हजारीबाग: अंधविश्वास की पराकाष्ठा; बीमार बेटे को ठीक करने के लिए मां ने दी 13 साल की बेटी की ‘बलि’
नेशनल डेस्क: झारखंड के हजारीबाग जिले के कुसुमभा गांव से ममता को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक मां ने अपने बीमार बेटे को ठीक करने के लिए एक तांत्रिक के कहने पर अपनी ही 13 वर्षीय बेटी की बलि दे दी। पुलिस ने इस मामले में मृतका की मां, एक तांत्रिक महिला और एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया है।
वारदात और मंशा: आरोपी महिला, रेशमी देवी (35), अपने छोटे बेटे की शारीरिक और मानसिक बीमारी को लेकर परेशान थी। गांव की तांत्रिक शांति देवी (55) ने उसे झांसा दिया कि यदि वह किसी कुंवारी कन्या की बलि देगी, तो उसका बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा। इसी अंधविश्वास में फंसकर मां ने अपनी ही बेटी की हत्या की साजिश रची।
अष्टमी की रात को हत्या: यह जघन्य अपराध 24 मार्च (नवरात्र की अष्टमी) की रात को अंजाम दिया गया। जब पूरा गांव रामनवमी के जश्न में डूबा था, तब तांत्रिक के घर पर मासूम का गला घोंट दिया गया और बाद में उसके शव को एक बगीचे में दफन कर दिया गया। इस अपराध में भीम राम नामक व्यक्ति ने भी सहयोग किया।
पुलिस को गुमराह करने की कोशिश: आरोपियों ने शुरू में पुलिस को गुमराह करने के लिए अपहरण और दुष्कर्म की झूठी कहानी गढ़ी थी। हालांकि, हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन के नेतृत्व में हुई कड़ाई से पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद तीनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
हाई कोर्ट और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना पर झारखंड हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और डीजीपी को नोटिस जारी किया है। घटना के विरोध में भाजपा ने हजारीबाग में 12 घंटे का बंद भी रखा था।इस हृदयविदारक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है और अंधविश्वास के खिलाफ सख्त जागरूकता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।

