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रेलवे का किराया कैसे तय होता है? अब आप कभी नहीं जान पाएंगे; रेलवे ने किराए के फॉर्मूले को घोषित किया है ‘ट्रेड सीक्रेट’

बिजनेस डेस्क: क्या आपने कभी सोचा है कि रेलवे की अलग-अलग कैटेगरी (क्लास) का किराया कैसे तय होता है? अगर हां, तो अब आपको इसका जवाब शायद कभी न मिले। इंडियन रेलवे ने साफ कर दिया है कि ट्रेनों का किराया तय करने का फॉर्मूला ‘ट्रेड सीक्रेट’ है और इसे पब्लिक नहीं किया जा सकता।

RTI के तहत जानकारी देने से इनकार: सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) में पहुंची एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान रेलवे ने यह दलील दी है। दरअसल, एक RTI के जरिए ट्रेन टिकट के बेस फेयर, डायनामिक प्राइसिंग, इंस्टेंट बुकिंग और सीजनल बदलावों के बारे में डिटेल्ड जानकारी मांगी गई थी। रेलवे ने कहा कि किराया कैलकुलेट करने का तरीका इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) के दायरे में आता है, इसलिए यह जानकारी RTI एक्ट के सेक्शन 8(i)(d) के तहत शेयर नहीं की जा सकती।

सुविधाओं के आधार पर किराया: रेलवे बोर्ड के सेंट्रल पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (CPIO) ने कहा कि किराया अलग-अलग क्लास में दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर तय होता है। उनके अनुसार, इस पॉलिसी मैकेनिज्म का खुलासा करना पब्लिक इंटरेस्ट में सही नहीं है। CIC ने रेलवे की इस दलील को मानते हुए एप्लीकेशन को रिजेक्ट कर दिया है।

सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी और कमर्शियल पहलू: रेलवे ने यह भी कहा कि इंडियन रेलवे एक कमर्शियल यूटिलिटी के तौर पर काम करती है, लेकिन सरकार का हिस्सा होने के नाते, यह देश के इंटरेस्ट में अलग-अलग सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी को पूरा करने के लिए भी कमिटेड है। कमीशन ने पाया कि पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर ने वह सारी जानकारी पहले ही दे दी थी जो पब्लिक की जा सकती थी।इसके अलावा, रेलवे ने साल 2026 के लिए अपना नया टाइम टेबल भी जारी किया है, जिसमें 549 ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई गई है और 122 नई ट्रेनें शुरू करने का अनाउंसमेंट किया गया है।