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पीएसपीसीएल की संपत्तियां बेचने पर हाईकोर्ट की रोक: सरकारी विभागों के भारी बकाया के बदले संपत्तियां बेचने के कदम को मिली चुनौती

पंजाब डेस्क : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने यह आदेश चंडीगढ़ निवासी राजबीर सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें पंजाब सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा गया है।

सरकारी विभागों पर है करोड़ों का बकाया: याचिका के अनुसार, अगस्त 2025 तक पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल का कुल 2,582 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा, राज्य सरकार पर बिजली सब्सिडी के मद में भी 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित बताई गई है। बकायेदारों की सूची में जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

संपत्तियां बेचना जनहित के खिलाफ: याचिकाकर्ता याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस भारी वित्तीय दबाव और बकाये की भरपाई के लिए निगम की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की कोशिश की जा रही है, जो जनहित के प्रतिकूल और विधि-विरुद्ध है। याचिका में दलील दी गई कि जब सरकारी विभाग स्वयं नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो सार्वजनिक उपक्रम की संपत्तियों को बेचकर घाटा पूरा करना पूरी तरह अनुचित है।

याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें:

-पीएसपीसीएल की संपत्तियों की किसी भी प्रकार की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।

-डिफॉल्टर विभागों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उनके बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दिए जाएं।

-राज्य सरकार को लंबित बिल और सब्सिडी की राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए।

हाईकोर्ट ने फिलहाल संपत्तियों की बिक्री पर रोक बरकरार रखी है और स्पष्ट किया है कि अगला आदेश आने तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी।

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