ब्रेकिंग न्यूज़
8th Pay Commission: 2025 में रिटायर होने वालों की लॉटरी; पेंशन में बढ़ोतरी के साथ मिलेगा लाखों का बकाया

बिजनेस डेस्क: साल 2025 में रिटायर होने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। हालांकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी समय है, लेकिन 2025 में रिटायर होने वाले कर्मचारी भी इसके फायदे में आएंगे। सूत्रों के मुताबिक, इन कर्मचारियों को बढ़ी हुई पेंशन के साथ लाखों रुपये का बकाया भी मिलेगा।

नया वेतन आयोग कब लागू होगा?

फाइनेंस मिनिस्ट्री ने 8वें वेतन आयोग को नवंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए 18 महीने का समय दिया है। इसका सीधा मतलब है कि आयोग की सिफारिशें 2027 के मध्य तक तैयार हो जाएंगी और सरकार इसे 2028 तक लागू कर सकती है। हालांकि इसे लागू होने में समय लग सकता है, लेकिन जो कर्मचारी 2025 में रिटायर हो चुके हैं या होने वाले हैं, आयोग लागू होने के बाद उनकी पेंशन में बड़ा उछाल आएगा।

एरियर का कैलकुलेशन:

–सबसे ज़रूरी बात एरियर है। सूत्रों के मुताबिक, जब भी नया पे कमीशन लागू होता है, तो उसका कैलकुलेशन पिछले कमीशन के खत्म होने की तारीख से किया जाता है।

इसके मुताबिक:–2026 से लेकर नई सिफारिशें लागू होने तक का पूरा अमाउंट कर्मचारियों को एरियर के तौर पर दिया जाएगा।

–यह अमाउंट लाखों रुपये में हो सकता है, जो सीधे पेंशनर्स के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा।

–इसके लिए पेंशनर्स को किसी ऑफिस के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं होगी।

–इस फैसले से उन हज़ारों कर्मचारियों को बड़ी उम्मीद मिली है जो इस बात को लेकर कन्फ्यूज थे कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें नए पे स्केल का फायदा मिलेगा या नहीं।

बांग्लादेश में भारी हिंसा: कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा भड़की, भारतीय दूतावासों पर पथराव और वीज़ा सर्विस सस्पेंड

इंटरनेशनल डेस्क: बांग्लादेश में जुलाई मूवमेंट के एक बड़े नेता और ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पूरे देश में भारी हिंसा और अस्थिरता का माहौल बन गया है। प्रदर्शनकारी ढाका समेत कई शहरों में आगजनी, लूटपाट और भारतीय प्रॉपर्टी को निशाना बना रहे हैं।

मौत के बाद भड़की हिंसा–

शरीफ उस्मान हादी की 12 दिसंबर को ढाका के पलटन इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। हादी की मौत की खबर फैलते ही ढाका में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए और प्रदर्शनकारियों ने ‘द डेली स्टार’ अखबार की बिल्डिंग पर भी हमला किया।

इंडियन एम्बेसी को निशाना बनाया गया

प्रदर्शनकारी भारत विरोधी नारे लगा रहे हैं और चटगांव में इंडियन हाई कमीशन पर पत्थर फेंके जाने की भी खबरें हैं। इस तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए, भारत ने बांग्लादेश के चार बड़े शहरों — ढाका, राजशाही, खुलना और चटगांव में अपने हाई कमीशन से वीज़ा सर्विस कुछ समय के लिए बंद कर दी हैं। इन ऑफिस के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

उस्मान हादी कौन?–

उस्मान हादी 2024 में शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन का मुख्य चेहरा थे और उन्हें भारत का कट्टर विरोधी माना जाता था। वह तब चर्चा में आए जब उन्होंने तथाकथित ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का नक्शा जारी किया, जिसमें भारत के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया था। वह 8 फरवरी को होने वाले आम चुनावों में ढाका-8 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।

भारत पर बेबुनियाद आरोप–

हादी का संगठन ‘इंकलाब मंच’ और ‘नेशनल सिटिजन पार्टी’ (NCP) इस मामले में भारत का नाम घसीट रहे हैं। उनका दावा है कि हादी के हत्यारे भारत भाग गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अंतरिम सरकार से मांग की है कि जब तक भारत हत्यारों को वापस नहीं कर देता, तब तक भारतीय हाई कमीशन को बंद रखा जाए। हालांकि, बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में अब तक 20 लोगों को हिरासत में लिया है, जिसमें मुख्य आरोपी फैसल करीम मसूद का परिवार भी शामिल है।

लोकसभा में ‘जी राम जी बिल’ पर 14 घंटे बहस: BJP ने किया सपोर्ट, विपक्ष बोला, यह ‘महात्मा गांधी का अपमान’

नेशनल डेस्क: बुधवार को लोकसभा में ‘विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन) अमेंडमेंट बिल’ पर 14 घंटे लंबी बहस हुई, जो सुबह 1.35 बजे तक चली। इस बहस में कुल 98 सांसदों ने हिस्सा लिया।जहां सत्ताधारी BJP ने इस बिल का पूरा सपोर्ट किया और इसे 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम बताया, वहीं विपक्ष (INDIA गठबंधन) ने इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की पुरजोर मांग की। कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज, गुरुवार को इस बहस का जवाब देंगे।

विपक्ष की आपत्ति: महात्मा गांधी का नाम हटाना ‘अपमान’विपक्ष मुख्य रूप से मौजूदा स्कीम (MGNREGA) से महात्मा गांधी का नाम हटाने पर हमला कर रहा है। RSP नेता एनके प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि यह बिल केंद्र की मोदी सरकार के पतन की शुरुआत है, क्योंकि कोई भी किसी भी योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने को स्वीकार नहीं करेगा। भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने भी आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रपिता का अपमान कर रही है।कांग्रेस समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के कई सांसद आज, गुरुवार सुबह 10.15 बजे संसद परिसर में महात्मा गांधी की मूर्ति के पास इस बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में कानून पास कर रही है और यह नया बिल राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ भी डालता है।

BJP का रुख: ‘भ्रष्टाचार’ रोकना ज़रूरीदूसरी ओर, अनुराग ठाकुर और निशिकांत दुबे समेत BJP नेताओं ने बिल का ज़ोरदार समर्थन किया। BJP नेता निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस घबराई हुई है क्योंकि नए बिल से कड़े नियमों के कारण भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और वह महात्मा गांधी के नाम पर पैसा नहीं कमा पाएगी। बिल का समर्थन करते हुए, BJP MP जगदंबिका पाल ने कहा कि प्रस्तावित कानून मौजूदा स्कीम में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोज़गार की गारंटी देता है। BJP MP बसवराज एस. बोम्मई ने कहा कि यह कानून विपक्ष को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की बदलती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है।

जिला परिषद चुनाव में एक अनोखा मामला: इस गांव के लोगों ने वोट ही नहीं डाला

पंजाब डेस्क: जालंधर जिले में जिला परिषद चुनाव के दौरान एक अजीब मामला सामने आया है, जहां पूरे गांव के किसी भी वोटर ने वोट नहीं डाला।

यह घटना जालंधर जिले के नूरमहल ब्लॉक के दयारा ग्राम पंचायत की है। इस गांव के कुल 360 वोटरों में से कोई भी वोट देने के लिए पोलिंग बूथ पर नहीं पहुंचा।

खुल गया उम्मीदवारों की किस्मत का पिटारा: पंजाब में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए वोटों की गिनती शुरू

पंजाब डेस्क: पंजाब में आज जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा और वोटों की गिनती शुरू हो गई है। राज्य चुनाव आयोग ने वोटों की गिनती के लिए पूरे राज्य में 153 काउंटिंग सेंटर का इंतज़ाम किया है। कड़ी सुरक्षा के साथ-साथ इस गिनती के काम को करने के लिए बड़ी संख्या में 10,500 कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

इन चुनावों के नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनावों के संदर्भ में भी देखा जाएगा, क्योंकि जो भी पार्टी जीतेगी, उसकी ग्रामीण इलाकों में पकड़ बढ़ेगी।

मुख्य तथ्य और आंकड़े:उम्मीदवार:

जिला परिषद के 347 ज़ोन के लिए कुल 1,249 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। पंचायत समिति के 2,838 ज़ोन के लिए लगभग 8,000 उम्मीदवार मैदान में थे।

वोटिंग: ग्रामीण इलाकों में 1.30 करोड़ वोटरों में से करीब 62 लाख वोटरों ने अपने वोट डाले। पूरे राज्य में 48.40 परसेंट वोटिंग हुई।

सबसे ज़्यादा वोटिंग: सबसे ज़्यादा वोटिंग पेमेंट रेट मालेरकोटला और मानसा में देखा गया।

बिना किसी मुकाबले के जीत:

चुनाव के दौरान 15 ज़िला परिषद और 181 पंचायत समिति उम्मीदवार पहले ही बिना किसी मुकाबले के चुने जा चुके हैं।

Punjab News : ज़िला परिषद और पंचायत समिति के लिए वोटिंग खत्म; पंजाब में कई जगहों पर बूथ कैप्चरिंग की घटनाएं

पंजाब डेस्क: पंजाब में ज़िला परिषद और ब्लॉक समिति के चुनावों ने राज्य की पॉलिटिक्स को नया मोड़ दे दिया है। गांव लेवल पर हो रहे इन चुनावों को आने वाली पॉलिटिकल दिशा का बैरोमीटर माना जा रहा है। वोटिंग के दौरान कई ज़िलों में लोगों ने जोश के साथ हिस्सा लिया, जिससे साफ़ पता चलता है कि लोकल सेल्फ़-गवर्नेंस संस्थाओं में लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है।

इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। हर पार्टी ने गांवों में अपनी पकड़ दिखाने के लिए पूरी ताकत लगाई है और चुनाव प्रचार के दौरान लोकल मुद्दों को सेंटर में रखा गया।

पॉलिटिकल एनालिस्ट के मुताबिक ये चुनाव रूलिंग पार्टी के लिए खास तौर पर अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि गांवों में मिला सपोर्ट सरकार के काम पर लोगों की राय दिखाता है। दूसरी तरफ, यह अपोज़िशन पार्टियों के लिए अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पाने और गांव लेवल पर एक मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का मौका है।

कई जगहों पर चुनाव शांतिपूर्ण रहे, हालांकि कुछ इलाकों से तनाव और शिकायतों की खबरें भी आईं। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए थे ताकि वोटिंग प्रोसेस सही और सही तरीके से पूरा हो सके।

कुल मिलाकर, ये ज़िला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव पंजाब की राजनीति के लिए अहम संकेत देने वाले हैं। इनके नतीजे न सिर्फ़ गांव के लेवल पर सत्ता का संतुलन तय करेंगे, बल्कि आने वाले बड़े चुनावों के लिए राजनीतिक माहौल बनाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

राहुल गांधी का दिल्ली में तीखा बयान: बोले-‘वोट चोरी लोकतंत्र पर सीधा हमला है’

नेशनल डेस्क: आज नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि “वोट चोरी” देश में लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोगों की आवाज दबाई जाती है और चुनाव की पवित्रता का उल्लंघन होता है, तो यह संविधान की भावना को कमजोर करता है।

राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी सिर्फ किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक के अधिकारों पर हमला है। उन्होंने दावा किया कि अगर चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं होगी, तो आम आदमी का लोकतंत्र पर से भरोसा टूट जाएगा। उन्होंने लोगों से अपने वोट के अधिकार की रक्षा के लिए एक साथ आने की अपील की।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। राहुल गांधी के इस बयान के बाद देश की राजनीति में चुनाव प्रक्रिया और चुनावी संस्थाओं की भूमिका पर एक नई चर्चा छिड़ गई है।

जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव आज: 14 तरह के डॉक्यूमेंट्स दिखाकर लोग कर सकेंगे वोटिंग

जालंधर, (सत्ता संदेश ब्यूरो)- चुनाव अधिकारी डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि आज, 14 दिसंबर, 2025 को हो रहे जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के दौरान वोटर फोटो पहचान पत्र के अलावा सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी 14 तरह के दूसरे वैध डॉक्यूमेंट्स दिखाकर अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वोटरों की पहचान के लिए राज्य चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव-2024 के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को ही अपनाया गया है।

नीचे 14 तरह के डॉक्यूमेंट्स पढ़ें, जिनका इस्तेमाल वोट डालने के लिए किया जा सकता है

अगर किसी वोटर के पास वैलिड वोटर फोटो आइडेंटिटी कार्ड नहीं है, तो जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के दौरान

1, आधार कार्ड

2, MGNREGA जॉब कार्ड

3, बैंक/पोस्ट ऑफिस से जारी पासबुक जिसमें फोटो हो

4, मिनिस्ट्री ऑफ़ लेबर से जारी हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड

5, ड्राइविंग लाइसेंस

6, पैन कार्ड

7, RGI से जारी स्मार्ट कार्ड

8, इंडियन पासपोर्ट

9, राशन/ब्लू कार्ड

10, पेंशन डॉक्यूमेंट जिसमें फोटो हो

11, सेंट्रल/स्टेट गवर्नमेंट/PSU/पब्लिक लिमिटेड कंपनियों से जारी सर्विस आइडेंटिटी कार्ड

12, MPs और MLAs को जारी ऑफिशियल कार्ड

13, यूनिक दिव्यांगता आइडेंटिटी कार्ड

14, किसी मान्यता प्राप्त संस्था से जारी स्टूडेंट आइडेंटिटी कार्ड दिखाकर वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल कर सकते है।

इलेक्शन ऑफिसर ने जिले के एलिजिबल वोटर्स से अपील की कि वे वोट डालते समय अपने साथ वैलिड डॉक्यूमेंट्स लाएं, ताकि उन्हें वोट देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते समय कोई दिक्कत न हो।

2027 में देश की पहली डिजिटल जनगणना को केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए **जनगणना 2027** के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इस प्रस्ताव के तहत, देश में पहली बार **डिजिटल जनगणना** (Digital Census) आयोजित की जाएगी. इस पूरी परियोजना पर **11,718.24 करोड़ रुपये** की लागत आने का अनुमान है.यह पूरी प्रक्रिया **दो चरणों** में पूरी की जाएगी.

1. **पहला चरण:** इस चरण में घरों की सूची बनाकर उनकी गिनती की जाएगी. यह प्रक्रिया **अप्रैल से सितंबर 2026** तक चलेगी.

2. **दूसरा चरण:** मुख्य जनगणना का कार्य **फरवरी 2027** में संपन्न होगा.

**जाति गणना का समावेश**

इस जनगणना के **दूसरे चरण** में **जातियों का इलेक्ट्रॉनिक डेटा** भी शामिल किया जाएगा. राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने 30 अप्रैल, 2025 को हुई बैठक में ही यह फैसला लिया था कि आगामी जनगणना 2027 में जाति गणना (Caste Enumeration) को भी शामिल किया जाएगा.

**विशेष क्षेत्रों के लिए अलग समय-सीमा**

बर्फ़ से प्रभावित क्षेत्रों, जिनमें केंद्र शासित प्रदेश **लद्दाख और जम्मू-कश्मीर**, साथ ही **हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड** शामिल हैं, में दूसरे चरण की जनगणना **सितंबर 2026** में होगी.**कर्मचारी और तकनीक**केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जनगणना के चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए सरकार ने एक विस्तृत रूपरेखा बनाई है. इस कार्य में लगभग

**30 लाख क्षेत्रीय कर्मचारी**

(फील्ड स्टाफ) लगाए जाएंगे. गणनाकार (enumerators), जो सामान्यतः राज्य सरकार द्वारा नियुक्त सरकारी शिक्षक होते हैं, वे अपनी नियमित ड्यूटी के अलावा जनगणना का फील्ड वर्क भी करेंगे.

इन कर्मचारियों को उनके अतिरिक्त कार्य के लिए

**मानदेय** (honorarium) भी दिया जाएगा.डेटा संग्रह के लिए **मोबाइल ऐप** और मॉनिटरिंग के लिए

**सेंट्रल पोर्टल** का उपयोग किया जाएगा, जिससे बेहतर गुणवत्ता का डेटा उपलब्ध होगा. यह भी बताया गया है कि स्थानीय स्तर पर लगभग 550 दिनों के लिए करीब

**18,600 तकनीकी पेशेवर**

तैनात किए जाएंगे, जिससे लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिवसों का रोजगार पैदा होगा.सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि व्यक्तिगत स्तर पर **हर किसी का डेटा गोपनीय** रखा जाएगा, हालांकि जनगणना का **मैक्रो-लेवल डेटा प्रकाशित** किया जाएगा.