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शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों संग खरीफ अभियान 2026 की तैयारियों पर चर्चा की

दिल्ली / सत्ता संदेश

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-खरीफ अभियान 2026 के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के साथ कृषि के समग्र विकास पर गहन मंथन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब खेती को नई गति देने के लिए नीति, नवाचार और निष्ठा के साथ समयबद्ध, परिणामकारी और किसान-केंद्रित काम करना होगा। सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों की बड़ी भागीदारी ने इसे “टीम इंडिया” की सशक्त कृषि बैठक का रूप दिया।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-खरीफ अभियान 2026 के दूसरे दिन देशभर के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की महत्त्वपूर्ण सहभागिता रही। शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि खेती केवल उत्पादन का विषय नहीं, बल्कि देश की जीवनरेखा है, इसलिए कृषि विभाग से जुड़े हर व्यक्ति को मिशन मोड में काम करना होगा। सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से दलहन मिशन, तिलहन मिशन, कॉटन मिशन और अन्य प्रमुख अभियानों की व्यक्तिगत समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे किसानों की जरूरत के अनुसार तेज, व्यवहारिक और मांग-आधारित शोध करें। विशेष रूप से तुअर, सोयाबीन और तिलहन जैसी फसलों के लिए कम अवधि वाली और अधिक उपयुक्त किस्मों के विकास पर तेजी से काम करने को कहा गया।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीज भंडार की व्यवस्था की गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित क्षेत्रों तक तुरंत बीज पहुंचाया जा सके। साथ ही उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे कम वर्षा या अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए जिला स्तर तक तैयारी रखें। उनका संदेश साफ था कि संकट से डरना नहीं है, बल्कि पहले से तैयारी करके उसका सामना करना है।

शिवराज सिंह चौहान ने उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, कालाबाजारी पर रोक और जरूरतमंद किसानों तक सही आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यह भी जरूरी है कि खाद का उपयोग खेती के लिए ही हो और उसका दुरुपयोग न होने पाए।

कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लाभकारी खेती के लिए किसानों को समय पर पूंजी मिलना बहुत आवश्यक है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ राज्यों में कृषि ऋण का प्रवाह अच्छा है, जबकि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में अब भी कमी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर बैंकों के साथ जल्द बैठक की जाएगी और राज्यों के सहयोग से कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाई जाएगी। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे अपने यहां बचे हुए किसान क्रेडिट कार्ड मामलों की समीक्षा करें और किसानों की वास्तविक जरूरत के अनुसार ऋण व्यवस्था को मजबूत करें।

मशीनीकरण के संबंध में मंत्री ने जोर देकर कहा कि केवल मशीनें बांट देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना होगा कि सही मशीन सही किसान तक पहुंचे और उसका वास्तविक उपयोग हो। उन्होंने कस्टम हायरिंग सेंटरों की प्रभावशीलता की समीक्षा करने की बात कही और राज्यों से कहा कि वे स्थानीय जरूरत के अनुसार मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने पारदर्शी चयन प्रक्रिया, ऑनलाइन आवेदन और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था जैसी अच्छी प्रथाओं को बढ़ावा देने की बात भी कही।

एफपीओ, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका पर भी मंत्री ने विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र जमीन पर शोध, नवाचार और तकनीक पहुंचाने की बड़ी ताकत बन सकते हैं। इसके लिए राज्यों, कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों और कृषि छात्रों को एक साथ जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने एफपीओ को भी किसानों की बाजार शक्ति बढ़ाने का मजबूत माध्यम बताया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब हर राज्य को अपने एग्रीक्लाइमेटिक हालात, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय संभावनाओं के आधार पर कृषि रोडमैप तैयार करना चाहिए। केंद्र सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और मंत्रालय की पूरी टीम राज्यों के साथ इस दिशा में काम करने को तैयार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसान हित में जो भी आवश्यक सहयोग होगा, केंद्र सरकार पूरी तत्परता से देगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नियम और प्रक्रियाएं किसानों की सुविधा के लिए हैं, किसान नियमों के लिए नहीं। इसलिए जहां भी अनावश्यक जटिलता है, वहां सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्यों से खुलकर सुझाव देने को कहा और दोहराया कि सरकार का असर केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जनता के जीवन में दिखना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी रिफॉर्म की बात जोर देकर कही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन, राज्यों के सहयोग, वैज्ञानिकों के प्रयास और किसानों की मेहनत से भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा। उन्होंने कहा कि भारत केवल अपनी जरूरतें पूरी करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि खाद्यान्न, फल, सब्जी, दलहन, तिलहन और अन्य कृषि उत्पादों के क्षेत्र में दुनिया के लिए भी एक मजबूत उदाहरण बनेगा।

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