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बांग्लादेश में भारी हिंसा: कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा भड़की, भारतीय दूतावासों पर पथराव और वीज़ा सर्विस सस्पेंड

इंटरनेशनल डेस्क: बांग्लादेश में जुलाई मूवमेंट के एक बड़े नेता और ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पूरे देश में भारी हिंसा और अस्थिरता का माहौल बन गया है। प्रदर्शनकारी ढाका समेत कई शहरों में आगजनी, लूटपाट और भारतीय प्रॉपर्टी को निशाना बना रहे हैं।

मौत के बाद भड़की हिंसा–

शरीफ उस्मान हादी की 12 दिसंबर को ढाका के पलटन इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। हादी की मौत की खबर फैलते ही ढाका में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए और प्रदर्शनकारियों ने ‘द डेली स्टार’ अखबार की बिल्डिंग पर भी हमला किया।

इंडियन एम्बेसी को निशाना बनाया गया

प्रदर्शनकारी भारत विरोधी नारे लगा रहे हैं और चटगांव में इंडियन हाई कमीशन पर पत्थर फेंके जाने की भी खबरें हैं। इस तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए, भारत ने बांग्लादेश के चार बड़े शहरों — ढाका, राजशाही, खुलना और चटगांव में अपने हाई कमीशन से वीज़ा सर्विस कुछ समय के लिए बंद कर दी हैं। इन ऑफिस के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

उस्मान हादी कौन?–

उस्मान हादी 2024 में शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन का मुख्य चेहरा थे और उन्हें भारत का कट्टर विरोधी माना जाता था। वह तब चर्चा में आए जब उन्होंने तथाकथित ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का नक्शा जारी किया, जिसमें भारत के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया था। वह 8 फरवरी को होने वाले आम चुनावों में ढाका-8 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।

भारत पर बेबुनियाद आरोप–

हादी का संगठन ‘इंकलाब मंच’ और ‘नेशनल सिटिजन पार्टी’ (NCP) इस मामले में भारत का नाम घसीट रहे हैं। उनका दावा है कि हादी के हत्यारे भारत भाग गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अंतरिम सरकार से मांग की है कि जब तक भारत हत्यारों को वापस नहीं कर देता, तब तक भारतीय हाई कमीशन को बंद रखा जाए। हालांकि, बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में अब तक 20 लोगों को हिरासत में लिया है, जिसमें मुख्य आरोपी फैसल करीम मसूद का परिवार भी शामिल है।

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