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ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल: 1 अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाएगा रूस; जानें क्या है पुतिन सरकार का मास्टर प्लान

इंटरनेशनल डेस्क: वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर बड़ी हलचल होने वाली है। दुनिया के प्रमुख ऊर्जा निर्यातक देश रूस ने 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगाने का फैसला किया है। रूसी सरकार की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पाबंदी अगले चार महीनों यानी 31 जुलाई 2026 तक लागू रहेगी।

उप प्रधानमंत्री का बड़ा निर्देश: रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने शुक्रवार को ऊर्जा मंत्रालय को एक विशेष निर्देश जारी किया है, जिसमें 1 अप्रैल से इस प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। रूसी समाचार एजेंसी तास (TASS) ने भी इस खबर की पुष्टि की है।

वैश्विक बाजार में अस्थिरता: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। रूस का उद्देश्य इस अस्थिरता से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाना है।

घरेलू कीमतों पर नियंत्रण: रूसी सरकार चाहती है कि देश के भीतर पेट्रोल की कीमतें स्थिर रहें और आम नागरिकों को महंगाई का सामना न करना पड़े।

किल्लत और रिफाइनरियों पर खतरा: पिछले साल रूस और उसके नियंत्रण वाले इलाकों में ईंधन की भारी कमी देखी गई थी, जिसका कारण यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरियों पर किए गए हमले और घरेलू मांग में अचानक हुई बढ़ोतरी थी। सरकार इस बार पहले से ही सतर्क रहकर स्थानीय आपूर्ति सुरक्षित करना चाहती है।

कितना बड़ा है रूस का निर्यात? आंकड़ों के अनुसार, रूस ने पिछले साल लगभग 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल का निर्यात किया था, जो करीब 1,17,000 बैरल प्रतिदिन बैठता है। अब इस बड़ी मात्रा को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजने के बजाय घरेलू उपयोग के लिए रिजर्व रखा जाएगा। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि देश में कच्चे तेल की रिफाइनिंग पिछले साल के स्तर पर ही बनी हुई है, इसलिए आपूर्ति में फिलहाल कोई तकनीकी कमी नहीं है।

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