केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने जिनेवा में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में “स्वास्थ्य में एआई: कानून, नैतिक निगरानी, अनुसंधान और समानता” विषय पर आयोजित समानांतर कार्यक्रम को संबोधित किया
दिल्ली / सत्ता संदेश
“एआई स्वास्थ्य सेवा वितरण को आगे बढ़ाने के अपार अवसर प्रदान करता है, लेकिन इसे सुदृढ़ विनियमन, गहन अनुसंधान, नैतिक निगरानी और समानता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता द्वारा आकार दिया जाना चाहिए ताकि इसका लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे”: श्री जेपी नड्डा
“एसएएचआई वैश्विक दक्षिण से उभरने वाली पहली व्यापक रणनीति है, जो भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा को नैतिक, पारदर्शी और जन-केंद्रित तरीके से निर्देशित करती है”
उन्होंने विश्वसनीय और अंतरसंचालनीय स्वास्थ्य डेटा इकोसिस्टम को मजबूत करने, सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने, नैतिक एआई विकास को आगे बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी साझा चुनौतियों का सामूहिक रूप से समाधान करने के लिए वैश्विक भागीदारों के साथ काम करने की भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया
“स्वास्थ्य सेवा में एआई का भविष्य केवल एल्गोरिदम द्वारा नहीं बल्कि सामूहिक मानवीय विकल्पों द्वारा परिभाषित किया जाएगा”
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिनेवा में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान “स्वास्थ्य में एआई: कानून, नैतिक निगरानी, अनुसंधान और समानता” विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया।
श्री नड्डा ने वैश्विक नेताओं, प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों, शासन प्रणालियों, अर्थव्यवस्थाओं और विश्वभर के नागरिकों के जीवन को नया रूप देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य सेवा वितरण को उन्नत करने के अपार अवसर प्रदान करता है, लेकिन इसे “उचित विनियमन, गहन अनुसंधान, नैतिक निगरानी और समानता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए ताकि इसका लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे”।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्ष 2015 में डिजिटल इंडिया पहल की शुरुआत के माध्यम से भारत ने एक दशक पहले ही एक मजबूत डिजिटल नींव रखी थी। इस पहल का उद्देश्य “भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है, जिससे भारत को एआई सहित भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए तैयार किया जा सके।”
श्री नड्डा ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में एक एकीकृत, अंतरसंचालनीय, समावेशी और विस्तार योग्य डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम की परिकल्पना की गई थी। इसी परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए, सरकार ने वर्ष 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के साथ-साथ सहमति-आधारित डिजिटल स्वास्थ्य डेटा फ्रेमवर्क भी शुरू किए, जिससे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य डेटा का निर्माण संभव हो सका।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त करने के लिए केवल डिजिटलीकरण और डेटा ही पर्याप्त नहीं हैं और एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए क्षेत्र-विशिष्ट शासन ढांचे आवश्यक हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने फरवरी 2026 में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत के लिए स्वास्थ्य सेवा में एआई रणनीति (एसएएचआई) के शुभारंभ का उल्लेख किया।
उन्होंने एसएएचआई को “वैश्विक दक्षिण से उभरने वाली पहली व्यापक रणनीति” के रूप में वर्णित किया, जो नैतिक, पारदर्शी और जन-केंद्रित तरीके से भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा का मार्गदर्शन करती है।
केंद्रीय मंत्री ने भारत के अद्वितीय आकार और विविधता पर कहा कि देश 22 आधिकारिक भाषाओं और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के विभिन्न स्तरों वाले 1.4 अरब नागरिकों के लिए एआई का संचालन कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि हालांकि एआई में स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को दूर करने की क्षमता है, लेकिन यदि इसे जिम्मेदारी से डिजाइन नहीं किया गया तो यह असमानताओं को और भी गहरा कर सकता है। श्री नड्डा ने इस चुनौती से निपटने के लिए बीओडीएच (स्वास्थ्य एआई के लिए बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म) के निर्माण के बारे में चर्चा की, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत में तैनात एआई समाधानों का वास्तविक दुनिया के डेटासेट के साथ बेंचमार्किंग किया जाए ताकि वे हर भारतीय के लिए हर जगह सुरक्षित और समान रूप से कार्य कर सकें।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि कोई भी देश अकेले एआई की चुनौतियों और अवसरों का सामना नहीं कर सकता। उन्होंने विश्वसनीय और अंतरसंचालनीय स्वास्थ्य डेटा इकोसिस्टम को मजबूत करने, सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने, नैतिक एआई विकास को आगे बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी साझा चुनौतियों का सामूहिक रूप से समाधान करने के लिए वैश्विक भागीदारों के साथ काम करने की भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
श्री नड्डा ने कहा कि नवाचार को नियमों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए, पैमाने को विश्वास के माध्यम से प्राप्त किया जाना चाहिए और तकनीकी प्रगति समानता, नैतिकता और सार्वजनिक हित में निहित रहनी चाहिए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि स्वास्थ्य सेवा में एआई का भविष्य केवल एल्गोरिदम द्वारा ही नहीं बल्कि सरकारों, संस्थानों और समाजों के सामूहिक निर्णयों द्वारा निर्धारित होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत केवल “एआई” में ही नहीं, बल्कि “सर्व-समावेशी बुद्धिमत्ता” में विश्वास रखता है और वैश्विक समुदाय से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि एआई वैश्विक भलाई की शक्ति बने।

