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50 लाख रुपये का होम लोन लेने के लिए कम से कम कितनी सैलरी चाहिए? जानें EMI का पूरा गणित

बिजनेस डेस्क: घर खरीदना ज़िंदगी का एक बहुत बड़ा फाइनेंशियल फैसला होता है और अगर आप होम लोन लेने का प्लान बना रहे हैं, तो यह जानना बहुत ज़रूरी है कि बैंक आपको ज़्यादा से ज़्यादा कितना लोन अमाउंट दे सकता है। लोन देने से पहले बैंक किसी भी व्यक्ति की इनकम और लोन चुकाने की क्षमता का अंदाज़ा लगाते हैं।

50 लाख रुपये के लोन के लिए कम से कम इनकम:

अगर आप 50 लाख रुपये के होम लोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं, तो आपके लिए ज़रूरी कम से कम सैलरी मुख्य रूप से इंटरेस्ट रेट और लोन की अवधि पर निर्भर करती है।

• उदाहरण के लिए, अगर इंटरेस्ट रेट लगभग 7.4 परसेंट सालाना है, तो 20 साल के लिए लोन की महीने की किस्त (EMI) लगभग 39,974 रुपये होगी।

• स्टैंडर्ड फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो (FOIR) लिमिट (50%) के अनुसार, आपकी EMI आपकी महीने की इनकम के आधे से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।

• तो, 39,974 रुपये (20 साल का समय) की EMI के लिए, आपकी महीने की इनकम कम से कम 80,000 रुपये होनी चाहिए।यह कैलकुलेशन इस बात पर आधारित है कि आप पर कोई और EMI बकाया नहीं है। अगर आप पर कोई और लोन बकाया है, तो आपकी उधार लेने की क्षमता कम हो सकती है।

लोन अमाउंट बढ़ाने के तरीके:

आप अपनी होम लोन एलिजिबिलिटी कुछ तरीकों से बढ़ा सकते हैं:

1. को-एप्लीकेंट जोड़ें: अपने पति/पत्नी, माता-पिता या भाई-बहन जैसे काम करने वाले परिवार के सदस्य को को-एप्लीकेंट के तौर पर जोड़ने से आपकी कुल इनकम बढ़ेगी और लोन अप्रूव होने की संभावना बढ़ेगी।

2. छोटे कर्ज़ चुकाएं: अप्लाई करने से पहले पर्सनल या कार लोन जैसे छोटे कर्ज़ चुकाने से आपकी डिस्पोजेबल इनकम बढ़ती है।

3. अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाएं: 750 या उससे ज़्यादा का क्रेडिट स्कोर बेहतर इंटरेस्ट रेट पर बड़ा लोन मिलने की संभावना बढ़ाता है।

4. एक्स्ट्रा इनकम दिखाएं: अगर आपको किराए, बोनस या पार्ट-टाइम काम से कोई एक्स्ट्रा इनकम होती है, तो यह जानकारी लेंडर के साथ शेयर करें।

हर 5 में से 1 मॉल पर लटक गया ताला, वीरान पड़े हैं चमकते शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, हैरान कर देगी ये रिपोर्ट!

बिजनेस डेस्क : देश के रिटेल सेक्टर की तस्वीर तेजी से बदल रही है, और जिस मॉल कल्चर ने कभी भारतीय बाजारों की रौनक बढ़ा दी थी, आज वही मॉल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म ‘नाइट फ्रैंक’ की एक ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश का हर पांचवां मॉल या तो बंद हो चुका है या बंद होने की कगार पर खड़ा है। वीरान पड़े गलियारे और खाली दुकानें अब इन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की नई पहचान बनती जा रही हैं।

80 फीसदी दुकानें खाली, 75 मॉल बने ‘घोस्ट मॉल’

नाइट फ्रैंक ने देश के 32 बड़े शहरों में 365 मॉल्स का गहन सर्वे किया,। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि इनमें से 75 मॉल, यानी करीब 20 फीसदी, अब ‘घोस्ट मॉल’ बन चुके हैं,। ‘घोस्ट मॉल’ रियल एस्टेट की वो श्रेणी होती है जहां 40 फीसदी से ज्यादा जगह खाली पड़ी हो। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, इन 75 मॉल्स में तो लगभग 80 फीसदी दुकानें खाली पड़ी हैं,।इस बदलती तस्वीर को समझने के लिए दिल्ली के ‘अंसल प्लाजा’ का उदाहरण दिया गया है। एक दौर था जब इसे दिल्ली-एनसीआर का पहला और सबसे भव्य शॉपिंग कॉम्प्लेक्स माना जाता था, जहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती थी। मगर आज गिने-चुने खाने-पीने के आउटलेट्स को छोड़ दें, तो यहां सन्नाटा पसरा हुआ है और बिजनेस एक्टिविटी न के बराबर रह गई है।

खराब प्लानिंग और मेट्रो शहरों में ज्यादा बुरा हाल

मॉल्स के ‘घोस्ट मॉल’ में तब्दील होने का सबसे बड़ा कारण खराब प्लानिंग और डिजाइनिंग को माना जा रहा है। समय के साथ ग्राहकों की पसंद बदली है, लेकिन ये पुराने मॉल खुद को उस हिसाब से अपडेट नहीं कर पाए। रख-रखाव की कमी के चलते इनका इंफ्रास्ट्रक्चर दिनों-दिन जर्जर होता जा रहा है, जिससे ग्राहक यहां आने से कतराने लगे हैं।नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट ‘थिंक इंडिया थिंक रिटेल 2025’ एक और दिलचस्प तथ्य सामने लाती है: यह समस्या टियर-2 शहरों के मुकाबले बड़े मेट्रो शहरों में ज्यादा गंभीर है,। बड़े शहरों में कड़ी प्रतिस्पर्धा और बदलती लाइफस्टाइल ने इन पुराने मॉल्स की कमर तोड़ दी है। इसके विपरीत, टियर-2 शहरों में ऑक्युपेंसी लेवल अभी भी बेहतर स्थिति में है, क्योंकि वहाँ मॉल कल्चर अभी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

अरबों का नुकसान, लेकिन उम्मीद बाकी

इन बंद पड़े या वीरान हो चुके मॉल्स में करीब 1.55 करोड़ स्क्वायर फीट का विशाल एरिया बेकार पड़ा है। यह न केवल रियल एस्टेट की बर्बादी है, बल्कि एक बड़ा आर्थिक नुकसान भी है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। अगर इन संपत्तियों की सही तरीके से री-प्लानिंग की जाए और इन्हें रेनोवेट किया जाए, तो इनकी पुरानी रौनक लौट सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर इन जगहों का सही इस्तेमाल हो, तो सालाना करीब 350 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की जा सकती है।