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घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव बड़ी चुनौती, जरूरत पड़ी तो और कड़े कानून सुझाए जाएंगे: न्यायमूर्ति नावलेकर

इंदौर / सत्ता संदेश

Madhya Pradesh के इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष और उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश Prakash Prabhakar Naolekar ने कहा कि अवैध घुसपैठ और उसके कारण होने वाला जनसांख्यिकीय परिवर्तन देश के लिए एक “बहुत बड़ी चुनौती” बन चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं पाए गए, तो समिति और अधिक कड़े कानूनों की सिफारिश कर सकती है।

न्यायमूर्ति नावलेकर ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक व्यवस्था पर अवैध घुसपैठ का दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति और सामाजिक स्थिरता से जुड़े विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समिति विभिन्न राज्यों और संबंधित एजेंसियों से जानकारी जुटा रही है और इस बात का अध्ययन किया जा रहा है कि किन क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव तेजी से हो रहे हैं तथा उसके पीछे क्या कारण हैं। समिति यह भी देख रही है कि मौजूदा कानून और प्रशासनिक व्यवस्था इस चुनौती से निपटने के लिए कितने प्रभावी हैं।

नावलेकर ने स्पष्ट किया कि यदि जांच और अध्ययन के दौरान यह महसूस हुआ कि मौजूदा कानूनी ढांचा पर्याप्त नहीं है, तो समिति केंद्र सरकार को “और कड़े कानून” बनाने का सुझाव दे सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सिफारिश का उद्देश्य संवैधानिक प्रावधानों और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होगा।

हाल के वर्षों में अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा देश की राजनीति और सुरक्षा बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। कई राज्यों में इस संबंध में राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। केंद्र सरकार पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को लेकर अपनी चिंता जाहिर करती रही है।

विशेषज्ञों का मानना है that जनसांख्यिकीय परिवर्तन का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी संवेदनशील है। इसलिए किसी भी नीति या कानूनी कदम के लिए संतुलित और तथ्य आधारित दृष्टिकोण जरूरी होगा।

फिलहाल समिति विभिन्न पक्षों से राय और आंकड़े एकत्र कर रही है। आने वाले समय में इसकी सिफारिशें राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन सकती हैं।

राजस्थान के सेवानिवृत्त एएसपी ने की आत्महत्या, जोधपुर में पुलिस जांच शुरू

जोधपुर / सत्ता संदेश

Rajasthan के जोधपुर शहर के लालसागर इलाके में एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ने अपने आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शुक्रवार को इस घटना की पुष्टि की और मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतक की पहचान दशरथ सिंह चरण के रूप में हुई है, जो करीब दो साल पहले पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। जानकारी के अनुसार, उन्होंने हाल ही में लालसागर क्षेत्र में एक नया मकान बनवाया था और लगभग एक सप्ताह पहले ही अपनी पत्नी के साथ वहां रहने आए थे।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में किसी सुसाइड नोट की जानकारी सामने नहीं आई है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पारिवारिक स्थिति, मानसिक तनाव या किसी अन्य व्यक्तिगत कारण सहित सभी एंगल से जांच की जा रही है।

इस घटना के बाद इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दशरथ सिंह चरण एक शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हाल ही में नए घर में शिफ्ट होने के बाद सामान्य जीवन जी रहे थे।

पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामले को संवेदनशील मानते हुए जांच जारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मानसिक दबाव, सामाजिक बदलाव और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करते हैं, जिसके चलते ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और समय पर सहायता बेहद जरूरी हो जाती है।

‘अन्नपूर्णा योजना’ के 12 पन्नों के आवेदन पत्र पर विवाद, मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने किया बचाव

कोलकाता / सत्ता संदेश

West Bengal सरकार की प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी) योजना ‘अन्नपूर्णा योजना’ के विस्तृत आवेदन पत्र को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बीच राज्य की मंत्री Agnimitra Paul ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र और भारतीय नागरिकों तक ही पहुंचे।

यह योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई है, लेकिन इसके लिए तैयार किए गए 12 पन्नों के विस्तृत आवेदन पत्र को लेकर कई स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। आवेदन में लाभार्थियों से परिवार के प्रत्येक सदस्य की विस्तृत जानकारी, पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य व्यक्तिगत विवरण मांगे गए हैं।

विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतने विस्तृत दस्तावेजीकरण के कारण कई वास्तविक जरूरतमंद महिलाएं योजना का लाभ लेने से वंचित रह सकती हैं। आलोचकों का यह भी तर्क है कि ग्रामीण और कम साक्षरता वाले क्षेत्रों में इतनी लंबी प्रक्रिया जटिलता पैदा कर सकती है।

हालांकि, मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का मकसद पारदर्शिता सुनिश्चित करना और फर्जी लाभार्थियों को योजना से बाहर रखना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया आवश्यक है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस आवेदन पत्र के माध्यम से लाभार्थियों की सटीक पहचान सुनिश्चित करने और दोहराव या फर्जीवाड़े को रोकने की कोशिश की जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचेगा और संसाधनों का दुरुपयोग नहीं होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि कल्याणकारी योजनाओं में सत्यापन और सरलता के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। जहां एक ओर सख्त जांच प्रक्रिया फर्जी लाभार्थियों को रोकती है, वहीं अत्यधिक जटिलता वास्तविक जरूरतमंदों के लिए बाधा भी बन सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में और बहस का विषय बन सकता है, खासकर महिलाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर।

फिलहाल यह विवाद जारी है और राज्य सरकार पर आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने या उसमें संशोधन करने का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से शांतनु सेन ने दिया इस्तीफा

कोलकाता / सत्ता संदेश

West Bengal की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत Shantanu Sen ने All India Trinamool Congress के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, शांतनु सेन ने व्यक्तिगत कारणों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के पुनर्गठन का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजहों पर आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इस कदम को पार्टी के भीतर चल रहे हालिया बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

शांतनु सेन तृणमूल कांग्रेस के उन प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की नीतियों और रुख को मीडिया में प्रस्तुत करते थे। वे लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए हैं और विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं।

उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह कदम पार्टी के भीतर किसी असंतोष या पुनर्गठन की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस लगातार अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करती रही है, और ऐसे में प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस रिक्त पद को कैसे भरता है और क्या शांतनु सेन भविष्य में किसी अन्य भूमिका में पार्टी में सक्रिय रहते हैं।

त्विषा शर्मा मौत मामला: सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को किया गिरफ्तार

नयी दिल्ली: / सत्ता संदेश

Central Bureau of Investigation ने त्विषा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी उनकी सास और पूर्व न्यायाधीश Giribala Singh को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद की गई।

यह मामला Madhya Pradesh High Court के आदेश के बाद और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जिसमें अदालत ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

सीबीआई के अनुसार, यह मामला त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा है, जिसकी जांच कई पहलुओं से की जा रही थी। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई है।

सूत्रों के अनुसार, मामले में घरेलू विवाद और पारिवारिक तनाव की भी भूमिका सामने आई है। हालांकि आधिकारिक रूप से सीबीआई ने विस्तृत आरोपों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन जांच में कई अहम सुरागों पर काम किया जा रहा है।

गिरिबाला सिंह, जो पूर्व में न्यायिक सेवा से जुड़ी रही हैं, की गिरफ्तारी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई एक गंभीर और असाधारण स्थिति होती है, जो न्यायिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर ध्यान आकर्षित करती है।

मृतका के परिवार ने सीबीआई की कार्रवाई का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है। वहीं आरोपी पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। एजेंसी जल्द ही अदालत में आगे की रिपोर्ट पेश कर सकती है।

फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की नजर सीबीआई की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

भोजशाला परिसर विवाद फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली नई याचिका दाखिल

नयी दिल्ली: / सत्ता संदेश

Supreme Court of India में मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में एक नई याचिका दायर की गई है। इस याचिका में Madhya Pradesh High Court के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर बताया गया था।

यह मामला लंबे समय से विवादित रहा है, जिसमें धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों पहलू जुड़े हुए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े निर्णय केंद्र सरकार तथा Archaeological Survey of India (एएसआई) ले सकते हैं।

नई याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट का यह निष्कर्ष तथ्यात्मक और कानूनी दृष्टि से विवादास्पद है, इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने आग्रह किया है कि मामले की विस्तृत सुनवाई की जाए और सभी ऐतिहासिक साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।

भोजशाला परिसर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसे लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से मतभेद चले आ रहे हैं। एक पक्ष इसे देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे एक ऐतिहासिक मस्जिद स्थल के रूप में देखता है।

इस मामले में पहले भी कई बार अदालतों में सुनवाई हो चुकी है और विभिन्न आदेश दिए गए हैं। हाल के हाईकोर्ट आदेश के बाद यह विवाद फिर से कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में ऐतिहासिक तथ्यों, पुरातात्विक रिपोर्टों और कानूनी पहलुओं का संतुलित मूल्यांकन बेहद जरूरी होता है। एएसआई की भूमिका भी इस प्रकार के विवादों में महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह देश की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और अध्ययन से जुड़ी प्रमुख संस्था है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख तय होनी बाकी है, और सभी पक्षों की नजर अब शीर्ष अदालत के रुख पर टिकी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवेनिया के जनेज जान्शा को प्रधानमंत्री चुने जाने पर दी बधाई

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Slovenia की संसद द्वारा Janez Janša को प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उन्हें बृहस्पतिवार को बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वह स्लोवेनिया के नए नेतृत्व के साथ मिलकर द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम करने की बात कही।

जानकारी के अनुसार, जनेज जान्शा को स्लोवेनिया की संसद में हुए मतदान के बाद देश का नया प्रधानमंत्री चुना गया है। वे स्लोवेनियाई राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनकी राजनीतिक छवि एक अनुभवी और दक्षिणपंथी रुझान वाले नेता के रूप में देखी जाती है।

स्लोवेनिया यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है और यूरोपीय संघ का सदस्य भी है। भारत और स्लोवेनिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कई मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री स्तर पर इस तरह के बधाई संदेश दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे भविष्य में व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

फिलहाल, भारत और स्लोवेनिया दोनों देशों की सरकारें आपसी सहयोग को बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही हैं।

भीषण गर्मी से बचने शिमला पहुंचे सैलानी, 72 घंटे में 70 हजार वाहन शहर में दाखिल

शिमला / सत्ता संदेश

मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए पर्यटक हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पहाड़ी पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी वजह से शिमला में वाहनों का भारी दबाव देखने को मिल रहा है और शहर के कई हिस्सों में बार-बार जाम की स्थिति बन रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 24 दिनों में शिमला में कुल 6 लाख 31 हजार वाहन पहुंचे हैं। इनमें से करीब 70 हजार वाहन सिर्फ पिछले 72 घंटों में शहर में दाखिल हुए।

हालांकि पर्यटन सीजन अभी अपने चरम पर नहीं पहुंचा है, लेकिन ‘पहाड़ों की रानी’ शिमला पहले ही पर्यटकों और वाहनों से भर चुकी है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करने की अपील की है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक ने बताया कि पिछले 24 दिनों में चंडीगढ़-कालका मार्ग से लगभग 3 लाख 70 हजार वाहन शिमला पहुंचे हैं। इसके अलावा किन्नौर, बिलासपुर और कुल्लू मार्ग से भी बड़ी संख्या में पर्यटक वाहनों का आगमन हुआ है।

उन्होंने कहा कि अचानक बढ़े पर्यटक दबाव के कारण शहर की पुरानी पार्किंग समस्या और गंभीर हो गई है। पिछले एक सप्ताह में 1 लाख 54 हजार 450 वाहन शिमला पहुंचे, जबकि केवल पिछले 72 घंटों में करीब 70 हजार वाहनों की एंट्री दर्ज की गई।

यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए प्रशासन ने शिमला को पांच जोनों में बांटा है और प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है। ट्रैफिक कंट्रोल में सहायता के लिए स्वयंसेवकों की भी मदद ली जा रही है।

जाम कम करने के लिए पुलिस वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कर रही है। ऊपरी शिमला जाने वाले वाहनों को शोगी-मेहली मार्ग से भेजा जा रहा है ताकि शहर के मुख्य मार्गों पर दबाव कम किया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि जून महीने में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद 31 मई के बाद अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।

आमतौर पर हिमाचल प्रदेश में पर्यटन सीजन जून के पहले सप्ताह में चरम पर पहुंचता है, लेकिन इस वर्ष उत्तर और पश्चिम भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण पर्यटन सीजन समय से पहले ही शुरू हो गया है।

एक और उपलब्धि हासिल

PGIMER के 12 घंटे OT मॉडल से एक वर्ष में प्रमुख सर्जरी में 10.46% की वृद्धि

चंडीगढ़ स्थित PGIMER Chandigarh ने अपने नवाचारपूर्ण 12 घंटे इलेक्ट्रिव ऑपरेशन थिएटर (OT) मॉडल के सफल क्रियान्वयन के एक वर्ष पूरे होने पर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। संस्थान ने बताया कि इस मॉडल के लागू होने के बाद प्रमुख सर्जरी में उल्लेखनीय और निरंतर वृद्धि देखी गई है, जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिली है।

“सीमाओं को स्वीकार करने के बजाय हमने संभावनाओं का विस्तार चुना” – प्रो. विवेक लाल

PGIMER के निदेशक Vivek Lal ने कहा कि यह पहल मरीजों की बढ़ती जरूरतों, सर्जरी की लंबी प्रतीक्षा सूची और अस्पताल की क्षमता पर बढ़ते दबाव को देखते हुए शुरू की गई थी।

उन्होंने कहा,
“हमने सीमाओं को स्वीकार करने के बजाय सर्जिकल देखभाल में संभावनाओं और पहुंच को बढ़ाने का निर्णय लिया।”

12 घंटे OT मॉडल से बड़ा बदलाव

1 मई 2025 से लागू इस मॉडल के तहत इलेक्ट्रिव ऑपरेशन थिएटर का समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बजाय बढ़ाकर रात 8 बजे तक कर दिया गया।

इस बदलाव का उद्देश्य था—

  • लंबी सर्जरी वेटिंग लिस्ट को कम करना
  • बेड उपयोग को बेहतर बनाना
  • तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं में पहुंच बढ़ाना

इस पहल के बाद PGIMER देश का पहला संस्थान बन गया जिसने 12 घंटे का संरचित OT मॉडल लागू किया।

10.46% की वृद्धि, 3,695 अतिरिक्त सर्जरी

संस्थान के अनुसार, एक वर्ष में कुल प्रमुख सर्जरी में 10.46% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 3,695 अतिरिक्त ऑपरेशन के बराबर है।

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि मरीजों को:

  • जल्दी ऑपरेशन की सुविधा मिली
  • अस्पताल में प्रतीक्षा समय कम हुआ
  • बेड उपयोग अधिक प्रभावी हुआ

जटिल सर्जरी में भी सुधार

रिपोर्ट में बताया गया कि यह वृद्धि मुख्य रूप से उच्च जटिलता वाली सर्जरी में देखी गई, जिनमें शामिल हैं:

  • ऑर्थोपेडिक्स
  • न्यूरोसर्जरी
  • सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
  • रोबोटिक सर्जरी
  • ट्रांसप्लांट सर्जरी
  • यूरोलॉजी

यह दर्शाता है कि संस्थान की अत्याधुनिक सर्जिकल क्षमता और मजबूत हुई है।

ऑर्थोपेडिक्स में 80% तक वृद्धि

विशेष रूप से ऑर्थोपेडिक्स OT-22 में लगभग 80% की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है।

महीने-दर-महीने प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, 12 में से 9 महीनों में सर्जरी में वृद्धि दर्ज की गई।
सबसे अधिक वृद्धि:

  • अगस्त: +54% (1,210 अतिरिक्त सर्जरी)
  • अक्टूबर: +31% (730 अतिरिक्त सर्जरी)

सिस्टम स्तर पर बड़ा सुधार

संस्थान ने कहा कि यह मॉडल केवल संख्या में वृद्धि नहीं है, बल्कि यह:

  • स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता
  • ऑपरेशन थिएटर उपयोग
  • और मरीजों की पहुंच में सुधार

का बड़ा उदाहरण है।

PGIMER के अनुसार, यह पहल देश में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सिस्टम-लेवल सुधार के रूप में देखी जा रही है।

मजबूत मांग से कच्चे तेल के वायदा भाव में उछाल, कीमत 152 रुपये बढ़कर 8,778 रुपये प्रति बैरल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

मजबूत हाजिर मांग और कारोबारियों द्वारा सौदों के आकार में बढ़ोतरी के चलते मंगलवार को कच्चे तेल के वायदा भाव में तेजी दर्ज की गई। लगातार बढ़ती मांग के बीच निवेशकों की सक्रिय भागीदारी से कीमतों में मजबूती देखने को मिली।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून महीने में डिलीवरी वाले कच्चे तेल का अनुबंध 152 रुपये यानी 1.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ Crude Oil Futures (MCX) 8,778 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया।

कारोबार के दौरान कुल 11,942 लॉट के लिए लेनदेन हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में सक्रियता बनी हुई है और निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है।

विश्लेषकों के अनुसार, हाजिर बाजार में मांग बढ़ने से वायदा बाजार को समर्थन मिला है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और मांग से जुड़े संकेत भी कीमतों पर असर डाल रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

मजबूत मांग के चलते हाल के सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हलचल देखी जा रही है, और आगे भी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम इसके रुझान को प्रभावित कर सकते हैं।