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कैबिनेट ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण 2ए को दी स्वीकृति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण 2(ए) को स्‍वीकृति दे दी है। चरण 2(ए) के कार्यान्वित होने पर अहमदाबाद-गांधीनगर गलियारे में 77.63 किलोमीटर का सक्रिय मेट्रो रेल नेटवर्क हो जाएगा। चरण 2(ए) कॉरिडोर में स्थित स्टेशनों के नाम हैं- आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती नदी, सरदार नगर और एयरपोर्ट।

इस परियोजना की कुल लागत, जिसमें निर्माण के दौरान ब्याज भी शामिल है, 2,169.04 करोड़ रुपये होगी।

अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना का चरण 2(ए) शहर के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है।

अहमदाबाद मेट्रो परियोजना के चरण 2(ए) में लगभग 6.032 किलोमीटर के नए मेट्रो कॉरिडोर के विकास की परिकल्पना की गई है, जिसका उद्देश्य हवाई अड्डे से निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करके और उन प्रमुख आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों को जोड़कर सार्वजनिक परिवहन को काफी हद तक बढ़ाना है, जिनमें वर्तमान में कुशल ट्रांजिट पहुंच का अभाव है।

इस चरण का उद्देश्य आवासीय और वाणिज्यिक केंद्रों सहित प्रमुख क्षेत्रों को अहमदाबाद-गांधीनगर गलियारे के साथ सुचारू रूप से एकीकृत करना है। इसके अलावा, 2029 के विश्व पुलिस खेलों और 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए आसपास के क्षेत्र में खेल सुविधाओं को बढ़ाने की भी संभावना है।

अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना का चरण 2(ए) शहर के लिए एक क्रांतिकारी विकास सिद्ध होगा। यह बेहतर सम्‍पर्क, यातायात जाम में कमी, पर्यावरणीय लाभ, आर्थिक विकास और जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करने का आश्‍वासन देता है। प्रमुख शहरी चुनौतियों का समाधान करते हुए और भविष्य के विस्तार के लिए आधार प्रदान करते हुए, चरण 2(ए) शहर के विकास पथ और स्थिरता को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

रक्षा क्षेत्र में MSME और स्टार्ट-अप्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए दिल्ली में दो दिवसीय कार्यशाला

रक्षा खरीद, iDEX, स्वदेशीकरण और परीक्षण प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञ देंगे जानकारी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य MSME और स्टार्ट-अप्स को रक्षा इकोसिस्टम के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना तथा उन्हें रक्षा उत्पादन और नवाचार से जुड़े अवसरों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस दौरान प्रतिभागियों को रक्षा खरीद प्रक्रिया, स्वदेशीकरण पहलों, iDEX ढांचे, परीक्षण एवं प्रमाणन प्रक्रियाओं तथा प्रौद्योगिकी परिप्रेक्ष्य क्षमता रोडमैप (TPCR) के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, सेवा मुख्यालयों, डीजीक्यूए, iDEX-DIO और अन्य संबंधित संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन देंगे।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को एयर मार्शल प्रवीण केशव वोहरा और मेजर जनरल डॉ. अशोक कुमार संबोधित करेंगे।

पहले दिन रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, खरीद श्रेणियों, राजस्व खरीद मानदंडों, स्वदेशीकरण सुधारों, सृजन पोर्टल, आयात प्रतिस्थापन रणनीतियों तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

दूसरे दिन के सत्रों में iDEX पहल, प्रोटोटाइप विकास, परीक्षण एवं मूल्यांकन प्रक्रियाएं, प्रमाणन प्रणाली, उपयोगकर्ता परीक्षण, पर्यावरणीय परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की भूमिका तथा प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों (Technology Readiness Levels) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कार्यक्रम में TPCR पर विशेष सत्र और निवेशकों एवं वेंचर कैपिटलिस्ट्स के साथ एक पैनल चर्चा भी आयोजित की जाएगी। साथ ही प्रतिभागियों को प्रश्नोत्तर सत्रों के माध्यम से अपनी व्यावहारिक समस्याओं और जिज्ञासाओं के समाधान का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी तथा भारतीय उद्योग और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग को नया आयाम प्राप्त होगा। यह कार्यशाला रक्षा क्षेत्र में नवाचार, स्वदेशी तकनीक और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

शोभा करंदलाजे ने 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का किया नेतृत्व

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने जिनेवा में आयोजित 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इसमें उन्होंने समावेशी विकास, लैंगिक समानता और सामाजिक संवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

जिनेवा में आयोजित 114वें अंतर्राष्ट्रीय आईएलसी के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने नेपाल के युवा, श्रम और रोजगार मंत्री रामजी यादव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। नेपाल ने भारत के डिजिटल पोर्टल की सराहना की। भारत ने “पड़ोसी प्रथम” नीति के अंतर्गत नेपाल भारत का एक प्राथमिकता वाला साझेदारी की बात पर जोर दिया। दोनों मंत्रियों ने कौशल विकास, श्रम गतिशीलता और डिजिटल प्रौद्योगिकी साझा करने के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इस चर्चा में दोनों देशों के श्रमिकों के लिए अवसरों और कल्याण को बढ़ाने और दीर्घकालिक और सौहार्दपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे और अंगोला की लोक प्रशासन, श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री टेरेसा रोड्रिग्स डियास की बैठक में श्रम एवं रोजगार, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा एवं कार्यबल प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। दोनों मंत्रियों ने रोजगार सेवाओं, कौशल विकास, कार्यबल नियोजन एवं डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। अंगोला ने भारत के डिजिटल उत्पादों की सराहना करते हुए ज्ञान साझा करने का अनुरोध किया। भारत ने अंगोला को रोजगार सेवाओं, श्रमिक पंजीकरण, नौकरियों और कौशल मिलान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के डिजाइन, विकास और संचालन में तकनीकी सहायता एवं क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करने की पेशकश की।

शोभा करंदलाजे ने जिनेवा में फ्रांस, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और कनाडा के श्रम मंत्रियों से भी भेंट की और कौशल की पारस्परिक मान्यता एवं मांग-आधारित कौशल विकास के माध्यम से भारत से कुशल मानव शक्ति के प्रवास के लिए कानूनी मार्गों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 11 जून को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। प्रधानमंत्री के ‘टीम इंडिया’ के विजन के अनुरूप विकसित भारत के लक्ष्य के अंतर्गत इस वर्ष का विषय ‘2047 तक विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ है। इसका उद्देश्य आयु, क्षेत्र, लिंग या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना प्रत्येक भारतीय के कल्याण और विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। शासी परिषद की बैठक में इस विजन को साकार करने और इसे देश भर के प्रत्येक नागरिक के लिए ठोस, मापनीय परिणामों में परिणत करने के दृष्टिकोण पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस शासी परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल एक साथ मिलकर समावेशी मानव विकास प्रारूप पर चर्चा करेंगे। यह चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है: (i) मूलभूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल; (ii) उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास; (iii) स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण एवं (iv) सभी के लिए समानता और गरिमा। बैठक में देश भर में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

इन चर्चाओं में शासन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई), अभिसरण, साझेदारी और डेटा-आधारित प्रणालियों सहित प्रमुख सहायक तत्वों का लाभ उठाते हुए एक कार्यान्वयन प्रारूप तैयार करने पर बल दिया जाएगा। इसके साथ ही अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक परिणामों पर नज़र रखने के लिए एक संरचित तंत्र भी स्थापित किया जाएगा, जिससे जवाबदेही और मापने योग्य प्रभाव सुनिश्चित हो सके। समावेशी मानव विकास पर राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ राज्य के दृष्टिकोणों को संरेखित करने पर विशेष बल दिया जाएगा, जिससे न्यायसंगत और सतत विकास की दिशा में एक एकीकृत और सहयोगात्मक दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया जा सके।

नीति आयोग की शासी परिषद 26 से 28 दिसंबर, 2025 के दौरान आयोजित मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन की सिफारिशों पर भी ध्यान केंद्रित करेगी। मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन में निम्नलिखित पांच प्रमुख विषयों (i) प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा: नींव रखना (ii) स्कूली शिक्षा: आधारभूत संरचना (iii) कौशल विकास: भविष्य के लिए तैयार कार्यबल (iv) उच्च शिक्षा: ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था और (v) खेल और पाठ्येतर गतिविधियाँ: कक्षाओं से परे की सिफारिशें की गईं।

11वीं शासी परिषद की बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल/प्रशासक, केंद्रीय मंत्री पदेन सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में और नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

दक्षिण एशिया में रोजगार और विकास की नई राह बनेगा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र: विश्व बैंक

कृषि से आगे बढ़कर खाद्य प्रणालियों में निवेश से खुलेंगे आर्थिक विकास के नए अवसर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

विश्व बैंक समूह ने कहा है कि दक्षिण एशिया अपने विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां हर वर्ष लाखों युवा कार्यबल में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में स्थायी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन इस क्षेत्र की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बन गया है। विश्व बैंक के अनुसार कृषि से आगे बढ़कर खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धन आधारित खाद्य प्रणालियों का विस्तार रोजगार, निवेश, आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के व्यापक अवसर प्रदान कर सकता है।

विश्व बैंक समूह ने बताया कि दक्षिण एशिया का कृषि क्षेत्र सालाना 700 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का है और क्षेत्र के लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार प्रदान करता है। इसके बावजूद कृषि का क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद में योगदान केवल 16 प्रतिशत है। चिंता की बात यह है कि क्षेत्र में उत्पादित कुल खाद्य पदार्थों का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हर वर्ष बर्बाद हो जाता है, जो लगभग 30 करोड़ लोगों का पेट भरने के लिए पर्याप्त है।

विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि परिवर्तन का अगला चरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, सप्लाई चेन, विपणन और मूल्यवर्धन गतिविधियों के विस्तार से लाखों नए रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। इससे खाद्य हानि कम होगी और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि देश का खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 1950-51 के 51 मिलियन टन से बढ़कर आज 330 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। वहीं पिछले दशक में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का निर्यात लगभग 4.9 बिलियन डॉलर से बढ़कर 10 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र देश के विनिर्माण मूल्यवर्धन में लगभग 9 प्रतिशत और कुल निर्यात में करीब 13 प्रतिशत योगदान दे रहा है।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का अनुभव दर्शाता है कि प्रभावी नीतियां और लक्षित निवेश कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को बदल सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकरण योजना और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना जैसी पहलों ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विश्व बैंक समूह ने कहा कि तीव्र शहरीकरण, बढ़ता मध्यम वर्ग, समृद्ध कृषि जैव-विविधता और सुरक्षित व उच्च गुणवत्ता वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग दक्षिण एशिया को खाद्य प्रणालियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।

इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए विश्व बैंक समूह एग्रीकनेक्ट और सैपलिंग जैसी पहलों पर काम कर रहा है। एग्रीकनेक्ट का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 3 करोड़ किसानों को बाजारों से जोड़ना है, जबकि सैपलिंग सरकारों, निवेशकों, उद्योग जगत और विकास साझेदारों को एक मंच पर लाकर नीति सुधारों और निवेश को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है।

नीति संवाद में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स हब, प्रोसेसिंग क्लस्टर और कृषि-औद्योगिक पार्कों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही डिजिटल तकनीकों के उपयोग, गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने और कौशल विकास कार्यक्रमों के विस्तार की आवश्यकता भी बताई गई।

यह विचार दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद मूल्य को उजागर करना: दक्षिण एशिया में रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को आगे बढ़ाना” के उद्घाटन अवसर पर सामने आए। इस कार्यक्रम का आयोजन 9 जून 2026 को अहमदाबाद, गुजरात में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और विश्व बैंक समूह की सैपलिंग पहल के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों सहित लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो क्षेत्र में मजबूत, समावेशी और दीर्घकालिक खाद्य प्रणालियों के निर्माण पर चर्चा कर रहे हैं।

अकाल मार्केट की सभी दुकानें 29 जून से 3 जुलाई तक रहेंगी बंद

लुधियाना / सत्ता संदेश

गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए अकाल मार्केट एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। एसोसिएशन के सभी सदस्यों की सहमति से निर्णय लिया गया है कि अकाल मार्केट की सभी दुकानें सोमवार, 29 जून से शुक्रवार, 3 जुलाई तक बंद रहेंगी।

एसोसिएशन की ओर से व्यापारियों और आम लोगों को इस संबंध में सूचना जारी करते हुए कहा गया है कि निर्धारित अवधि के दौरान मार्केट में व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को किसी जरूरी काम के लिए अकाल मार्केट जाना है, तो वह अपनी योजना पहले से बना ले ताकि उसे किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

अकाल मार्केट एसोसिएशन ने सभी ग्राहकों और व्यापारिक साझेदारों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह फैसला भीषण गर्मी और व्यापारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे मार्केट बंद रहने की अवधि की जानकारी अपने परिचितों तक भी पहुंचाएं, ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी न हो।

समराला को मिली खेल सौगात, मालवा ग्राउंड में बनेगा हॉकी टर्फ

नशे से दूर, खेलों की ओर कदम: 2 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होगा आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

समराला / सत्ता संदेश

रिपोर्ट: परमिंदर वर्मा

समराला के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मालवा ग्राउंड की तस्वीर जल्द ही पूरी तरह बदलने जा रही है। हलका समराला के विधायक जगतार सिंह दयालपुरा ने मालवा ग्राउंड में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान क्षेत्र के लिए बड़ी खेल परियोजनाओं की घोषणा करते हुए आधुनिक हॉकी टर्फ मैदान का नींव पत्थर रखा।     

इस अवसर पर विधायक दयालपुरा ने कहा कि पंजाब सरकार युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखकर खेलों की ओर प्रेरित करने और खेल ढांचे को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि करीब 8 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा, जिस पर लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनमें से करीब 1 करोड़ रुपये की राशि केवल आधुनिक हॉकी टर्फ मैदान के निर्माण पर खर्च होगी। यह अत्याधुनिक हॉकी टर्फ चंडीगढ़ से लुधियाना के बीच के क्षेत्र का पहला ऐसा मैदान होगा, जहां खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

विधायक ने बताया कि इस खेल परिसर में हॉकी के अलावा फुटबॉल और वॉलीबॉल के लिए भी आधुनिक मैदान बनाए जाएंगे। साथ ही खिलाड़ियों के अभ्यास और प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए 400 मीटर का रनिंग ट्रैक भी तैयार किया जाएगा। इससे क्षेत्र के खिलाड़ियों को अपने घर के नजदीक ही उच्च स्तरीय खेल सुविधाएं मिल सकेंगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विधायक दयालपुरा ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि मालवा ग्राउंड जैसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खेल मैदान की लंबे समय तक उपेक्षा की गई। उन्होंने कहा कि मैदान का मुख्य गेट चोरी हुए 15 वर्ष से अधिक समय बीत गया, लेकिन किसी भी सरकार ने इसकी देखरेख और विकास की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि अब इस मैदान को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर क्षेत्र के खिलाड़ियों को नई पहचान देने और खेल संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल खिलाड़ियों के लिए लाभकारी साबित होगी, बल्कि युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नितिन कुमार ने चंडीगढ़ में एपीडा के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने चंडीगढ़ में हितधारक संवाद आयोजित किया; पंजाब और हरियाणा के उद्योग एवं किसानों को भारत की नई एफटीए संरचना के अंतर्गत विशाल निर्यात अवसरों से अवगत कराया
  • पंजाब और हरियाणा में वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध हैं: श्री नितिन कुमार यादव

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने चंडीगढ़ में एक उच्च-स्तरीय हितधारक संवाद आयोजित किया, जिसका उद्देश्य पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों, उद्योग संगठनों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसानों तथा सरकारी अधिकारियों को भारत के तेजी से विस्तारित हो रहे मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नेटवर्क द्वारा उपलब्ध कराए गए व्यापक निर्यात अवसरों के प्रति जागरूक करना था। इस संवाद का उद्देश्य विशेष रूप से वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि, औषधि एवं रसायन क्षेत्रों में क्षेत्र की निर्यात क्षमता को नई बाजार पहुंच संरचना के माध्यम से ठोस व्यापारिक परिणामों में परिवर्तित करना था।

वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री नितिन कुमार यादव ने “कृषि उत्पादों के निर्यात संवर्धन एवं हरियाणा तथा पंजाब राज्य के निर्यातकों एवं अन्य हितधारकों के साथ बैठक” विषय पर एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का भी उद्घाटन किया। इसी प्रकार, एपीडा के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव ने क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के उद्घाटन में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रीय कार्यालय पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हुए श्री नितिन कुमार यादव ने कहा, “पिछले एक दशक में भारत के कुल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें वस्तु एवं सेवा निर्यात को मिलाकर कुल निर्यात वित्त वर्ष 2014-15 के 468 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में सर्वकालिक उच्च स्तर 863 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो 5.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) को दर्शाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस अवधि के दौरान वस्तु निर्यात 310 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 442 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, सेवा निर्यात 158 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 421 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 9.3 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज की गई तथा गैर-पेट्रोलियम निर्यात 387.9 अरब अमेरिकी डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया, जो भारत के निर्यात आधार की गहराई और विविधता को रेखांकित करता है।”

संवाद के दौरान प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि नए एफटीए वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा औषधि क्षेत्रों में सभी टैरिफ लाइनों पर 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करते हैं — जो पंजाब और हरियाणा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत ने कई ऐतिहासिक व्यापार समझौते संपन्न किए हैं, जो देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के केंद्र में स्थापित करते हैं। भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए, 2025), जो 100 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रतिबद्धता द्वारा समर्थित है, भारत के लगभग 98 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि 27 उच्च-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को शामिल करने वाला भारत-यूरोपीय संघ एफटीए (2026), मूल्य के आधार पर द्विपक्षीय व्यापार के 99 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क रियायतों के माध्यम से भारतीय निर्यात के 3.2 लाख करोड़ रुपये मूल्य को लाभान्वित करने की अपेक्षा रखता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौता (सीईसीपीए) (2021) तथा भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) मिलकर इन बाजारों में भारत के 99 प्रतिशत निर्यात को शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान करते हैं, जबकि यूएई के साथ द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘मिशन 500’ पहल के अंतर्गत एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा समझ विकसित की, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से भारत के नौ एफटीए अब 38 देशों को कवर करते हैं और लगभग 70 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी तक पहुंच प्रदान करते हैं।

श्री नितिन कुमार यादव ने आगे कहा, “पंजाब के लिए वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध हैं। हरियाणा के लिए प्रमुख निर्यात उत्पादों में बासमती चावल, भैंस का मांस, गैर-बासमती चावल, प्राकृतिक शहद, डेयरी उत्पाद तथा विविध खाद्य तैयारियाँ शामिल हैं, जबकि औषधि एवं रसायन क्षेत्रों में भी बढ़ती संभावनाएं हैं। नए एफटीए के अंतर्गत सभी प्रमुख क्षेत्रों में निर्यातकों को उपलब्ध बाजार पहुंच रियायतों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।”

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की निदेशक श्रीमती मोनिका गौर ने अपनी प्रस्तुति में दोनों राज्यों में मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत विकसित महत्वपूर्ण निर्यात अवसंरचना की जानकारी दी। पंजाब में निर्यातकों को अवसंरचना उन्नयन सहायता का लाभ मिला है; अमृतसर हवाई अड्डे (एएआई) पर पैकहाउस एवं गुणवत्ता अनुपालन सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है ताकि शीघ्र नष्ट होने वाले उत्पादों के परिवहन समय को कम किया जा सके तथा हॉर्टिकल्चर फसलों के लिए किसान एवं खेत पंजीकरण को हॉर्टीनेट ट्रेसबिलिटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

हरियाणा में बासमती नेट और हॉर्टीनेट प्रणालियों को एकीकृत किया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मार्च 2026 में भारतीय पैकेजिंग संस्थान के सहयोग से एक सप्ताह का पैकेजिंग उत्कृष्टता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय पैकेजिंग मानकों, निर्यात दस्तावेजीकरण तथा लेबलिंग आवश्यकताओं को शामिल किया गया।

क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण निर्यात मील के पत्थरों को भी रेखांकित किया गया। इनमें अबोहर से सिंगापुर और रूस के लिए किन्नू की परीक्षण खेपें (जनवरी 2025); डेराबस्सी से ‘कॉर्न ट्रूपर’ ब्रांड के अंतर्गत दक्षिण कोरिया को भारत का पहला रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न निर्यात (जनवरी 2025); पठानकोट से कतर और यूएई को ताज़ी लीची (जून 2025); संगरूर से कनाडा को मूल्य संवर्धित बाजरा उत्पाद (जून 2025); हरियाणा से मेडागास्कर को फोरेज्ड राइस कर्नेल्स (7,000 मीट्रिक टन); तथा सोनीपत के अटेरना गांव से टोरंटो, कनाडा के लिए सोया चाप का पहला किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) निर्यात शामिल हैं।

भारत ने दुबई में आयोजित गुलफूड 2026 में आधिकारिक भागीदार देश के रूप में भाग लिया तथा जर्मनी में आयोजित बायोफाख 2026 में ‘कंट्री ऑफ द ईयर’नामित किया गया, जिससे क्षेत्र के कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान प्राप्त हुई। श्री नितिन कुमार यादव ने कहा कि भारत का कृषि निर्यात कैलेंडर वर्ष 2014 के 40.95 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर कैलेंडर वर्ष 2024 में 52.76 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि कृषि-समुद्री-खाद्य निर्यात वर्ष 2025-26 में 4.3 लाख करोड़ रुपये को पार कर 206 देशों तक पहुंच गया है।

इसी प्रकार, इस अवसर पर हरियाणा और पंजाब से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर केंद्रित एक उच्च-स्तरीय हितधारक संवाद भी आयोजित किया गया। हितधारकों को निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसे 12 नवंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया था। इस मिशन का कुल बजटीय परिव्यय वित्त वर्ष 2025-26 से छह वर्षों के लिए 25,060 करोड़ रुपये है, जिसे वाणिज्य विभाग, एमएसएमई मंत्रालय और वित्त मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जा रहा है। ईपीएम दो उप-योजनाओं के माध्यम से संचालित होता है: निर्यात प्रोत्साहन’, जो एमएसएमई क्षेत्र में व्यापार वित्त अंतर को पाटने के लिए प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट ऋण पर ब्याज सहायता, निर्यात फैक्टरिंग, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड तथा संपार्श्विक (कोलेटरल) सहायता प्रदान करता है। ‘निर्यात दिशा’, जो गैर-टैरिफ बाधाओं, निर्यात गुणवत्ता अनुपालन, बाजार पहुंच, निर्यात भंडारण, कम निर्यात तीव्रता वाले जिलों के लिए अंतर्देशीय परिवहन सहायता तथा ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग से संबंधित चुनौतियों का समाधान करता है। यह मिशन बिखरी हुई योजनाओं से हटकर एक व्यापक, डिजिटल-संचालित ढांचे की दिशा में एक रणनीतिक परिवर्तन का प्रतीक है, जो विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

एपीडा, चंडीगढ़ के क्षेत्रीय प्रमुख श्री हरप्रीत सिंह ने कहा कि इस संवाद ने पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसानों और एमएसएमई को भारत की नई एफटीए संरचना का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया है। मंत्रालय ने हितधारकों से आग्रह किया कि वे उत्पाद-विशिष्ट निर्यात तैयारी योजनाएं तैयार करें, एपीडा की वित्तीय सहायता एवं ट्रेसबिलिटी प्लेटफॉर्म का उपयोग करें तथा निर्यात संवर्धन मिशन के ढांचे के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप अपनी वैश्विक उपस्थिति का विस्तार करें।

करनाल में राज्य-स्तरीय पेंशन जागरुकता कार्यक्रम का किया जाएगा आयोजन

हरियाणा / सत्ता संदेश

एसएलबीसी हरियाणा ग्रामीण समुदायों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज गहरा करने के लिए करनाल में राज्य-स्तरीय पेंशन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा

अटल पेंशन योजना (एपीवाई) भारत के सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा प्रयासों में से एक बन कर उभरी है, जिसने असंगठित क्षेत्र के लाखों कामगारों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा प्रदान की है। राष्ट्रीय स्तर पर सकल पंजीकरण 9 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स पार कर चुके हैं, जिनमें हरियाणा में 19.27 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स शामिल हैं, और यह सफलता स्टेट लेवल बैंकर्स’ कमेटी (एसएलबीसी), लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम), बैंकों और फील्ड-स्तर के कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों से संभव हुई है।

बैंकिग पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा पेंशन समावेशन को मजबूत करने में निभाई गई केंद्रीय भूमिका को स्वीकार करते हुए, पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने देश भर में एपीवाई की पहुंच बढ़ाने में बैंकों की निरंतर प्रतिबद्धता की हार्दिक सराहना व्यक्त की है।

हालाँकि एपीवाई ने 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच व्यक्तियों के लिए प्रति माह तकरीबन ₹5,000 तक की गारंटीकृत पेंशन के साथ सामाजिक सुरक्षा का फ्रेमवर्क उपलब्ध कराया है, फिर भी जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा इसके दायरे से बाहर है। पात्र आयु सीमा से ऊपर के व्यक्ति और जो अधिक से अधिक रिटायरमेंट बचत चाहते हैं, उन्हें अपनी दीर्घकालिक वित्तीय आकांक्षाओं के अनुरूप लचीले पेंशन समाधान की आवश्यकता होती है।

इस अंतर को दूर करने के लिए, नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) एक मार्केट-लिंक्ड रिटायरमेंट समाधान प्रदान करता है जो अधिक लचीला है और पेंशन संचय पर कोई ऊपरी सीमा नहीं रखता। इस दृष्टि के अनुरूप, पीएफआरडीए ने “एनपीएस – कृषि एवं सहायक क्षेत्र, सहित ग्रामीण-आधारित नैनो यूनिट्स” शीर्षक से एक समर्पित वर्टिकल स्थापित किया है ताकि किसानों, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) सदस्यों, ग्रामीण शिल्पकारों, सहायक क्षेत्र के कामगारों और छोटे उद्यमियों के बीच पेंशन जागरूकता बढ़ाई जा सके।

सुश्री निधि भार्गव, संयोजक (महानिदेशक), एसएलबीसी हरियाणा ने बताया कि फील्ड कर्मियों को संवेदनशील बनाने और ग्रामीण जनसंख्या में पेंशन योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से, स्टेट लेवल बैंकर्स’ कमेटी, हरियाणा, पीएफआरडीए के सहयोग से 12 जून 2026 को सुबह 10:00 बजे हेरिटेज लॉन, ग्रीन बेल्ट, मुख्य मार्ग, सेक्टर-5, करनाल में एक राज्य-स्तरीय आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करेगी।

अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में बैंकों, एफपीओ, ग्रामीण शिल्पकारों, सहायक क्षेत्र के कामगारों और छोटे उद्यमियों सहित लगभग 150 हितधारकों की भागीदारी होगी। कार्यक्रम को श्री आशीष कुमार, मुख्य महाप्रबंधक, पीएफआरडीए और श्री ओमकार नाथ झा, उप महाप्रबंधक, एसएलबीसी हरियाणा संबोधित करेंगे, जो पेंशन कवरेज बढ़ाने और नेशनल पेंशन सिस्टम के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा को प्रोत्साहित करने पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा करेंगे।

राज्य-स्तरीय कार्यक्रम से पहले, पेंशन साक्षरता और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के इस बड़े अभियान के तहत 11 जून 2026 को कुरुक्षेत्र में भी एक ज़िला-स्तरीय आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

आउटरीच कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों, एफपीओ सदस्यों, सहायक क्षेत्र के कामगारों और ग्रामीण नैनो उद्यमियों तक संरचित जागरूकता सत्रों और हितधारक जुड़ाव के माध्यम से स्थायी वृद्धावस्था वित्तीय सुरक्षा का संदेश सीधे पहुँचाना है, जिससे पेंशन योजनाओं को व्यापक रूप से अपनाने को प्रोत्साहन मिले और ग्रामीण समुदायों के लिए एक वित्तीय रूप से सुरक्षित भविष्य का निर्माण हो।

यूपी के सीतापुर में रक्षा मंत्री ने रक्षा भूमि पर सौर उर्जा परियोजना को मिली मंजूरी

ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और रक्षा मंत्रालय की खाली पड़ी जमीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में लगभग 850 एकड़ रक्षा मंत्रालय की खाली पड़ी जमीन पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली सहित 250 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना को मंजूरी दी है। इसमें रक्षा भूमि पर एकीकृत बीईएसएस सहायता के साथ बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन सुविधा का विकास भी शामिल है।

यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। रक्षा बलों के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के अलावा, इस परियोजना से रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए पारंपरिक ग्रिड बिजली की खरीद पर होने वाले खर्च में काफी कमी आने की उम्मीद है। इससे परियोजना की अवधि के दौरान सरकारी खजाने में बचत होगी।


एनटीपीसी लिमिटेड रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए सबसे अनुकूल ऊर्जा मूल्य निर्धारण और बचत सुनिश्चित करने हेतु प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से इस परियोजना को कार्यान्वित कर रही है। यह परियोजना रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय और रक्षा संपदा महानिदेशालय के साथ बेहतर समन्वय में कार्यान्वित की जाएगी। यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय स्थिरता का संगम है, जो रणनीतिक हितों की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के समर्थन में अपनी संपत्तियों का लाभ उठाने के लिए रक्षा मंत्रालय की प्रतिबद्धता को उजागर करती है।


रक्षा मंत्रालय, एनटीपीसी, सेना का मुख्यालय और डीजीडीई परियोजना के समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए बेहतर समन्वय में कार्य करेंगे। परियोजना पूरी होने पर सीतापुर सौर ऊर्जा परियोजना रक्षा भूमि पर स्थापित देश की सबसे महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में से एक के रूप में उभरेगी और परियोजना के रक्षा क्षेत्र में भविष्य की सौर-सह-भंडारण परियोजनाओं के लिए एक मानदंड स्थापित करने की उम्मीद है।