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बिना दवाओं के भी कंट्रोल हो सकता है हाई ब्लड प्रेशर; आयुर्वेद में छिपा है बीपी का जड़ से इलाज

हेल्थ डेस्क : आधुनिक जीवनशैली के कारण भारत में हाई ब्लड प्रेशर (HBP) एक गंभीर समस्या बन चुका है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर 4 में से 3 पुरुष और 5 में से 3 महिलाएं इस समस्या से ग्रसित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां एलोपैथी में इसकी दवाएं उम्र भर चल सकती हैं, वहीं आयुर्वेद में इसे बिना किसी साइड इफेक्ट के जड़ से मिटाने की क्षमता है।

क्यों खतरनाक है हाई बीपी? आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों पर रक्त के प्रवाह को बहुत बलपूर्वक बढ़ा देता है, जिससे हृदय रोगों, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। अक्सर इसके लक्षण (जैसे सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत या नाक से खून आना) स्पष्ट नहीं होते, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है।

आयुर्वेद में प्रभावी औषधियां: स्रोतों के अनुसार, कुछ विशेष जड़ी-बूटियां बीपी नियंत्रित करने में रामबाण साबित होती हैं:अश्वगंधा: यह तनाव को कम कर रक्त प्रवाह को सुधारता है। सुबह खाली पेट इसका सेवन बीपी बढ़ने की संभावना को कम करता है।

त्रिफला: यह शरीर की सूजन और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और धमनियों की ब्लॉकेज को कम करने में मदद करता है।

तुलसी: इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट गुण रक्त संचार को बेहतर बनाए रखते हैं।

पंचकर्म और जीवनशैली का महत्व: सिर्फ दवाएं ही नहीं, आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा (विशेषकर विरेचन) की सलाह दी जाती है, जो शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर पित्त दोष को संतुलित करती है। इसके अलावा, नियमित व्यायाम, संतुलित खान-पान (कम नमक और तेल-मसाला) और तनाव मुक्त रहना हाई बीपी को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने के लिए अनिवार्य है।

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