सूर्य का रौद्र रूप: भारत में भीषण ‘रेडियो ब्लैकआउट’ का खतरा, ISRO ने जारी की हाई अलर्ट की चेतावनी
नैशनल डेस्क : सूर्य में मची भारी हलचल ने वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी एजेंसी NASA ने भारत सहित दुनिया भर में भीषण रेडियो ब्लैकआउट और पावर ग्रिड फेल होने की चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1 फरवरी से सूर्य लगातार शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स (सौर लपटें) छोड़ रहा है, जो अब पृथ्वी की ओर बढ़ रही हैं।
2026 की सबसे शक्तिशाली सौर ज्वाला : इस अशांति की मुख्य वजह ‘सक्रिय क्षेत्र 14366’ नामक सूर्य धब्बों के समूह में हुआ अचानक विस्फोट है। पिछले कुछ दिनों में यहाँ से कई शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स निकली हैं, जिनमें X8.1 श्रेणी की ज्वाला भी शामिल है। यह साल 2026 की अब तक की सबसे शक्तिशाली सौर ज्वाला मानी जा रही है। सूर्य में अब तक लगातार 27 सौर तूफान आ चुके हैं।
इन सेवाओं पर पड़ सकता है बुरा असर: इसरो ने चेतावनी दी है कि सौर गतिविधि में इस वृद्धि से संचार, नेविगेशन और उपग्रह पेलोड में व्यवधान उत्पन्न होने का गंभीर खतरा है। इसके संभावित प्रभाव निम्नलिखित हो सकते हैं:रेडियो ब्लैकआउट: उच्च आवृत्ति वाले रेडियो संचार बाधित होने की प्रबल संभावना है।
सैटेलाइट पर खतरा: अंतरिक्ष में मौजूद 50 से अधिक कार्यरत भारतीय उपग्रहों को नुकसान पहुँच सकता है, इसलिए उनकी बारीकी से निगरानी की जा रही है。बिजली और टीवी: टेलीविजन सिग्नल बाधित हो सकते हैं और बिजली ग्रिड व रडार प्रभावित हो सकते है।
ऑरोरा (Northern Lights): भू-चुंबकीय गतिविधि बढ़ने के कारण सामान्य इलाकों में भी आसमान में रंगीन रोशनी (ऑरोरा) दिखाई दे सकती है।आदित्य-L1 निभा रहा अहम भूमिका भारत की पहली सौर वेधशाला, आदित्य-L1, इस समय इस तूफान की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित यह वेधशाला सौर विकिरण और चुंबकीय क्षेत्र को वास्तविक समय में माप रही है।
इससे प्राप्त डेटा इसरो को समय रहते चेतावनी जारी करने और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने में मदद कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार कर ली गई हैं।

