ब्रेकिंग न्यूज़
राजनाथ सिंह की आतंकियों को चेतावनी: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है, हम आतंकी सोच को खत्म कर देंगे

नेशनल डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जयपुर के SMS स्टेडियम में आयोजित ‘शौर्य संध्या’ प्रोग्राम के दौरान आतंकियों को कड़ी चेतावनी दी। इंडियन आर्मी डे के मौके पर बोलते हुए उन्होंने ऐलान किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है और जब तक आतंकी सोच पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, भारत की शांति की कोशिशें जारी रहेंगी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ हिम्मत और संयम का प्रतीक है राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन को इतिहास में भारत की हिम्मत, ताकत और संयम के प्रतीक के तौर पर याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आतंकियों के खिलाफ यह कार्रवाई बहुत सोच-समझकर और इंसानी मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई थी। उनके मुताबिक, आतंकियों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि भारतीय सेना इतनी बहादुरी और तेज़ी से जवाब देगी।

आत्मनिर्भर भारत और डिफेंस प्रोडक्शन देश की बढ़ती मिलिट्री ताकत और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा:2014 में घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन 46,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है।डिफेंस एक्सपोर्ट 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये हो गया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारतीय सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बनाने का लक्ष्य है।

महिलाओं की बढ़ती भूमिका और मिलिट्री विरासत पर प्रोग्राम के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि अब महिलाओं को सेना में परमानेंट कमीशन दिया जा रहा है और उनके लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के दरवाज़े भी खोल दिए गए हैं।

इस इवेंट में मार्शल आर्ट, कलारीपयट्टू, मल्लखंभ और नेपाल आर्मी बैंड ने अपनी कला दिखाई। इस मौके पर राजस्थान के गवर्नर हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और सीनियर आर्मी ऑफिसर भी मौजूद थे।

“बम” की तरह फटा चिप्स का पैकेट ! 8 साल के मासूम की बाहर निकल आई आंख ; जानें पैकेट में हवा भरने के पीछे क्या है असली वजह?

नेशनल डेस्क: ओडिशा के बलांगीर जिले के टिटलागढ़ इलाके से एक बेहद दर्दनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां चिप्स का पैकेट फटने से 8 साल के बच्चे की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। इस घटना ने पैकेज्ड फूड की सेफ्टी और क्वालिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा?शगरघाट गांव के रहने वाले लब हरपाल का 8 साल का बेटा गांव की दुकान से चिप्स का पैकेट खरीदा था। शाम को जब बच्चा चिप्स खाने की तैयारी कर रहा था, तो उसकी मां किचन में खाना बना रही थी। बच्चा चिप्स का पैकेट लेकर गैस स्टोव के पास गया, जहां अचानक आग के संपर्क में आते ही पैकेट जोरदार धमाके के साथ फट गया। धमाका इतना जोरदार था कि बच्चे की पुतली बाहर आ गई और उसकी आंख पूरी तरह खराब हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चा अब उस आंख से कभी नहीं देख पाएगा।

पुलिस एक्शन:गुस्साए माता-पिता ने चिप्स बनाने वाली कंपनी के खिलाफ टिटलागढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

*चिप्स के पैकेट में हवा (गैस) क्यों होती है?इस हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि इन पैकेट में ऐसा क्या है जो आग के संपर्क में आने पर फट जाता है। सूत्रों के मुताबिक, चिप्स के पैकेट में आम हवा नहीं, बल्कि नाइट्रोजन गैस भरी होती है।

नाइट्रोजन गैस भरने के मुख्य कारण: टूटने से बचाना: यह गैस पैकेट के अंदर ‘एयरबैग’ की तरह काम करती है और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान चिप्स को टूटने से बचाती है।

फ्रेशनेस बनाए रखना: नाइट्रोजन गैस चिप्स में मौजूद तेल और स्टार्च को ऑक्सिडाइज होने से रोकती है, जिससे वे ज़्यादा समय तक क्रिस्पी रहते हैं*।

बैक्टीरियल प्रोटेक्शन: यह गैस पैकेट के अंदर बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ने से रोकती है।नियमों के मुताबिक, पैकेट पर लिखा वज़न सिर्फ़ चिप्स का होना चाहिए, उसमें से गैस का वज़न घटाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पैकेट के अंदर गैस का प्रेशर और प्लास्टिक का कॉम्बिनेशन आग लगने पर खतरनाक साबित हो सकता है।

’10-मिनट डिलीवरी’ पर बैन: राघव चड्ढा ने केंद्र के फैसले का स्वागत किया; कहा- गिग वर्कर्स के लिए बड़ी जीत

नेशनल डेस्क: केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, स्विगी, ज़ोमैटो, फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ’10-मिनट डिलीवरी’ सर्विस पर बैन लगा दिया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इन बड़े प्लेटफॉर्म के साथ मीटिंग करने के बाद उन्हें सख्त डिलीवरी टाइम लिमिट और अपनी ब्रांडिंग हटाने की सलाह दी है, जिस पर सभी कंपनियों ने सहमति जताई है।

राघव चड्ढा ने जताई खुशी:आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने इस फैसले पर खुशी जताई है और केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “सत्यमेव जयते, हम सब मिलकर जीत गए हैं”। चड्ढा के मुताबिक, जब राइडर के बैग या जैकेट पर ’10 मिनट’ लिखा होता था और कस्टमर की स्क्रीन पर टाइमर चल रहा होता था, तो इससे राइडर्स पर खतरनाक मेंटल प्रेशर पड़ता था, जो रोड सेफ्टी के लिए भी खतरा था।

डिलीवरी बॉय बनकर दर्द को समझा:यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में राघव चड्ढा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह खुद डिलीवरी बॉय की यूनिफॉर्म पहनकर स्कूटर चलाते हुए सामान पहुंचाते दिखे थे। उन्होंने कहा कि पिछले महीनों में उन्होंने सैकड़ों डिलीवरी पार्टनर्स से बात की, जो कम पैसे में अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे थे। उन्होंने इस फैसले को गिग वर्कर्स की इज्ज़त और सुरक्षा के लिए बड़ी राहत बताया है।

SC का सख्त रुख: कुत्तों के काटने पर देना होगा भारी मुआवजा, सरकार और ‘डॉग लवर्स’ की जिम्मेदारी तय होगी

नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर बहुत सख्त टिप्पणी की है। 13 जनवरी, 2026 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि जब सड़कों पर आवारा कुत्तों के हमलों से बच्चे और बुजुर्ग मारे जाते हैं या घायल होते हैं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

इंसानी जान की कीमत पर सवाल: 9 साल के बच्चे की मौत का जिक्र करते हुए कोर्ट ने बेंच से पूछा कि जब ऐसे बच्चे कुत्तों द्वारा मारे जाते हैं, जिन्हें ‘डॉग लवर्स’ संगठन खाना खिलाते हैं, तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ कुत्तों के लिए ही भावनाएं दिखाई जाती हैं, जबकि इंसानों पर हमलों के मामलों में ऐसी तत्परता अक्सर नहीं देखी जाती।

भारी मुआवजा और जवाबदेही: सुप्रीम कोर्ट अब जवाबदेही तय करने के लिए एक सख्त फ्रेमवर्क पर विचार कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों और घायलों के मामलों में राज्य सरकार को भारी मुआवजा देना होगा। इसके अलावा, डॉग ब्रीडर और उन्हें रिप्रेजेंट करने वाले ऑर्गनाइज़ेशन की भी ज़िम्मेदारी और अकाउंटेबिलिटी तय की जाएगी।

डॉग लवर्स के लिए निर्देश: कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर लोग कुत्तों को खाना खिलाना या उनकी देखभाल करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने कंपाउंड में या घर के अंदर करना चाहिए। उन्हें बाहर घूमने और लोगों के लिए परेशानी खड़ी करने की इजाज़त क्यों दी जानी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उसने कुत्तों पर क्रूरता दिखाने वाले वीडियो देखने से मना कर दिया है, क्योंकि ऐसे वीडियो भी हैं जिनमें कुत्ते बच्चों और बुज़ुर्गों पर हमला कर रहे हैं।

पाकिस्तानी टेररिस्ट कैंप पर इंडियन आर्मी की पैनी नज़र: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दी कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली: इंडियन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पड़ोसी देश पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। 13 जनवरी 2026 को मानेकशॉ सेंटर में हुई इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने देश की सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से बात की।

8 टेररिस्ट कैंप निशाने पर: आर्मी चीफ ने बताया कि इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) और लाइन ऑफ कंट्रोल (LC) के पार करीब 8 टेररिस्ट कैंप हैं, जहां ट्रेनिंग जैसी गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने साफ किया कि इंडियन आर्मी उन पर नज़र रख रही है और पाकिस्तान की किसी भी संदिग्ध गतिविधि या गलती का तुरंत और सख्ती से जवाब दिया जाएगा।

बॉर्डर के हालात:

नॉर्दर्न बॉर्डर (चीन): चीन से लगी नॉर्दर्न बॉर्डर पर हालात धीरे-धीरे नॉर्मल हो रहे हैं, लेकिन आर्मी लगातार अलर्ट है।

जम्मू और कश्मीर: यहां हालात सेंसिटिव हैं लेकिन पूरी तरह कंट्रोल में हैं। ‘ऑपरेशन सिंधुर’ अभी भी जारी है।

मणिपुर: पूर्वी राज्य मणिपुर में भी हालात अब स्थिर हो रहे हैं।

मॉडर्नाइजेशन और स्वदेशी हथियार
सेना अब मॉडर्नाइजेशन पर खास जोर दे रही है। जनरल द्विवेदी के मुताबिक, भारतीय सेना का 90 परसेंट गोला-बारूद अब स्वदेशी हो गया है। आने वाले समय में एडवांस्ड ब्रह्मोस मिसाइल, ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन पर फोकस किया जाएगा। इसके अलावा, सेना ने साल 2026 को ‘ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी’ घोषित किया है ताकि युद्ध के दौरान फैसले लेने की क्षमता बढ़ाई जा सके।

सेना में महिलाओं की भूमिका: सेना में महिलाओं की भर्ती को और बढ़ावा दिया जाएगा। अब महिलाओं को AEC (आर्मी एजुकेशनल कोर) और मेडिकल (नॉन-टेक्निकल) ब्रांच में भी सिपाही और फायरमैन के तौर पर भर्ती किया जाएगा।

लोहड़ी 2026: ‘सुंदर मुंदरिये’ गाने का असली हीरो कौन था? जानें उनके बिना यह त्योहार अधूरा क्यों है

पंजाब डेस्क: पंजाब की धरती पर लोहड़ी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर लोहड़ी पर गाया जाने वाला मशहूर गाना “सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचार हो, दुल्ला भट्टी वाला हो” किसकी याद में गाया जाता है?, ‘पंजाब का रॉबिन हुड’ कहे जाने वाले दुल्ला भट्टी की बहादुरी के किस्से बिना अधूरे माने जाते हैं।

दुल्ला भट्टी कौन थे? दुल्ला भट्टी का असली नाम राय अब्दुल्ला भट्टी था और उनका जन्म 16वीं सदी (1547) में पंजाब के संदल बार इलाके (आज का पाकिस्तान) में हुआ था।, वे भट्टी राजपूत वंश से थे। उनके पिता और दादा ने भी मुगल सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया था, जिसकी वजह से उन्हें सजा मिली थी। इस बैकग्राउंड की वजह से दुल्ला भट्टी के मन में मुगल राज के खिलाफ बगावत की भावना पैदा हुई।

गरीबों का मसीहा और औरतों का रक्षक: मुगल काल में जब किसानों पर भारी टैक्स लगाकर उनका शोषण किया जाता था, तो दुल्ला भट्टी ने मुगल अधिकारियों पर हमला किया और लूटा हुआ पैसा गरीबों में बांटना शुरू कर दिया। उनकी ज़िंदगी का सबसे ज़रूरी हिस्सा औरतों की इज्ज़त बचाना था। उस समय मुगल अधिकारी गरीब हिंदू और सिख परिवारों की लड़कियों को ज़बरदस्ती उठा ले जाते थे।

सुंदरी और मुंदरी की कहानी: लोक कथाओं के मुताबिक, दुल्ला भट्टी ने सुंदरी और मुंदरी नाम की दो अनाथ लड़कियों को एक बेरहम ज़मींदार से बचाया था। उन्होंने खुद पिता का रोल निभाया और जंगल में आग जलाकर उनकी शादी करवाई और उन्हें शगुन के तौर पर गुड़ और तिल दिए। यही वजह है कि आज भी लोहड़ी के मौके पर आग के चारों ओर चक्कर लगाते समय दुल्ला भट्टी की याद में गाने गाए जाते हैं।

शहादत और अमरता: दुल्ला भट्टी की बागी गतिविधियों की वजह से उन्हें आखिरकार पकड़ लिया गया और 26 मार्च 1599 को उन्हें सबके सामने शहीद कर दिया गया। भले ही इतिहास की किताबों में उन्हें कम जगह मिली हो, लेकिन वे पंजाब के लोगों के दिलों और लोक संस्कृति में हमेशा के लिए अमर हो गए हैं।

AAP MP राघव चड्ढा बने डिलीवरी बॉय: गिग वर्कर्स की दिक्कतों को समझने के लिए उठाया बड़ा कदम

पंजाब डेस्क: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा का एक नया और हैरान करने वाला लुक सामने आया है, जहां वे कड़ाके की ठंड में लोगों के घरों तक सामान पहुंचाते दिखे। उन्होंने यह कदम इस काम में लगे लोगों की मुश्किलों और चुनौतियों को खुद महसूस करने और समझने के लिए उठाया है। राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर 40 सेकंड का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे डिलीवरी बैग लिए और हेलमेट पहनकर स्कूटर पर सवार होकर ऑर्डर पहुंचाते दिख रहे हैं। उन्होंने इस वीडियो के कैप्शन में लिखा, “बोर्डरूम से दूर, ग्राउंड लेवल पर। मैंने उनके दिन जिया। जुड़े रहें”।

संसद में उठा मुद्दा: गौरतलब है कि राघव चड्ढा ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भी गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का मुद्दा काफी गंभीरता से उठाया था। उनका कहना है कि डिलीवरी बॉय, राइडर और ड्राइवर जैसी ये “साइलेंट वर्कफोर्स” बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों को अरबों डॉलर की वैल्यूएशन पर ले जा रही है, लेकिन ये खुद अभी भी दिहाड़ी मज़दूरों की ज़िंदगी जी रहे हैं। उन्होंने मांग की कि “10 मिनट डिलीवरी” का कल्चर खत्म होना चाहिए क्योंकि इससे मज़दूरों की जान खतरे में पड़ती है। उनके मुताबिक, ये मज़दूर सम्मान, सुरक्षा और सही मज़दूरी के हकदार हैं।

हिमांशु थपलियाल के वीडियो से प्रेरणा: यह पूरी पहल एक डिलीवरी बॉय हिमांशु थपलियाल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शुरू हुई। उस वीडियो में हिमांशु ने दावा किया था कि वह 15 घंटे काम करके और 50 km गाड़ी चलाकर सिर्फ़ 730 रुपये कमाता है। इससे प्रभावित होकर राघव चड्ढा ने दिसंबर के आखिर में हिमांशु को अपने घर डिनर पर भी बुलाया था और अब खुद डिलीवरी करके उन्होंने इस मुद्दे को ज़मीनी स्तर पर समझने की कोशिश की है।

2026 की पहली बड़ी कामयाबी: ISRO ने ‘EOS-N1 अन्वेषा’ सैटेलाइट लॉन्च किया; बॉर्डर पर नज़र रखने के लिए भारत को मिलेगी ‘दिव्य दृष्टि’

नेशनल डेस्क: साल 2026 की शानदार शुरुआत करते हुए, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) ने सोमवार, 12 जनवरी को अपना पहला मिशन PSLV-C62 सफलतापूर्वक पूरा किया। इस मिशन के तहत, भारत का अहम सैटेलाइट ‘EOS-N1 अन्वेषा’ सुबह करीब 10:17 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया।

खास बातें और क्षमताएं:

DRDO का योगदान: यह सैटेलाइट एक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट है जिसे मुख्य रूप से डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) ने बनाया है।

बॉर्डर पर नज़र रखना: यह सैटेलाइट भारत के बॉर्डर पर नज़र रखने, छिपे हुए टारगेट का पता लगाने और माहौल की निगरानी में क्रांति लाएगा।

PM मोदी का गुजरात दौरा: सोमनाथ में ‘विरासत’ और राजकोट में ‘विकास’ का शानदार संगम

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन दिन (10 से 12 जनवरी) के गुजरात दौरे में देश को ‘विकास भी, विरासत भी’ का मज़बूत मैसेज दिया है। दौरे की शुरुआत सोमनाथ मंदिर के दर्शन से हुई, जिसके बाद उन्होंने राजकोट में इंडस्ट्रियल तरक्की का नया ब्लूप्रिंट पेश किया।

1. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और शौर्य यात्रा

प्रधानमंत्री ने साल 1026 में महमूद ग़ज़नवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर हमले की 1,000वीं बरसी मनाने के लिए आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में हिस्सा लिया।

शौर्य यात्रा: रविवार सुबह उन्होंने एक किलोमीटर लंबी ‘शौर्य यात्रा’ को लीड किया, जिसमें 108 घोड़ों का एक सिंबॉलिक जुलूस निकाला गया। इस दौरान खुद PM मोदी ने डमरू और ‘चेंडा’ (पारंपरिक ढोल) बजाकर भक्तों का उत्साह बढ़ाया।खास पूजा: उन्होंने ज्योतिर्लिंग पर करीब 30 मिनट तक जल, फूल और पंचामृत से खास पूजा की।

ड्रोन शो: शनिवार रात को उन्होंने 3,000 ड्रोन के ज़रिए दिखाई गई सोमनाथ की गौरव गाथा देखी, जिसमें सरदार पटेल, अहिल्याबाई होल्कर और भगवान शिव की आकृतियाँ बनाई गई थीं।

2. PM मोदी का संबोधन: “सोमनाथ तबाही का नहीं, बल्कि फिर से बनाने का इतिहास है”सोमनाथ में इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमलावरों ने सोमनाथ को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ का मतलब ‘अमृत’ है जो हमेशा अमर रहता है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास हार का नहीं, बल्कि जीत और फिर से बनाने का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि 1951 में मंदिर के फिर से बनने के भी 75 साल पूरे हो रहे हैं।

3. राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट

धार्मिक कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री राजकोट पहुँचे, जहाँ उन्होंने रीजनल वाइब्रेंट गुजरात समिट का उद्घाटन किया।

इंडस्ट्रियल हब: PM ने अमरेली, जामनगर, कच्छ और राजकोट समेत अलग-अलग जिलों में 3,540 एकड़ में फैले 13 नए स्मार्ट इंडस्ट्रियल एस्टेट की घोषणा की।

तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी: उन्होंने भरोसा जताया कि भारत तेज़ी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनने की ओर बढ़ रहा है।

इंटरनेशनल पार्टनरशिप: इस समिट में US और यूरोप समेत 16 देशों के 110 से ज़्यादा खरीदार हिस्सा ले रहे हैं और 1,500 से ज़्यादा MoU साइन होने की उम्मीद है।

4. अगला प्रोग्राम (12 जनवरी)

अपने दौरे के आखिरी दिन, प्रधानमंत्री जर्मनी के चांसलर से मिलेंगे। दोनों नेता मिलकर अहमदाबाद में इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल का उद्घाटन करेंगे और साबरमती आश्रम जाएंगे। इसके अलावा, PM मोदी अहमदाबाद से गांधीनगर (महात्मा मंदिर) तक नए मेट्रो सेक्शन का भी उद्घाटन करेंगे।

कर्नाटक में घर की नींव खोदते समय मिला ‘खजाना’: तांबे के बर्तन में मिले 470 ग्राम सोने के गहने

नेशनल डेस्क: कर्नाटक के गडग जिले के लकुंडी गांव में एक घर बनाने के लिए नींव खोदते समय जमीन में सोने का खजाना मिलने की खबर सामने आई है। खुदाई के दौरान मजदूरों को तांबे का एक पुराना बर्तन मिला, जिसमें कीमती सोने के गहने भरे हुए थे।

खजाने की डिटेल्स: गडग के पुलिस सुपरिटेंडेंट रोहन जगदीश के मुताबिक, इस तांबे के बर्तन में सोने की 22 कीमती चीजें मिलीं। इनमें सोने के हार, झुमके और दूसरे पारंपरिक गहने शामिल हैं, जिनका कुल वजन करीब 470 ग्राम बताया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ये गहने बहुत पुराने समय के हो सकते हैं।

छात्र की सतर्कता और ईमानदारी: इस खजाने को सबसे पहले प्रज्वल नाम के क्लास 8 के छात्र ने देखा। जब मजदूर मिट्टी हटा रहे थे, तो प्रज्वल की नजर बर्तन पर पड़ी। बिना किसी लालच के उसने तुरंत गांव के बुजुर्गों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन को बताया गया।

एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन: खबर फैलते ही बड़ी संख्या में गांववाले मौके पर जमा हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस और रेवेन्यू डिपार्टमेंट की टीम पहुंची और सोना अपने कब्जे में ले लिया। फिलहाल, सारा सोना सरकारी कब्जे में है और इसके आर्कियोलॉजिकल महत्व को देखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।