यापारिक सफर: विजयपत सिंघानिया ने 1980 से वर्ष 2000 तक दो दशकों तक रेमंड के चेयरमैन के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में रेमंड भारत के अग्रणी कपड़ा और परिधान ब्रांडों में से एक बना।

विमानन में विश्व रिकॉर्ड: वह एक कुशल पायलट भी थे। साल 2005 में उन्होंने हॉट एअर बैलून में 21,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई तक पहुंचकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

सम्मान: साहसिक खेलों और उद्योग में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, 1994 में उन्हें भारतीय वायु सेना में मानद एयर कमोडोर का पद भी प्रदान किया गया था।

बेटे के साथ विवाद और सुलह: विजयपत सिंघानिया ने अपनी पूरी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने बेटे गौतम को सौंप दी थी। हालांकि, कुछ साल पहले पिता-पुत्र के बीच कानूनी विवाद की खबरें सामने आई थीं, लेकिन बाद में उन्होंने आपसी सहमति से मामले को सुलझा लिया था।

ट्रंप के ऐलान से भारतीय मार्केट में जोश: रुपये में 3 साल में सबसे बड़ी तेज़ी, इन्वेस्टर्स ने कमाए 23 लाख करोड़ रुपये

बिज़नेस डेस्क: US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ कट के ऐलान के बाद भारतीय करेंसी और स्टॉक मार्केट में भारी उछाल आया है। मंगलवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 1.2% मज़बूत होकर 90.40 पर पहुंच गया, जो तीन साल से ज़्यादा समय में सबसे बड़ी तेज़ी है।

बड़ी टैरिफ कट और ट्रेड डील: प्रेसिडेंट ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच ट्रेड डील पर हुए समझौते से भारतीय करेंसी को बड़ी तेज़ी मिली है। ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने का ऐलान किया है, जिससे भारतीय एक्सपोर्ट पर दबाव और अनिश्चितता खत्म हो गई है। गौरतलब है कि साल 2025 में रुपया एशिया की सबसे कमज़ोर करेंसी थी, जो पूरे साल में करीब 5% और अकेले जनवरी में 2% से ज़्यादा गिरी थी।

स्टॉक मार्केट ने बनाया रिकॉर्ड: रुपये की मज़बूती के साथ ही स्टॉक मार्केट ने भी ऐतिहासिक वापसी की है। मार्केट का मेन इंडेक्स सेंसेक्स करीब 3,600 पॉइंट्स की बढ़त के साथ खुला और 85,000 के लेवल को पार कर गया।

निफ्टी 50 में भी ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई और इन्वेस्टर्स ने एक ही झटके में 23 लाख करोड़ रुपये कमाए। बजट के दिन मार्केट पर जो प्रेशर था, वह आज की तेज़ी से पूरी तरह खत्म हो गया है।एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस डील से फॉरेन इन्वेस्टर्स का भरोसा वापस आया है, जिससे इंडियन रुपये (INR) की डिमांड बढ़ी है।

सेंसेक्स, निफ्टी में शुरुआती कारोबार में तेजी
 मुंबई, दो फरवरी (भाषा) सेंसेक्स और निफ्टी में सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेजी दर्ज की गई।
 बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 302 अंक चढ़कर 81,024.94 अंक पर और एनएसई निफ्टी 59.25 अंक की बढ़त के साथ 24,884.70 अंक पर पहुंच गया।
 सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में से अदाणी पोर्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो, एशियन पेंट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इटर्नल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड और एचडीएफसी बैंक के शेयर में तेजी रही। वहीं ट्रेंट, टाइटन, आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर नुकसान में रहे।
 केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के बाद रविवार को बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स रविवार को 1,546.84 अंक और निफ्टी 495.20 अंक टूटा था।
 एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी चार प्रतिशत से अधिक टूटा। जापान का निक्की 225 सूचकांक, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग भी गिरावट में रहे।
 अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
 अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 4.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 66.45 डॉलर प्रति बैरल रहा।
 शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लंबे समय बाद रविवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 588.34 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
50 लाख रुपये का होम लोन लेने के लिए कम से कम कितनी सैलरी चाहिए? जानें EMI का पूरा गणित

बिजनेस डेस्क: घर खरीदना ज़िंदगी का एक बहुत बड़ा फाइनेंशियल फैसला होता है और अगर आप होम लोन लेने का प्लान बना रहे हैं, तो यह जानना बहुत ज़रूरी है कि बैंक आपको ज़्यादा से ज़्यादा कितना लोन अमाउंट दे सकता है। लोन देने से पहले बैंक किसी भी व्यक्ति की इनकम और लोन चुकाने की क्षमता का अंदाज़ा लगाते हैं।

50 लाख रुपये के लोन के लिए कम से कम इनकम:

अगर आप 50 लाख रुपये के होम लोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं, तो आपके लिए ज़रूरी कम से कम सैलरी मुख्य रूप से इंटरेस्ट रेट और लोन की अवधि पर निर्भर करती है।

• उदाहरण के लिए, अगर इंटरेस्ट रेट लगभग 7.4 परसेंट सालाना है, तो 20 साल के लिए लोन की महीने की किस्त (EMI) लगभग 39,974 रुपये होगी।

• स्टैंडर्ड फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो (FOIR) लिमिट (50%) के अनुसार, आपकी EMI आपकी महीने की इनकम के आधे से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।

• तो, 39,974 रुपये (20 साल का समय) की EMI के लिए, आपकी महीने की इनकम कम से कम 80,000 रुपये होनी चाहिए।यह कैलकुलेशन इस बात पर आधारित है कि आप पर कोई और EMI बकाया नहीं है। अगर आप पर कोई और लोन बकाया है, तो आपकी उधार लेने की क्षमता कम हो सकती है।

लोन अमाउंट बढ़ाने के तरीके:

आप अपनी होम लोन एलिजिबिलिटी कुछ तरीकों से बढ़ा सकते हैं:

1. को-एप्लीकेंट जोड़ें: अपने पति/पत्नी, माता-पिता या भाई-बहन जैसे काम करने वाले परिवार के सदस्य को को-एप्लीकेंट के तौर पर जोड़ने से आपकी कुल इनकम बढ़ेगी और लोन अप्रूव होने की संभावना बढ़ेगी।

2. छोटे कर्ज़ चुकाएं: अप्लाई करने से पहले पर्सनल या कार लोन जैसे छोटे कर्ज़ चुकाने से आपकी डिस्पोजेबल इनकम बढ़ती है।

3. अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाएं: 750 या उससे ज़्यादा का क्रेडिट स्कोर बेहतर इंटरेस्ट रेट पर बड़ा लोन मिलने की संभावना बढ़ाता है।

4. एक्स्ट्रा इनकम दिखाएं: अगर आपको किराए, बोनस या पार्ट-टाइम काम से कोई एक्स्ट्रा इनकम होती है, तो यह जानकारी लेंडर के साथ शेयर करें।

हर 5 में से 1 मॉल पर लटक गया ताला, वीरान पड़े हैं चमकते शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, हैरान कर देगी ये रिपोर्ट!

बिजनेस डेस्क : देश के रिटेल सेक्टर की तस्वीर तेजी से बदल रही है, और जिस मॉल कल्चर ने कभी भारतीय बाजारों की रौनक बढ़ा दी थी, आज वही मॉल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म ‘नाइट फ्रैंक’ की एक ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश का हर पांचवां मॉल या तो बंद हो चुका है या बंद होने की कगार पर खड़ा है। वीरान पड़े गलियारे और खाली दुकानें अब इन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की नई पहचान बनती जा रही हैं।

80 फीसदी दुकानें खाली, 75 मॉल बने ‘घोस्ट मॉल’

नाइट फ्रैंक ने देश के 32 बड़े शहरों में 365 मॉल्स का गहन सर्वे किया,। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि इनमें से 75 मॉल, यानी करीब 20 फीसदी, अब ‘घोस्ट मॉल’ बन चुके हैं,। ‘घोस्ट मॉल’ रियल एस्टेट की वो श्रेणी होती है जहां 40 फीसदी से ज्यादा जगह खाली पड़ी हो। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, इन 75 मॉल्स में तो लगभग 80 फीसदी दुकानें खाली पड़ी हैं,।इस बदलती तस्वीर को समझने के लिए दिल्ली के ‘अंसल प्लाजा’ का उदाहरण दिया गया है। एक दौर था जब इसे दिल्ली-एनसीआर का पहला और सबसे भव्य शॉपिंग कॉम्प्लेक्स माना जाता था, जहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती थी। मगर आज गिने-चुने खाने-पीने के आउटलेट्स को छोड़ दें, तो यहां सन्नाटा पसरा हुआ है और बिजनेस एक्टिविटी न के बराबर रह गई है।

खराब प्लानिंग और मेट्रो शहरों में ज्यादा बुरा हाल

मॉल्स के ‘घोस्ट मॉल’ में तब्दील होने का सबसे बड़ा कारण खराब प्लानिंग और डिजाइनिंग को माना जा रहा है। समय के साथ ग्राहकों की पसंद बदली है, लेकिन ये पुराने मॉल खुद को उस हिसाब से अपडेट नहीं कर पाए। रख-रखाव की कमी के चलते इनका इंफ्रास्ट्रक्चर दिनों-दिन जर्जर होता जा रहा है, जिससे ग्राहक यहां आने से कतराने लगे हैं।नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट ‘थिंक इंडिया थिंक रिटेल 2025’ एक और दिलचस्प तथ्य सामने लाती है: यह समस्या टियर-2 शहरों के मुकाबले बड़े मेट्रो शहरों में ज्यादा गंभीर है,। बड़े शहरों में कड़ी प्रतिस्पर्धा और बदलती लाइफस्टाइल ने इन पुराने मॉल्स की कमर तोड़ दी है। इसके विपरीत, टियर-2 शहरों में ऑक्युपेंसी लेवल अभी भी बेहतर स्थिति में है, क्योंकि वहाँ मॉल कल्चर अभी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

अरबों का नुकसान, लेकिन उम्मीद बाकी

इन बंद पड़े या वीरान हो चुके मॉल्स में करीब 1.55 करोड़ स्क्वायर फीट का विशाल एरिया बेकार पड़ा है। यह न केवल रियल एस्टेट की बर्बादी है, बल्कि एक बड़ा आर्थिक नुकसान भी है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। अगर इन संपत्तियों की सही तरीके से री-प्लानिंग की जाए और इन्हें रेनोवेट किया जाए, तो इनकी पुरानी रौनक लौट सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर इन जगहों का सही इस्तेमाल हो, तो सालाना करीब 350 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की जा सकती है।