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सोशल मीडिया बच्चों को बना रहा है हिंसक और जिद्दी : नई स्टडी से माता-पिता में चिंता बढ़ी

नैशनल डेस्क : इंटरनेट और सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों के व्यवहार और मेंटल हेल्थ के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया बच्चों को हिंसक और जिद्दी बना रहा है, जिससे माता-पिता में काफी चिंता है।

डिजिटल एडिक्शन और मेंटल हेल्थ पर असर

सूत्रों के मुताबिक, 11 से 37 परसेंट किशोरों में इंटरनेट मीडिया एडिक्शन के लक्षण पाए गए हैं, जिससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। स्क्रीन पर बहुत ज़्यादा समय बिताने की वजह से बच्चों में नींद की कमी, डिप्रेशन, एंग्जायटी और आत्मविश्वास की कमी जैसी गंभीर मेंटल समस्याएं देखी जा रही हैं।

इस स्थिति को देखते हुए अब देश भर के अस्पतालों में ‘डिजिटल एडिक्शन क्लीनिक’ खोले जा रहे हैं।साइबरबुलिंग और इस्तेमाल के आंकड़ों पर हुई एक स्टडी में चौंकाने वाली बात सामने आई है कि 3 से 60 परसेंट बच्चे साइबरबुलिंग का शिकार हो रहे हैं। साल 2024 के डेटा के मुताबिक, भारत में 88 करोड़ इंटरनेट यूज़र थे। हैरानी की बात है कि 14-16 साल के 76 परसेंट बच्चे स्मार्टफोन का इस्तेमाल सोशल मीडिया के लिए करते हैं, जबकि सिर्फ़ 57 परसेंट बच्चे पढ़ाई के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।

49 परसेंट शहरी माता-पिता मानते हैं कि उनके बच्चे रोज़ाना तीन घंटे से ज़्यादा इंटरनेट पर बिताते हैं।

सरकार की सख्ती और माता-पिता की राय

बच्चों को इन बुरे असर से बचाने के लिए, IT मिनिस्ट्री ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) रूल्स, 2025 को नोटिफ़ाई किया है। इसका मकसद बच्चों के डेटा को सुरक्षित रखना और OTT और सोशल मीडिया के बेलगाम इस्तेमाल को रोकना है। लोकल सर्कल्स के एक सर्वे में, जिसमें 302 ज़िलों के माता-पिता से 57,000 जवाब इकट्ठा किए गए, 25 परसेंट माता-पिता ने मांग की कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की मंज़ूरी ज़रूरी होनी चाहिए।

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