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कनाडा में 30 हजार छात्र संकट में: नए बिल C-12 से 9 हजार पंजाबियों को मिला नोटिस, 21 दिन में डिपोर्टेशन का डर

नेशनल डेस्क : कनाडा सरकार के नए इमिग्रेशन बिल C-12 के पास होने के बाद वहां रह रहे विदेशी छात्रों और शरणार्थियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इमिग्रेशन विभाग ने करीब 30,000 लोगों को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें से लगभग 9,000 पंजाबी युवा शामिल हैं,। इन सभी से 21 दिन के भीतर (3 मई तक) अपनी अयोग्यता का आधार स्पष्ट करने को कहा गया है।

क्या है नया कानून (Bill C-12)? पुराने नियमों के तहत कनाडा पहुंचने के बाद कोई भी व्यक्ति कभी भी शरण (Asylum) के लिए आवेदन कर सकता था, जिससे मामले वर्षों तक अदालतों में चलते रहते थे। लेकिन नए कानून के तहत अब कनाडा आने के एक साल के भीतर शरण का दावा करना अनिवार्य कर दिया गया है,। ऐसा न करने वालों को अब बिना लंबी सुनवाई के डिपोर्ट किया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि अब केवल युद्ध, हिंसा या उत्पीड़न के शिकार लोगों को ही शरणार्थी माना जाएगा, पीआर (PR) न मिलने वालों को नहीं।

पंजाबियों पर बड़ा असर : पंजाब के जालंधर, अमृतसर और लुधियाना जैसे जिलों से हर साल लगभग डेढ़ लाख छात्र कनाडा जाते हैं। कोर्स पूरा होने के बाद वर्क परमिट खत्म होने पर कई छात्र शरणार्थी बोर्ड में आवेदन कर देते थे ताकि वे वहां लंबे समय तक काम कर सकें। अब यह रास्ता लगभग बंद हो चुका है। नोटिस मिलने के बाद पंजाबी छात्र बड़े पैमाने पर कानूनी सलाह ले रहे हैं और विनिपेग जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

जवाब न देने पर होगी कार्रवाई: यदि नोटिस मिलने के 21 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संबंधित व्यक्ति का वर्क परमिट रद्द कर दिया जाएगा और डिपोर्टेशन (देश निकाला) की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक नोटिस है, तुरंत डिपोर्टेशन ऑर्डर नहीं, और छात्र वकील के माध्यम से अपनी बात रख सकते हैं।

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