77वां गणतंत्र दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया
नेशनल डेस्क: भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और तिरंगे को सलामी दी। इस दौरान राष्ट्रगान बजाया गया और देश में बनी 105 mm लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई।
मुख्य अतिथि और विशेष सम्मान: इस साल के समारोह में यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। परेड के दौरान, भारतीय अंतरिक्ष यात्री IAF ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला को देश के सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया।
परेड की खास बातेंथीम: इस साल रिपब्लिक डे की थीम ‘वंदे मातरम के 150 साल’ और ‘आज़ादी का मंत्र – वंदे मातरम, खुशहाली का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’ है।
आत्मनिर्भर भारत: भारत की देसी तोपें जैसे धनुष गन सिस्टम और अमोघ (ATAGS) को रूट ऑफ़ ड्यूटी पर दिखाया गया, जिससे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में भारत की टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता का पता चला।
झांकी: परेड में कुल 30 झांकियां थीं, जिनमें ‘युद्ध से राष्ट्र निर्माण तक’ थीम पर आधारित पूर्व सैनिकों की झांकी आकर्षण का केंद्र थी।
फूलों की बारिश: ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत की लीडरशिप में चार Mi-17 1V हेलीकॉप्टरों ने रूट ऑफ़ ड्यूटी पर फूल बरसाए।
प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि: परेड शुरू होने से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देशवासियों से ‘विकसित भारत’ के कॉन्सेप्ट को और मज़बूत करने की कामना की।
कड़े सुरक्षा इंतज़ाम: गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली को एक मज़बूत किले में बदल दिया गया था। लगभग 10,000 सैनिक ड्यूटी पर तैनात थे और हज़ारों CCTV कैमरों से निगरानी रखी जा रही थी।

