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खुदकुशी की कोशिश… पंजाब के Ex IPS अमर चहल ने खुद को क्यों मारी गोली, यूं बयां किया दर्द!

पंजाब डेस्क: पंजाब के पटियाला में सोमवार को एक बहुत ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पंजाब पुलिस के पूर्व IPS (रिटायर्ड IG) अमर सिंह चहल ने खुद को गोली मारकर सुसाइड करने की कोशिश की। उन्हें गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने तीन घंटे के ऑपरेशन के बाद उनके फेफड़ों में फंसी गोली को सफलतापूर्वक निकाल लिया है। फिलहाल वह अगले 12 से 24 घंटे तक ऑब्जर्वेशन में हैं।

8.10 करोड़ की ठगी और 12 पेज का नोट: पुलिस को मौके से 12 पेज का सुसाइड नोट मिला है, जो पंजाब के DGP गौरव यादव के नाम से लिखा गया है। इस नोट में चहल ने बताया कि वह ‘F-777 DBS वेल्थ इक्विटी रिसर्च ग्रुप’ नाम के साइबर ठगों के एक बड़े जाल में फंस गए थे। ठगों ने उन्हें WhatsApp और Telegram के जरिए स्टॉक ट्रेडिंग और IPO में भारी मुनाफे का लालच देकर उनसे करीब 8.10 करोड़ रुपये ठग लिए हैं।

मानसिक पीड़ा और शर्मिंदगी: अमर सिंह चहल ने अपने नोट में बहुत दर्द ज़ाहिर करते हुए लिखा कि इस आर्थिक तबाही की वजह से वह बहुत शर्मिंदा और टूटा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्हें अफ़सोस है कि एक पुलिस अफ़सर होने के बावजूद वह खुद ऐसे ऑर्गनाइज़्ड साइबर अटैक का शिकार हो गए, जिससे पंजाब पुलिस की इमेज पर भी सवाल उठे हैं। उन्होंने DGP से अपील की कि इस मामले की जांच के लिए SIT बनाई जाए या केस CBI को सौंप दिया जाए ताकि दोषियों को पकड़ा जा सके और पैसे रिकवर किए जा सकें।

दूसरी ज़रूरी जानकारी:चहल ने बताया कि उनके पास अपना कोई हथियार नहीं था, इसलिए उन्होंने अपने गनमैन की राइफ़ल का इस्तेमाल किया। गौरतलब है कि अमर सिंह चहल को 2015 के बहबल कलां और कोटकपूरा फ़ायरिंग केस में भी आरोपी बनाया गया है।

ना दोस्तों को पता था, ना परिवारवालों को

मर सिंह के दोस्तों का कहना है कि उनके साथ इस तरह की ठगी हुई है इसकी किसी को जानकारी नहीं थी। अमर सिंह के सुसाइड नोट की मानें तो उनके साथ निवेश के पैसे निकालने की कोशिश के बाद उगाही शुरू हुई। 5 करोड़ रुपये निकालने की कोशिश की तो उससे 1.5% सर्विस फीस और 3% टैक्स के नाम पर 2.25 करोड़ रुपए वसूल लिए गए। इसके बाद भी पैसे नहीं दिए गए और दोबारा 2 करोड़ रुपए लिए। इसके बाद 20 लाख रुपए प्रीमियम मेंबरशिप फीस के नाम पर मांगे गए। पूर्व आईजी के साथ ठगी के बारे में ना तो उनकी करीबियों को पता था ना ही उनके पड़ोसियों को। यहां तक कि उनके परिवारवालों को ठगी की कोई जानकारी नहीं थी।