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वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में: आरबीआई

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, घरेलू मांग, स्थिर वित्तीय प्रणाली और सरकारी सुधारों के कारण भारत की आर्थिक स्थिति अन्य कई देशों की तुलना में बेहतर बनी हुई है।

आरबीआई ने अपने ताजा आकलन में कहा कि दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और वैश्विक व्यापार में सुस्ती जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत की विकास दर, बैंकिंग प्रणाली और निवेश गतिविधियां सकारात्मक संकेत दे रही हैं।

केंद्रीय बैंक के अनुसार, देश में उपभोग और निवेश दोनों क्षेत्रों में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। साथ ही, बुनियादी ढांचा विकास, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है।

आरबीआई ने यह भी कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली पहले की तुलना में अधिक मजबूत और पूंजीगत रूप से बेहतर स्थिति में है। बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में कमी और ऋण वितरण में वृद्धि आर्थिक स्थिरता के संकेत माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक दबावों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है। सरकार की पूंजीगत व्यय योजनाएं, डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार और सेवा क्षेत्र की मजबूती भी विकास को गति दे रही हैं।

हालांकि आरबीआई ने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय जोखिमों पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना उसकी प्राथमिकता रहेगी।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की बड़ी घरेलू बाजार क्षमता और सुधार आधारित नीतियां उसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में मानसून, वैश्विक मांग और निवेश प्रवाह जैसे कारक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

कागज के नोटों की छुट्टी? RBI जल्द ला सकता है प्लास्टिक करेंसी; पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी

बिजनेस डेस्क : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कागज के नोटों की छपाई पर होने वाले भारी भरकम खर्च को कम करने और कटे-फटे नोटों की समस्या को खत्म करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने पर विचार कर रहा है। हाल ही में मुंबई और पटना में हुई बोर्ड बैठकों में प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट पेश करने पर गंभीरता से चर्चा की गई है।

छपाई के खर्च में होगी बड़ी बचत : RBI की वार्षिक रिपोर्ट (FY25) के अनुसार, कागज के नोट छापने की लागत पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गई है। सूत्रों का मानना है कि प्लास्टिक के नोट छापना लंबी अवधि में अधिक किफायती साबित होगा, क्योंकि इनकी उम्र कागज के नोटों की तुलना में काफी ज्यादा होती है।

गंदे और फटे नोटों से मिलेगा छुटकारा: वित्त वर्ष 2025 में लगभग 23.8 अरब खराब नोटों को चलन से बाहर किया गया, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या 500 रुपये के नोटों की थी। प्लास्टिक के नोट न केवल पानी से खराब नहीं होते, बल्कि इन्हें गंदा होना भी मुश्किल होता है। साथ ही, वर्तमान एटीएम (ATM) तकनीक भी अब इतनी एडवांस हो चुकी है कि वे इन पॉलिमर नोटों को आसानी से पहचान सकते हैं।

दुनिया भर में सफल है यह मॉडल: प्लास्टिक करेंसी का विचार नया नहीं है; वर्तमान में दुनिया के लगभग 60 देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड पहले से ही पॉलिमर बैंक नोटों का उपयोग कर रहे हैं। भारत ने भी 2012 में इसका फील्ड ट्रायल शुरू किया था, लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण तब इसे रोक दिया गया था, जो अब एडवांस तकनीक के कारण आसान हो गया है।

आर्केड डेवलपर्स को चौथी तिमाही में बड़ा झटका, 109 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा दर्ज

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनी Arvind SmartSpaces Limited (आर्केड डेवलपर्स के रूप में रिपोर्टेड) को वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी–मार्च तिमाही में भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा है। कंपनी ने इस तिमाही में 109.45 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध घाटा दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले एक बड़ा उलटफेर है।

कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 की इसी तिमाही में उसे 33.26 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। इस बदलाव को रियल एस्टेट कारोबार में लागत दबाव, परियोजना निष्पादन में देरी और बाजार स्थितियों में उतार-चढ़ाव जैसे कारणों से जोड़ा जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में कई कंपनियां जहां स्थिर मांग और परियोजना डिलीवरी के दम पर लाभ बनाए रखने में सफल रही हैं, वहीं कुछ कंपनियों को बढ़ती निर्माण लागत और कैश फ्लो प्रबंधन की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस तिमाही में आए घाटे को कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में अस्थायी गिरावट के रूप में भी देखा जा रहा है।

आर्केड डेवलपर्स मुख्य रूप से आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट परियोजनाओं में सक्रिय है। कंपनी का फोकस शहरी क्षेत्रों में मिड-सेगमेंट और प्रीमियम हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर रहता है, जहां प्रतिस्पर्धा भी काफी अधिक है।

कंपनी प्रबंधन ने संकेत दिया है कि आने वाली तिमाहियों में लागत नियंत्रण, परियोजनाओं की समय पर डिलीवरी और बिक्री गति बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। रियल एस्टेट उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्टर में लंबे समय के लिए स्थिरता बनाए रखने के लिए नकदी प्रवाह और परियोजना निष्पादन सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं।

इस वित्तीय परिणाम ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पिछले साल लाभ में रही कंपनी इस बार घाटे में चली गई है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनी आने वाले महीनों में अपने प्रदर्शन को कैसे संतुलित करती है।

आशियाना हाउसिंग के चौथी तिमाही नतीजे, शुद्ध लाभ बढ़कर 20.98 करोड़ रुपये पर पहुंचा

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनी Ashiana Housing Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी–मार्च तिमाही के नतीजे जारी करते हुए बताया है कि उसका एकीकृत शुद्ध लाभ मामूली बढ़त के साथ 20.98 करोड़ रुपये रहा है।

कंपनी के अनुसार, यह लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में हल्की वृद्धि को दर्शाता है, जो स्थिर कारोबारी प्रदर्शन और आवासीय परियोजनाओं की लगातार मांग का परिणाम है। रियल एस्टेट सेक्टर में उतार-चढ़ाव के बीच आशियाना हाउसिंग ने इस तिमाही में संतुलित प्रदर्शन बनाए रखा है।

आशियाना हाउसिंग मुख्य रूप से रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स, खासकर सीनियर लिविंग और मिड-इनकम हाउसिंग सेगमेंट में सक्रिय है। कंपनी का फोकस उन शहरों में प्रोजेक्ट विकसित करने पर रहता है जहां मध्यम वर्गीय आवास की मांग लगातार बढ़ रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तिमाही में रियल एस्टेट सेक्टर को ब्याज दरों, निर्माण लागत और मांग में बदलाव जैसे कारकों का असर देखने को मिला है, लेकिन कुछ कंपनियां स्थिर बिक्री और प्रोजेक्ट डिलीवरी के दम पर अपने मुनाफे को बनाए रखने में सफल रही हैं।

कंपनी ने निवेशकों को बताया कि आगामी तिमाहियों में भी उसका फोकस प्रोजेक्ट निष्पादन और बिक्री गति को बनाए रखने पर रहेगा। साथ ही, शहरीकरण और आवासीय जरूरतों में बढ़ोतरी के कारण मध्यम अवधि में सेक्टर की संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

आशियाना हाउसिंग का यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब देश में रियल एस्टेट बाजार धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रहा है और डेवलपर्स अपनी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और ग्राहक भरोसा मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।

मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल नहीं लिया वेतन, लाभांश बना आय का प्रमुख स्रोत

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति Mukesh Ambani ने एक बार फिर अपनी वेतन नीति को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। जानकारी के अनुसार, उन्होंने लगातार छठे वर्ष अपनी कंपनी Reliance Industries Limited से कोई वेतन नहीं लिया है। इसके बावजूद उनकी आय का प्रमुख स्रोत कंपनी द्वारा दिया जाने वाला लाभांश (डिविडेंड) बना हुआ है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शीर्ष नेतृत्व में लंबे समय से सक्रिय मुकेश अंबानी ने पिछले कई वर्षों से अपना वेतन शून्य रखा है। कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढांचे के तहत निदेशक मंडल द्वारा तय पारिश्रमिक नीति के अनुसार उनका वेतन निर्धारित होता है, लेकिन उन्होंने स्वेच्छा से इसे नहीं लेने का निर्णय जारी रखा है।

कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड के अनुसार, मुकेश अंबानी की कुल आय का बड़ा हिस्सा उनकी शेयरधारिता और उससे मिलने वाले लाभांश से आता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी और परिवार की हिस्सेदारी उन्हें देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट डिविडेंड प्राप्तकर्ताओं में शामिल करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की नीति कॉर्पोरेट जगत में एक अलग संदेश देती है, जहां प्रमोटर-चेयरमैन का वेतन नहीं लेना कंपनी की दीर्घकालिक छवि और निवेशकों के विश्वास से जोड़ा जाता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनियों में से एक है, जिसका कारोबार ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम और रिटेल जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।

हालांकि वेतन नहीं लेने के बावजूद कंपनी के प्रदर्शन और शेयरहोल्डिंग के कारण अंबानी की संपत्ति पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा कंपनी के शेयर मूल्य और बाजार प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है।

कॉर्पोरेट विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम पिछले कई वर्षों से जारी एक स्थिर नीति का हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि कंपनी का नेतृत्व वेतन से अधिक लंबे समय के निवेश मूल्य और शेयरधारक लाभ पर केंद्रित है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के भीतर यह भी माना जाता है कि शीर्ष नेतृत्व द्वारा वेतन न लेना एक प्रतीकात्मक निर्णय है, जो कंपनी की वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है।

इस बीच, भारतीय कॉर्पोरेट जगत में अंबानी की यह नीति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि यह बड़े कॉरपोरेट घरानों के पारिश्रमिक मॉडल से अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

बेमौसम बारिश के बावजूद बढ़ेगा गेहूं उत्पादन, 2025-26 में 12.06 करोड़ टन रहने का अनुमान

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद गेहूं उत्पादन में वृद्धि का अनुमान जताया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, फसल सत्र 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन 2.29 प्रतिशत बढ़कर 12.06 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के उत्पादन की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मानी जा रही है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में देश में गेहूं का उत्पादन 11.79 करोड़ टन दर्ज किया गया था, जबकि चालू फसल सत्र के लिए प्रारंभिक अनुमान 12.02 करोड़ टन का लगाया गया था। अब जारी नवीनतम अनुमान इस प्रारंभिक आकलन के लगभग अनुरूप है, जिससे संकेत मिलता है कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद उत्पादन पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और किसानों द्वारा वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के कारण गेहूं उत्पादन में यह बढ़ोतरी संभव हो सकी है। हालांकि कई राज्यों में फसल कटाई के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान की खबरें सामने आई थीं, फिर भी कुल राष्ट्रीय उत्पादन में गिरावट नहीं आई।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में अच्छी पैदावार दर्ज की गई है। खासकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में उत्पादन वृद्धि ने कुल राष्ट्रीय आंकड़ों को मजबूत आधार दिया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में खाद्यान्न सुरक्षा बनाए रखने के लिए गेहूं उत्पादन का स्थिर और बढ़ता स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया के प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों में शामिल है और घरेलू खपत के साथ-साथ सरकारी भंडारण व्यवस्था के लिए भी पर्याप्त उत्पादन आवश्यक माना जाता है।

सरकार का मानना है कि उत्पादन बढ़ने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए गेहूं की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी। इसके अलावा उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति मजबूत होने और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और असामान्य मौसम की घटनाएं भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में मौसम अनुकूल खेती, फसल बीमा, जल प्रबंधन और तकनीकी सहायता को और मजबूत करने की जरूरत होगी।

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी यह अनुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि आगामी महीनों में भंडारण और खरीद प्रक्रिया सुचारू रहती है, तो इससे देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को मिलेगी रफ्तार, एक जून से चार दिवसीय दौरे पर आएगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक जून से चार दिवसीय भारत दौरे पर आएगा। इस महत्वपूर्ण वार्ता को दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के अधिकारी व्यापार और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। बातचीत में अंतरिम व्यापार समझौते के ब्योरे को अंतिम रूप देने के साथ-साथ बाजार पहुंच, गैर-शुल्क बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने, व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।

भारत और अमेरिका पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तेजी से बढ़े हैं और अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में प्रस्तावित समझौते को द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इस वार्ता का उद्देश्य केवल व्यापारिक अड़चनों को दूर करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना भी है। खासतौर पर डिजिटल व्यापार, विनिर्माण, कृषि उत्पादों की पहुंच, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को अधिक मजबूत और स्थिर बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि दोनों देश चरणबद्ध तरीके से व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अंतरिम समझौते के तहत कुछ क्षेत्रों में तत्काल राहत और सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार हो सके। इससे दोनों देशों के निर्यातकों और उद्योगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत लंबे समय से अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की बेहतर पहुंच और कुछ गैर-शुल्क प्रतिबंधों में राहत की मांग करता रहा है। वहीं अमेरिका भी भारत में निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर अधिक स्पष्टता और सहूलियत चाहता है। ऐसे में आगामी वार्ता को दोनों देशों के व्यापारिक हितों के संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने एसईसीएल के कार्य संचालन की समीक्षा की; छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

बुनियादी ढांचे और अस्पताल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए गए; अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइजर यूनिट का उद्घाटन भी किया गया

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने दक्षिण पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (एसईसीएल) का एक दिवसीय दौरा किया और कंपनी के परिचालन प्रदर्शन, अवसंरचना संबंधी पहलों और भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरे के दौरान उन्होंने रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से भी मुलाकात की। दोनों के बीच राज्य में कोयला उत्पादन, अवसंरचना विकास, रसद संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई।

इन चर्चाओं का मुख्य लक्ष्य प्रमुख विकास परियोजनाओं में तेजी लाना, परिचालन सुगम बनाना और कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक विकास व रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूती देना था। उन्होंने कोयला क्षेत्र के विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि सहयोगात्मक दृष्टिकोण से राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा में राज्य का योगदान और अधिक मजबूत होगा।

एसईसीएल मुख्यालय के अपने दौरे के दौरान, श्री सतीश चंद्र दुबे ने एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कोयला उत्पादन, ढुलाई, गुणवत्ता प्रबंधन, सुरक्षा, डिजिटलीकरण पहल, पर्यावरण स्थिरता उपायों, कोयला गैसीकरण परियोजनाओं, खदान बंद करने की गतिविधियों, सीएसआर पहल और कंपनी की भविष्य की कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में एसईसीएल के सीएमडी श्री हरीश दुहान, कार्यात्मक निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और एसईसीएल के अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री ने सुरक्षित और टिकाऊ खनन पद्धतियों, आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसईसीएल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उत्पादन, गुणवत्ता आश्वासन, सुरक्षा मानकों और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में कंपनी के प्रयासों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि सीएसआर पहलों को कोयला क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के समावेशी विकास और कल्याण पर केंद्रित रहना चाहिए।

इस अवसर पर एसईसीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री हरीश दुहान ने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान, एसईसीएल ने कोल इंडिया के 100 मिलियन टन के संचयी उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने में 26.86 मिलियन टन का सर्वोच्च योगदान दिया है। उन्होंने कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एसईसीएल की प्रतिबद्धता को दोहराया।

एसईसीएल के डिजिटल परिवर्तन की पहल के अंतर्गत, केंद्रीय मंत्री ने ई-डीएडीएएस (एसईसीएल में डिजाइन और ड्राइंग अनुमोदन) पोर्टल और अस्पताल प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-डीएडीएएस पोर्टल प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं से संबंधित इंजीनियरिंग डिजाइन और ड्राइंग की ऑनलाइन जांच, निगरानी और अनुमोदन को सुगम बनाएगा, जिससे पारदर्शिता, निगरानी और समयबद्ध निष्पादन में सुधार होगा। एचएमआईएस पोर्टल रोगी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और बेहतर अस्पताल प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से एसईसीएल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करेगा।

इस दौरे के दौरान, श्री दुबे ने बिलासपुर के इंदिरा विहार स्वास्थ्य केंद्र में अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइजर यूनिट का भी उद्घाटन किया। उन्नत स्वचालित परीक्षण क्षमताओं से लैस यह मशीन रक्त विश्लेषण को तेज और अधिक सटीक बनाएगी और स्वास्थ्य सेवाओं में निदान क्षमता को बढ़ाएगी। उन्होंने इस केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया और चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की दिशा में एसईसीएल के प्रयासों की सराहना की।

मजबूत मांग से कच्चे तेल के वायदा भाव में उछाल, कीमत 152 रुपये बढ़कर 8,778 रुपये प्रति बैरल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

मजबूत हाजिर मांग और कारोबारियों द्वारा सौदों के आकार में बढ़ोतरी के चलते मंगलवार को कच्चे तेल के वायदा भाव में तेजी दर्ज की गई। लगातार बढ़ती मांग के बीच निवेशकों की सक्रिय भागीदारी से कीमतों में मजबूती देखने को मिली।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून महीने में डिलीवरी वाले कच्चे तेल का अनुबंध 152 रुपये यानी 1.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ Crude Oil Futures (MCX) 8,778 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया।

कारोबार के दौरान कुल 11,942 लॉट के लिए लेनदेन हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में सक्रियता बनी हुई है और निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है।

विश्लेषकों के अनुसार, हाजिर बाजार में मांग बढ़ने से वायदा बाजार को समर्थन मिला है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और मांग से जुड़े संकेत भी कीमतों पर असर डाल रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

मजबूत मांग के चलते हाल के सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हलचल देखी जा रही है, और आगे भी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम इसके रुझान को प्रभावित कर सकते हैं।

शेयर बाजार में तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 479 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरा

मुंबई / सत्ता संदेश

लगातार दो सत्रों से जारी तेजी के बाद मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये में कमजोरी के कारण निवेशकों की धारणा पर दबाव पड़ा, जिससे बाजार लाल निशान में बंद हुआ।

कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 479 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का सूचकांक Nifty 50 भी 118 अंक टूटकर नीचे आ गया।

विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रहा, जहां ईरान के दक्षिणी क्षेत्र में अमेरिकी हमले की रिपोर्टों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी और भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव पड़ा।

इसके अलावा, विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में कमजोरी आने से भी निवेशकों की चिंता बढ़ी। विशेष रूप से बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा है।

दिनभर के कारोबार में उतार-चढ़ाव का माहौल रहा, जहां शुरुआत में बाजार स्थिर दिखाई दिया, लेकिन बाद में बिकवाली बढ़ने से प्रमुख सूचकांक नीचे आ गए। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और तेल कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।