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IIT रोपड़ और RGNAU के बीच समझौता, ड्रोन तकनीक में शुरू होगा संयुक्त पीजी डिप्लोमा कार्यक्रम

यूएवी ऑपरेशंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी में युवाओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण, शोध और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ और राजीव गांधी नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी के बीच यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) ऑपरेशंस और ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू करेंगे।

एमओयू पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रोफेसर राजीव आहूजा और आरजीएनएयू के कुलपति प्रोफेसर भृगु नाथ सिंह ने दोनों संस्थानों के शिक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

दो संस्थानों में होगा अध्ययन

संयुक्त पीजी डिप्लोमा कार्यक्रम के तहत पहले सेमेस्टर की पढ़ाई आरजीएनएयू में कराई जाएगी, जबकि दूसरे सेमेस्टर में विद्यार्थी आईआईटी रोपड़ में प्रशिक्षण और अध्ययन करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ड्रोन और यूएवी तकनीक की गहन सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

पाठ्यक्रम को इस प्रकार तैयार किया गया है कि छात्रों को ड्रोन संचालन, डिजाइन, तकनीकी अनुप्रयोग, सुरक्षा मानकों और उभरती विमानन तकनीकों की व्यापक समझ विकसित हो सके।

शोध और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस अवसर पर प्रोफेसर राजीव आहूजा ने कहा कि यह साझेदारी ड्रोन तकनीक और यूएवी क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थान मिलकर भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

दोनों संस्थानों ने तकनीकी शिक्षा, क्षमता निर्माण और ड्रोन क्षेत्र में अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बढ़ती मांग को पूरा करेंगे प्रशिक्षित पेशेवर

भारत में ड्रोन और विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। कृषि, रक्षा, निगरानी, लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर सर्वेक्षण जैसे क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह संयुक्त कार्यक्रम उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित और कुशल पेशेवर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह पहल देश में ड्रोन इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और युवाओं को उभरती तकनीकों में करियर के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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