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मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल नहीं लिया वेतन, लाभांश बना आय का प्रमुख स्रोत

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति Mukesh Ambani ने एक बार फिर अपनी वेतन नीति को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। जानकारी के अनुसार, उन्होंने लगातार छठे वर्ष अपनी कंपनी Reliance Industries Limited से कोई वेतन नहीं लिया है। इसके बावजूद उनकी आय का प्रमुख स्रोत कंपनी द्वारा दिया जाने वाला लाभांश (डिविडेंड) बना हुआ है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शीर्ष नेतृत्व में लंबे समय से सक्रिय मुकेश अंबानी ने पिछले कई वर्षों से अपना वेतन शून्य रखा है। कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढांचे के तहत निदेशक मंडल द्वारा तय पारिश्रमिक नीति के अनुसार उनका वेतन निर्धारित होता है, लेकिन उन्होंने स्वेच्छा से इसे नहीं लेने का निर्णय जारी रखा है।

कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड के अनुसार, मुकेश अंबानी की कुल आय का बड़ा हिस्सा उनकी शेयरधारिता और उससे मिलने वाले लाभांश से आता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी और परिवार की हिस्सेदारी उन्हें देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट डिविडेंड प्राप्तकर्ताओं में शामिल करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की नीति कॉर्पोरेट जगत में एक अलग संदेश देती है, जहां प्रमोटर-चेयरमैन का वेतन नहीं लेना कंपनी की दीर्घकालिक छवि और निवेशकों के विश्वास से जोड़ा जाता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनियों में से एक है, जिसका कारोबार ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम और रिटेल जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।

हालांकि वेतन नहीं लेने के बावजूद कंपनी के प्रदर्शन और शेयरहोल्डिंग के कारण अंबानी की संपत्ति पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा कंपनी के शेयर मूल्य और बाजार प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है।

कॉर्पोरेट विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम पिछले कई वर्षों से जारी एक स्थिर नीति का हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि कंपनी का नेतृत्व वेतन से अधिक लंबे समय के निवेश मूल्य और शेयरधारक लाभ पर केंद्रित है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के भीतर यह भी माना जाता है कि शीर्ष नेतृत्व द्वारा वेतन न लेना एक प्रतीकात्मक निर्णय है, जो कंपनी की वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है।

इस बीच, भारतीय कॉर्पोरेट जगत में अंबानी की यह नीति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि यह बड़े कॉरपोरेट घरानों के पारिश्रमिक मॉडल से अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

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