“गलतफहमी” कहकर गैंगरेप का आरोप वापस लेना पड़ा भारी: हाईकोर्ट ने महिला पर लगाया 1 लाख का जुर्माना
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) जैसे गंभीर आरोप लगाकर बाद में उसे मात्र एक “गलतफहमी” बताने वाली महिला के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए शिकायतकर्ता महिला पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी: जस्टिस आलोक जैन ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 376-डी जैसे गंभीर प्रावधानों का इस तरह इस्तेमाल करना न केवल कानून का मजाक उड़ाना है, बल्कि इससे महिलाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बाद में समझौते के आधार पर मामले को “गलतफहमी” बताना यह दर्शाता है कि शिकायतकर्ता ने अधिकारियों को गुमराह किया और आरोपियों पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की।
मामले की पृष्ठभूमि:समझौता और बयान: पठानकोट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच समझौता बिना किसी दबाव या डर के हुआ था।
सबूतों का अभाव: अदालत ने नोट किया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने में काफी देरी की गई थी और आरोपों को साबित करने के लिए कोई मेडिकल सबूत भी नहीं मिले थे।
छवि को नुकसान: हाईकोर्ट ने माना कि इस तरह के झूठे आरोपों से आरोपियों की प्रतिष्ठा को जो नुकसान पहुंचता है, उसकी भरपाई बाद में केस वापस लेने से नहीं हो सकती।
जुर्माने की शर्तें: अदालत ने महिला को एक महीने के भीतर 1 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है। यदि वह ऐसा नहीं करती है, तो राज्य सरकार उसकी संपत्ति को भू-राजस्व बकाया की तरह कुर्क करके वसूली करेगी। इसके अलावा, आरोपी पक्ष को भी 10-10 हजार रुपये जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

