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कनाडा के हंबोल्ट बस हादसे के गुनहगार जसकीरत सिद्धू को बड़ी राहत: फेडरल कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर लगाई इमरजेंसी रोक

इंटरनेशनल डेस्क : कनाडा के चर्चित हंबोल्ट ब्रोंकोस (Humboldt Broncos) बस हादसे के जिम्मेदार भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवर जसकीरत सिंह सिद्धू को अदालत से आखिरी क्षणों में बड़ी राहत मिली है। सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को उन्हें भारत डिपोर्ट किया जाना था, लेकिन रवानगी से महज दो दिन पहले फेडरल कोर्ट ने उनके निर्वासन पर इमरजेंसी रोक (Stay) लगा दी है।

क्या था पूरा मामला? मूल रूप से पंजाब के संगरूर के रहने वाले जसकीरत सिंह 2014 में कनाडा गए थे। 6 अप्रैल 2018 को उनकी लापरवाही (स्टॉप साइन को नजरअंदाज करने) के कारण एक भीषण सड़क हादसा हुआ था, जिसमें जूनियर हॉकी टीम की बस के परखच्चे उड़ गए थे। इस दर्दनाक हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी और 13 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में जसकीरत को 8 साल की सजा सुनाई गई थी।

मानवीय आधार पर दी गई दलीलें: कनाडा के कानून के अनुसार, 6 महीने से अधिक की सजा पाने वाले स्थायी निवासी (PR) को देश से डिपोर्ट करना अनिवार्य है। हालांकि, सिद्धू के वकील माइकल ग्रीन ने कोर्ट में ‘मानवीय और करुणामय’ आधार पर दलील दी। वकील ने बताया कि सिद्धू के एक साल के बेटे को दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारी है और भारत की हवा उसके स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

पीड़ित परिवारों की नाराजगी: दूसरी ओर, मृतकों के परिजनों ने इस फैसले पर दुख जताया है। उनका कहना है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए और हर नई अपील उनके पुराने जख्मों को फिर से कुरेद देती है।

अब आगे क्या? फेडरल कोर्ट का यह स्टे 1 से 8 महीने तक प्रभावी रह सकता है। इस दौरान अदालत विस्तार से जांच करेगी कि क्या मानवीय आधार पर जसकीरत के निर्वासन को स्थायी रूप से टाला जा सकता है या नहीं।

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