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भारत मजबूत प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में उभरा है : नैसकॉम अध्यक्ष

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने मंगलवार को कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं एवं खंडित आपूर्ति शृंखलाओं के कारण वैश्विक कंपनियां अब केवल लागत दक्षता के बजाय भरोसे तथा मजबूती को प्राथमिकता दे रही हैं जिससे भारत एक मजबूत प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में उभर रहा है।

‘नैसकॉम ग्लोबल कॉन्फ्लुएंस 2026’ में नांबियार ने कहा कि निर्यात पर काफी हद तक निर्भर प्रौद्योगिकी उद्योग असाधारण बदलाव के दौर से गुजर रहा है और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के पुनर्गठन ने देशों एवं कंपनियों के प्रौद्योगिकी साझेदारी के तरीके को मूल रूप से बदल दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ पहले सभी केवल लागत एवं दक्षता को ही प्राथमिकता देते थे… अब वह दौर खत्म हो चुका है। दक्षता महत्वपूर्ण है लेकिन यह निर्णायक कारक नहीं है। मजबूती अब कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन सभी प्राथमिकताओं के बीच भारत एक उपयुक्त स्थिति में है जो इसे कारोबार के लिए एक बेहद सक्षम देश बनाता है।’’

नांबियार ने कहा कि दुनिया भर के देश और कंपनियां अब यह मूल प्रश्न पूछ रही हैं कि उनका भरोसेमंद साझेदार कौन होगा और किस देश के साथ वे दीर्घकालिक साझेदारी कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत एक ‘‘विश्वसनीय लोकतंत्र’’ होने के साथ-साथ अपने विशाल आकार और विविध जनसंख्या के कारण नवाचार के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला भी है।

भारत की ताकत का एक प्रमुख आधार उसका डिजिटल प्रतिभा भंडार है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगभग 60 लाख पेशेवर और व्यापक उद्योग में अतिरिक्त 30-40 लाख लोग शामिल हैं। यह परिवेश अब कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग, सेमीकंडक्टर, उत्पाद अभियांत्रिकी एवं साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विकसित हो रहा है।

नांबियार ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की वैश्विक संभावनाओं पर भी जोर दिया।

उन्होंने आधार एवं यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) जैसे मंचों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके मूल सिद्धांत जैसे उपयोगकर्ता की सहमति, गोपनीयता, विस्तार क्षमता एवं परस्पर संचालन..दुनिया के लिए उपयोगी मॉडल बन सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ एआई के साथ मिलकर डीपीआई एक बड़ी शक्ति बन सकता है।’’

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में भारत के देर से शुरुआत करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

नांबियार ने कहा, ‘‘ अंततः भारत के पसंदीदा साझेदार बनने की कहानी केवल प्रौद्योगिकी की नहीं है, बल्कि साझा मूल्यों एवं साझा आकांक्षाओं की भी है। प्रौद्योगिकी के इस नए दौर में कोई भी देश अकेले आगे नहीं बढ़ सकता।’’

भारत वैश्विक दक्षिण के लिए एक सशक्त, भरोसेमंद आवाज के रूप में उभरा: प्रधानमंत्री मोदी

 मुंबई, 17 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत वैश्विक संवादों को आकार और अधिक संतुलित एवं समावेशी विश्व व्यवस्था में योगदान देने के साथ वैश्विक दक्षिण के लिए एक सशक्त और विश्वसनीय आवाज के रूप में उभरा है।

मोदी ने वैश्विक आर्थिक सहयोग परिषद द्वारा विदेश मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से आयोजित ‘वैश्विक आर्थिक सहयोग 2026’ कार्यक्रम में अपने लिखित संबोधन में कहा कि जब दुनिया अनिश्चित समय में स्थिर नेतृत्व की तलाश कर रही है, तब भारत उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि देश साझा वैश्विक चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान प्रदान कर रहा है। साथ ही उच्च वृद्धि दर और कम मुद्रास्फीति का दुर्लभ संतुलन भी बनाए हुए है।

भारतीय जनता पार्टी के नेता विजय चौथाईवाले ने प्रधानमंत्री का भाषण पढ़ा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘‘भारत वैश्विक दक्षिण की एक सशक्त और विश्वसनीय आवाज के रूप में उभरा है, जो वैश्विक संवादों को आकार देने के साथ अधिक संतुलित एवं समावेशी विश्व व्यवस्था में योगदान दे रहा है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इस युग की प्रमुख चुनौतियों में से एक कल्याणकारी योजनाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना, किसी को भी पीछे न छोड़ना और इसे कुशलतापूर्वक हासिल करना है। भारत ने विश्व स्तरीय डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से इस महत्वाकांक्षा को वास्तविकता में बदल दिया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कल्याणकारी लाभ पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ नागरिकों तक एक क्लिक में पहुंचें।

उन्होंने कहा कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसकी प्रगति के मूल में स्थिरता समाहित है। देश में स्थापित ऊर्जा क्षमता में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म यानी हरित ईंधन स्रोतों से आता है, जिससे भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाले पहले प्रमुख देशों में से एक बन गया है।

मोदी ने कहा कि 2014 से सौर ऊर्जा क्षमता में 40 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति ने उल्लेखनीय गति पकड़ी है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत की विकास गाथा न केवल तेज है, बल्कि यह हरित, समावेशी और व्यापक स्तर पर लागू होने के लिए डिजाइन की गई है…। भारत में उभर रहे मॉडल अनुकूलनीय मार्ग प्रदान करते हैं जिन्हें दुनिया भर के देशों के लिए दोहराया जा सकता है।’’

मोदी ने कहा कि देश में विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में हो रही प्रगति से इसके सतत विकास के एजेंडा को और मजबूती मिलती है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माता है और साथ ही सेमीकंडक्टर और दुर्लभ खनिज जैसे उभरते क्षेत्रों में भी विविधता ला रहा है, जो आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण की दिशा में निर्णायक कदम का संकेत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संदर्भ में, वैश्विक सहयोग अत्यावश्यक है। जैसे-जैसे विश्व आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और विश्वसनीयता पर पुनर्विचार कर रहा है, भारत सीमाओं के पार विश्वास, स्थिरता और साझा समृद्धि को मजबूत करने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है।